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राजनीति
आंदोलनरत किसानों के साथ महिला संगठन भी एकजुट, मोदी सरकार को लिखा खुला पत्र
महिला संगठनों ने किसानो के साथ अपनी एकजुटता जारी करते हुए कहा: “हम किसानों के संघर्ष के बर्बर दमन की,  और इतनी कड़ी सर्दी मे आँसू गैस और पानी के गोले फेंकने की कड़ी निंदा करते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Nov 2020
आंदोलनरत किसानों के साथ महिला संगठन भी एकजुट

दिल्ली: देशभर के कई महिला संगठनों ने रविवार को मोदी सरकार को एक खुली चिठ्ठी लिखी और किसानों के आंदोलन पर दमनात्मक कार्रवाई की निंदा की। इसमें ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेन्स एसोसिएशन (ADWA), नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन (NFIW ) और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वुमेन्स एसोसिएशन (AIPWA) सहित कई अन्य महिलाओं के संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं।

महिला संगठनों ने किसानों के संघर्ष के मद्देनजर अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा: “हम किसानों के संघर्ष के बर्बर दमन की,  और इतनी कड़ी सर्दी मे आँसू गैस और पानी के गोले फेंकने की कड़ी निंदा करते हैं। बीजेपी-आरएसएस केंद्र सरकार और बीजेपी यूपी और हरियाणा राज्य सरकारों ने भी शांतिपूर्ण किसानों पर, जो अपनी उचित मांगों के लिए दिल्ली पहुंचना चाहते हैं, अभूतपूर्व बर्बरता का उदाहरण पेश किया है।"

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए, पत्र में कहा गया है, “महिलाएं, भले ही किसानों के रूप में मान्यता प्राप्त न हों, कृषि कार्यों में समान रूप से संलग्न हैं। महिलाओं की एक बड़ी संख्या अभी भी "अदृश्य योगदानकर्ताओं" के रूप में ही बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे कृषि श्रम बल का 33% और स्वरोजगार किसानों का 48% हिस्सा है। ”

इस पत्र में कहा गया है, '' किसान लगातार संकट से जूझ रहे हैं और महामारी से निपटने के लिए आपकी सरकार द्वारा उठाए गए अनियोजित और खतरनाक कदमो  से आर्थिक प्रभाव पड़ रहा है। इसने कृषि पर निर्भर परिवारों को गंभीर ऋणग्रस्तता में डाल दिया है और इसके परिणामस्वरूप किसानों की आत्महत्या बढ़ गई है।"

नीचे पूरा पत्र पढ़ें:

महिला संगठनों द्वारा प्रधान मंत्री को खुला पत्र

दिनांक: 29 नवंबर, 2020

सेवा में ,

श्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री

हम, निम्नहस्ताक्षरित राष्ट्रीय महिला संगठन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं पर आपकी नीतियों के प्रतिकूल प्रभाव और आपकी सरकार द्वारा हाल ही में पारित तीन किसान विरोधी कानूनों के बारे में बहुत गहरे से चिंतित हैं। महिलाएं, भले ही किसान के रूप में न पहचानी जाती हों,  लेकिन कृषि कार्यों में समान रूप से शामिल हैं। महिलाओं की एक बड़ी संख्या अभी भी "अदृश्य योगदानकर्ताओं" के रूप में बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि वे कृषि श्रम बल का 33% और स्वरोजगार किसानों का 48% हिस्सा है।

किसान लगातार कृषि संकट से और महामारी से निपटने के लिए आपकी सरकार द्वारा उठाए गए अनियोजित और कठोर उपायों के आर्थिक प्रभाव से जूझ रहे हैं। इन कड़े कदमों ने कृषि पर निर्भर परिवारों को गंभीर ऋणग्रस्तता की स्थिति में डाल दिया है और इसके परिणामस्वरूप किसानों की आत्महत्या बढ़ गई है। आत्महत्या प्रभावित परिवारों की महिला किसान पूरी तरह से दयनीय स्थिति में हैं। महिलाएं जमीनों की मालिक नहीं हैं। इसलिए उन्हें ऋणग्रस्तता और आत्महत्या की दोहरी आपदा से निपटने के लिए सरकारों से कोई मदद नहीं मिलती है। आवश्यक वस्तुओं के निरंतर बढ़ते मूल्य, बेरोजगारी और भूख के कारण महिलाओं और वंचित परिवारों के जीवन पर गंभीर असर पड़ रहे हैं।

अक्टूबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, किसान मूल्य आश्वासन अधिनियम और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम के कारण देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है, जिसमें महिला किसानों की भारी भागीदारी है, क्योंकि यह किसानों और उनके परिवारों को कृषि व्यवसायों पर निर्भरता की स्थिति में डाल देगा। ठेके पर खेती (कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग) को प्रोत्साहन देने से भूमिहीनता और अभाव की स्थिति और भी बढ़ जाएगी। इन कानूनों से महिला किसानों की दरिद्रता बढ़ेगी क्योंकि कॉरपोरेट लॉबी द्वारा होने वाली असुरक्षित लूट से उन्हे कोई सुरक्षा नहीं है। इन कदमों से सरकार द्वारा विकेन्द्रीकृत खरीद में कमी होगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली चौपट होगी। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किसान संगठन लगातार कर्जमाफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग उठाते रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपकी सरकार ने इन उचित मांगों की अवहेलना करते हुए किसान विरोधी कानूनों को पारित करके किसानों को और अधिक संकट में धकेल दिया है।

हम किसानों के संघर्ष के बर्बर दमन की,  और इतनी कड़ी सर्दी मे आँसू गैस और पानी के गोले फेंकने की कड़ी निंदा करते हैं। बीजेपी-आरएसएस केंद्र सरकार और बीजेपी यूपी और हरियाणा राज्य सरकारों ने भी शांतिपूर्ण किसानों पर, जो अपनी उचित मांगों के लिए दिल्ली पहुंचना चाहते हैं, अभूतपूर्व बर्बरता का उदाहरण पेश किया है

हम किसानों के संघर्ष के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हैं और आपके नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शित क्रूर दमन और निर्ममता के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

राष्ट्रीय महिला संगठन मांग करते हैं:

1. किसानों के वैध और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर दमन को तुरंत रोकें।

2. संघर्षरत किसानों और किसान संगठनों के नेताओं पर लगाए गए सभी मामलों को वापस लें ।

3. महामारी के दौरान अधिनियमित तीन किसान विरोधी अधिनियमों को निरस्त करें।

4. ठेके पर कृषि को प्रोत्साहन देना बंद करें।

5. सभी कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण और गारंटी तथा सरकार द्वारा विकेन्द्रीकृत खरीद सुनिश्चित करना।

6. भूख और गरीबी की स्थिति को देखते हुए राशन वितरण प्रणाली का सार्वभौमिकरण 

7. छात्रों को मध्याह्न भोजन सुनिश्चित करना।

8. किसानों के लिए ऋण माफी, विशेष रूप से आत्महत्या करने वाले किसानों की विधवाओं के लिए और जिन्होंने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से ऋण लिया है।

9. सभी वंचित और जरुरतमन्द परिवारों को मासिक आय सहायता।

10. स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सहायता।

अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति  (AIDWA)

भारतीय महिला राष्ट्रीय फेडरेशन  (NFIW)

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ  (AIPWA)

प्रगतिशील महिला संगठन  (PMS)

अखिल भारतीय महिला सांस्कृतिक संगठन  (AIMSS)

अखिल भारतीय अग्रगामी महिला समिति  (AIAMS)

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