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अबहलाली बेस के नवनिर्वाचित महासचिव मजोंडोलो का संकल्प: "हम प्रतिरोध करेंगे"
अपने ज़बरदस्त दमन के दौरान भी अपने प्रभाव का विस्तार करते हुए आयोजित होती रहने वाली अबहलाली बेस मजोंडोलो की इस कांग्रेस ने दक्षिण अफ़्रीका के झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे लोगों के इस आंदोलन को लेकर अगले तीन सालों के लिए आगे की लड़ाई का खाका तैयार कर लिया है।
पवन कुलकर्णी
07 Dec 2021
Abahlali
इलेक्टिव कांग्रेस से पहले सोमवार को डेनिस हर्ले हॉल में नीति सम्मेलन के दौरान शामिल हो रहे अबहलाली। फ़ोटो: एबीएम

28 नवंबर को आयोजित दक्षिण अफ़्रीका के झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के आंदोलन की इस कांग्रेस, अबहलाली बेस मजोंडोलो (AbM) ने अपने उस आंदोलन को लेकर भविष्य का खाका तैयार कर लिया है, जो ज़मीन पर कब्ज़ा और खाद्य-संप्रभुता को हासिल करने के लिहाज़ से सामुदायिक आत्मनिर्भर परियोजनाओं का निर्माण के लिए सामूहिक कार्रवाई के आसपास केंद्रित है। थेलेपो मोहपी ने फ़ोन पर दिये गये एक साक्षात्कार में पीपुल्स डिस्पैच को बताया,”आंदोलन के लिए यह ज़रूरी इसलिए है, क्योंकि "सरकार ने हमें नाकाम कर दिया है; हमें ख़ुद को बचाये रखने के लिए नीचे से ऊपर तक के एक विकल्प तैयार करने की जरूरत है। "

अपने ज़मीन से जुड़े कारोबार और ख़ास तौर पर उस ईखेनाना कारोबार, जिसकी कामयाब सामुदायिक मुर्गी पालन और कृषि परियोजनाओं ने अन्य कारोबारों के लिए एक मिसाल के तौर पर काम किया है,उसपर लगातार होते हमलों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने साफ़ कर दिया है कि अबहलाली किसी भी ऐसे कारोबार का बचाव के लिए तैयार है, जो लोगों को ख़ुद को बचाये रखने के लिए सामुदायिक तरीक़े की नुमाइंदगी करता है।"

उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "जब लोग सामुदायिक परियोजनाओं के ज़रिये इन मुश्किल दौर में ख़ुद को बचाये रखने का रास्ता ढूंढ़ रहे हैं, ऐसे समय में अफ़्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (ANC) सरकार इन परियोजनाओं को ख़त्म कर देना चाहती है और लोगों को जीवित रहने के लिए सरकार पर निर्भर रहने के लिए मजबूर कर देना चाहती है। लेकिन, हम इसका विरोध करेंगे। हम नीचे से आम लोगों को लामबंद करेंगे और ख़ुद को बचाने की ख़ातिर सभी ज़रूरी साधनों का इस्तेमाल करेंगे।”

अगले तीन सालों के लिए आंदोलन की अगुवाई करती एक नयी राष्ट्रीय परिषद का चुनाव करने वाली कांग्रेस की अहमियत पर रौशनी डालते हुए मोहपी ने कहा, "सरकार, उसकी पुलिस और सत्ताधारी एएनसी के ग़ुंडों के हमलों के बीच हम अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताक़त दिखाना जारी रखे हुए हैं।" कांग्रेस ने एएनसी को हराने और मज़दूर तबके की पार्टियों को मज़बूत करने के लिए सामूहिक कार्रवाई का संकल्प लिया है, जिसमें चुनावी ताक़त को लामबंद करने के लिए चुनावों में हस्तक्षेप किया जाना भी शामिल है।

