NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
प्रवासी श्रमिकों के अधिकार और सम्मान के लिए मज़दूर संगठन ने किया देशव्यापी प्रतिवाद
मज़दूर संगठन ऐक्टू ने इस प्रतिवाद का आयोजन प्रवासी श्रमिकों के मुद्दों के प्रति सरकारी की उदासीनता के ख़िलाफ़ 18 और 19 अप्रैल को किया। इसमें देश के ज़्यादातर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रवासी मज़दूरों व ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं समेत अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Apr 2020
मज़दूर संगठन

दिल्ली: प्रवासी श्रमिकों के अधिकार और सम्मान के लिए मजदूर संगठन ऐक्टू के साथ, भाकपा माले और ग्रामीण खेत मजदूर सभा ने 18 और 19 अप्रैल को दिल्ली, बिहार सहित देश के कई राज्यों में विरोध किया। इस दौरन लॉकडाउन के नियम का ध्यान रखते हुए कहीं भूख हड़ताल तो कही विरोध दिवस मनाया गया।

इस देशव्यापी विरोध के तहत देश की राजधानी दिल्ली के विभिन्न इलाकों में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन करते हुए प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को लेकर ऐक्टू के बैनर तले मजदूरों ने विरोध किया। इसमें भवन निर्माण से लेकर औद्योगिक मजदूरों और रेहड़ी-पटरी-खोमचा मजदूरों, छात्र-कार्यकर्ताओं, वकीलों व अन्य लोगों ने भागीदारी की।

उत्तरी दिल्ली के नरेला, कादीपुर, मुखर्जी नगर, वजीरपुर, संत नगर- बुराड़ी; दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार, वसंत कुंज, कापसहेड़ा, आश्रम, गोविन्दपुरी, कालकाजी और पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद, शाहदरा, मंडावली, पटपड़गंज आदि इलाकों में प्रवासी मजदूरों ने कार्यक्रम में भारी संख्या में भागीदारी की।

IMG-20200420-WA0012.jpg

इस प्रतिवाद का आयोजन प्रवासी मजदूरों के मुद्दों के प्रति सरकारी की उदासीनता के खिलाफ किया गया था। बिहार, झारखंड, प. बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना, राजस्थान, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर-प्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों में प्रवासी मजदूरों व ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं समेत अन्य लोगों ने भी हिस्सा लिया।

इससे पहले तमिलनाडु के कई ट्रेड यूनियन व राजनैतिक कार्यकर्ताओं पर लॉक-डाउन के दौरान मजदूरों की समस्याओं को लेकर विरोध करने के चलते मामला दर्ज किया जा चुका है। सोमवार को भी उत्तर प्रदेश के अयोध्या में इंकलाबी नौजवान सभा के अतीक अहमद को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल उन्हें पर्सनल-बांड पर छोड़ दिया गया है।

विरोध कर रहे मजदूरों ने कहाकि 'मोदी सरकार द्वारा बिना किसी प्लानिंग के किए गए लॉकडाउन एवं केन्द्र और ज्यादातर राज्य सरकारों के राहत कार्य में विफल रहने की वजह से देश की एक बड़ी आबादी के सामने भुखमरी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। मजदूर अपने गृह-राज्यों से दूर अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं। खाने और राशन की कमी के चलते आत्महत्या तक कर रहे हैं। सरकारी रवैये से प्रधानमंत्री मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के खोखले वादों की कलई खुल रही है। रोजगार, भोजन और पैसा न होने की वजह से, मजदूरों के सामने बहुत बुरे हालात हैं। इन्हीं कारणों से कई मजदूरों ने मुश्किल पैदल यात्राओं पर निकलना शुरू कर दिया।'

वहीं, मजदूर संगठन ऐक्टू का कहना है कि 'एक तरफ भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास कई लाख टन का बफर स्टॉक गोदामों में रखा हुआ है, इसके बावजूद भी मजदूर भूख से मर रहे हैं। सरकारी हेल्पलाइन और ‘खाद्य वितरण केन्द्र’ मजदूर वर्ग और गरीब जनता के छोटे से हिस्से तक को राहत दे पाने में असफल हैं, तो दूसरी तरफ कारखानों, सर्विस सेक्टर, आईटी, मीडिया - हर जगह, हर स्तर पर कर्मचारियों को लॉकडाउन के नाम पर काम से निकाला जा रहा है। और ये तब हो रहा है जबकि प्रधानमंत्री बहुत जोर जोर से अपने विभिन्न मंत्रालयों के जरिए नियोक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि वे ऐसा ना करें। विभिन्न राज्यों ने अपने श्रम विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे ये सुनिश्चित करें कि लॉकडाउन के दौरान छंटनी या वेतन कटौती न हो; लेकिन हमे लगातार छंटनी, वेतन कटौती, और जबरन छुट्टी पर भेजे जाने की शिकायतें मिल रही हैं।'

