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कोविड-19
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लैटिन अमेरिका में उपनिवेशवाद अब संभव नहीं
वेनेज़ुएला के विदेश मंत्री जॉर्ज अर्रेज़ा अपने देश के चीन के साथ आपसी हितों और मुनाफ़े पर आधारित संबंधों के बारे में बात कर रहे हैं। वे अमेरिका द्वारा "मुनरो डॉक्ट्रीन 2.0" लागू करने की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि क्यों और कैसे उनके क्षेत्र में एक नए शीत युद्ध की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विजय प्रसाद
28 Nov 2020
Jorge Arreaza
Jorge Arreaza. Photo: Ultimas Noticias

सितंबर, 2018 में वेनेज़ुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो चीन यात्रा पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में व्यापार और संस्कृति पर अहम समझौते हुए थे। अपनी यात्रा के अंत में मादुरो ने कहा था कि दोनों देशों के बीच मुनाफ़े को साझा करने के आधार पर "आपसी हितों वाले संबंध" बनाए गए हैं।

इन समझौतों के बीच एक ऐसा समझौता है, जो इनकी गहराई दिखाता है: इस समझौते के तहत चीन को 'ग्रेट वेनेज़ुएला हाउसिंग मिशन (GMVV)' के साथ भागीदारी करनी है, जिसके तहत काराकस के एल वाल्ले पेरिश में 13,000 घर बनाए जाने हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान चीन और वेनेज़ुएला के बीच के तेल व्यापार और चीन से वेनेज़ुएला को मिलने वाली मदद की ओर रहा है। लेकिन यह संबंध ज़्यादा गहराई में जाते हैं। दोनों देशों के संबंध उन लोगों के सामाजिक जीवन तक पहुंचते हैं, जो गरीबी से निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

जब मैंने हाल में वेनेज़ुएला के विदेश मंत्री जॉर्ज अर्रेज़ा से उनके देश के चीन के साथ संबंधों के बारे में पूछा, तब उन्होंने इन घरों के निर्माण का जिक्र किया था। दरअसल लोगों के भले के चलते वेनेज़ुएला की चीन के साथ संबंधों में रुचि पैदा हुई, ना कि सिर्फ़ तेल और उद्योग की बड़ी-बड़ी योजनाओं के चलते यह संबंध इतनी गहराई में बने। चीन ने वेनेज़ुएला में अरबों डॉलर का निवेश किया है और उधार दिया है। यह कई तरह के विकास के लिए जरूरी था। अर्रेज़ा ने मुझे बताया, "कई सालों से अमेरिका की आक्रामकता बढ़ती ही जा रही है, ऐसे में वेनेज़ुएला की संप्रभुता बनाए रखने में चीन अहम रहा है।"

महामारी के बीच बंधुत्व

मार्च में चीन सरकार ने दो जहाज भरकर जरूरी उपकरण महामारी से निपट रहे वेनेज़ुएला के प्रशासन को मुहैया कराए थे। इसके बाद भी कई जहाज भरकर टेस्ट किट्स और वेंटिलेटर्स, दवाईयां और सुरक्षा उपकरण भेजे गए।

मार्च के अंत में जब 55 टन माल वेनेज़ुएला में उतर रहा था, तब वहां चीन के राजदूत ली बाओरोंग ने कहा, "मुश्किल वक़्त में चीन और वेनेज़ुएला के लोग एकसाथ हैं।" चीन और वेनेज़ुएला के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के बीच में यह मदद मुहैया कराई गई थी। एक महीने बाद ली ने EI यूनिवर्सल से बात करते हुए कहा, "बेहद भयावह और आपराधिक प्रवृत्ति के एकपक्षीय प्रतिबंधों के बावजूद, वेनेज़ुएला सरकार ने जिस तरह से स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और जिंदगियां बचाने की कोशिश की हैं, चीन उनका मजबूती से समर्थन करता है।"