उन्होंने कहा, "इस बार हमने तय किया है कि हम आम सभा में सामूहिक रूप से सुनिश्चित करेंगे कि हमें मज़दूर तबके की किस पार्टी का समर्थन करना है, और इसके बाद हमें यह भी सुनिश्चित करना है कि हम सभी अपने-अपने वोटों को लामबंद करने के लिए सर्वसम्मति से वोट दें और उस पार्टी को मज़बूत करने के लिए इसका इस्तेमाल करें, ताकि ग़रीबों और हाशिये के लोगों का जनादेश हासिल किया जा सके।”

नवंबर 2021 में नगरपालिका चुनाव के नतीजे की ओर इशारा करते हुए वह कहते हैं कि एएनसी के ख़िलाफ़ यह चुनावी लामबंदी पहले ही नतीजे दिखाना शुरू कर चुकी है,जिसमें एएनसी ने पहली बार 50% से कम वोट हासिल किये हैं और बड़े-बड़े शहर उसके हाथ से निकल गये हैं।

उन्होंने कहा, "सबसे अहम बात यह है कि एएनसी को उसस ईखेनाना नगरपालिका में गठबंधन तक करना पड़ा, जो उनका गढ़ रहा है। अबहलाली का भी गढ़ रहे इस सूबे में एएनसी के ख़िलाफ़ वोट करने के हमारे आह्वान से एएनसी को समर्थन को अच्छा-ख़ासा नुकसान हुआ है।”

आख़िरकार दुनिया भर के संगठनों से एबीएम के प्रति जतायी गयी इस एकजुटता को लेकर आभार जताते हुए मोहपी ने इस आंदोलन की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, "हमारा संघर्ष सिर्फ़ दक्षिण अफ़्रीका में ही नहीं चल रहा है। कॉर्पोरेट के ज़रिये ज़मीन हथियाते हुए दक्षिण अमेरिका के कई देशों में वहां के मूल निवासी और ग़रीबों को साम्राज्यवादी देशों के ओर से बेदखल किया जा रहा है। उन्हीं कॉर्पोरेटों में से कई अफ़्रीका के लोगों के संसाधनों पर कब्ज़ा करने में भी लिप्त हैं..हम न सिर्फ़ दक्षिण अफ़्रीका में पूंजीवाद के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था के रूप में साम्राज्यवादी पूंजीवाद को पूरी तरह से ख़त्म करने के संघर्ष में अपनी भूमिका भी निभा रहे हैं।”

प्रस्तुत है इसी साक्षात्कार का संपादित अंश:

पीपुल्स डिस्पैच: एबीएम के सदस्यों के लिए इस कांग्रेस की क्या अहमियत है ?

थलेपो मोहापी: यह कांग्रेस बुनियादी लोकतंत्र का प्रतीक है; हमें जनादेश देने वाले लोगों ने नयी राष्ट्रीय परिषद का चुनाव किया है। हम हर तीन साल में ऐसा इसलिए कर पाते हैं, क्योंकि (हमारे संगठन में) कोई तानाशाही नहीं है; इसमें लोकतंत्र है, यहां समाजवाद है। किसी ख़ास नेता के बनिस्पत आम लोगों की आवाज़ कहीं ज़्यादा अहम है। जनता के पास हर तीन साल में नेतृत्व का चुनाव करने का अधिकार है, और यह जनता ही है, जिसका जनादेश अगले तीन सालों तक चलेगा।

पीपल्स डिस्पैच: जिस समय लोकतांत्रिक जनादेश का नवीनीकरण करते हुए यह आंदोलन लगातार एक सख़्त कार्रवाई का सामना कर रहा है, वैसे समय में आप सरकार और उन दूसरी ताक़तों को क्या संदेश देना चाहते हैं, जो ख़ुद को इस आंदोलन के ख़िलाफ़ रुख़ अख़्तियार किये हुए हैं ?

