NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी में बच्चों की मौतें जारी , सरकार और प्रशासन निष्क्रिय
यूपी में पिछले कुछ महीनों से अस्पतालों से बच्चों की मौत की खबरें आ रही हैं। आलम ऐसा हो गया है कि नेशनल हॉरर लिस्ट में यूपी का नाम सबसे ऊपर आ गया है
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Nov 2017
बीआरडी अस्पताल

बीआरडी मेडिकल कालेज के बालरोग विभाग में मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। बालरोग विभाग में बीते चार दिनों में 55 मासूमों की मौत हो गई। मरने वालों में 29 नवजात शामिल हैं। इसके अलावा इंसेफेलाइटिस व एपेडमिक वार्ड में 26 बच्चों की मौत हुई। बीते बुधवार को 13 मासूमों की मौत हुई जिसमें सात नवजात शामिल रहे। गुरुवार को 12, शुक्रवार को 18 व शनिवार को 12 मरीजों की मौत बालरोग विभाग में हुई।

बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन त्रासदी के बाद मासूमों की मौत कम नहीं हुई। मरीज़ों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए शासन ने दूसरे मेडिकल कालेज व पीएमएस से 20 डॉक्टरों को बीआरडी में लिए तैनात किया। बीआरडी में नवजातों की मौत के बढ़ते ग्राफ से परेशान कॉलेज प्रशासन हलकान हो गया है। बालरोग विभाग में अक्तूबर में भी मौतों के कारण पिछले वर्ष का रिकॉर्ड टूट गया।

बीते तीन महीने में करीब 1,300 बच्चों की मौत बालरोग विभाग में हुई। बीआरडी के आँकड़ों के मुताबिक अगस्त में 418, सितंबर में 433 और अक्तूबर में 458 बच्चों की मौत हो गई।

यूपी में पिछले कुछ महीनों से अस्पतालों से बच्चों की मौत की खबरें आ रही हैं। आलम ऐसा हो गया है कि नेशनल हॉरर लिस्ट में यूपी का नाम सबसे ऊपर आ गया है। जुलाई, अगस्त और सितंबर में गोरखपुर के कई जिलों से लगातार बच्चों की मौत की खबरों ने सबका दिल दहला दिया। यूपी देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जहाँ 5 साल से कम उम्र के बच्चों की सबसे ज्यादा मौत हुई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 1000 बच्चों में से 130 बच्चे पाँच साल से कम उम्र में मारे जाते हैं, श्रावस्ती में 1000 बच्चों में से 96 बच्चे 1 साल की उम्र में और 49 बच्चे 28 दिनों के अंदर ही मारे जाते हैं । 

भले ही ये आँकड़ा गोरखपुर का है, लेकिन ऐसी दहशत फैलाने वाले आँकड़े दूसरे जिलों के भी  हैं, यूपी में 7,338 डॉक्टरों की कमी है, ज़्यादातर डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी के दौरान मौजूद नहीं रहते इसलिए ऐसे हादसे होते हैं।

गोरखपुर के ख़स्ता हाल 

गोरखपुर के श्रावस्ती में आबादी के हिसाब से अस्पताल या क्लिनिक नहीं है। 30 बेड वाले अस्पताल में केवल 2 ही एमएमबीएस डॉक्टर हैं और एक भी सर्जन या विशेषज्ञ नहीं हैं। सरकारी आँकड़े भी अगर देखते हैं तो यूपी के अस्पतालों में 84 फीसद डॉक्टरों की कमी है। हालांकि योगी सरकार ने पिछले दिनों दावा किया है कि जल्द ही अस्पतालों में डॉक्टरों के खाली पद भरे जाएंगे, लेकिन कब तक और कितने इसकी कोई जानकारी नहीं है। 

