NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या पेटीएम को सरकारी ऐपस्टोर में समायोजित करने के लिए नीतियों में बदलाव किया गया?
पेटीएम जिसकी मोबाइल सेवा ऐपस्टोर पर एकमात्र निजी उपस्थिति है को पिछले साल सितंबर माह में गूगल प्ले से हटा दिया गया था। ठीक उसी महीने इसे सेवा एप में शामिल कर लिया गया था।
रोसम्मा थॉमस
08 Jan 2021
पेटीएम
तस्वीर साभार: द इकॉनोमिक टाइम्स

सूचना एवं तकनीक मंत्रालय का मोबाइल सेवा ऐपस्टोर वर्तमान में सरकारी एप्लीकेशन स्टोर पर “सार्वजनिक सेवा क्षेत्र से संबंधित मोबाइल एप्लीकेशन” की होस्टिंग के लिए आमंत्रण दे रहा है। वर्तमान में इस स्टोर पर निजी एप्लीकेशन के तौर पर एकमात्र उपस्थिति पेटीएम की बनी हुई है।

 apps.mgov.gov.in में जाकर अवलोकन करने पर यह दिखता है कि यहाँ पर मौजूद ऐप्स मुख्यतया सरकारी विभागों से संबंधित हैं। ये ऐप्स मौसम से जुड़ी खबरों, कृषि से संबंधित समाचारों या सूचनाओं में मदद पहुँचाते हैं। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश सरकार के स्थानीय सार्वजनिक वितरण प्रतिष्ठान पर स्टॉक की उपलब्धता की सूचना जैसे इस प्रकार के कई अन्य ऐप्स सरकार के कई विभागों या अन्य संस्थाओं द्वारा विकसित किये गए हैं।

पेटीएम को कथित तौर पर जुए के संचालन के आरोप में गूगल प्ले स्टोर से 18 सितम्बर, 2020 को मात्र कुछ घंटों के लिए हटा दिया गया था।

टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार: “गूगल का इस बारे में कहना था कि उसका प्ले स्टोर उन ऑनलाइन कैसीनो एवं अन्य गैर-वैधानिक सट्टेबाजी खिलाने वाले ऐप्स को प्रतिबंधित करता है, जो भारत में सट्टेबाजी की सुविधा मुहैया कराते हैं। पेटीएम जिसने अपने संदेहास्पद ऐप में फंतासी स्पोर्ट्स सेवा को बढ़ावा दिया है, ने लगातार प्ले स्टोर की नीतियों का उल्लंघन करने का काम किया है। इस संबंध में दो लोगों ने जो इस मामले से परिचित हैं ने टेकक्रंच को इस बारे में बताया था। पेटीएम के फंतासी स्पोर्ट्स सेवा जिसे पेटीएम फर्स्ट गेम्स के नाम से जाना जाता है, वह अलग से एक ऐप के तौर पर मौजूद था। उसे भी प्ले स्टोर से हटा लिया गया था।” इस रिपोर्ट को बाद में पाठकों को सूचित करने के उद्देश्य से अपडेट कर दिया गया था कि पेटीएम को प्ले स्टोर में दोबारा से शामिल कर लिया गया है।

अक्टूबर 2020 में नई दिल्ली निवासी नीरज शर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना तकनीक मंत्रालय के सेंटर फॉर डेवेलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सीडीएसी) से इस बाबत यह जानकारी माँगी थी कि किस आधार पर पेटीएम को सरकारी साइट पर होस्टिंग की अनुमति दी गई है।

उनके आवेदन में यह जानकारी माँगी गई थी कि जब पहली बार पेटीएम को सरकारी साइट पर अपलोड किया गया था तो सरकार की ओर से मोबाइल सेवा पर इसकी होस्टिंग को लेकर संचार की सारी सत्यापित प्रतियों, नोटिंग एवं दिशानिर्देशों को, जो इस प्रकार के ऐप्स की होस्टिंग के लिए आवश्यक प्रक्रिया और बैठकों में हुई सारी बातचीत जिसमें यह फैसला लिया गया था, को सार्वजनिक किया जाये।

शर्मा को इस बारे में सूचित किया गया कि सरकारी प्लेटफार्म पर इस साइट की अपलोडिंग या होस्टिंग 25 सितम्बर, 2020 की तारीख में कर दी गई थी। सीडीएसी की बैठक की मिनट्स से उन्हें सिर्फ एक लाइन की सूचना प्रदान की गई थी, जबकि बाकी के दस्तावेज को संशोधित कर दिया गया था। इसका मजमून कुछ इस प्रकार से था: “सीडीएसी को उन सभी सरकारी एप्लीकेशंस को जिन्हें प्राइवेट डेवलपर द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के लिए तैयार किया गया है, को मोबाइल सेवा ऐपस्टोर में होस्टिंग की अनुमति प्राप्त है। इसके साथ ही साथ सार्वजनिक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अन्य महत्वपूर्ण एवं प्रासंगिक प्राइवेट ऐप्स की भी मेजबानी की जा सकती है।”

