NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ये जज हैं या बीजेपी-आरएसएस के नेता?
यह दौर अजब है। अब न्यायाधीश भी नेताओं की ज़ुबान बोलने लगे हैं। मेघालय हाईकोर्ट के जज ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उनका कहना है कि आज़ादी के समय भारत को हिन्दू राष्ट्र बन जाना चाहिए था।
ऋतांश आज़ाद
13 Dec 2018
judge

मेघालय हाईकोर्ट के जज ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उनका कहना है कि आज़ादी के समय भारत को हिन्दू राष्ट्र बन जाना चाहिए था। यह बयान उन्होंने एक पेटीशन पर अपना आदेश देते हुए दिया। इस बात के अलावा भी जज साहब ने कई और भी आपत्तिजनक बातें कहीं।

मेघालय हाईकोर्ट के जज एसआर सेन ने कहा “पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया था और क्योंकि भारत भी धर्म के आधार पर अलग हुआ था इसीलिए उसे भी हिन्दू राज्य बनना चाहिए था, लेकिन वह धर्मनिरपेक्ष रहा।’’

उन्होंने आगे कहा “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई भारत को इस्लामिक देश बनाने की कोशिश न करे। अगर यह इस्लामिक देश हो गया तो भारत और दुनिया में कयामत आ जाएगी। मुझे इसका पूरा भरोसा है कि मोदीजी की सरकार मामले की गंभीरता को समझेगी और जरूरी कदम उठाएगी और हमारी मुख्यमंत्री ममताजी राष्ट्रहित में हर तरह से उसका समर्थन करेंगी।’’

जस्टिस सेन ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह बातें की। यह याचिका अमोन राना नाम के एक शख्स ने दायर की थी और मामला नागरिक प्रमाण पत्र से जुड़ा हुआ था। जस्टिस सेन ने इसीलिए नागरिकता से जुड़े हुए अपने ये ख्याल सामने रखे ।

इन बातों के साथ जस्टिस सेन ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार को एक कानून बनाना चाहिए जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम को बिना किसी प्रमाण पत्र के भारत कि नागरिकता मिल सके। उनके कहने से यह साफ हो जाता है कि वह मानते हैं कि हिन्दू भारत के मूल निवासी हैं। उनका कहना था कि भारत एक हिन्दू राज्य था जिसपर मुग़लों ने कब्ज़ा किया और उन्होंने ज़बरदस्ती लोगों को इस्लाम से जोड़ा ।

इन सब बातों से यह लगता है कि जस्टिस सेन संघ की सांप्रदायिक विचारधारा से प्रेरित हैं। हालांकि वह कह रहे हैं कि वह भारतीय मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, लेकिन अगर ऐसा है तो इन बयानों का क्या मतलब है? 

क्या किसी जज को इस तरह की विचाधारा से प्रेरित होना चाहिए जो इतिहास को जानबूझकर सांप्रदायिक नज़रिये से देखे? फिर तर्क और वैज्ञानिक सोच की संवैधानिक भावना का क्या अर्थ है? क्या किसी जज को खुले तौर पर किसी पार्टी या नेता के समर्थन में खड़ा होना चाहिये? अगर ऐसा होगा तो क्या जज निष्पक्ष हो सकता है? यहाँ एक और सवाल महत्वपूर्ण है, वह है कि क्या एक जज की इस तरह की बातें संविधान की धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना का उल्लंघन नहीं है?

इन बयानों से वह बहस वापस शुरू हो जाती है जो जून में सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुरू की थी। बहस यह थी कि क्या हमारी न्याय प्रणाली निष्पक्ष है? सभी चार जजों ने उस समय के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा पर सरकार के दबाव में काम करने के गंभीर सवाल उठाए थे।

इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट से रिटायर हो रहे जज ने भी इसी तरह का बेतुका बयान दिया था। राजस्थान के हाईकोर्ट जज महेश चन्द्र शर्मा ने कहा था कि मोर सेक्स नहीं करते बल्कि मोरनी मोर के आंसुओं से गर्भवती होती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि गाय के अंदर 33 करोड़ देवी देवता होते हैं और गाय ऑक्सीज़न अंदर भी लेती है और बाहर भी छोड़ती है।

इस तरह के बयान साफ तौर पर वैज्ञानिक सोच और संविधान की भावना पर एक चोट हैं क्योंकि हमारा संविधान समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की अवधारणा हमारे सामने रखता है और वैज्ञानिक सोच के प्रचार-प्रसार पर ज़ोर देता है, लेकिन क्या किया जाए जब मंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री तक धर्म विशेष के प्रचार में लगे हों और गैर तार्किक, गैर वैज्ञानिक बातों को भी दावे के साथ मंचों से दोहरा रहे हों तो फिर अन्य लोग भी कुछ लाभ की आकांक्षा में उन्हीं का अनुसरण करने लगते हैं। लेकिन फिर भी जजों का इस तरह की विचारधारा रखना खतरनाक संदेश हैं और निष्पक्ष न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

Meghalay
Meghalaya High Court Judge
BJP-RSS
RSS
Communal statement

Related Stories

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

पीएम मोदी को नेहरू से इतनी दिक़्क़त क्यों है?

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद


बाकी खबरें

  • उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा : क्या रहे जनता के मुद्दे?
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा : क्या रहे जनता के मुद्दे?
    09 Mar 2022
    उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा के चुनाव की चर्चा भले ही मीडिया में कम हुई हो, मगर चुनावी नतीजों का बड़ा असर यहाँ की जनता पर पड़ेगा।
  • Newschakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    Akhilesh Yadav का बड़ा आरोप ! BJP लोकतंत्र की चोरी कर रही है!
    09 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार Abhisar Sharma बात कर रहे हैं चुनाव नतीजे के ठीक पहले Akhilesh Yadav द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस की।
  • विजय विनीत
    EVM मामले में वाराणसी के एडीएम नलिनीकांत सिंह सस्पेंड, 300 सपा कार्यकर्ताओं पर भी एफ़आईआर
    09 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले राज्य कई स्थानों पर ईवीएम को लेकर हुए हंगामे के बाद चुनाव आयोग ने वाराणसी के अपर जिलाधिकारी (आपूर्ति) नलिनी कांत सिंह को सस्पेंड कर दिया। इससे पहले बना
  • बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार विधानसभा में महिला सदस्यों ने आरक्षण देने की मांग की
    09 Mar 2022
    मौजूदा 17वीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 26 है। 2020 के चुनाव में 243 सीटों पर महज 26 महिलाएं जीतीं यानी सदन में महिलाओं का प्रतिशत महज 9.34 है।
  • सोनिया यादव
    उत्तराखंड : हिमालयन इंस्टीट्यूट के सैकड़ों मेडिकल छात्रों का भविष्य संकट में
    09 Mar 2022
    संस्थान ने एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे चौथे वर्ष के छात्रों से फ़ाइनल परीक्षा के ठीक पहले लाखों रुपये की फ़ीस जमा करने को कहा है, जिसके चलते इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License