थलेपो मोहापी: हम तो सबसे पहले और सबसे अहम तरीक़े से बुनियादी लोकतंत्र की शक्ति के प्रति अपना सम्मान और अपना विश्वास जता रहे हैं। सरकार, उसकी पुलिस और सत्ताधारी एएनसी के गुडों के हमलों के बीच हम अपनी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताक़त दिखाने को जारी रखे हुए हैं। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया उस प्रक्रिया से बहुत अलग है, जिसने इस सरकार को दक्षिण अफ़्रीका पर थोपा हुआ है। चुनाव में मतदान करने को लेकर पंजीकृत हुए लोगों में से महज़ 40 या 50% लोगों ने ही मतदान किया, और जो लोग मतदान के पात्र हैं, उनमें से ज़्यादतर लोगों ने तो पंजीकरण तक नहीं कराया है।

दूसरी ओर, हम लोकतांत्रिक क़वायद का रास्ता दिखा रहे हैं। अबहलाली के एक लाख से ज़्यादा लोगों की आवाज़ इस कांग्रेस के लिए मायने रखती है। लेकिन, चूंकि हम सब एक जगह इकट्ठा नहीं हो सकते थे, इसलिए 400 प्रतिनिधि थे, जिन्हें विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से चुना गया और कांग्रेस में मतदान के लिए भेजा गया (उनकी इच्छा के मुताबिक़)।

पीपल्स डिस्पैच: एबीएम पर हुए हाल के हमलों के केंद्र में ईखेनाना ज़मीन का कब्ज़ा रहा है। ईखेनाना को लेकर हुए इस संघर्ष के सिलसिले में कांग्रेस किस निष्कर्ष पर पहुंची ?

थलेपो मोहापी: कांग्रेस के आयोजित होने से पहले आयोजित होने वाले नीति सम्मेलन ने यह साफ़ कर दिया था कि अबहलाली उस किसी भी कारोबार को बचाने के लिए तैयार है, जो लोगों को ख़ुद को बचाये रखने के लिए सामुदायिक तरीक़े की नुमाइंदगी करता है। हम अपने आंदोलन को उन लोगों के हमलों से बचाने जा रहे हैं, जो उस उम्मीद को ख़त्म कर देना चाहते हैं, जो ईखेनाना कारोबार ने हमारे सामने पेश किया है।

अगर ज़रूरी हुआ,तो हम अदालत जायेंगे, या किसी भी प्रगतिशील कारोबार की रक्षा के लिए जो कुछ भी ज़रूरी होगा,वह सब करेंगे। जब लोग सामुदायिक परियोजनाओं के ज़रिये इन कठिन दौर में ख़ुद को बचाये रखने का रास्ता ढूंढ़ रहे हों, वैसे समय में एएनसी सरकार इन परियोजनाओं को तबाह कर देना चाहती है और लोगों को जीवित रहने के लिए सरकार पर निर्भर रहने के लिए मजबूर कर देना चाहती है। लेकिन, हम इसका विरोध करेंगे। हम नीचे से जनता को लामबंद करेंगे और अपनी रक्षा के लिए सभी ज़रूरी साधनों का इस्तेमाल करेंगे।

पीपल्स डिस्पैच: इस नीति सम्मेलन से निकले कुछ अन्य प्रस्ताव क्या थे ?

थलेपो मोहापी: इन प्रस्तावों में से एक संकल्प तो यह है कि हम एक ऐसे न्यायसंगत और बराबरी वाले समाज के निर्माण को लेकर अपने जनादेश को मज़बूत करेंगे, जहां लोगों को उनकी चमड़ी के रंग, उनकी राष्ट्रीयता या उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किये बिना सम्मान के साथ व्यवहार किया जाता हो। इसे पूरा करने के लिए हम अपने आंदोलन को आगे बढ़ायेंगे, जनता के बीच अपनी सदस्यता को मौजूदा संख्या एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख करेंगे और अपनी शाखाओं का विस्तार करेंगे। हम एक सामुदायिक जीवन शैली को बढ़ावा देने और उसे व्यवस्थित करने के लिए काम करेंगे, ताकि लोग आत्मनिर्भर बन सकें। हम खाद्य संप्रभुता की परंपरा पर काम करना इसलिए जारी रखेंगे, क्योंकि सरकार ने हमें नाकाम कर दिया है; हमें ख़ुद को बचाये रखने के लिहाज़ से एक नीचे से ऊपर तक के विकल्प को तैयार करने की ज़रूरत है।

