NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
आर्थिक मंदी की आड़ में श्रमिकों के खिलाफ साज़िश!
उत्तराखंड के रुद्रपुर में 2 अक्टूबर को इंटरार्क मजदूर संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र के आह्वान पर स्थानीय आंबेडकर पार्क में मजदूर प्रतिरोध सभा का आयोजन हुआ। इस दौरान छंटनी, बंदी, यूनियनों को मान्यता देने, मांग पत्रों पर सुनवाई करने और ठेका प्रथा खत्म करने जैसे मुद्दों को उठाया गया।  
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Oct 2019
labour protest

सरकार जहां सार्वजनिक कंपनियों को निजी क्षेत्रों को सौंप रही है तो वहीं इसके उल्ट श्रमिक वर्ग मांग कर रहा है कि घाटे में चल रही निजी क्षेत्र की कंपनियों को सरकार को अपने अधीन ले लेना चाहिए। उत्तराखंड के रुद्रपुर में 2 अक्टूबर बुधवार को इंटरार्क मजदूर संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र के आह्वान पर स्थानीय आंबेडकर पार्क में मजदूर प्रतिरोध सभा का आयोजन हुआ। इस दौरान छंटनी, बंदी, यूनियनों को मान्यता देने, मांग पत्रों पर सुनवाई करने, ठेका प्रथा खत्म करने जैसे मुद्दों को उठाया गया।  

सभा को इंकलाबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट ने कहा कि आज मंदी के बहाने पूंजीपतियों द्वारा मजदूरों को नौकरी से निकाल कर बेरोजगार किया जा रहा है। सिडकुल समेत पूरे देश भर में मालिकों द्वारा गैरकानूनी रूप से कंपनियां बंद कर छंटनी, बंदी, लेऑफ कर मजदूरों को नौकरियों से निकाला जा रहा है।

इसके साथ ही मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि मंदी का हौवा खड़ा करके स्थाई मजदूरों पर हमला किया जा रहा है और ट्रेड यूनियनों का दमन किया जा रहा है। मजदूरों के मांग पत्र पर सुनवाई नहीं की जा रही है।
RUDRPUR.jpg
वक्ताओं ने कहा कि आज नित्य प्रतिदिन रिलायंस, टाटा, बिरला, मारुति, गोदरेज, जिंदल समेत सभी कंपनियों में प्रबंधकों व सीईओ के वेतन भत्ते लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नवीन जिंदल का वेतन ₹74 करोड़ से ज्यादा है, वही मजदूरों का वेतन वृद्धि नहीं के बराबर हो रहा है।

आज प्रबंधकों व मजदूरों के वेतन में गैप काफी बढ़ गया है। आज टाटा मोटर्स के सीईओ का वेतन कर्मचारियों के औसत वेतन का 450 गुना हो चुकी है। परंतु मालिकों द्वारा मजदूरों की सम्मानजनक वेतन वृद्धि नहीं की जा रही है। मज़दूरों का सवाल है ये इतना अंतर क्यों?

इसके साथ मज़दूर यूनियनों ने केंद्र सरकार द्वारा पूंजीपतियों के ऋण माफ किए जाने, टैक्सों में निरंतर छूटे दिए जाने  और मजदूरों के खिलाफ कानून बनाए जाने का भी विरोध किया और कहा इन सभी को भटकाने के लिए गैर जरूरी मुद्दे उछाले जा रहे हैं।

सभा में मजदूर विरोधी सभी कदमों को वापस लेने की मांग की गई और जीएसटी सहित सभी अप्रत्यक्ष करों को वापस लेने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती छंटनी का सर्वाधिक शिकार ठेका मजदूर हो रहे हैं। सिडकुल पंतनगर में एरा व माइक्रोमैक्स तथा सिडकुल सितारगंज में एमकोर फ्लैक्सिबल समेत कई कंपनियां गैरकानूनी रूप से बंद कर दी गई हैं और मजदूरों व उनके परिजनों का भविष्य बर्बाद कर दिया गया है।

शिरडी, टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड समेत कई कंपनियों में लेऑफ के नाम पर मजदूरों का रोजगार छीना जा रहा है। बजाज मोटर्स, इंटरार्क सहित कई कंपनियों में मालिकों द्वारा यूनियनों पर हमले, नेताओं का उत्पीड़न कर नौकरी से निकाला जा रहा है।

इंटरार्क, गुजरात अंबुजा, पारले, एलजीबी, लुकास टीवीएस समेत कई कंपनियों की यूनियनों के मांग पत्र पर सुनवाई नहीं की जा रही है।
 
सभा मे स्थाई काम स्थाई रोजगार, बेरोजगार मज़दूरों को 25,000 रुपये मासिक भत्ता देने, मांगपत्रों पर सुनवाई करने, यूनियनों को मान्यता देने आदि मांग को लेकर श्रमिकों ने सरकार को घेरा। इसके साथ ही सभी मज़दूर यूनियनों ने आपने संघर्षों को और तेज करने के लिए एक साथ आकर साझा संघर्ष करने का प्रस्ताव को भी पारित किया।