'दिल्ली सरकार पूर्ण रूप से विफल'

मजदूर संगठन ऐक्टू ने अपनी प्रेस विज्ञप्तिमें में कहा उप-राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार खाने की कमी से जूझती जनता को खाना तक मुहैया नहीं करवा पा रही है। जो भोजन केन्द्र बनाए गए हैं वो बहुत कम हैं। ये कई बार मजदूर इलाकों से दूर होते हैं, यहां बहुत कम मात्रा में व निम्न क्वालिटी का खाना उपलब्ध करवाया जाता है।

IMG-20200420-WA0013.jpg

इस दौरान पुलिस के व्यवहार पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों को इन भोजन वितरण केन्द्रों पर लम्बी कतारों का भी सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा भूखे मजदूरों को मारने-पीटने की भी घटनाएं सामने आ रही हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री के आश्वासनों व घोषणाओं के बावजूद कई मजदूरों को नौकरियों से निकाल दिया गया है। गरीबों-मजदूरों को पुलिस परेशान कर रही है, उन्हें राशन, वेतन या किसी भी अन्य तरह का गुज़ारा भत्ता नहीं दिया जा रहा है।

मजदूर नेताओं ने सरकार आरोप लगाते हुए कहा कि इतने बुरे हालातों में भी दिल्ली के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल और श्रम मंत्री ने ट्रेड यूनियनों के साथ बातचीत तक करने से मना कर दिया है, जिससे मजदूरों तक पहुंचा व बेहतर राहत कार्य सुनिश्चित किया जा सकता था।

ऐक्टू ने दिल्ली सरकार को कई पत्र लिखे लेकिन दिल्ली सरकार ने उन्हें साफ़ तौर पर अनसुना कर दिया। अस्थायी राशन कार्ड को लेकर टीवी पर चल रही घोषणाओं का खोखलापन तब सामने आ जाता है, जब हर मजदूर से दिल्ली सरकार इन्टरनेट, स्मार्टफोन, आधार कार्ड इत्यादि का इस्तेमाल करके सरकारी वेबसाइट पर रजिस्टर करने की अपेक्षा करती है।

ज्यादातर समय दिल्ली सरकार की ये साइट भी ‘डाउन’ रहती है। सरकार को तुरंत आधार कार्ड, पंजीकरण इत्यादि के चक्करों को छोड़कर सभी मजदूरों-गरीबों को राशन देने की गारंटी करनी चाहिए।

इसके साथ ही पांच हजार रुपये का आर्थिक अनुदान भी सिर्फ उन भवन-निवारण मजदूरों को दिया गया है जो ‘दिल्ली भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड’ में पंजीकृत हैं, और वह भी बोर्ड के अपने फंड से। इस घोषणा के लाभार्थियों की कुल संख्या बहुत मुश्किल से दिल्ली की कुल मजदूर आबादी का एक या दो प्रतिशत ही होगी।

‘मरकज़’ मुद्दे पर दिल्ली और केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बयानों ने समाज में नफरत की जड़ों को और गहरा कर दिया है। मुस्लिम समुदाय से आने वाले रेहड़ी-खोखा वाले छोटे दुकानदारों को कई जगहों पर हिंसा का सामना भी करना पड़ रहा है।

ऐक्टू ने सरकार से यह मांग किया कि 'मजदूरों और गरीबों के मुद्दों पर केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा केवल बयानबाजी नहीं बल्कि फौरन कार्रवाई की जाए। ट्रेड यूनियनों के साथ बातचीत करके “प्रवासी मजदूर कार्य-योजना” तैयार किया जाए और भारतीय खाद्य निगम (एफ सी आई) के गोदामों को फौरन जनता के लिए खोल दिया जाए। नियोक्ताओं को छंटनी करने व वेतन कटौती से रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। किसी भी तरह के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।