"बेहद भयावह और आपराधिक प्रवृत्ति के एकपक्षीय प्रतिबंध"- यह वाक्यांश बेहद अहम है। यह वाक्यांश उन कठोर नीतियों को बताता है, जो अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर थोपी हैं। यह वो नीतियां हैं, जो जॉर्ज डबल्यू बुश के वक्त़ शुरू हुईं, बराक ओबामा ने उन्हें गहरा किया और डोनाल्ड ट्रंप ने इन नीतियों को और भी कठोर बना दिया। जो बाइडेन की तरफ से भी वेनेज़ुएला को राहत के कोई संकेत नहीं हैं। बल्कि महामारी के दौरान अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर दबाव बढ़ा दिया, जिसके तहत वहां की सरकार को वित्तीय मदद तक पहुंच से दूर रखा गया। वेनेज़ुएला को सामान्य व्यापार करने से भी रोका गया। यहां तक कि वहां की सरकार को सेना के ज़रिए उखाड़ फेंकने की भी धमकियां दी गईं।

चीन ने जारी रखा व्यापार

अर्रेज़ा ने मुझे बताया, "अमेरिका समुद्री लूट (पायरेसी) के आधुनिक तरीके पर तक उतारू हो गया, बीच समुद्र में जहाज रोके गए और उस माल को चुराया गया, जिसकी कीमत वेनेज़ुएला के लोगों ने भरी थी।" अमेरिका ने ना केवल वेनेज़ुएला का समुद्री ब्लॉकेड लगाने की कोशिश की, बल्कि उसने वहां के आंतरिक राजनीतिक मामलों में दखल देना भी जारी रखा, इसके तहत उन विधायी चुनावों को खारिज करने की कोशिश की गई, जो 6 दिसंबर को होने वाले हैं।

चीन ने ज़्यादातर मामलों में वेनेज़ुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं माना। वेनेज़ुएला चीन की तरफ से दिए जाने वाले कर्ज़ का सबसे बड़ा हितग्राही है। अर्रेजा कहते हैं, "जब चीन कहता है कि वह वेनेज़ुएला के साथ व्यापार जारी रखेगा, तो वह वेनेज़ुएला पर थोपे गए कठोर प्रतिबंधों की अवैधानिकता के खिलाफ़ खड़ा हो रहा होता है।" वेनेज़ुएला द्वारा चीन के कर्ज़ को वापस चुकाए जाने की अक्षमता को चीन में लोग अवैध प्रतिबंधात्मक व्यवस्था के नतीज़े के तौर पर देखा जाता है, जिससे वेनेज़ुएला को सामान्य आर्थिक गतिविधियों को अंजाम देना मुश्किल हो गया है। चीन द्वारा धैर्य के साथ अपनी पूंजी के वापस आने का इंतज़ार और वेनेज़ुएला के ऊपर भूराजनीतिक दबाव की समझ, उसके वेनेज़ुएला के साथ संबंधों को समझने का अहम ज़रिया हैं।

व्यापार करने के लिए अमेरिका का स्वागत है

पिछले साल अमेरिका ने "अमेरिका क्रेसे" नाम के एक नए कार्यक्रम का विकास किया, जो अमेरिका की निजी कंपनियों को कैरेबियन और लातिन अमेरिका में निवेश करने के लिए सरकारी सहायता का कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इस इलाके में चीनी निवेश को रोकना है। 

अर्रेज़ा कहते हैं, "हमारे देश में अमेरिकी कंपनियों की मौजूदगी को बढ़ाने के लिए किसी कार्यक्रम को प्रस्तावित करने के अमेरिकी कदम का स्वागत है। लेकिन उसके पास हमें व्यापार करने और हम जिससे चाहें, उसके साथ साझेदारी करने से रोकने का अधिकार नहीं है।" चीन या वेनेज़ुएला राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल कर अमेरिकी निजी क्षेत्र के निवेश को नहीं रोक रही हैं, लेकिन अमेरिकी सरकार साफ़ तौर पर कह चुकी है कि उसके इस कार्यक्रम का उद्देश्य इस क्षेत्र में चीन के निवेश को रोकना है।

