NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
विश्व स्वास्थ संगठन के मानदंडों के मुताबिक भारत में और 4 लाख डॉक्टरों की ज़रूरत
भारतीय डॉक्टरों का एक बड़ा हिस्सा काम या पढ़ाई के लिए विदेशों में पलायन कर रहा है, जिससे ग्रामीण स्वास्थ केन्द्रों की हालत बदत्तर होती जा रही हैI
पी.जी. अम्बेडकर
12 Feb 2018
भारत में डॉक्टरों की कमी

साल 2018 के बजट सत्र में सांसदों ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ से जुड़े कई सवाल उठायेI

देश में मेडिकल डॉक्टरों की संख्या

देश में मौजूद मेडिकल डॉक्टरों की संख्या से जुड़े एक सवाल के जवाब में सरकार ने बाते कि 30 सितम्बर 2017 तक विभिन्न राज्यों की मेडिकल काउन्सिल्ज़ के पास 10,41,395 डॉक्टर पंजीकृत थेI स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि, “अगर [इस आंकड़े में से] 80% भी उपलब्ध मान लें तो अनुमानत: कि सक्रिय रूप से लगभग 8.33 लाख डॉक्टर मौजूद हैंI” इसका मतलब कि एक डॉक्टर पर 1,597 लोगI विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफ़ारिशों के मुताबिक 1,000 की आबादी पर एक डॉक्टर की आवश्यकता हैI इस हिसाब से WHO के मापदंडों को पूरा करने के लिए भारत को 4,97,189 और डॉक्टरों की आवश्यकता हैI   

प्रत्येक वर्ष देश में 67,532 छात्र MBBS के लिए दाखिला लेता हैंI यह संख्या और भी बढ़ेगी जब 31.05.2018 को अंडरग्रेजुएट मेडिकल में स्वीकृत सीटों की संख्या निर्धारित होगीI

प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ केन्द्रों में रिक्त पदों की स्थिति

एक सांसद ने गाँवों और दूर-दराज़ के इलाकों में डॉक्टरों के रिक्त पदों पर प्रश्न पूछा जिसके जवाब में चौबे ने बताया कि 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से सरकार के पास 33 के आँकड़े मौजूद हैंI ग्रामीण इलाकों में एक प्राथमिक स्वास्थ केंद्र (PHC) स्वीकृत होता हैI इस PHC के ठीक संचालन के लिए एक डॉक्टर की ज़रूरत होती हैI

मंत्री ने बताया कि 33 क्षेत्रों के लिए 33,968 एलोपैथिक डॉक्टरों की मंज़ूरी दी गयीI लेकिन अभी भी 8,286 पद भरने बाकि हैंI

बड़े क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर जैसे सर्जन, Obstetrics और Gynecologists, Physicians और Paediatricians, होते हैंI इन अस्पतालों को सामुदायिक स्वास्थ केंद्र (CHC) कहा जाता हैI 31 मार्च 2017 तक इन अस्पतालों के सही संचालन के लिए 22,496 डॉक्टरों की ज़रूरत थी जबकि सिर्फ 4,156 पद ही भरे गयेI

विभिन्न PHC और CHC के लिए नर्सों की स्वीकृत संख्या 77,956 थी लेकिन 11,288 पद खाली पड़े हैंI सरकार हर PHC के लिए 1 और हर CHC के 7 नर्सों की संख्या तय हैI

डॉक्टरों का काम के लिए और उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में पलायन

तमाम PHC और CHC में खाली पड़े पदों और सक्षम डॉक्टरों के निजी क्लीनिक न होने के पीछे की एक बड़ी वजह यह है कि डॉक्टर ग्रामीण और छोटे इलाकों में जाकर काम ही नहीं करना चाहतेI इस पर डॉक्टरों का विदेशों में पलायन भी लगातार जारी है, कुछ वहाँ काम के लिए जाते हैं तो कुछ उच्च शिक्षा के लिएI

चौबे ने बताया कि कितने डॉक्टर विदेश पलायन कर चुके हैं इसका कोई केंद्रीकृत आँकड़ा मौजूद नहीं हैI उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) “जो भारतीय डॉक्टर विदेश में काम करना चाहते हैं उन्हें गुड स्टैंडिंग सर्टिफिकेट” देती हैI

