NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी : भेदभाव से पीड़ित 25 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया
"हिंदू धर्म में रहते हुए उनके साथ भेदभाव और अत्याचार किया जाता रहा है, इसी से तंग आकर उन्होंने अपने परिवार के 25 सदस्यों के साथ हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया है।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Nov 2018
shamli
Image Courtesy: Amar Ujala

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में भेदभाव और उत्पीड़न से तंग आकर दलित समाज के 25 सदस्यों ने सोमवार को एक समारोह में हिंदू धर्म छोड़ कर बौद्ध धर्म अपना लिया।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजेश कुमार तिवारी ने बताया, "समारोह का आयोजन बिना किसी दबाव के आयोजित हुआ था और संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत दलित समुदाय के 25 सदस्यों को बौद्ध भिक्षु प्रज्ञाशील ने बौद्ध दीक्षा दी है।"

उधर, धर्म परिवर्तन करने वाले दलित नेता देवदास जयंत ने कहा, "हिंदू धर्म में रहते हुए उनके साथ भेदभाव और अत्याचार किया जाता रहा है, इसी से तंग आकर उन्होंने अपने परिवार के 25 सदस्यों के साथ हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया है।"

इससे पहले भी यूपी के अलग-अलग हिस्सों खासतौर से मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर इत्यादि ज़िलों से दलितों के धर्म परिवर्तन की ख़बरें आती रही हैं। अभी जून में बागपत में भी 25 लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था। यहां भी दलित परिवारों का यही कहना था कि हिन्दू धर्म में उनके साथ भेदभाव, छुआछूत के साथ उनका उत्पीड़न किया जाता है। गुजरात के ऊना कांड के बाद भी देशभर में इस तरह की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी, जब जगह-जगह दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाया था।  

(इनपुट आईएएनएस)

Dalit atrocities
Dalits Protest
dharm
Dalits adopted Buddhism
shamli up

Related Stories

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

यूपी चुनाव: दलितों पर बढ़ते अत्याचार और आर्थिक संकट ने सामान्य दलित समीकरणों को फिर से बदल दिया है

राजस्थान: घोड़ी पर चढ़ने के कारण दलित दूल्हे पर पुलिस की मौजूदगी में हमला

यूपी: ‘प्रेम-प्रसंग’ के चलते यूपी के बस्ती में किशोर-उम्र के दलित जोड़े का मुंडन कर दिया गया, 15 गिरफ्तार 

यूपी: आज़मगढ़ में पुलिस पर दलितों के घर तोड़ने, महिलाओं को प्रताड़ित करने का आरोप; परिवार घर छोड़ कर भागे

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कई गठबंधन बदल चुकी पीएमके के पास स्पष्ट दृष्टिकोण की कमी


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License