NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों का अधिग्रहण कौन कर रहा है?
कुछ वैश्विक पेंशन फंड़, जिनका मक़सद जल्द और स्थिर लाभ कमाना है,  ने कथित तौर पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति को लीज़ पर ले लिया है।
सुबोध वर्मा
18 Apr 2022
Translated by महेश कुमार
Who is Taking Over National Assets in India

सरकार ने विभिन्न निजी संस्थाओं को देश के स्वामित्व वाली संपत्तियों को पट्टे पर देकर 2021-22 में 97,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटा लिए हैं, इस तथ्य को 14 अप्रैल को रिपोर्ट किया गया था। इन संपत्तियों में कोयला खनन से (40,000 करोड़ रुपये), राजमार्गों के विभिन्न हिस्सों से (23,585 करोड़ रुपये), बिजली पारेषण लाइनों (9,409 करोड़ रुपये) आदि शामिल हैं। [नीचे चार्ट देखें]

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने नीति आयोग के साथ मिलकर विभिन्न मंत्रालयों की समीक्षा बैठक की जहां ये ताजा तथ्य दर्ज किए गए हैं। इस वर्ष के लिए लक्ष्य 88,190 करोड़ रुपये था और हर कोई खुश था कि लक्ष्य को पार कर लिया गया है, हालांकि सार्वजनिक  संपत्तियों को पट्टे पर देने (पढ़ें: निजीकरण) का कार्यक्रम केवल सात महीने पहले अगस्त 2021 में शुरू किया गया था। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान लक्ष्य वित्तीय वर्ष के लिए - 1.67 लाख करोड़ रुपए का है – जोकि निश्चित रूप से लगभग पूरा होने वाला है, यदि इससे अधिक नहीं तो फिर भी पहले से ही 1.62 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को पट्टे पर देने की प्रक्रिया चल रही है।

नरेंद्र मोदी सरकार अगले चार साल (2022-2025) में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति का 'मुद्रीकरण' करके संसाधन जुटाने के इस कार्यक्रम के साथ सामने आई है।

वैश्विक पेंशन फंड इन संपत्तियों को ले रहे हैं  

समीक्षा बैठक का एक दिलचस्प पहलू यह भी था कि कुछ निजी संस्थाओं की पहचान की गई है, जिन्होंने इन संपत्तियों को लिया है और उसे मीडिया ने रिपोर्ट कर दिया है। इनमें शामिल हैं: कनाडा पेंशन योजना (सीपीपी) निवेश बोर्ड, ओंतेरियो शिक्षक पेंशन योजना (ओटीपीपी), कैपिटल ग्रुप और यूटिलिको इमर्जिंग मार्केट्स ट्रस्ट (यूईएमटी)। ये विशाल फंड हैं जिन्हें विश्व स्तर के बड़े फंड माना जाता हैं जो वैश्विक स्तर पर जल्द और आकर्षक रिटर्न के लिए निवेश करती हैं। 

उदाहरण के लिए, टोरंटो स्थित सीपीपी इन्वेस्टमेंट के पास संपत्ति प्रबंधन के लिए 497 बिलियन डॉलर की संपत्ति है, जबकि लॉस एंजिल्स स्थित कैपिटल ग्रुप के पास 31 दिसंबर, 2021 तक प्रबंधन के तहत जिसका संपत्ति में निवेश 2.7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा है। यूईएमटी लंदन जो कि एक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी है, जिसके पास 2021 के अंत तक संपत्ति में 556 मिलियन पाउंड का निवेश था। ओटीपीपी एक कनाडाई पेंशन फंड है जो अपने सदस्यों की संपत्ति में से  241.6 बिलियन डॉलर का प्रबंधन करता है।

पेंशन फंड आम तौर पर कर्मचारियों के कामकाजी जीवन से कर्मचारियों और नियोक्ताओं के योगदान से एकत्रित धन का विशाल हिस्सा होता है, जिससे पेंशन और संबंधित लाभों को दिया जाता है। इस प्रकार एकत्र किए गए धन को विभिन्न तरीकों से निवेश किया जाता है, जिसमें शेयर बाजारों में और वर्तमान में भारत में बेची जा रही संपत्ति की तरह संपत्ति खरीदने या पट्टे पर देना शामिल है। यह अनुमान लगाया गया है कि विश्व स्तर पर, लगभग 21.5 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का स्वामित्व और प्रबंधन दुनिया के शीर्ष 100 पेंशन फंडों द्वारा किया जाता है।

इन फंडों का उद्देश्य अपने योगदानकर्ताओं को निवेश के एवज़ में स्थिर रिटर्न प्रदान करना है। वे कोई चैरिटी नहीं चला रहे हैं - वे लाभ कमाने के लिए निवेश कर रहे हैं। यदि आवश्यक हो, तो वे किसी खरीदार से बेहतर कीमत मिलने पर अपनी संपत्ति बेच सकते हैं। इसे एसेट स्ट्रिपिंग के रूप में जाना जाता है, यह विशेष रूप से तब होता है जब अंडरवैल्यूड एसेट उपलब्ध होते हैं जैसा कि अधिकांश राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) परिसंपत्तियों के मामले में हो रहा है।

तो सब इस पर कब्ज़ा क्यों करना चाहते हैं 

क्योंकि यह एक पैसा बनाने की खान है। और भारत की प्रतिष्ठित सरकार ने भारत की सबसे बेशकीमती संपत्ति उपलब्ध कराते हुए इसमें डुबकी लगा ली है। याद रखें: मूल एनएमपी प्रस्ताव में सड़कों से लेकर रेलवे, बंदरगाहों से लेकर हवाई अड्डों, दूरसंचार के बुनियादी ढांचे से लेकर बिजली लाइनों, स्टेडियमों से लेकर पाइपलाइनों तक सब कुछ शामिल है [नीचे सारांश देखें, जिसे आधिकारिक एनएमपी पोर्टल से लिया गया है]

यह राष्ट्रवाद है या गुलामी?

