NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
बाइडेन-पुतिन की बैठक के एक हफ़्ते बाद संकट गहरा रहा है
मॉस्को को एहसास हो गया है कि वाशिंगटन इस तर्क को हवा दे रहा है और इसे बनाए रखना चाहता है कि मुद्दा रूसी क्षेत्र में तथाकथित सैन्य तैनाति के बारे में है जिससे यूक्रेन पर आक्रमण होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
एम.के. भद्रकुमार
15 Dec 2021
Translated by महेश कुमार
रूस
8 दिसंबर को काले सागर के ऊपर मिराज-2000 मंडरा रहे थे, क्योंकि नाटो के जासूसी विमान बड़ी संख्या में रूस की सीमाओं का चक्कर लगा रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय के दैनिक अखबार क्रास्नाया ज़्वेज़्दा ने 13 दिसंबर को बताया कि राडार ने पिछले एक सप्ताह में रूस की सी

रूस अपनी उन 'लाल रेखाओं' को फिर से दोहरा रहा है, जो नाटो को पूर्वी दिशा में आगे बढ़ने और रूस की पश्चिमी सीमाओं पर हथियारों की तैनाती को रोकने के लिए दीर्घकालिक कानूनी गारंटी की मांग कर रहा है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने 10 दिसंबर को एक बयान जारी कर अपनी अपेक्षाओं को दर्ज़ किया है कि कानूनी गारंटी लंबी अवधि की होनी चाहिए और उसे "एक विशिष्ट समय सीमा के भीतर लागू किया जाना चाहिए जिसे समग्र और अविभाज्य सुरक्षा के सिद्धांत के आधार पर" लागू किया जाना चाहिए।

मॉस्को को एहसास हो गया है कि वाशिंगटन इस तर्क को हवा दे रहा है और इसे बनाए रखना चाहता है कि मुद्दा रूसी क्षेत्र में तथाकथित सैन्य तैनाति के बारे में है जिससे यूक्रेन पर आक्रमण होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस बात को 12 दिसंबर को खुद बाइडेन ने दोहराया था, जिन्होंने एक बार फिर नाटो की तैनाती के मुद्दे को बड़े तरीके से दरकिनार कर दिया और इसके बजाय इस बात पर ध्यान आकर्षित  करना पसंद किया कि अगर रूस यूक्रेन पर आक्रमण करता है तो क्या होगा।

इस बीच अमेरिका ने इस तर्क़ के पीछे जी-7 देशों को लामबंद कर लिया है। 12 दिसंबर का जी-7 बयान मूल रूप से अमेरिकी रुख का प्रतिध्वनित करता है। जी-7  ने 10 दिसंबर के विदेश मंत्रालय के नाटो विस्तार के संबंध में दिए बयान में रूस की "लाल रेखाओं" या चेतावनी को भी दरकिनार कर दिया है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने घोषणा की है कि यूरोपीय और यूरेशियन मामलों के ब्यूरो के सहायक सचिव, डॉ करेन डोनफ्रिड 13-15 दिसंबर को "रूस की बढ़ती सैन्य तैनाती पर चर्चा करने और यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए संयुक्त राज्य अमरीका की प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए कीव और मॉस्को का दौरा करेंगे।"

इसके बाद डोनफ्राइड 15-16 दिसंबर को नाटो सहयोगियों और यूरोपीयन यूनियन के भागीदारों के साथ "राजनयिक समाधान को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर" परामर्श करने के लिए ब्रुसेल्स की यात्रा करेंगे।

पूरे मुद्दे को रूस द्वारा क्षेत्रीय आक्रमण का मुदा बनाकर पश्चिम पाखंड कर रहा है, यह भूलकर कि पश्चिमी नेताओं (तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री जेम्स बेकर और जर्मन विदेश मंत्री गेन्स्चर सहित) की पहले की एक जटिल पृष्ठभूमि है जिन्हौने ने सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव से वादा किया था कि जर्मन एकीकरण के मामले में सोवियत संघ के अनुमोदन देने पर पश्चिम इस बात की गारंटी देगा कि नाटो रूस की सीमा की ओर "एक इंच" भी नहीं बढ़ेगा।