सभा को ठेका मजदूर कल्याण समिति के अभिलाख, श्रमिक संयुक्त मोर्चा के महामंत्री व ब्रिटानिया श्रमिक संघ के अध्यक्ष गणेश मेहरा, इंट्रार्क मजदूर संगठन पंतनगर के अध्यक्ष दलजीत सिंह, इंट्रार्क मजदूर संगठन किच्छा के अध्यक्ष राकेश कुमार, पारले मजदूर संघ पंतनगर के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी, सिडकुल संयुक्त मोर्चा सितारगंज के अध्यक्ष व रैकेट इंप्लाइज संघ सितारगंज के सुरेंद्र सिंह देउपा, गुजरात अंबुजा यूनियन सितारगंज के अध्यक्ष कैलाश पांडे, श्रमिक संयुक्त मोर्चा अध्यक्ष व राने मद्रास यूनियन के महामंत्री दिनेश तिवारी, बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन के महामंत्री कृपाल सिंह, शिरडी श्रमिक संगठन के महामंत्री आनंद सिंह नेगी, यजाकी वर्कर्स यूनियन के महामंत्री राजेंद्र सिंह, देना इंडिया मजदूर संघ के विशाल, एडिएंट कर्मकार यूनियन के अध्यक्ष गंगा सिंह, पारले मज़दूर संघ सितारगंज के मोनू, डेल्टा पावर, एमकोर, नेस्ले कर्मचारी संगठन, भगवती श्रमिक संगठन, एलजीबी वर्कर्स यूनियन, मज़दूर सहयोग केंद्र आदि के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। इन कंपनियों के मज़दूर प्रतिरोध सभा में शामिल हुए।

economic crises
Labour Right
Uttrakhand
Labor Organization and Inquiry Labor Center
government and Public companies
automobile production
UNEMPLOYMENT IN INDIA

Related Stories

उत्तराखंड: गढ़वाल मंडल विकास निगम को राज्य सरकार से मदद की आस

आंदोलन: 27 सितंबर का भारत-बंद ऐतिहासिक होगा, राष्ट्रीय बेरोज़गार दिवस ने दिखाई झलक

दिल्ली से लेकर एमपी तक बेरोजगारों पर लाठी बरसा रही सरकार !

किसान आंदोलन को सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन की स्पिरिट से प्रेरणा, परन्तु उसके नकारात्मक अनुभवों से सीख लेनी होगी

हिमाचल में हुई पहली किसान महापंचायत, कृषि क़ानूनों के विरोध के साथ स्थानीय मुद्दे भी उठाए गए!

उत्तराखंड: एक सड़क के लिए दो महीने से आंदोलन फिर भी सुनवाई नहीं

उत्तराखंड: सरकार ने आंदोलनकारी शिक्षक-कर्मचारियों की लिस्ट मंगाई, वेतन रोका

आर्थिक गिरावट को लेकर ट्यूनीशिया में तीसरे दिन भी विरोध जारी, सैकड़ों लोग गिरफ़्तार

जब 10 हज़ार पेड़ कट रहे होंगे, चिड़ियों के घोंसले, हाथियों के कॉरिडोर टूट रहे होंगे, आप ख़ामोश रहेंगे?

कोलंबिया के लोग संकट और हिंसा को लेकर सड़कों पर उतरे


बाकी खबरें

  • sedition
    भाषा
    सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश
    11 May 2022
    पीठ ने कहा कि राजद्रोह के आरोप से संबंधित सभी लंबित मामले, अपील और कार्यवाही को स्थगित रखा जाना चाहिए। अदालतों द्वारा आरोपियों को दी गई राहत जारी रहेगी। उसने आगे कहा कि प्रावधान की वैधता को चुनौती…
  • बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    एम.ओबैद
    बिहार मिड-डे-मीलः सरकार का सुधार केवल काग़ज़ों पर, हक़ से महरूम ग़रीब बच्चे
    11 May 2022
    "ख़ासकर बिहार में बड़ी संख्या में वैसे बच्चे जाते हैं जिनके घरों में खाना उपलब्ध नहीं होता है। उनके लिए कम से कम एक वक्त के खाने का स्कूल ही आसरा है। लेकिन उन्हें ये भी न मिलना बिहार सरकार की विफलता…
  • मार्को फ़र्नांडीज़
    लैटिन अमेरिका को क्यों एक नई विश्व व्यवस्था की ज़रूरत है?
    11 May 2022
    दुनिया यूक्रेन में युद्ध का अंत देखना चाहती है। हालाँकि, नाटो देश यूक्रेन को हथियारों की खेप बढ़ाकर युद्ध को लम्बा खींचना चाहते हैं और इस घोषणा के साथ कि वे "रूस को कमजोर" बनाना चाहते हैं। यूक्रेन
  • assad
    एम. के. भद्रकुमार
    असद ने फिर सीरिया के ईरान से रिश्तों की नई शुरुआत की
    11 May 2022
    राष्ट्रपति बशर अल-असद का यह तेहरान दौरा इस बात का संकेत है कि ईरान, सीरिया की भविष्य की रणनीति का मुख्य आधार बना हुआ है।
  • रवि शंकर दुबे
    इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी
    11 May 2022
    इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में गीतों, नाटकों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया जा रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License