NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यह दोहराव हास्यास्पद होगा ?
एक बार फिर अन्ना दिल्ली में, पर लोगो में नहीं दिख रहा उनके प्रति वो जोश जो पहले था|
मनोज कुलकर्णी
24 Mar 2018
अन्ना हजारे
Image Courtesy:जनसत्ता

अगस्त 2011 में दिल्ली में एक लामबदी हुई थी। ‘इंडिया अगंेस्ट करप्षन’ के बैनर तले, भ्रष्टाचार के विरोध में । जिसका अगुआ एक बुज़ुर्ग था। साधारण सफेद धोती-कुर्ता और टोपी धारी। षुरूआत में सरकार ने रोड़े अड़ायें। उस वरिष्ठ नागरिक को तिहाड़-जेल रसीद कर दिया। बाद में वहां से रिहाई के लिए इंकार करते हुए अनषन शुरू कर देने वाले उस वयोवृद्ध ग्रामीण का जिद्दीपन लेकिन चर्चा का सबब बना। आखिर उसे रामलीला मैदान से अपनी मुहिम चलाने की इजाज़त दे देनी पड़ी। रात-दिन के समाचार-चैनलों के कैमरों ने तब दिल्ली के रामलीला मैदान में डेरा डाल दिया। अगले दो हफ्तों में  आमरण अनषन पर बैठा वह चेहरा देष के शहरी मध्यमर्ग के जेहन पर खुद गया। महानगरों से लगा कर कस्बों तक का पढ़ा-लिखा मगर राजनीतिक को हिकारत से देखने वाला मध्य और उच्च मध्यवर्ग हाथों में मोमबत्ती थामे सड़कों पर आ खड़ा हुआ था। नारा बुलंद करता ‘मै भी अण्णा, तू भी अण्णा-अब तो सारा देष है अण्णा’।

अण्णा हजारे। महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि सरीखे सूखे गांव में पानी बचाने और ज़मीन को हरा-भरा बना देने के उस सेवा-निव्त्त फौजी की चर्चा सामाजिक-क्षेत्रों में तो कुछ-कुछ थी। अपने प्रदेष में भ्रष्टाचार विरोधी कुछ उभारों में भी उन्हें पहचान हासिल हो चुकी थी। मगर, देष के स्तर तक जो बहुत  नहीं पहुंची थी। रोज-रोज बेपर्दा हो रहे घोटालों से यूपीए-दो का चेहरा दागदार हो रहा था। केंद्रीय सत्ता पर काबिज होने के लिए सांप्रदायिक-फांसीवाद अपने दांत-नाखून तेज़ कर रहा था। कारपोरेट-मीडिया ने मौका लपका। माहौल बनाया। रामलीला मैदान के मंच पर अनषनरत चेहरा चाहे अण्णा का रहा हो, वहां जमा हो रहे लोगों को कौन ला रहा था, कौन खाना-पानी मुहैया करा रहा था ? भीड़ को कतारबद्ध रखने में पसीना बहा रहे स्वयंसेवक, विचारधारा के किस घराने से थे, यह राजनीतिक-जानकारों की समझ में आ चुका था।  

सादी वेषभूषा देखते ही षिक्षित, शहरी मध्यवर्ग उस व्यक्ति में गांधी जी की छवि उकेरने लगता है। अण्णा को देखते ही वह वर्ग मुतमईन हो गया कि क्रांति देहरी पर खड़ी है। एक उद्धारक आ चुका है।‘इंडिया अगंेस्ट करप्षन’ के नारे से रंगी टी-षर्ट पहने सूचना-प्रोघोगिकी के पाॅष-दफ्तरों से आधे दिन की छुट्टि ले रामलीला मैदान या इतर शहरों-कस्बों के चैक-चैराहों पर इकट्ठा होते युवक-युवति मान बैठे थे कि यह दादाजी सरकार को मजबूर कर देंगे। चार दषकों से संसद में लटके लोकपाल-बिल को मंजूरी देने के लिए। फिर भ्रष्टाचार गुजरे जमाने का वाकया होगा।

इस तथ्य को जानते-बूझते अलक्षित रखा गया कि भ्रष्टाचार विरूद्ध खड़े किये जा रहे उस षुभंकर का असल कद उतना बड़ा नहीं था, जितना प्रचारित किया जा रहा था। जीवन-संबंधी उसके अनेक आग्रह  संकीर्ण और कट्टर थे। अपने गांव की पंचायत को वह खाप की तर्ज पर हांकता था और जिसे गर्व से बताता भी था। जनतांत्रिक-मूल्यों के प्रति जिसका लगाव संदिग्ध था।

 तात्कालिक लोकप्रियता को भुनाने की गरज से कुछ महीनों बाद वही अंक मुंबई में मंचित करने की कोशिश की गयी थी। घरेलू मंच होने के बावजूद जो नाकामयाब रही थी। दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्षाने के लिए बेकरार ममता बैनर्जी को एक बार लगा था कि अण्णा का जादू उन्हें तार देगा लेकिन रामलीला मैदान में उनकी साझा-सभा में इने-गिने लोग तक नहीं पहुंचे। आम आदमी पार्टी बनने और उसमें आये दिन होने वाली उठा-पटक से उड़ी गर्द अण्णा पर इस तरह जम गयी कि वे कहां है, क्या कर रहे हैं, किसी को सारोकार न था।   

