NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
'वित्त विधेयक 2018' बिना बहस के लोकसभा में महज़ 30 मिनट में पारित
बीजेपी सरकार ने गिलोटिन के रास्ते वित्त विधेयक ध्वनि मत से पारित कराया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
15 Mar 2018
BUDGET

संसद को दरकिनार करने की कला को बीजेपी सरकार तेज़ी से और मज़बूत कर रही है। बिना चर्चा के विधेयक पारित किया जा रहा है खासकर सबसे महत्वपूर्ण वित्त विधेयक को। पिछले साल वित्त विधेयक में आंध्र में तस्करी संबंधित कानूनों की विचित्र घटना के शामिल करने और लोकसभा में इसे जल्दी पारित करने के बाद ठीक इसी तरह लेकिन और ज़्यादा तानाशाही वाला क़दम 14 मार्च 2018 को सत्ताधारी पार्टी ने अपनाया। विपक्षी सांसदों ने इस तानाशाही क़दम के ख़िलाफ़ ज़ोरदार विरोध दर्ज किया।

यद्यपि वित्त विधेयक 2018 तथा विनियोग विधेयक को शाम 5 बजे के लिए सूचीबद्ध किया गया था लेकिन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अचानक घोषणा की कि यह दोपहर 12 बजे पेश किया जाएगा। चर्चा के लिए गिलोटिन का इस्तेमाल करते हुए स्पीकर ने इसे केवल 30 मिनट में ही लाया गया। गिलोटिन का मतलब विभिन्न विभागों से अनुदान की सभी शेष मांगों के लिए एक साथ वोट देना भले ही इस पर कोई चर्चा हुई हो या नहीं। इन विधेयकों को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके लिए बीजेपी के सभी सदस्यों को कुछ दिन पहले ही सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया गया था। ज्ञात हो कि बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की निचले सदन में भारी बहुमत है।

इन दो विधेयकों के पारित होने का मतलब है कि शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा कि लोकसभा में किसी बहस के बिना देश के इस महत्वपूर्ण बजट को पारित कर दिया गया और अंतिम रूप दे दिया गया। यह बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाली अंतिम पूर्ण बजट है क्योंकि आम चुनाव2019 में होने वाले हैं और मौजूदा सरकार ने प्रथा के अनुसार होल्डिंग बजट प्रस्तुत किया।

लोकसभा में पारित होने के बाद ये दोनों विधेयक अनुमोदन के लिए राज्यसभा भेजा जाना है, लेकिन चूंकि ये दोनों धन विधेयक हैं इसलिए इन्हें ऊपरी सदन में अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है और यदि राज्य सभा 14 दिनों के भीतर इन विधेयकों को वापस लोकसभा में नहीं भेजती है तो उन्हें पारित माना जाएगा। ज्ञात हो कि ऊपरी सदन में विपक्षी दलों की बहुमत है।

बाद में कई विपक्षी पार्टियों ने बिना उचित सूचना के मतदान के लिए पेश किए गए बजट को लेकर सरकार के फैसले के ख़िलाफ विरोध दर्ज करते हुए स्पीकर को सख्त लेहजे में एक पत्र सौंपा। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और ज्योतिरादित्य सिंधिया, सीपीआई (एम) सांसद मोहम्मद सलीम और आरजेडी सांसद जय प्रकाश यादव सहित अन्य नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रीमती महाजन को यह पत्र दिया।

विपक्षी पार्टियों के सौंपे गए पत्र में उजागर किया कि 5 मार्च को हुए अंतिम व्यापार सलाहकार समिति की बैठक में सरकार ने कृषि मंत्रालय सहित छह मंत्रालयों के लिए बजट पर चर्चा के लिए समय आवंटित किया था। लेकिन बजट पर मतदान के लिए तारीख़ और समय का निर्णय नहीं किया गया था।

पत्र में कहा गया, "यह सरकार के अहंकार और सदन के पटल पर चर्चा किए बिना सभी वित्तीय कार्यवाही को ध्वस्त करने का एकतरफा कदम दिखाई देता है।"

विपक्षी दलों ने कहा कि पिछले सात दिनों से सदन की कार्यवाही बाधित कर दी गई है क्योंकि सरकार ने नीरव मोदी के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है। पत्र में कहा गया कि "सरकार सदन के सुचारु कार्य के लिए इस मुद्दे को सुलझाने के लिए आगे भी नहीं आ रही है। दूसरी ओर सरकार बिना किसी जांच के सभी विधेयक (केंद्रीय बजट) को किसी भी क़ीमत पर पारित करने को प्रतिबद्ध है।"

विपक्षी दलों द्वारा भारत के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड, कावेरी नदी के पानी के बंटवारे और आंध्र प्रदेश के विशेष पैकेज जैसे मुद्दे उठाए जाने के बाद 5 मार्च से शुरू हुए बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद के दोनों सदनों में कामकाज स्थगित है।

पिछले साल वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन के समक्ष 48 घंटों से भी कम समय में सरकार के अपने विधेयक में संशोधन के 30 पृष्ठों को पेश किया जिसे समीक्षा के लिए रखा गया था। बड़े पैमाने पर किए गए इस संशोधन पर कोई चर्चा नहीं हुई और इसे सत्तारूढ़ बीजेपी द्वारा आगे बढ़ा दिया गया। इन संशोधनों में बायोमेट्रिक आधारित आधार संख्या का एक विस्तारित दायरा भी शामिल था जिसे करदाताओं को रिटर्न दाखिल करते समय उनके विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने के लिए अनिवार्य बना दिया गया था। इसमें एक नया अध्याय भी शामिल है जिसने संसद द्वारा पारित पिछले 27 कानूनों को बदल दिया। इन संशोधनों ने वर्षों से विभिन्न अधिनियमों के माध्यम से संसद द्वारा गठित विभिन्न न्यायाधिकरणों में अभूतपूर्व परिवर्तन किए।


बाकी खबरें

  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां
    04 Jun 2022
    बनारस के फुलवरिया स्थित कब्रिस्तान में बिंदर के कुनबे का स्थायी ठिकाना है। यहीं से गुजरता है एक विशाल नाला, जो बारिश के दिनों में फुंफकार मारने लगता है। कब्र और नाले में जहरीले सांप भी पलते हैं और…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत
    04 Jun 2022
    केरल में कोरोना के मामलों में कमी आयी है, जबकि दूसरे राज्यों में कोरोना के मामले में बढ़ोतरी हुई है | केंद्र सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए पांच राज्यों को पत्र लिखकर सावधानी बरतने को कहा…
  • kanpur
    रवि शंकर दुबे
    कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!
    04 Jun 2022
    उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था का सच तब सामने आ गया जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के दौरे के बावजूद पड़ोस में कानपुर शहर में बवाल हो गया।
  • अशोक कुमार पाण्डेय
    धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है
    04 Jun 2022
    केंद्र ने कश्मीरी पंडितों की वापसी को अपनी कश्मीर नीति का केंद्र बिंदु बना लिया था और इसलिए धारा 370 को समाप्त कर दिया गया था। अब इसके नतीजे सब भुगत रहे हैं।
  • अनिल अंशुमन
    बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर
    04 Jun 2022
    जीएनएम प्रशिक्षण संस्थान को अनिश्चितकाल के लिए बंद करने की घोषणा करते हुए सभी नर्सिंग छात्राओं को 24 घंटे के अंदर हॉस्टल ख़ाली कर वैशाली ज़िला स्थित राजापकड़ जाने का फ़रमान जारी किया गया, जिसके ख़िलाफ़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License