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समाज
भारत
भगत सिंह ने क्यों कहा— मैं नास्तिक हूं?
आज जब एक बार फिर धर्म और ईश्वर के नाम पर सत्ता और शोषण की राजनीति बेहद तेज़ हो गई है। ऐसे में शहीदे-आज़म Bhagat Singh का यह लेख "मैं नास्तिक क्यों हूं" पढ़ना बेहद ज़रूरी हो गया है।
न्यूज़क्लिक टीम
23 Mar 2022

जेल में रहते हुए लिखे गए इस लंबे लेख को उनकी शहादत 23 मार्च, 1931 के बाद 27 सितंबर, 1931 को लाहौर से निकलने वाले अख़बार 'द पीपल' में प्रकाशित किया गया था। इस लेख में भगत सिंह ने इस दुनिया के निर्माण के साथ ईश्वर, मनुष्य, उसके सुख-दुख, उत्पीड़न-शोषण इन सबका बेहद वैज्ञानिक ढंग से विवेचन किया है। साथ ही वर्ग भेद की स्थितियों को उजागर किया है। न्यूज़क्लिक की ओर से प्रस्तुत हैं उनके इस लेख के कुछ मुख्य अंश। 

Bhagat Singh
Bhagat Singh Thoughts
Rationalism

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CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License