NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
आख़िर यूजीसी पर शिक्षा के भगवाकरण का आरोप क्यों लग रहा है?
यूजीसी के नए ड्राफ्ट में हिंदू पौराणिक कथाओं और धार्मिक चीजों पर ज्यादा महत्व दिया गया है जबकि मुस्लिम शासन के महत्वपूर्ण बिंदुओं को गायब कर दिया गया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Mar 2021
UGC

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी अपने स्नातक (ग्रेजुएशन) के नए इतिहास पाठ्यक्रम के ड्राफ्ट को लेकर इन दिनों सुर्खियों में है। इसके चलते  संस्थान और मोदी सरकार की खूब आलोचना भी हो रही है, उन पर शिक्षा का भगवाकरण करने का आरोप लगाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि आयोग सरकार के इशारे पर इतिहास से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहा है, इसे एक खास विचारधारा के अनुरूप बनाने की जुगत में लगा है।

क्या है पूरा मामला?

यूजीसी ने हाल ही में एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके मुताबिक यह दस्तावेज सिर्फ ‘मार्गदर्शक सिद्धांत’ के रूप में फिलहाल तैयार किया गया है। इसमें कहा गया है कि “भारतीय इतिहास के गौरवशाली अतीत और इसके विशाल परिदृश्य के साथ जब छोटे और बड़े स्तर पर अत्यधिक ध्यान दिया जाएगा।”

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक प्रसिद्ध इतिहासकारों जैसे कि प्राचीन भारत पर आरएस शर्मा और मध्यकालीन भारत पर इरफान हबीब की किताबों को हटा दिया गया है। इनकी जगह पर ‘संघ और सत्ता’ के करीबी लेखकों की किताबों को शामिल करने की बात कही गई है।

आपको बता दें कि ये पहला मौका है जब आयोग ने पूरा पाठ्यक्रम ही तैयार कर दिया है। इससे पहले यूजीसी सिर्फ सामान्य दिशानिर्देश जारी किया करती थी या फिर सुझाव देती थी। खुद आयोग ने ही इससे पूर्व में सुझाया था कि विश्वविद्यालयों को पहले के पाठ्यक्रम में 20-30 फीसदी ही परिवर्तन करने की इजाजत है।

क्या है आइडिया ऑफ भारत?

रिपोर्ट के मुताबिक यूजीसी के नए सिलेबस आउटलाइन में इतिहास (ऑनर्स) के पहले पेपर को ‘आइडिया ऑफ भारत’ नाम दिया गया है, जिसमें ‘भारतवर्ष के विचार’ के साथ-साथ वेद, वेदांग, उपनिषद, महाकाव्य, जैन और बौद्ध साहित्य, स्मृति, पुराण इत्यादि पढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज में इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर जीतेंद्र मीणा ने कहा कि नए पाठ्यक्रम में धार्मिक साहित्य का महिमामंडन किया गया है और प्राचीन धर्मनिरपेक्ष साहित्य जैसे कि कौटिल्य का अर्थशास्त्र, कालिदास की कविताएं और चरक संहिता के आयुर्वेदिक शोध को हटा दिया गया है।

इसके अलावा तीसरे पेपर में ‘सिंधू-सरस्वती सभ्यता’ के नाम से एक टॉपिक है, जिसमें सिंधू, सरस्वती सभ्यता और वैदिक सभ्यता के संबंधों पर बहस का वर्णन है।

सरस्वती सभ्यता जैसा कोई शब्द ही नहीं है!

द वॉयर की रिपोर्ट के मुताबिक ऋगवेद में सरस्वती नदी का उल्लेख एक शताब्दी से भी अधिक समय से वैज्ञानिक शोध का हिस्सा रहा है। केंद्र ने इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए एक प्रोजेक्ट भी बनाया है। हालांकि इसे लेकर गंभीर संदेह है कि क्या ये वाकई वही सरस्वती नदी है जिसका उल्लेख ऋगवेद में हुआ है।

मीणा कहते हैं, “सरस्वती सभ्यता, जिसे पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, जैसा कोई भी शब्द इससे पहले नहीं था।”

इस ड्राफ्ट में इतिहास के सातवें पेपर में ‘भारत पर बाबर के आक्रमण’ को लेकर एक टॉपिक शामिल किया गया है, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय का मौजूदा सिलेबस इसे आक्रमण नहीं मानता है, बल्कि भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को आक्रमण माना गया है।

हिंदू-मुसलमान को अलग-थलग दिखाने की कोशिश

इस बार के पेपर में मध्यकालीन दौर में हिंदू और मुस्लिम समाज को लेकर दो अलग-अलग टॉपिक बनाया गया है। हालांकि जानकारों का मानना है कि ऐसा ये दिखाने के लिए किया गया है कि किस तरह उस समय मुसलमान और हिंदू अलग-थलग थे, जबकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, हमेशा से यही पढ़ाया जाता रहा है कि किस तरह मध्यकालीन इतिहास में हिंदू और मुसलमान साथ रह रहे थे।

