NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
वरिष्ठ पत्रकार ही नहीं मानते एग्ज़िट पोल को विश्वसनीय : लखनऊ से ख़ास रिपोर्ट
मीडिया जगत से सम्बंध रखने वाले भी एग्ज़िट पोल की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। अपने अनुभव के आधार पर कई वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि कई बार एग्ज़िट पोल न सिर्फ़ भारत में बल्कि अमेरिका में भी ग़लत साबित हुए हैं।
असद रिज़वी
21 May 2019
Exit Polls
फोटो साभार: Elections.in

एग्ज़िट पोल पर कितना विश्वास किया जा सकता है? क्या एग्ज़िट पोल पूर्णतया वैज्ञानिक आधार पर होते हैं? सर्वेक्षण दिखाने वाले मीडिया घरानो पर सत्ता या किसी राजनीतिक दल का दबाव तो नहीं होता है? ऐसे ही कुछ प्रश्नों पर चर्चा आज सारे भारत में चल रही है।

लोकसभा चुनाव 2019 का मतदान ख़त्म होने के आधे घण्टे के भीतर टेलीविज़न पर एग्ज़िट पोल दिखाए जाने लगे थे। लगभग सभी मीडिया घरानों के सर्वेक्षणों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बहुमत से आगे या क़रीब बताया गया है। ज़्यादातर सर्वेक्षणों के अनुसार एनडीए पूर्ण बहुमत से सरकार बना रहा है। 

लेकिन टेलीविज़न पर दिखाए गए सर्वेक्षणों पर कितना विश्वास किया जा सकता है यह एक बड़ा प्रश्न है। क्योंकि मीडिया जगत से सम्बंध रखने वाले भी एग्ज़िट पोल की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। अपने अनुभव के आधार पर कई वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि कई बार एग्ज़िट पोल न सिर्फ़ भारत में बल्कि अमेरिका में भी ग़लत साबित हुए हैं।

लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार राम दत्त त्रिपाठी कहते हैं कि उन्होंने कभी किसी मीडिया घराने या एजेन्सी को मतदान के दिन सर्वेक्षण करते नहीं देखा है। कई दशक तक बीबीसी में ब्यूरो चीफ़ रहे त्रिपाठी कहते हैं कि उनके सूत्र बताते हैं कि सर्वेक्षण करने वाले अक्सर अपने घरों या कार्यालय से ही सर्वेक्षण की रिपोर्ट तैयार कर लेते हैं। एजेंसियां सर्वेक्षण करने वालों को बहुत कम भुगतान करती है इसलिए अक्सर सर्वेक्षण करने वाले मतदाताओं से बात किए बिना सर्वेक्षण की रिपोर्ट बना देते हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स के पूर्व ब्यूरो चीफ़ एम. हसन मानते हैं अमेरिका में दो पार्टी प्रणाली है, लेकिन वहाँ भी एग्ज़िट पोल ग़लत साबित होते हैं। अमेरिका की मीडिया के अनुसार हिलेरी क्लिंटन चुनाव जीत रही थीं। लेकिन अमेरिका की मीडिया के सर्वेक्षण ग़लत साबित हुए और डोनाल्ड ट्रम्प चुनाव जीत गए। हसन मानते हैं कि जब एग्ज़िट पोल दो पार्टी प्रणाली वाले देश में सही नहीं साबित होते,तो भारत जहाँ मल्टी पार्टी सिस्टम है वहाँ एग्ज़िट पोल की विश्वसनीय होने पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

देश कि राजनीति पर काफ़ी समय से नज़र रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक अतुल चंद्रा कहते हैं की एग्ज़िट पोल पर बहुत अधिक विश्वास नहीं किया जा सकता है। टाइम्‍स ऑफ इंडिया के सम्पादक रहे चंद्रा मानते हैं कि ऐसा भी सम्भव है कि जहाँ से सैम्पल (नमूने) लिए जाएं वहाँ किसी विशेष पार्टी का प्रभाव ज़्यादा हो, जबकि दूसरी कई जगह पर समीकरण अलग हो सकता है। ऐसे में मीडिया अपने सर्वेक्षण के आधार पर एग्ज़िट पोल देती है लेकिन वास्तविक चुनावी परिणाम बिल्कुल अलग होते हैं।