इस सवाल-जवाब से जो बात निकलकर आती है वह यह है कि निजी खिलाड़ियों को समायोजित करने के लिए सरकारी नीति में बदलाव किया गया है। गौरतलब है कि विमुद्रीकरण (नोटबंदी) किये जाने के अगले ही दिन 8 नवंबर, 2016 की सुबह समाचारपत्रों के पाठक कई राष्ट्रीय अखबारों के फ्रंट-पेज पर पेटीएम के विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का इस्तेमाल किया गया था, के साथ जगे थे, जिसमें उन्हें “स्वतंत्र भारत के वित्तीय इतिहास में अब तक के सबसे बड़े साहसिक फैसले” के लिए बधाई दी गई थी! संयोगवश इसी अवधि के दौरान 100 से ज्यादा की संख्या में मौतें हुईं, क्योंकि लोगों को अपने पास रखे नोटों को बदलने के लिए लाइनों में लगना पड़ा था, जबकि बैंकिंग व्यवस्था में वैध नकदी के अभाव में वह पूरी तरह से ठप पड़ चुकी थी। हालाँकि इस सबसे पेटीएम को फायदा पहुँचा था, क्योंकि लोगों के पास  नकदी के अभाव के चलते उनके पास इस ऐप को डाउनलोड करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा था।

शर्मा ने पेटीएम मोबाइल ऐप के साथ सरकार के समझौते की सत्यापित प्रति की माँग की थी, जिसे इस आधार पर ख़ारिज कर दिया गया था कि यह “आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(जे) के तहत थर्ड पार्टी की सूचना के तहत संरक्षित है।”

न्यूज़क्लिक के साथ अपनी बातचीत में शर्मा का कहना था: “एक नागरिक के तौर पर मैं इस बात से आश्चर्यचकित हूँ कि अचानक से कैसे सरकारी ऐप स्टोर में जिसमें इससे पहले सिर्फ सरकारी विभागों से तैयार किये गए ऐप्स को ही अनुमति प्राप्त थी, उसमें एक प्राइवेट ऐप को अनुमति दे दी गई थी। सरकारी साइट पर पहला निजी ऐप पेटीएम है, और हम सभी इस बात को जानते हैं कि अलीबाबा ग्रुप जो कि एक चीनी कंपनी है, के पास इसके स्टॉक शेयर होल्डिंग में 40% की हिस्सेदारी है। इससे पहले भी पेटीएम विवादों में रहा है और हमें उन समाचार रिपोर्टों की याद है जिसमें पेटीएम से व्यक्तिगत डेटा को प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ साझा करने के लिए कहा गया था। पेटीएम ऐप्स के सरकारी ऐपस्टोर पर बने रहने को लेकर संदेह करने के पर्याप्त कारण हैं, क्योंकि लोग इसे सरकारी ऐप समझकर इस्तेमाल कर सकते हैं। यदि बाद में जाकर कोई मुद्दा खड़ा होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? और भला सीडीएसी इस जानकारी को क्यों छिपा रही है?

पेटीएम जिसका मुख्यालय उत्तर प्रदेश के नोयडा में है, यह भारत की सबसे मूल्यवान स्टार्टअप कंपनी है। पेटीएम मॉल ई-कॉमर्स प्लेटफार्म निर्माता वन97 कम्युनिकेशंस की स्थापना अगस्त 2010 में हुई थी, जिसका मूल्यांकन जून 2020 में 16 अरब डॉलर आँका गया था।

लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-

Was Policy Changed to Accommodate Paytm on Govt Appstore?

Mobile Sewa
Mobile Sewa Patym
paytm
Paytm Narendra modi
Paytm Demonetisation
Government Appstore

Related Stories

पे-टीएम : सीबीआई की तरह एक उलझी-सुलझी कहानी


बाकी खबरें

  • gautam navlakha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एल्गार परिषद: नवलखा को तलोजा जेल के 'अंडा सेल' में भेजा गया, सहबा हुसैन बोलीं- बिगड़ गई है तबीयत
    25 Oct 2021
    हुसैन ने पूछा- “नवलखा को उनके विचारों के लिए कब तक सताया जाएगा और अधिकारी उनकी विचारधारा को तोड़ने के लिए किस हद तक जाएंगे।''
  • skm
    लाल बहादुर सिंह
    किसान आंदोलन को उसके उन "शुभचिंतकों" से बचाना होगा जो संघ-भाजपा की भाषा बोल रहे हैं 
    25 Oct 2021
    जाहिर है मुद्दा  आधारित आंदोलन में सबका विचार हर प्रश्न पर एक हो, इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। लेकिन आंदोलन की unity in action हर हाल में बनी रहे, इसे बेशक सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • Sardar Udham
    हर्षवर्धन, अंकुर गोस्वामी
    सरदार उधम: एक अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी की महागाथा
    25 Oct 2021
    निर्देशक ने निश्चित ही एक ऐतिहासिक किरदार के जीवन के अनछुए पहलुओं को दर्शाने  के लिए गहरा शोध किया है। फिल्म यह भली प्रकार से दिखाती है कि उधम सिंह, सिर्फ बदले की भावना से प्रेरित एक जोशीले नौजवान…
  • congress
    शुभम शर्मा, अजय सहारन
    क्रांतिकारी और कांग्रेस
    25 Oct 2021
    क्रांतिकारियों, कम्युनिस्टों और समाजवादियों ने कांग्रेस पार्टी को अलग दिशा के बजाय संपूर्ण बदलाव और प्रगतिशील दिशाओं के रास्ते पर आगे चलने के लिए हमेशा मजबूर किया है।
  • RASHEED KIDWAI
    शिरीष खरे
    चर्चा में नई किताब 'भारत के प्रधानमंत्री'
    25 Oct 2021
    कश्मीर पर नेहरू की नीति कितनी उचित है या अनुचित, यह समझने के लिए हमें वर्ष 1947 के अगस्त से अक्टूबर के महीनों में जाना होगा। और इसमें हमारी मदद कर सकती है, पत्रकार रशीद किदवई की नई पुस्तक 'भारत के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License