हाल ही में नासिक से मुंबई तरफ पैदल निकले आदिवासियों और किसानों को मनुष्य तक न मानने वाले अपने फेसबुक-स्टेटस में उनकी सूखी रोटियों के प्रायोजक तो तलाषते हैं, इस सवाल को वे सुविधापूर्वक नज़र-अंदाज़ कर देते हैं कि 2011 में रामलीला मैदान पर खेले गये प्रहसन के प्रायोजक कौन थे ? बहरहाल वक्त बदल चुका है। यूपीए-दो को बेदखल कर जो ताकत सत्तानषीं हुई है, भ्रष्टाचार हटाना कभी भी उसका मकसद नहीं रहा है। लिहाजा दिल्ली की बागडोर सम्हाले चार बरस बीत चुके लेकिन लोकपाल की तो कहीं कोई सुगबुगाहट तक नहीं है! उलटे सत्ताधारी दल के संदिग्ध हिसाब-किताब अब आये दिन बेनकाब हुए जा रहे हैं।

इस मंज़र के बीच बासी कढ़ी में फिर उबाल आया है। इस बार, जाहिर है पुराने प्रायोजक तो साथ न देंगे। ना ही उन लग्गुओं का भग्गू कारपोरेट-मीडिया ही अपने कैमरों का फोकस उधर करेगा। गुजरे सात सालों में जमुना में बहुत पानी बह चुका। पिछली बार जो चेहरे बूढ़े टोपीधारी के कानों में फुसफुसाते दीखते थे, अब इस या उस दल के दरवाज़े से सत्ता-सुख के चैगानों तरफ निकल चुके हैं। लेनिन का बुत चाहे त्रिपुरा के किसी कस्बाई चैराहे से ढहा दिया गया है, लेनिन की सूक्तियां अब भी खड़ी है। उनमें से एक अण्णा के आज के अभियान पर सटीक होगी। जिसका कुल आशय यह है कि इतिहास अपने को दोहराता है, दूसरी बार मगर हास्य की तरह।

इस बार यह कितना हास्यास्पद होगा, आने वाले दिन बतायेंगे।

अन्ना हजारे
रामलीला मैदान
दिल्ली
भ्रष्टाचार
आन्दोलन

Related Stories

दून विवि के कुलपति की बर्ख़ास्तगी : उत्कृष्टता के केंद्र का दावा और घपले-घोटालों की निकृष्टता!

क्या अन्ना का अनशन “मैच फिक्सिंग” था?

दिल्ली: दिव्यंगो को मिलने वाले बूथों का गोरखधंधा काफी लंम्बे समय से जारी

5 सितम्बर : देश के लोकतांत्रिक आंदोलन के इतिहास में नया अध्याय

जंतर मंतर - सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी द्वारा धरना-प्रदर्शन पर लगी रोक हटाई

क्यों बिफरी मोदी सरकार राफेल सौदे के नाम पर?

दिल्ली के मज़दूरों की एक दिवसीय हड़ताल

क्या भाजपा हेडक्वार्टर की वजह से जलमग्न हो रहा है मिंटो रोड?

दिल्ली का दमकल

दिल्ली: 20 जुलाई को 20 लाख मज़दूर हड़ताल पर जायेंगे


बाकी खबरें

  • ghazipur
    भाषा
    गाजीपुर अग्निकांडः राय ने ईडीएमसी पर 50 लाख का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया
    30 Mar 2022
    दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दो दिन पहले गाजीपुर लैंडफिल साइट (कूड़ा एकत्र करने वाले स्थान) पर भीषण आगजनी के लिये बुधवार को डीपीसीसी को ईडीएमसी पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाने और घटना के…
  • paper leak
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित
    30 Mar 2022
    सूत्रों के अनुसार सोशल मीडिया पर परीक्षा का प्रश्न पत्र और हल किया गया पत्र वायरल हो गया था और बाजार में 500 रुपए में हल किया गया पत्र बिकने की सूचना मिली थी।
  • potato
    मोहम्मद इमरान खान
    बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान
    30 Mar 2022
    पटनाः बिहार के कटिहार जिले के किसान राजेंद्र मंडल, नौशाद अली, मनोज सिंह, अब्दुल रहमान और संजय यादव इस बार आलू की बम्पर पैदावार होने के बावजूद परेशान हैं और चिंतित हैं। जि
  • east west
    शारिब अहमद खान
    रूस और यूक्रेन युद्ध: पश्चिमी और गैर पश्चिमी देशों के बीच “सभ्य-असभ्य” की बहस
    30 Mar 2022
    “किसी भी अत्याचार की शुरुआत अमानवीयकरण जैसे शब्दों के इस्तेमाल से शुरू होती है। पश्चिमी देशों द्वारा जिन मध्य-पूर्वी देशों के तानाशाहों को सुधारवादी कहा गया, उन्होंने लाखों लोगों की ज़िंदगियाँ बरबाद…
  • Parliament
    सत्यम श्रीवास्तव
    17वीं लोकसभा की दो सालों की उपलब्धियां: एक भ्रामक दस्तावेज़
    30 Mar 2022
    हमें यह भी महसूस होता है कि संसदीय लोकतंत्र के चुनिंदा आंकड़ों के बेहतर होने के बावजूद समग्रता में लोकतंत्र कमजोर हो सकता है। यह हमें संसदीय या निर्वाचन पर आधारित लोकतंत्र और सांवैधानिक लोकतंत्र के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License