अतुल चंद्रा कहते हैं कि हाल में ऑस्ट्रेलिया में हुए चुनाव में सभी सर्वेक्षण ग़लत साबित हुए हैं। वहाँ सभी ओपिनियन पोल में माना जा रहा था की लेबर पार्टी की सरकार बनेगी लेकिन जीत लिबरल पार्टी की हुई।

अस्सी के दशक से चुनावों की समीक्षा कर रहे हुसैन अफ़सर कहते हैं कि भारत में एग्ज़िट पोल बहुत अधिक वैज्ञानिक तरीक़े से नहीं किए जाते हैं। लोकसभा चुनाव 2004 का उदाहरण देते हुए हुसैन अफ़सर कहते की उस वक़्त सभी सर्वेक्षण एनडीए के पक्ष में थे, लेकिन परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आये थे। वह मानते हैं कि मीडिया शुरू से सत्तारूढ़ दल की मदद करती आई है और चुनावों के बाद भी वही कर रही है।

यूएनआई के ब्यूरो चीफ़ मनोज भद्रा मानते हैं कि एग्ज़िट पोल परिणाम के संकेत दे सकते हैं, लेकिन इनको परिणाम नहीं माना जा सकता क्योंकि विधानसभा चुनावो से लेकर लोकसभा तक कई बार एग्ज़िट पोल फ़ेल हुए हैं।

मीडिया से सम्बंध रखने वाले यह भी मानते हैं कि दो प्रतिशत वोट भी चुनावों के परिणाम को बदल देते हैं। वरिष्ठ राजनीतिक समीक्षक मुदित माथुर कहते हैं कि सभी मीडिया घराने मानते हैं कि परिणामों और एग्ज़िट पोल में दो से पाँच प्रतिशत अंतर हो सकता है। वह कहते हैं की यह अंतर बहुत बड़ा होता है और इतने अंतर में वास्तविक परिणाम एग्ज़िट पोल से बहुत अलग हो जाते हैं।

इस तरह एग्ज़िट पोल पर कितना विश्वास किया जा सकता है यह एक बड़ा प्रश्न है। लोकसभा चुनाव के परिणाम तो 23 मई को आयेंगे, तभी इस बहस पर विराम लगेगा की एग्ज़िट पोल की विश्वसनियता कितनी है।

exit polls
BJP
Congress
Left politics
left parties
opposition
opposition parties
General elections2019
Result

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!
    24 Feb 2022
    तमाम आशंकाओं के बाद रूस ने यूक्रेन पर हमला करते हुए युद्ध की शुरुआत कर दी है। इस युद्ध के लिए कौन ज़िम्मेदार है? कौन से कारण इसके पीछे हैं? आइए इसे समझते हैं। 
  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    उत्तर प्रदेश चुनाव: ज़मीन का मालिकाना हक़ पाने के लिए जूझ रहे वनटांगिया मतदाता अब भी मुख्यधारा से कोसों दूर
    24 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चल रहे विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान इस इलाक़े में होना है। ज़मीन के मालिकाना हक़, बेरोज़गारी और महंगाई इस क्षेत्र के कुछ अहम चुनावी मुद्दे हैं।
  • ayodhya
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    यूपी चुनाव: अयोध्यावादियों के विरुद्ध फिर खड़े हैं अयोध्यावासी
    24 Feb 2022
    अयोध्या में पांचवे दौर में 27 फरवरी को मतदान होना है। लंबे समय बाद यहां अयोध्यावादी और अयोध्यावासी का विभाजन साफ तौर पर दिख रहा है और धर्म केंद्रित विकास की जगह आजीविका केंद्रित विकास की मांग हो रही…
  • mali
    पवन कुलकर्णी
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों की वापसी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक जीत है
    24 Feb 2022
    माली से फ़्रांसीसी सैनिकों को हटाने की मांग करने वाले बड़े पैमाने के जन-आंदोलनों का उभार 2020 से जारी है। इन आंदोलनों की पृष्ठभूमि में, माली की संक्रमणकालीन सरकार ने फ़्रांस के खिलाफ़ लगातार विद्रोही…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License