NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
विज्ञान
अंतरराष्ट्रीय
वीडियो: शोधकर्ताओं ने दर्शाया चूहों में कोविड-19 का संक्रमण और उससे लड़ती एंटीबाडीज़
चित्र में वायरस के प्रसार को दर्ज किया गया है, जिसके चलते चूहे के श्वसन मार्ग को क्षति पहुंची है। यह इस तथ्य को भी दर्ज करने में सफल रहा है कि कैसे एंटीबाडीज वायरस के प्रसार पर रोक लगाने में कारगर हैं।
संदीपन तालुकदार
20 Aug 2021
वीडियो: शोधकर्ताओं ने दर्शाया चूहों में कोविड-19 का संक्रमण और उससे लड़ती एंटीबाडीज़
प्रतीकात्मक तस्वीर। चित्र साभार: विकिपीडिया 

यह देखना बेहद दिलचस्प है कि कैसे वायरस इंसानी जिस्म के भीतर प्रसार करता है और एक-एक कर शरीर के तमाम अंगों को प्रभावित करता जाता है। यह कम से कम उन वैज्ञानिकों के परिश्रम का जीता-जागता प्रमाण है, जो कोरोनावायरस महामारी के दौरान पिछले डेढ़ सालों से भी अधिक समय से इस काम में लगे हुये हैं। सामान्य ज्ञान अब यह कह सकता है कि नोवेल कोरोनावायरस एक श्वसन संबंधी वायरस है जो नासिका से शुरू होकर हमारे श्वसन प्रणाली को अपना निशाना बनाता है। 

यह वायरस हमारे शरीर के भीतर तब भारी तबाही मचा सकता है जब यह शरीर के भीतर गुणात्मक रूप से वृद्धि करना शुरू कर देता है और एक के बाद एक, दूसरे अंगों पर हमला करने लगता है। और यदि ये प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा सफाया किये जाने से पहले ही हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर पाने में सफल हो जाते हैं तो ये अतिसूक्ष्म जीव, रोगी के जीवन के लिए खतरा पैदा करने की स्थिति में पहुँच जाते हैं। 

क्या वीडियो के माध्यम से वास्तविक-जीवन का सचित्र चित्रण संभव है?

हाँ, आंशिक तौर पर ऐसा कर पाना संभव है। वैज्ञानिक प्रयासों एवं परिष्कृत तकनीक के संयोजन ने इसे संभव बना दिया है। शोधकर्ता जीवित जीवों के भीतर वायरस के प्रसार को कैद कर पाने में सफल रहे हैं – इस मामले में एक चूहे की नासिका के जरिये उसके फेफड़ों तक छह दिनों के दौरान होने वाली घटनाओं की गतिविधयों को उन्होंने कैद कर पाने में सफलता प्राप्त की है।

इस इमेजिंग अध्ययन को वैज्ञानिक पत्रिका इम्युनिटी में एक प्री-प्रूफ प्रारूप में ऑनलाइन प्रकाशित किया गया है। इस अध्ययन का नेतृत्व येल स्कूल ऑफ़ मेडिसिन से प्रीति कुमार, प्रदीप उचिल और वाल्टर मोथेस सहित यूनिवर्सिटी डे मांट्रियल से ऐन्द्रेस फिन्ज़ी के द्वारा किया गया। 

इमेज ने वायरस के प्रसार को दर्ज किया है, जिसमें चूहे के श्वसन पथ को नुकसान पहुँचते देखा जा सकता है। इसने इस चीज को भी दर्ज किया है कि कैसे एंटीबाडीज वायरस की प्रगति पर लगाम लगाने में सक्षम हैं। शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के हिस्से के तौर पर जिन एंटीबाडीज का इस्तेमाल किया था, उसे उन इंसानों से लिया गया था जो कोरोनावायरस एसएआरएस-सीओवी-2 से उपजे कोविड-19 से पूरी तरह से उबर चुके थे।