सार्वजनिक संपत्तियों-सड़कों, बिजली लाइनों, रेलवे स्टेशनों और यहां तक कि खेल स्टेडियमों को दूर-दराज के फंड मैनेजरों को सौंपने की ऐसी बेशर्मी भारत में कभी नहीं हुई थी। इन सभी संपत्तियों को वर्षों से कड़ी मेहनत के ज़रीए बनाया गया था। उपरोक्त क्षेत्र लोगों की सेवा करते हैं और ऐसा करते हुए देश की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करते हैं। फिर भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार, जो 'राष्ट्रवाद' और 'देशभक्ति' पर दूसरों को उपदेश देने का कोई मौका नहीं छोड़ती है, जो लगातार देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की प्रशंसा करती है और जो सबसे छोटे विरोध प्रदर्शनों या आलोचना करने वालों पर भी देशद्रोह होने का आरोप लगाती है, और इसकी खुद की सरकार ने विदेशियों को सार्वजनिक संपत्ति बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी है!

अपने विनिवेश अभियान के माध्यम से, सरकार पहले ही लाखों करोड़ मूल्य के सार्वजनिक क्षेत्र के औद्योगिक उद्यमों को निजी कंपनियों को बेच चुकी है। इसने कानूनों में ढील दी है ताकि विदेशी पूंजी भारत में स्वतंत्र रूप से प्रवाहित हो सके और कोयला खदानों से लेकर रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष अन्वेषण तक हर चीज में निवेश कर सके।

इसके अलावा, सरकार ने अब सार्वजनिक उपयोगिता वाली संपत्तियों को भी "पट्टे पर" देना शुरू कर दिया है। इसका वास्तव में मतलब है कि उन्हें बेच देना क्योंकि 35-40 साल के पट्टों से कई संपत्तियों का जीवन समाप्त हो जाएगा। यहां तक कि एक भूमि मुद्रीकरण कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और विभिन्न सरकारी निकायों से संबंधित भूमि को बेचने या "पट्टे पर" देने की भी योजना है।

भाजपा की इन नीतियों के लागू होने के बाद "राष्ट्र" कैसा दिखेगा? पश्चिम में स्थित कई बेचेहरे वाली कॉरपोरेशन के स्वामित्व वाले लोग ही सब कुछ चलाएँगे? क्या यह मोदी और उनकी पार्टी द्वारा किया गया वादा है जिसके लिए लोगों ने उन्हें दो बार सत्ता सौंपी है?

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

Who is Taking Over National Assets in India?

BJP
Privatisation
disinvestment
selling government assets
Pension Funds
Nationalism
Patriotism
NMP
National Monetisation Pipeline
Railways
Roads
Highways
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • भाषा
    श्रीलंका में हिंसा में अब तक आठ लोगों की मौत, महिंदा राजपक्षे की गिरफ़्तारी की मांग तेज़
    10 May 2022
    विपक्ष ने महिंदा राजपक्षे पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला करने के लिए सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उकसाने का आरोप लगाया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिवंगत फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी को दूसरी बार मिला ''द पुलित्ज़र प्राइज़''
    10 May 2022
    अपनी बेहतरीन फोटो पत्रकारिता के लिए पहचान रखने वाले दिवंगत पत्रकार दानिश सिद्दीकी और उनके सहयोगियों को ''द पुल्तिज़र प्राइज़'' से सम्मानित किया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर खीरी हत्याकांड: आशीष मिश्रा के साथियों की ज़मानत ख़ारिज, मंत्री टेनी के आचरण पर कोर्ट की तीखी टिप्पणी
    10 May 2022
    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के आचरण पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि वे इस घटना से पहले भड़काऊ भाषण न देते तो यह घटना नहीं होती और यह जघन्य हत्याकांड टल सकता था।
  • विजय विनीत
    पानी को तरसता बुंदेलखंडः कपसा गांव में प्यास की गवाही दे रहे ढाई हजार चेहरे, सूख रहे इकलौते कुएं से कैसे बुझेगी प्यास?
    10 May 2022
    ग्राउंड रिपोर्टः ''पानी की सही कीमत जानना हो तो हमीरपुर के कपसा गांव के लोगों से कोई भी मिल सकता है। हर सरकार ने यहां पानी की तरह पैसा बहाया, फिर भी लोगों की प्यास नहीं बुझ पाई।''
  • लाल बहादुर सिंह
    साझी विरासत-साझी लड़ाई: 1857 को आज सही सन्दर्भ में याद रखना बेहद ज़रूरी
    10 May 2022
    आज़ादी की यह पहली लड़ाई जिन मूल्यों और आदर्शों की बुनियाद पर लड़ी गयी थी, वे अभूतपूर्व संकट की मौजूदा घड़ी में हमारे लिए प्रकाश-स्तम्भ की तरह हैं। आज जो कारपोरेट-साम्प्रदायिक फासीवादी निज़ाम हमारे देश में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License