हमने यह भी संकल्प लिया है कि जब राष्ट्रीय या स्थानीय स्तर पर चुनाव हों, तो हमें अलग-अलग दिशाओं में निजी रूप से मतदान नहीं करना चाहिए। हमें अपनी ताक़त को मज़बूत करने के लिए सामूहिक रूप से एक ही दिशा में मतदान करने की ज़रूरत है। हम प्रगतिशील मज़दूर वर्ग के राजनीतिक दलों के साथ काम करने जा रहे हैं और इस बात को सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि इस समय हमारे पास जो एक लाख से ज़्यादा वोट हैं,और यह संख्या निश्चित रूप से और बढ़ने वाली है,ये तमाम वोट एकमुश्त एक ही राजनीतिक दल के लिए डाले जायें।

पीपल्स डिस्पैच: क्या इस कांग्रेस से पहले एबीएम ने किसी राजनीतिक दल के समर्थन में कोई रुख़ अख़्तिया नहीं किया था ?

थलेपो मोहापी: पिछले आम चुनाव में अबहलाली ने एसआरडब्ल्यूपी (सोशलिस्ट रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी) का समर्थन किया था, लेकिन सदस्यों को बताया गया था कि वे व्यक्तिगत रूप से अपनी-अपने पसंद के लोगों के लिए वोट कर सकते हैं। और उन्होंने अलग-अलग तरह से मतदान किया था। इससे हमारी ताक़त कमज़ोर पड़ जाती है। इस बार हमने यह तय किया है कि हम आम सभा में सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करेंगे कि हम सभी अपने-अपने वोटों को मज़बूत करने के लिए एकमत से वोट करें और उस पार्टी को मज़बूती देने के लिए इसका इस्तेमाल करें, ताकि ग़रीबों और हाशिये के लोगों के जनादेश को आगे बढ़ाया जा सके।

हमने यह सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया है कि हमारे सदस्य सत्तारूढ़ एएनसी को वोट न दें। हम इस बात को लेकर एकदम स्पष्ट हैं कि हमारे लोगों को ख़ुद को मटियामेट करने के लिए वोट नहीं देना चाहिए, क्योंकि एएनसी अबहलाली के कार्यकर्ताओं को मार रही है। एएनसी के 27 साल के शासनकाल में अनौपचारिक बस्तियों में रह रहे लोग अमानवीय परिस्थितियों में घोर गरीबी में जीते रहे हैं। ऐसे में हमें एएनसी को वोट क्यों देना चाहिए और देश की अगुवाई करने का जनादेश उसे क्यों देना चाहिए ?

पीपल्स डिस्पैच: इस नीति सम्मेलन को लेकर एबीएम के दिये गये बयान में यह भी कहा गया है कि "जिस शक्ति का हम सालों से सक्षमता के साथ निर्माण करते रहे हैं, वह अब नतीजा देने लगी है।" क्या आप इसे विस्तार से समझा सकते हैं ?

थलेपो मोहापी: ऐसा हाल के चुनाव नतीजे में देखा गया है (नवंबर 2021 में नगरपालिका के लिए हुए चुनाव में एएनसी ने पहली बार 50% से कम वोट हासिल किये और बड़े-बड़े शहर उसके हाथ से निकल गये)। सबसे अहम बात तो यह है कि एएनसी को उस ईखेनाना नगरपालिका में गठबंधन तक करना पड़ा, जो उनका गढ़ रहा है। इस सूबे में अबहलाली की भी मज़बूत पकड़ है और एएनसी के ख़िलाफ़ वोट करने के सिलसिले में किये गये हमारे आह्वान से एएनसी को समर्थन को बड़ा नुक़सान हुआ है। लोग अब विवेक के साथ मतदान कर रहे हैं, और कह रहे हैं कि हम ख़ुद की क़ब्र खोदने के लिए वोट नहीं देंगे, हम उन्हें वोट नहीं देंगे, जिन्होंने नेल्सन मंडेला के संघर्ष को धोखा दिया है।

पीपल्स डिस्पैच: इस नीति सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने भी "आम जनता हमारे आंदोलन को कैसे देखती है, इस सिलसिले में एक अहम बदलाव देखा।" जनता की धारणा किस तरह बदली है?