दरअसल, 1990 के दशक के मध्य तक, बिल क्लिंटन प्रशासन ने उस आश्वासन की उपेक्षा की थी, जो रूस की सुरक्षा के लिए मौलिक था, और नाटो क्रमिक तरीके से विस्तार के रास्ते पर आगे बढ़ गया था, पहले मध्य यूरोप और फिर बाल्टिक क्षेत्र तक विस्तार किया था, और उन बाल्कन देशों तक बढ़ गया था जिन देशों से यूगोस्लाविया बना था।  

उस वक़्त नाटो ने अपने विस्तार के साथ कई रूसी विरोधों को आसानी से नजरअंदाज कर दिया गया था। मॉस्को उस समय अपने राष्ट्रीय हितों पर जोर देने की स्थिति में नहीं था।

एक निर्णायक क्षण तब आया जब नाटो ने 2008 में घोषणा की कि यूक्रेन (और जॉर्जिया) की सदस्यता के लिए दरवाजा खुला है। रूस ने एक बार फिर विरोध किया, क्योंकि इन दोनों देशों की नाटो सदस्यता का मतलब उसकी पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं पर गठबंधन की सेना का तैनात होना था। एक बार फिर अमेरिका ने इस पर ध्यान देने से इनकार कर दिया है। 

लेकिन, 2013-2014 में एक बड़ा बदलाव तब आया, जब पश्चिम ने यूक्रेन में मास्को समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच की स्थापित सरकार को सफलतापूर्वक उखाड़ फेंका था (जो संयोगवश, एक निर्वाचित नेता थे) और उनके स्थान पर कीव में एक पश्चिमी-समर्थक नेतृत्व स्थापित कर दिया था। इसके बाद ही, यूक्रेन को रूस विरोधी देश में बदलने की एक व्यवस्थित परियोजना शुरू हुई।

आज, रूस के सामने चुनौती यह है कि यूक्रेन को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किए बिना, नाटो ने डोनबास में गतिरोध को देखते हुए और कीव और मॉस्को के बीच खराब संबंधों का लाभ उठाते हुए उस देश में सैन्य तैनाती शुरू कर दी है।

रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 12 दिसंबर को खुलासा किया कि नाटो यूक्रेन में भारी मात्रा में हथियार डाल रहा है और "सैन्य प्रशिक्षकों या प्रशिक्षण की आड़ में आतंकवादियों को वहां भेजा जा रहा है।" 

इसके ऊपर, अब टकराव से इंकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि मास्को बल प्रयोग के किसी भी इरादे को स्वीकार नहीं करेगा। 

जो बात "ज्ञात या अज्ञात" है वह यह है कि अमेरिकी घरेलू राजनीति कितनी दूर तक बाइडेन का साथ देती है। (पुतिन ने बाइडेन के साथ आमने-सामने बैठक की मांग की है।) अफ़गानिस्तान के बाद, बाइडेन की रेटिंग में भारी गिरावट आई है और 10 में से तीन अमेरिकियों ने अमेरिकी मुद्रास्फीति संकट से निपटने के लिए बाइडेन को मंजूरी दी है, और कोविड-19 महामारी को छोड कर अधिकांश लोगों ने उन्हे हर प्रमुख मोर्चे पर कम अंक दिए हैं। 

7 दिसंबर को पुतिन और बाइडेन के वीडियो शिखर सम्मेलन के बाद एबीसी न्यूज के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 15 प्रतिशत उत्तरदाताओं को विश्वास है कि अमेरिका की ओर से पुतिन के साथ बातचीत करने में राष्ट्रपति "बेहतरीन" व्यक्ति हैं। (इसकी तुलना एबीसी की जून किए गए पोल में जिसमें 26 प्रतिशत रेटिंग थी से की जानी चाहिए।)

अलग तरीके से कहें, तो यह बाइडेन के लिए यह बेहतर है कि वह दिखाए कि वह रूस को "आड़े हाथों" ले रहा है। कार्यालय में खराब रिकॉर्ड वाले नेता अक्सर अपनी छवि को सुधारने के लिए विदेश नीति का सहारा लेते हैं। 2022 अमेरिका में एक महत्वपूर्ण चुनावी वर्ष है, जिसमें भविष्यवाणी की गई है कि डेमोक्रेट कांग्रेस में नियंत्रण खो सकते हैं, जो वास्तव में बाइडेन के राष्ट्रपति पद को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा और 2024 में उनके फिर से चुने जाने की संभावना को प्रभावित करेगा।

