NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
यूपी  : लेखपाल और वकील आमने-सामने, मारपीट, एफआईआर, हड़ताल
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ, कन्नौज में अधिवक्ताओं द्वारा महिला लेखपाल के साथ कथित मारपीट के विरोध में 25 सितंबर यानी आज से हड़ताल पर है तो वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने इसे नियम विरूद्ध करार देते हुए महिला लेखपाल द्वारा पैसों की मांग का मामला बताया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
25 Sep 2019
protest
फोटो साभार: अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में लेखपाल और अधिवक्ता आमने-सामने हैं और दोनों जिला प्रशासन पर पक्षपात के गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। जहां एक ओर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ, कन्नौज में अधिवक्ताओं द्वारा महिला लेखपाल के साथ कथित मारपीट के विरोध में 25 सितंबर यानी आज से हड़ताल पर है तो वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने इसे नियम विरूद्ध करार देते हुए महिला लेखपाल द्वारा पैसों की मांग का प्रकरण बताया है।

उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रदेश कार्यालय अधीक्षक सरोज कुमार कुशवाहा ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया, ‘ मामला 20 सितंबर का है। छिबरामऊ कन्नौज में प्रमाण पत्र पर जबरन रिपोर्ट लगवाने के लिए महिला लेखपाल पर दबाव बनाते हुए अधिवक्ता ने मारपीट की। दूसरी महिला लेखपाल जब बीच-बचाव करने आईं तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।'
38ae049dde3a331b2673217ff8163808.jpg
उन्होनें आगे कहा कि कई लेखपालों को अधिवक्ताओं द्वारा घंटों बंधक भी बनाया गया उसके बाद उल्टा लेेखपालों के ख़िलाफ़ ही एफआईआर भी दर्ज करा दी गई। इसके विरोध में जब 24 सितंबर को लेखपालों ने कलेक्टरेट ऑफिस पर शांतिपूर्ण धरना दिया तो वहां अधिवक्ताओं द्वारा लेखपालों के साथ जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों के सामने मारपीट की गई।

गौरतलब है उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन  भी लिखा है जिसमें उल्लेख किया गया है कि सभी प्रदेश के लेखपाल 25 से 27 सितंबर तक हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति तय होगी। संघ ने दोषी अधिवक्ताओं की गिरफ्तारी, घटना में शामिल अधिवक्ताओं का लाइसेंस निरस्त करने, इच्छुक लेखपालों को शस्त्र लाइसेंस देने, कन्नौज में लेखपालों के ख़िलाफ़ दर्ज की गई फर्जी एफआईआर निरस्त करने, डीएम कन्नौज को तुरंत हटाने की मांग की है।

इस संबंध में न्यूज़क्लिक ने अधिवक्ताओं का पक्ष जानने के लिए बार एसोसिएशन छिबरामऊ कन्नौज से संपर्क किया।

एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव ने बताया, 'लेखपालों द्वारा जो मनगढ़ंत कहानी बनाकर प्रदर्शन किया जा रहा है वो नियम विरूद्ध है। दरअसल जिस महिला लेखपाल के साथ मारपीट की बात कही जा रही है वो अधिवक्ता से रिपोर्ट के लिए पैसे की मांग कर रही थीं और तहसील में अधिवक्ता ने लेखपालों के साथ नहीं बल्कि लेखपालों ने अधिवक्ता के साथ मारपीट की है।'

उन्होंने आगे कहा कि 24 सितंबर को जब वकील कलेक्ट्रेट ऑफिस ज्ञापन सौंपने जा रहे थे तब वहीं परिसर में लेखपालों द्वारा वकीलों पर केले का छिलका फेंका गया, महिला अधिवक्ताओं को अभद्र शब्द कहे गए। जिसके बाद वहां धक्का-मुक्की हुई और सीओ सदर श्रीकांत प्रजापति ने पुलिस को लाठी चार्ज करने के आदेश दे दिए।
kannauj collectrate.jpg
बता दें कि इस मामले में दोनों पक्षों द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है। दोनों पक्ष जिला प्रशासन पर लापरवाही और पक्षपात का भी आरोप लगा रहे हैं।

इस संबंध में लेखपल संघ के जिलाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा ने बताया कि पूरे मामले में डीएम की लापरवाही रही है। उनके सामने लेखपालों से अभद्रता हुई। दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। लेकिन वो मूक दर्शक बने रहे।

वहीं अधिवक्ता जितेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि मामला छोटा सा था जिला प्रशासन अधिकारियों के चलते बड़ा बन गया। जिलाधिकारी के मना करने के बावजूद सीओ सदर श्रीकांत प्रजापति ने पुलिस को लाठीचार्ज करने के आदेश दे दिए।

UttarPradesh
kannauj
Bar association
लेखपाल संघ
Protests

Related Stories

हापुड़ अग्निकांड: कम से कम 13 लोगों की मौत, किसान-मजदूर संघ ने किया प्रदर्शन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?

बलिया: पत्रकारों की रिहाई के लिए आंदोलन तेज़, कलेक्ट्रेट घेरने आज़मगढ़-बनारस तक से पहुंचे पत्रकार व समाजसेवी

पत्रकारों के समर्थन में बलिया में ऐतिहासिक बंद, पूरे ज़िले में जुलूस-प्रदर्शन

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

सूडान में तख्तापलट के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी, 3 महीने में 76 प्रदर्शनकारियों की मौत

अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की


बाकी खबरें

  • Olaf Scholz
    एम. के. भद्रकुमार
    मास्को की नपी-तुली कूटनीति काम कर रही है
    21 Feb 2022
    यूक्रेन पर रूसी हमले की संभावना सही मायने में कभी थी ही नहीं। हालांकि, अगर यूक्रेनी सेना अलगाववादी ताक़तों पर हमला करती है, तो डोनबास क्षेत्र में मास्को के हस्तक्षेप का होना सौ फ़ीसदी तय है।
  • sultanpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनावः सुल्तानपुर चीनी मिल राज्य सरकार की अनदेखी से हुई जर्जर
    21 Feb 2022
    "सुल्तानपुर चीनी मिल के सही ढ़ंग से न चलने की वजह से इस इलाके के गन्ने की उपज प्राइवेट क्रशर मशीन में किसान मजबूरन दे देते हैं जहां से उनको गन्ने की कीमत आधी या दो-तिहाई ही मिल पाती है।"
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में पीएम मोदी ने पार की चुनावी मर्यादा, जागो चुनाव आयोग
    21 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अखिलेश यादव पर साधे गए निशाने पर बात की और उसको हास्यास्पद बताया। उसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कैसे एक…
  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख
    21 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में तीन चरणों के चुनावों के बाद अब चौथे चरण के लिए जंग शुरू हो गई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब अवध की चुनावी परिक्रमा लगातार जारी है। लेकिन चौथे चरण में अवध की वो सीटे भी हैं जहां…
  • Ballia
    विजय विनीत
    बलिया: ''सबके वोटे के चिंता बा, चुनाव बाद रसड़ा चीनी मिल के बात केहू ना करे ला''
    21 Feb 2022
    देसी चीनी और गुड़ के लिए मशहूर रसड़ा, कभी ''रसदा'' के नाम से जाना जाता था। रसड़ा इलाके में कई घंटे गुजारने के बाद हमें इस बात का एहसास हो चला था कि रसड़ा में हर आदमी की जुबां पर सिर्फ़ एक ही सवाल है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License