हालाँकि, शोध के जरिये यह भी खुलासा हुआ है कि जो एंटीबाडीज प्रतिरक्षा प्रणाली (शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र) की महत्वपूर्ण कोशिकाओं को इस अभियान में शामिल कर पाने में असमर्थ होते हैं वे संक्रमण से लड़ने में कम प्रभावी होते हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली में कुछ ऐसी कोशिकाएं हैं जो संक्रमण को खत्म करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, येल स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में संक्रामक रोगों की सहायक प्रोफेसर प्रीति कुमार, जो इस शोध पत्र की लेखिका भी हैं, को यह कहते हुए उद्धृत किया गया था: “पहली बार हम एसएआरएस-सीओवी-2 के प्रसार को एक जीवित प्राणी के भीतर रियल टाइम में प्रसार पाते देख पाने में सफल रहे। और महत्वपूर्ण बात यह है कि हम यह जान पाने में सफल रहे कि संक्रमण की प्रगति को रोकने के लिए किन क्षेत्रों पर एंटीबाडीज को जोर देने की जरूरत होती है।”

इसके लिए शोधकर्ताओं ने बायोलुमिनेस्सेंट (जीवदीप्ति) इमेजिंग (बीएलआई) के नाम से जानी जाने वाली तकनीक का उपयोग किया। बीएलआई तकनीक शरीर के भीतर घटित होने वाली प्रतिक्रियाओं द्वारा उत्सर्जित प्रकाश का उपयोग करती है। शरीर के भीतर एक छोटे से रासायनिक पदार्थ को डाला जाता है जो प्रतिक्रिया होने पर प्रकाश उत्सर्जित करता है। उन्नत सूक्ष्मदर्शी यंत्र की मदद से, फिर शोधकर्ता शरीर के भीतर वायरस के प्रसार की पड़ताल कर सकते हैं।

इन छह दिनों के दौरान वायरस के प्रसार पर नजर बनाये रखने वाले वीडियो के यू-ट्यूब लिंक को यहाँ पर पाया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने उन मनुष्यों के रक्त प्लाज्मा का भी इस्तेमाल किया था, जो कोविड-19 के हमले से उबर चुके थे। उनके प्लाज्मा में मौजूद एंटीबाडीज – प्रतिरक्षा प्रणाली में मौजूद प्रोटीन, जो वायरस को नष्ट करने में सक्षम हैं, ने वायरस के प्रसार को रोक दिया था, जिसे शोधकर्ताओं ने अपने इमेजिंग प्रयोगों में दर्ज किया है।

अपने निष्कर्षों में उन्होंने पाया है कि संक्रमण होने के तीन दिन बाद भी जब एंटीबाडीज दी गई तो भी वे वायरस के प्रसार को रोक पाने में सफल रहे। यहाँ पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि शोधकर्ताओं ने पाया कि जब इन एंटीबाडीज को संक्रमण होने से पहले चूहों के शरीर में प्रवेश कराया गया, तो वे संक्रमण को पूरी तरह से रोक पाने में कामयाब रहे।

येल के शोध वैज्ञानिक प्रदीप उचिल ने बताया “इमेजिंग द्वारा वायरस के प्रसार की लाइव रिपोर्टिंग का तेजी से पता लगाने में उपयोग किया जा सकता है कि क्या तीन से पांच दिनों के भीतर संक्रमण फैलने में उपचार काम करेगा या नहीं, जो कि वर्तमान एवं भविष्य में होने वाली महामारियों में बचाव के उपायों को तैयार करने के लिए एक महत्वपूर्ण समय की बचत करने वाली विशेषता है।” हालाँकि शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि सभी एंटीबाडीज समान रूप से काम करने में सक्षम नहीं हैं।

वायरस के खिलाफ लड़ाई में एंटीबाडीज दो अहम भूमिकाएं निभाते हैं। अलगाव में डालने वाले एंटीबाडीज वायरस को बाँध कर रखते हैं और इसे कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकते हैं। दूसरे प्रकार के एंटीबाडीज के जरिये एक प्रभावकारी कार्य होता है। ये एंटीबाडीज प्रतिरक्षा प्रणाली को संकेत भेजती रहती हैं और बाकी कोशिकाओं को इस संघर्ष में भर्ती करती हैं जो अंततः उन कोशिकाओं को खत्म कर सकती हैं, जहाँ पर संक्रमण हुआ था।