थलेपो मोहापी: उपद्रव के दौरान जब कई ताक़तें हिंसा में शामिल थीं, उस समय अबहलाली ने सूबे में शांति और अमन-चैन के लिए काम किया। यहां तक कि छोटे-छोटे व्यवसाय के मालिक, मध्यम वर्ग और उदारवादी भी इस काम को क़ुबुल करते हैं और तारीफ़ करने लगे हैं। इसलिए आम जनता में हमारे आंदोलन को लेकर धारणा बदल रही है।

उपद्रव के बाद समाज के ज़्यादतर तबके देश के संसाधनों के समान वितरण को सुनिश्चित करने और यह तय किये जाने को लेकर हमारे इस संघर्ष के महत्व को महसूस कर रहे हैं कि कोई बच्चा भूखा न रहे, और जिनके पास भोजन नहीं है,उन्हें जीने और अपने अस्तित्व को बचाने रखने की ख़ातिर खाद्य सामग्रियों का उत्पादन करने के लिए भूमि पर कब्ज़ा करने का हक़ है। वे इस बात को सुनिश्चित करने में अबहलाली के इस काम की अहमियत को समझ चुके हैं कि ग़रीब अश्वेत लोगों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए मजबूर नहीं किया जाता है, बल्कि गरीबों और हाशिए के तबकों के लिए सामूहिक रूप से आगे बढ़ने को लेकर संगठित किया जाता है।

पीपल्स डिस्पैच: एबीएम को उसके इस सम्मेलन पर बधाई देते हुए कई ट्रेड यूनियनों, ज़मीनी स्तर के संगठनों और दक्षिणी अफ़्रीकी क्षेत्र के वामपंथी राजनीतिक दलों ने एकजुटता जतायी है। यहां तक कि इस महाद्वीप से बाहर, लैटिन अमेरिका और अन्य जगहों पर भी इस तरह के संगठनों ने लगातार एकजुटता दिखायी है। आप अबहलाली को वैश्विक वर्ग संघर्ष में कहां फ़िट पाते हैं ?  

थलेपो मोहापी: हमने जो वैश्विक एकजुटता अर्जित की है, वह हमारे लिए मौलिक है।हर बार जब भी हम यहां सख़्त दमन का सामना करते हैं,तो देश भर में फैले हमारे साथी, अफ़्रीका के इस महाद्वीप और दुनिया भर के हमारे बाक़ी साथी दक्षिण अफ़्रीकी दूतावासों के बाहर विरोध और प्रदर्शनों के ज़रिये अपनी एकजुटता दिखाते रहे हैं। हम वास्तव में इसकी सराहना करते हैं और इन जुड़ाव को और विस्तार देना चाहते हैं। ऐसा इसलिए,क्योंकि हमारा संघर्ष सिर्फ़ दक्षिण अफ़्रीका में ही नहीं चल रहा है।

साम्राज्यवादी देशों के कॉर्पोरेटों की ओर से ज़मीन हथियाये जाने से दक्षिण अमेरिका के कई देशों के मूल निवासी और ग़रीब लोग बेदखल किये जा रहे हैं। इसी तरह के कई और कॉर्पोरेट अफ़्रीकियों के संसाधनों पर भी कब्ज़ा करने में लिप्त हैं। हमें दुनिया भर के साथियों के साथ मिलकर काम करना होगा, क्योंकि हम न सिर्फ़ दक्षिण अफ़्रीका में पूंजीवाद के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं, बल्कि एक वैश्विक व्यवस्था के रूप में साम्राज्यवादी पूंजीवाद को पूरी तरह से ख़त्म करने के संघर्ष में अपनी भूमिका भी निभा रहे हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

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