अगर बाइडेन को पुतिन की "लाल रेखाओं" या चेतावनियों पर चर्चा करने के लिए मेज पर आना पड़ा तो यह उनके लिए हार हो सकती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उन स्थितियों में से एक है जहां आप बीच धारा में घुस जाते हैं और फिर वापस मुड़ने के लिए बहुत देर हो जाती है।

इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि रूस अभी भी एक राजनयिक/राजनीतिक समाधान पसंद करता है, लेकिन खुद की मांगों को कम करने और फिर से नाटो विस्तार को स्वीकार करने की अत्यधिक संभावना नहीं है, वह भी अपनी सीमाओं तक। विदेश मंत्रालय का 10 दिसंबर का बयान रूस की राष्ट्रीय रक्षा के मुख्य मुद्दों को छूता है।

आज इज़वेस्टिया अखबार के साथ एक साक्षात्कार में, रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा, "ऐसा नहीं है कि समस्याएं कल से शुरू हुईं। इन समस्याओं का अधिकांश भाग, रूस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र और प्रमुख कारक के रूप में नकारने की अमेरिकी आकांक्षा के साथ संबंधित हैं, और वे, हमें अपने स्वयं के देश में कैसे रहना चाहिए, जैसे मुद्दों की एक पूरी श्रृंखला है जिस पर अमरीकी खुद का दृष्टिकोण थोपना चाहते हैं।

रयाबकोव ने कहा कि यूक्रेन "वाशिंगटन की सभी भू-राजनीतिक परियोजनाओं में सबसे ऊपर है, वह अपने प्रभाव के क्षेत्र को बड़ा करने का प्रयास कर रहा है, अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के लिए अपने उपकरणों का विस्तार कर रहा है जो अमेरिकी आकांक्षाओं के अनुसार, उन्हें दुनिया के इस क्षेत्र में हावी होने में मदद करेगा। बेशक, यह हमारे लिए मुश्किलें पैदा करने का एक तरीका है, जो हमारी सुरक्षा को प्रभावित करता है। हम खुले तौर पर कह रहे हैं: हमारी कुछ लाल रेखाएँ हैं और हम उन्हे किसी को भी पार नहीं करने देंगे; हमारी बहुत ही स्पष्ट जरूरत है ... कि मास्को को अपनी सुरक्षा की अधिकतम विश्वसनीय कानूनी गारंटी चाहिए।"

उन्होंने इस चेतावनी के साथ बात खत्म की कि मॉस्को नाटो सदस्यों के सामने इस बात को उजागर करना जारी रखेगा कि गठबंधन के विस्तार से उसकी सुरक्षा नहीं बढ़ेगी और इस कदम के परिणाम गंभीर होंगे।

अलग से, रयाबकोव को भी आज राज्य द्वारा संचालित आरआईए नोवोस्ती समाचार एजेंसी को  यह कहते हुए उद्धृत किया गया है कि यदि नाटो मास्को को पूर्व सीमा की ओर विस्तार की समाप्ति की गारंटी नहीं देता है तो "हमारी प्रतिक्रिया सैन्य होगी" और “टकराव होगा। नाटो पर मूल रूप से कोई भरोसा नहीं है। इसलिए, हम अब इस तरह का खेल नहीं खेल रहे हैं और न ही नाटो के आश्वासनों पर विश्वास करते हैं।"

सीधे शब्दों में कहें तो रूस ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के अमरीकी कुतर्क को खारिज़ कर दिया है ताकि वास्तव में यहां जो दांव पर लगा है, उससे ध्यान हटाया जा सके - अर्थात्, पूर्व सोवियत की तरफ नाटो के आगे किसी भी विस्तार को स्वीकार करने से मास्को ने इंकार कर दिया है। 

संकट का समय अब आ गया और रूस ने एक कड़वा सबक सीखा है क्योंकि उसे पता है कि पश्चिमी देशों के मौखिक आश्वासन का कोई महत्व नहीं है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि गोर्बाचेव और बेकर अभी भी जीवित हैं।

Russia
Biden-Putin Meeting
ukraine
NATO
G7 Countries
United States
NATO expansion

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License