कुमार को यह कहते हुए उद्धृत किया गया था कि “हम अभी तक यही समझते थे कि संक्रमण की रोकथाम के लिए वायरस को बेअसर करना ही पर्याप्त होता है, लेकिन एंटीबाडीज को शरीर में सही समय पर सही स्थान पर और सही मात्रा में मौजूद होना अति आवश्यक है। बिना प्रभावकारी कार्य के एंटीबाडीज द्वारा अकेले निष्क्रिय कर देने वाली गतिविधि उतनी प्रभावकारी नहीं है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Video: Researchers Show How COVID-19 Spreads in Mice and How Antibodies Counter it

novel coronavirus
How COVID-19 Spreads
Live Imaging of Coronavirus
COVID-19
Antibodies
SARS-CoV-2
Imaging Spread of Coronavirus
Yale University

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • ग्राउंड रिपोर्टः  यूपी में सवा सौ से ज्यादा बच्चों की मौत, अभी और कितनी जान लेगा 'मिस्ट्री फीवर'!
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्टः  यूपी में सवा सौ से ज्यादा बच्चों की मौत, अभी और कितनी जान लेगा 'मिस्ट्री फीवर'!
    09 Sep 2021
    रंग-बिरंगी चूड़ियों के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के साथ ही दुनिया की पुरातन सांस्कृतिक नगरी काशी (बनारस) में रहस्यमयी फीवर का कहर बरपा हुआ है। पश्चिम से पूरब तक मिस्ट्री फीवर का खौफ है।…
  • करनाल में तीसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी, SDM पर कार्रवाई की मांग
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    करनाल में तीसरे दिन भी किसानों का प्रदर्शन जारी, SDM पर कार्रवाई की मांग
    09 Sep 2021
    वहीं सरकार का पक्षकार माने जाने वाले किसान संगठन ''भारतीय किसान संघ'' जो आरएसएस से जुड़ा हुआ है, ने भी विवादित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और दिल्ली में प्रदर्शन किया।
  • अनियंत्रित ‘विकास’ से कराहते हिमालयी क्षेत्र, सात बिजली परियोजनों को मंज़ूरी! 
    डी रघुनंदन
    अनियंत्रित ‘विकास’ से कराहते हिमालयी क्षेत्र, सात बिजली परियोजनों को मंज़ूरी! 
    09 Sep 2021
    उत्तराखंड के अपर-गंगा क्षेत्र में, 7 विवादित पन-बिजली परियोजनाओं के लिए मंजूरी दे दी गई है। इन परियोजनाओं में, धौलीगंगा पर बनने वाली 512 मेगावाट की तपोवन-विष्णुगढ़ पन-बिजली परियोजना भी शामिल है, जिसे…
  • मीडिया लीक की जांच के लिए दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: आसिफ तन्हा के वकील
    सबरंग इंडिया
    मीडिया लीक की जांच के लिए दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: आसिफ तन्हा के वकील
    09 Sep 2021
    अगस्त 2020 में, तन्हा के पुलिस को दिए गए कथित कबूलनामे को समाचार मीडिया में लीक कर दिया गया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कबूल किया था कि वह फरवरी 2020 की दिल्ली हिंसा की साजिश में शामिल थे।
  • 150 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिक जावेद अख़्तर और नसीरुद्दीन शाह के समर्थन में उतरे
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    150 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिक जावेद अख़्तर और नसीरुद्दीन शाह के समर्थन में उतरे
    09 Sep 2021
    प्रख्यात नागरिकों के एक समूह को इन दो जानी-मानी हस्तियों के प्रति अपने समर्थन को व्यक्त करने के लिए एक बयान जारी करना पड़ा है जब दोनों के द्वारा हिन्दू और मुस्लिम दक्षिणपंथियों के खिलाफ की गई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License