अमेरिकी गृह सचिव माइक पॉम्पियो गुयाना में एक्सॉनमोबिल के निवेश को बढ़ावा देने के लिए वहां पहुंचे थे। अपनी छोटी सी यात्रा के दौरान पॉम्पियो ने इरफान अली की सरकार से चीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था।  अर्रेज़ा ने मुझे बताया, "दुनिया के किसी भी दूसरे देश की तरह गुयाना को भी अपने साझेदार को चुनने का अधिकार है। लेकिन एक बात साफ़ है कि अमेरिका हमारे महाद्वीप पर अपने कार्यक्रम को थोप नहीं सकता या ऐसे बर्ताव नहीं कर सकता कि व्यापारिक साझेदार बनने का उसका कोई विशेषाधिकार है।"

अर्रेज़ा के मुताबिक़ "अमेरिका क्रेसे" कार्यक्रम को विकसित किया जाना "मुनरो डॉक्ट्रीन 2।0" का दोहराव है। यहां अर्रेज़ा 1823 की मुनरो डॉक्ट्रीन का जिक्र कर रहे थे, जिसका इस्तेमाल अमेरिका ने अमेरिकी गोलार्द्ध में अपने क्षेत्रीय प्रभाव के दावे के लिए किया था। अर्रेज़ा ने कहा, "अब उपनिवेशवाद अतीत की तारीख हो चुकी है। हम अपने क्षेत्र पर एक नए शीत युद्ध को थोपने नहीं दे सकते।"

चीन ने कभी नहीं किया हस्तक्षेप

लातिन अमेरिका और कैरेबियन में अमेरिका के साथ नज़दीकियां रखने वाली सरकारों को महामारी के दौरान चीन के साथ अपने संबंधों के प्रबंधन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अक्टूबर में ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि उनका देश कोरोना वैक्सीन चीन से खरीदेगा।

लेकिन ट्रंप और पॉम्पियो के कट्टर समर्थक ब्राजील के राष्ट्रपति जॉयर बोलसोनारो ने बड़ी आक्रामकता के साथ ट्विटर पर लिखा, "ब्राजील के लोग किसी और के लिए बलि का बकरा नहीं बनेंगे।" इसी के साथ उन्होंने महज़ भूराजनीतिक आधार पर इन वैक्सीन की खरीद को रद्द कर दिया।

इसके बावजूद, इनमें से कई सरकारों ने चीन के साथ व्यापार जारी रखा है, ध्यान रहे चीन ही दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जो कोरोना वायरस द्वारा लाई गई आर्थिक मंदी से उबरने में कामयाब रहा है। अर्रेज़ा कहते हैं कि चीन ने इस क्षेत्र के देशों के साथ बिना उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किए व्यापार जारी रखा है। यह पश्चिमी ढांचे से बहुत अलग है, जिसकी निगरानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) करता है। IMF कर्ज़ देने के लिए देशों में ढांचागत बदलाव लाने का दबाव डालता है। अर्रेज़ा ने मुझसे कहा, "चीन देशों के संप्रभु फ़ैसलों की कद्र करता है, इस तरह चीन ने साबित किया है कि वह इस क्षेत्र के लिए भरोसमंद साझेदार है और यह आने वाले कई सालों तक हमारे विकास में अहम भागीदारी निभाता रहेगा।"

विजय प्रसाद एक भारतीय इतिहासकार, संपादक और पत्रकार हैं। वे ग्लोबट्रॉटर के मुख्य संवाददाता और राइटिंग फेलो हैं। विजय प्रसाद लेफ़्टवर्ड बुक्स के मुख्य संपादक और ट्राईकॉन्टिनेंटल: इंस्टीट्यूट फॉर सोशल रिसर्च के निदेशक हैं। वे रेनमिन यूनिवर्सिटी के चोंगयांग इंस्टीट्यूट फॉर फायनेंशियल स्टडीज़ के सीनियर नॉन-रेसिडेंट फेलो हैं। उन्होंने 20 से ज़्यादा किताबें लिखी हैं। इनमें द डॉर्कर नेशन्स और द पूअरर नेशन्स शामिल हैं। उनकी हालिया किताब वाशिंगटन बुलेट्स है, जिसका परिचय इवो मोराल्स आयमा ने लिखा है।

इस लेख को ग्लोबट्रॉटर ने उत्पादित किया था।

साभार: पीपल्स डिस्पैच

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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