इसके साथ ही देश भर में भूखे लोगों के खिलाफ हर तरह का दमन–खासकर पुलिस द्वारा किए जा रहे मारपीट को फौरन बंद किया जाए। हम गुजरात, महाराष्ट्र व अन्य जगहों पर मजदूरों के खिलाफ दर्ज मामलों को फौरन खारिज करने की भी मांग करते हैं। 

Coronavirus
Lockdown
migrants
Migrant workers
Labor organization ACTU
CPIML
Nationwide Protest
Workers and Labors

Related Stories

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

बिहार : सीटेट-बीटेट पास अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली को लेकर करेंगे आंदोलन

सड़क पर अस्पताल: बिहार में शुरू हुआ अनोखा जन अभियान, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जनता ने किया चक्का जाम

किसान आंदोलन@378 : कब, क्या और कैसे… पूरे 13 महीने का ब्योरा

निर्माण मज़दूरों की 2 -3 दिसम्बर को देशव्यापी हड़ताल,यूनियन ने कहा- करोड़ों मज़दूर होंगे शामिल

मौत के आंकड़े बताते हैं किसान आंदोलन बड़े किसानों का नहीं है - अर्थशास्त्री लखविंदर सिंह

मंत्री अजय मिश्रा की बर्ख़ास्तगी की मांग को लेकर किसानों का ‘रेल रोको’ आंदोलन

बाघमारा कोल साइडिंग में छंटनी का विरोध कर रहे मज़दूरों पर प्रबंधन ने कराया लाठीचार्ज

भारत बंद को सफल बनाने के लिए हर वर्ग से समर्थन मिल रहा हैः सीपीआई (एम)


बाकी खबरें

  • हिमाचल : सीटू ने सरकार से टैक्सी व अन्य निजी परिवहन सेवाओं में कार्यरत लोगों की आर्थिक मदद की मांग की
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिमाचल : सीटू ने सरकार से टैक्सी व अन्य निजी परिवहन सेवाओं में कार्यरत लोगों की आर्थिक मदद की मांग की
    02 Jun 2021
    सीटू राज्य कमेटी ने कोरोना के कारण मासिक किस्त न चुका पाने वाले संचालकों की गाड़ियों को सरकारी, निजी बैंकों व फाइनेंस कम्पनियों द्वारा जब्त करने के घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है व इसे अमानवीय करार दिया…
  • rbi
    अजय कुमार
    आरबीआई तो सरकार को बचा रहा है लेकिन क्या सरकार भी आरबीआई को बचा रही है?
    02 Jun 2021
    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 99,122 करोड़ रुपये भारत सरकार को अपने सरप्लस से देने का एलान किया है। ...जिस तरह से नोटबंदी के लिए आरबीआई को पूरी तरह से अनसुना कर फैसला लिया गया, उसी तरह का संबंध सरकार और…
  • बिहार : पंचयती चुनाव टले लेकिन पंचायतों की ज़िम्मेदारी अधिकारियो को सौंप जाने को लेकर विपक्ष का विरोध
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : पंचयती चुनाव टले लेकिन पंचायतों की ज़िम्मेदारी अधिकारियों को सौंप जाने को लेकर विपक्ष का विरोध
    02 Jun 2021
    बिहार में कोरोना संक्रमण को देखते हुए पंचायत चुनाव को टाल दिया गया है। लेकिन बिहार सरकार के इस निर्णय को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है सरकार आपद में अवसर देखकर सारी शक्ति अपने पास ले…
  • सोनिया यादव
    यूपी: कस्तूरबा विद्यालयों में 9 करोड़ का कथित घोटाला, बेसिक शिक्षा मंत्री की बर्ख़ास्तगी की मांग
    02 Jun 2021
    कोरोना संकट के दौरान राज्य में जब ये स्कूल बंद थे, तब भी सरकारी अधिकारी खर्च दिखाकर पैसे निकालते रहे। कुल 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के खातों से साल 2020-21 के सत्र के लिए तकरीबन 9 करोड़…
  • अवनि बंसल
    काफ़ी नहीं है रामदेव की माफ़ी, दंडनीय अपराध है उनका एलोपैथी पर दिया बयान
    02 Jun 2021
    अवनि बंसल लिखती हैं योग गुरू और व्यापारी बाबा रामदेव ने हाल में एलोपैथी को खारिज़ करते हुए विवादास्पद बयान दिया था। लेकिन अपने बयान से वापस जाते हुए सिर्फ़ माफ़ी मांगना ही काफ़ी नहीं है। अवनि बंसल उन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License