इसके साथ ही 13वीं से 18वीं शताब्दी के बीच के मुस्लिम इतिहास को भी दरकिनार कर दिया गया है।

इस बारे में डीयू में राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले आरएसएस विचार प्रकाश सिंह ने कहा, ‘पहले मुगल इतिहास ने ही सारी जगह घेर रखी थी। ऐसा नहीं है कि इसे दरकिनार किया जा रहा है, बल्कि इसमें कुछ सुधार किए गए हैं। पहले दक्षिण भारत और अन्य भाग के राजाओं को लेकर कम कंटेंट था। अब इन्हें भी जगह दिया जा रहा है।’

यूजीसी के ड्राफ्ट में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और भीमराव अंबेडकर जैसे नेताओं पर भी कम ध्यान दिया गया है और प्रारंभिक 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में सांप्रदायिकता के विषय को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है। दलित राजनीति भी नए पाठ्यक्रम से गायब है।

क्या विश्वगुरु ऐसे बनेंगे?

गौरतलब है कि कई लोगों का मानना है कि यूजीसी ऐतिहासिक आंकड़ों को प्रस्तुत करने और इतिहास के हिस्से के रूप में काल्पनिक घटनाओं को प्रस्तुत करके इतिहासलेखन के मूल सिद्धांतों से समझौता कर रहा है। इसी समय, यह एक वास्तविक अतीत बनाने के लिए अन्य वास्तविक ऐतिहासिक आंकड़ों और घटनाओं की भूमिका को गलत तरीके से प्रस्तुत करना या गलत व्याख्या करना चाहता है जो केवल हिंदुत्व के दिमाग में मौजूद हैं।

वैसे ये विडंबना ही है कि एक ओर सरकार भारत को विश्वगुरु बनाने की बात कर रही है तो वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से भटकाव के आरोप भी झेल रही है। ठीक ऐसे ही एक तरफ यूजीसी कॉलेजों की स्वायत्तता के लिए जोर दे रहा है, तो वहीं दूसरी ओर देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को एक आकार में फिट करने की कोशिश कर रहा है।

UGC
Hindutva
BJP
RSS
hindu-muslim
Religion Politics
Indian education

Related Stories

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

स्कूलों की तरह ही न हो जाए सरकारी विश्वविद्यालयों का हश्र, यही डर है !- सतीश देशपांडे

कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  

इफ़्तार को मुद्दा बनाने वाले बीएचयू को क्यों बनाना चाहते हैं सांप्रदायिकता की फैक्ट्री?

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • global
    संदीपन तालुकदार
    मौसम परिवर्तन: वैश्विक कार्बन उत्सर्जन पूर्व महामारी स्तर पर पहुंचने के करीब
    06 Nov 2021
    एक रिपोर्ट बताती है कि इस साल कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 4.9 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा होगा। इससे 2020 में महामारी के दौरान उत्सर्जन में आई 5.4 फ़ीसदी की कमी वापस अपने पुराने स्तर पर पहुंच जाएगी। 
  • Moscow
    एम. के. भद्रकुमार
    भारत ने खेला रूसी कार्ड
    06 Nov 2021
    पुतिन की दिल्ली यात्रा से कुछ हफ्ते पहले इस महीने के अंत में मास्को में रूसी-भारतीय "2+2" मंत्रिस्तरीय की पहली बैठक घटनापूर्ण या महत्वपूर्ण होने वाली है क्योंकि यह वाशिंगटन में मंत्रिस्तरीय यूएस-…
  • Dalit-Adivasi education
    राज वाल्मीकि
    महामारी से कितनी प्रभावित हुई दलित-आदिवासी शिक्षा?
    06 Nov 2021
    हाल ही में नेशनल कैंपेन ऑन दलित ह्यूमन राइट्स  ने दलित आदिवासियों की शिक्षा पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन में अपेक्षा से अधिक दुखद तथ्य सामने आए हैं।
  • lakshwdeep
    अयस्कांत दास
    भारत में सबसे कम जेल में रहने की दर होने के बावजूद लक्षद्वीप को पांचवीं जेल की आवश्यकता क्यों है?
    06 Nov 2021
    पूरे देश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तुलना में लक्षद्वीप में जेल में रह रहे कैदियों की तादाद सबसे कम 6 फीसदी है। इसकी तुलना में दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश में जेल अधिभोग दर क्रमशः 174.9…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 10,929 नए मामले, 392 मरीज़ों की मौत
    06 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.43 फ़ीसदी यानी 1 लाख 46 हज़ार 950 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License