NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
योगी जी! ज़्यादा गन्ने से शुगर होता है और ज़्यादा राजनीति से ?
योगी जी ने गन्ने का नुकसान तो बता दिया लेकिन ये बताना भूल गए कि किसान-मज़दूरों की राजनीति को छोड़कर हिन्दू-मुसलमान की राजनीति करने से क्या नुकसान होता है।
मुकुल सरल
13 Sep 2018
सांकेतिक तस्वीर

“ज़्यादा गन्ने से शुगर होता है”

और ज़्यादा राजनीति से...?

किसान और अन्य लोग योगी जी से आज यही पूछना चाहते हैं। योगी जी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और किसानों को सलाह दे रहे हैं कि कम गन्ना उगाओ, क्योंकि ज़्यादा गन्ने से ज़्यादा चीनी बनेगी और ज़्यादा चीनी से मधुमेह यानी ब्लड शुगर की बीमारी होती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को ये सलाह पश्चिम उत्तर प्रदेश के बागपत में दी। हालांकि वे बताना भूल गए कि उन्होंने 14 दिन के भीतर गन्ने का भुगतान कराने  वरना उसपर ब्याज देने का जो वादा किया था उसका क्या हुआ ?

योगी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को दिल्ली-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग का शिलान्यास करने बागपत पहुंचे थे।

इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “अन्य फसलें भी बोइये, दिल्ली का बाजार पास है। वैसे भी लोग शुगर के कारण बीमार होते जा रहे हैं।”

योगी जी ने गन्ने का नुकसान तो बता दिया लेकिन ये बताना भूल गए कि किसान-मज़दूरों की राजनीति को छोड़कर हिन्दू-मुसलमान की राजनीति करने से क्या नुकसान होता है।

गन्ने से तो चीनी बनती है, लेकिन नफ़रत की राजनीति से जो ज़हर बनता है उसका क्या?

योगी जी ये सब नहीं बताएंगे। वे ये भी नहीं बताएंगे कि वे चीनी मिल मालिकों की तरफ़ से क्यों बोल रहे हैं?

गन्ने का ज्यादा उत्पादन सीधे चीनी के मूल्य से जुड़ा है। अगर किसान ज्यादा गन्ना उगाएगा तो ज्यादा चीनी बनेगी और इससे उसकी कीमत गिरेगी। और चीनी मिल मालिक यह नहीं चाहते। वे ये चाहते हैं कि किसानों का सालों-साल का बकाया बने रहे और किसान बिना उसे मांगे गन्ने की सप्लाई करता रहे।

वे यहां ये भी सलाह दे सकते थे कि ज्यादा गन्ना उगाइए हम चीनी का निर्यात करेंगे। आपको पूरा दाम दिलाएंगे और वो भी समय से।

हालांकि योगी आदित्यनाथ ने सभा में किसानों को 36 हजार करोड़ रुपये का भुगतान करने और 10 हजार करोड़ जल्द करने का दावा किया। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक जिस वक्त सीएम योगी किसानों को बकाया भुगतान दिलाने की बात कर रहे थे, भीड़ में कई किसानों ने खड़े होकर हाथ हिलाकर नाराजगी जाहिर की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मिल मालिकों को 15 अक्तूबर तक भुगतान हर हाल में देना होगा, किसानों के साथ नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी।

पश्चिमी यूपी गन्ना बेल्ट है। यानी उत्तर प्रदेश में यहां सबसे ज़्यादा गन्ना बोया जाता है। यहां की मिट्टी और जलवायु गन्ने के लिए अधिक अनुकूल है। इसलिए यहां का किसान सबसे ज्यादा गन्ना ही उगाता है। लेकिन पिछले कई बरस से अब इसमें घाटा ही घाटा है। चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करोड़ों बकाया है।

राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के सहारनपुर मंडल उपाध्यक्ष मनोज राझड़ कहते हैं कि “योगी जी ने जो कहा है वह उनका कैराना उपचुनाव की हार का दर्द है। वे कैराना की चोट को भुला नहीं पा रहे हैं, क्योंकि वहां जिन्ना बनाम गन्ना की लड़ाई हुई और गन्ने की जीत हुई। इसी वजह से योगी जी गन्ने से खार खाए हुए हैं।” (कैराना में पिछले दिनों हुए लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष की साझा प्रत्याशी आरएलडी की बेगम तबस्सुम हसन ने बीजेपी उम्मीदवार मृगांका सिंह को भारी मतों से शिकस्त दी थी। मृगांका बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद हुकुम सिंह जिनके निधन की वजह से ये सीट खाली हुई थी की बेटी हैं।)

आरएलडी नेता मनोज ने कहा कि योगी जी को मालूम होना चाहिए कि शुगर या डायबिटीज केवल मीठे से नहीं होती। इसकी कई वजह हैं। 

उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री योगी को गन्ने की पैदावार पर बोलने की बजाय गन्ने के भुगतान पर बोलना चाहिए था। यहां की जमीन तो गन्ने के लिए ही सूट करती है तो किसान और क्या बोएगा।” आरएलडी नेता के मुताबिक पश्चिमी यूपी में इस समय गन्ना किसानों का निजी और सरकारी चीनी मिलों पर करीब 3 हज़ार करोड़ रुपया बकाया है। उनके मुताबिक ये पहली बार है जब इस सरकार में सरकारी मिलों पर भी गन्ने का कई-कई महीनों का बकाया है, जबकि इससे पहले निजी चीनी मिलों पर तो बकाया रहता था लेकिन सरकारी मिल समय पर भुगतान कर देती थीं।

आपको बता दें कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी किसानों को अजीबो-गरीब सलाह दी थी कि तुम गन्ना बोते क्यों हो? दरअसल मई महीने में मेनका गांधी अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गईं थी। वहां क्षेत्र के कुछ गन्ना किसान अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। जिसे सुनते ही मेनका किसानों पर भड़क गईं। और गुस्से में कहा कि “आकर मेरी जान खाते हो, न देश को चीनी की जरूरत है, न गन्ना कोई बढ़ने वाला है। हजार बार मैं बोल चुकी हूं कि गन्ना मत लगाओ।”

मेनका की यह बात सुनकर किसान हैरान रह गए थे। गन्ना किसानों ने मेनका की बातों पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर हम गन्ना नहीं पैदा करेंगे तो अपने बच्चे कैसे पालेंगे?

तो बीजेपी के मंत्रियों और मुख्यमंत्री की गन्ना और किसानों के बारे में ऐसी राय है। हालांकि भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी तक बार-बार किसानों का नाम लेते हैं और किसान हितैषी होने का दावा करते हैं।

योगी के इस तरह की सलाह पर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर तंज किया कि " बात-बात में पाकिस्तान का विरोध करने वाली भाजपा सरकार ने वहां से अरबों रुपयों की चीनी आयात करके भारत के किसानों को नुक़सान पहुंचाया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने का भी उनका वादा जुमला साबित हुआ है। इससे आक्रोशित किसान अपने गन्ने लेकर 2019 में इसका जवाब देने के लिए तैयार बैठे हैं।"

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा," भाजपा सरकार गन्ना-बक़ाया न चुकाने से जिस तरह गन्ना किसानों का विरोध झेल रही है उस आग में अब प्रवचनीय मुख्यमंत्री जी ने ये कहकर घी डाल दिया है कि गन्ना न उगाएं इससे डायबीटीज बढ़ती है। इससे अच्छा वो एक सलाह अपने मतांध समर्थकों को दें कि वो समाज में हिंसा-नफ़रत की कड़वाहट न घोलें।"

कुल मिलाकर किसान इस समय जिस तरह परेशान है उसे बयान करना मुश्किल है। किसानों का मुंबई कूच हो या किसान-मजदूरों का दिल्ली कूच या फिर तमिलनाडु के किसानों का दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला लंबा धरना...इन सबसे यही साबित होता है कि देशभर में किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। किसान लगातार अपनी उपज का उचित दाम मांग रहे हैं। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन तमाम धरने-आंदोलन के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।

महाराष्ट्र के विदर्भ से लेकर यूपी के बुंदेलखंड तक किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला जारी है और उनकी अपेक्षा कुछ सक्षम माने जाने वाले पश्चिमी यूपी के गन्ना किसानों की दशा भी लगातार खराब होती जा रही है। यही एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सामान या माल पहले ले लिया जाता है और पेमेंट यानी भुगतान साल-साल भर बाद किया जाता है। 

Yogi Adityanath
kisan
SUGAR CANE
गन्ना किसान

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव का समीकरण

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

योगी 2.0 का पहला बड़ा फैसला: लाभार्थियों को नहीं मिला 3 महीने से मुफ़्त राशन 

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?


बाकी खबरें

  • असद रिज़वी
    CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा
    06 May 2022
    न्यूज़क्लिक ने यूपी सरकार का नोटिस पाने वाले आंदोलनकारियों में से सदफ़ जाफ़र और दीपक मिश्रा उर्फ़ दीपक कबीर से बात की है।
  • नीलाम्बरन ए
    तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है
    06 May 2022
    रबर के गिरते दामों, केंद्र सरकार की श्रम एवं निर्यात नीतियों के चलते छोटे रबर बागानों में श्रमिक सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
  • दमयन्ती धर
    गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया
    06 May 2022
    इस मामले में वह रैली शामिल है, जिसे ऊना में सरवैया परिवार के दलितों की सरेआम पिटाई की घटना के एक साल पूरा होने के मौक़े पर 2017 में बुलायी गयी थी।
  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती
    06 May 2022
    नज़रिया: ऐसा लगता है इस दौर की रणनीति के अनुरूप काम का नया बंटवारा है- नॉन-स्टेट एक्टर्स अपने नफ़रती अभियान में लगे रहेंगे, दूसरी ओर प्रशासन उन्हें एक सीमा से आगे नहीं जाने देगा ताकि योगी जी के '…
  • भाषा
    दिल्ली: केंद्र प्रशासनिक सेवा विवाद : न्यायालय ने मामला पांच सदस्यीय पीठ को सौंपा
    06 May 2022
    केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाएं किसके नियंत्रण में रहेंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License