काम के लिए देश छोड़कर जाने वाले डॉक्टरों के स्वास्थ और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मुहैया आंकडें इस प्रकार हैं:

भारत में डॉक्टरों की कमी

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय उन छात्रों का भी रिकॉर्ड रखता है जो मेडिकल विज्ञान में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने के लिए अमेरिका जाते हैंI अमेरिकी सरकार का यह निर्देश है कि जो भी भारतीय छात्र मेडिसिन की पढ़ाई के लिए विदेश का वीज़ा चाहते हैं उन्हें भारतीय सरकार स्टेटमेंट ऑफ़ नीड (SON) सर्टिफिकेट और एक्सेप्शनल नीड सर्टिफिकेट (ENC) देI  

भारत में डॉक्टरों की कमी

आँकड़ों से हमें पता चलता है कि पिछले तीन सालों में 5,129 डॉक्टर विदेशों में पलायन कर गयेI

ब्रेन ड्रेन की यह परिघटना IIT जैसे बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों से पढ़े छात्रों के सन्दर्भ में भी देखा जा सकता हैI ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ सुविधाओं की बेहतरी के लिए ज़रुरी है कि ऐसी नीति बनायी जाये जिसके मुताबिक डॉक्टरों के लिए बड़े शहरों में काम करने से पहले गाँवों में काम करना अनिवार्य किया जाना चाहिएI मौजूदा समय में मेडिकल सेवाओं का पूरा ध्यान सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित हैI

भारतीय स्वास्थ व्यवस्था
भारतीय डॉक्टर
health care facilities
health sector in India
भारत में डॉक्टरों की कमी

Related Stories

कोरोना महामारी अनुभव: प्राइवेट अस्पताल की मुनाफ़ाखोरी पर अंकुश कब?

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

मध्यप्रदेश: सागर से रोज हजारों मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर! 

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन

यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी

यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग

EXCLUSIVE: सोनभद्र के सिंदूर मकरा में क़हर ढा रहा बुखार, मलेरिया से अब तक 40 आदिवासियों की मौत

EXCLUSIVE :  यूपी में जानलेवा बुखार का वैरिएंट ही नहीं समझ पा रहे डॉक्टर, तीन दिन में हो रहे मल्टी आर्गन फेल्योर!

पहाड़ों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, कैसे तीसरी लहर का मुकाबला करेगा उत्तराखंड?

ट्रांसजेंडर समुदाय के सेहत और रोज़गार के मुद्दे पर क्या कर रही है उत्तराखंड सरकार?


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के मामलों में क़रीब 25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई
    04 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,205 नए मामले सामने आए हैं। जबकि कल 3 मई को कुल 2,568 मामले सामने आए थे।
  • mp
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर
    04 May 2022
    माकपा और कांग्रेस ने इस घटना पर शोक और रोष जाहिर किया है। माकपा ने कहा है कि बजरंग दल के इस आतंक और हत्यारी मुहिम के खिलाफ आदिवासी समुदाय एकजुट होकर विरोध कर रहा है, मगर इसके बाद भी पुलिस मुख्य…
  • hasdev arnay
    सत्यम श्रीवास्तव
    कोर्पोरेट्स द्वारा अपहृत लोकतन्त्र में उम्मीद की किरण बनीं हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं
    04 May 2022
    हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं, लोहिया के शब्दों में ‘निराशा के अंतिम कर्तव्य’ निभा रही हैं। इन्हें ज़रूरत है देशव्यापी समर्थन की और उन तमाम नागरिकों के साथ की जिनका भरोसा अभी भी संविधान और उसमें लिखी…
  • CPI(M) expresses concern over Jodhpur incident, demands strict action from Gehlot government
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग
    04 May 2022
    माकपा के राज्य सचिव अमराराम ने इसे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अनायास नहीं होती बल्कि इनके पीछे धार्मिक कट्टरपंथी क्षुद्र शरारती तत्वों की…
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल
    04 May 2022
    भारत का विवेक उतना ही स्पष्ट है जितना कि रूस की निंदा करने के प्रति जर्मनी का उत्साह।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License