इस स्थिति के क्या है कारण

कुपोषण और गरीबी, डॉक्टरों की कमी

अंतर्राष्ट्रीय खाद्य पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के आधार पर यूपी में 46 फीसद बच्चे 5 साल से कम उम्र में मारे जाते हैं। बिहार और झारखंड भी इस मामले में पीछे नहीं है। श्रावस्ती में 63 फीसदी है, यूपी में गर्भवती महिलाएँ और बच्चे कुपोषण का शिकार हैं, नवजात और गर्भवती महिलाएँ खतरे में हैं। गरीबी की वजह से गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक खाना नहीं मिल पाता। इसिलए बच्चे भी कमजोर पैदा होते हैं। जुलाई से अगस्त और सितंबर तक गोरखपुर के बीआरडी कॉलेज में हजार बच्चों की मौत हो गई थी।

जुलाई और अगस्त का महीना नवजातों के लिए बहुत ही घातक होता है। गोरखपुर के बीआरडी कॉलेज में केवल अगस्त भर में 1000 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी, वहीं, राजस्थान के बांसवाड़ा में दो महीने में 70 बच्चे और जमशेदपुर के अस्पताल में चंद रोज़ में 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत हुई। फर्रुखाबाद और बरेली में भी लगातार बच्चों की मौत की खबरें आई थी। इन खबरों ने सबका दिल दहला दिया था और देश के स्वास्थ्य की पोल खोल दी थी। 

इंडिया स्पेंड की ओर से किए गए एक शोध में पाया गया है कि नवजातों की मौत के मामले में झारखंड सबसे आगे है। डॉक्टर कहते हैं कि जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा शिशुओं की मौत होती है। इस दौरान बारिश की वजह से इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है बच्चों को कई तरह की बीमारियाँ होती हैं। झारखंड में इसके सबसे ज़्यादा मामले सामने आते हैं।

डॉक्टरों ने इसके पीछे कई कारण बताए:

  1. छोटी उम्र में शादी होने की वजह से महिलाएँ गर्भ धारण करने में सक्षम नहीं रहती हैं। 
  2. गरीबी और अशिक्षा भी इसके लिए जिम्मेदार है। 
  3. गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक खाना नहीं मिलता, वे और पैदा होने वाले बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। 
  4. अपनी उम्र के हिसाब से उनका वजन नहीं होता है, ऐसे में बच्चे का वजन भी बहुत कम होता है।

झारखंड में 2015-16 के आँकड़ों के अनुसार पाँच साल से कम के 45.3% बच्चे कम हाइट के थे, 47.8% कम वजन के और 40.3 फीसद लोग गरीबी रेखा से नीचे रहने को मजबूर हैं। ऐसे में अस्पताल में पहुँचने से पहले ही कुछ की मौत हो जाती है तो कुछ अस्पताल में जाकर दम तोड़ देते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में ये आँकड़ा सामने आया है।

साल 2000 में बिहार से अलग होने के बाद झारखंड ने 2005-06 से 2015-16 के बीच अर्थव्यवस्‍था में काफी तेज़ी से सुधार हुआ। बच्चों की मृत्यु दर में भी गिरावट आई , लेकिन साल 2016- 17 के बीच ये लक्ष्य पीछे रह गया। झारखंड ने मिले हुए फंड को अच्छे से इस्तेमाल नहीं किया और स्वास्थ्य विकास रुक गया।

गोरखपुर
बीआरडी अस्पताल
यूपी सरकार
बीजेपी
बिगड़ती स्वास्थ व्यस्वस्था

Related Stories

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

गोरखपुर बीआरडी अस्पताल हादसा को एक सालः न मुआवज़ा और न ही कोई सुविधा

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

असमः नागरिकता छीन जाने के डर लोग कर रहे आत्महत्या, एनआरसी की सूची 30 जुलाई तक होगी जारी

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

आज़मगढ़ : रिहाई मंच का रासुका के खिलाफ दौरा

अहमदाबाद के एक बैंक और अमित शाह का दिलचस्प मामला

आरएसएस के लिए यह "सत्य का दर्पण” नहीं हो सकता है


बाकी खबरें

  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    'राम का नाम बदनाम ना करो'
    17 Apr 2022
    यह आराधना करने का नया तरीका है जो भक्तों ने, राम भक्तों ने नहीं, सरकार जी के भक्तों ने, योगी जी के भक्तों ने, बीजेपी के भक्तों ने ईजाद किया है।
  • फ़ाइल फ़ोटो- PTI
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?
    17 Apr 2022
    हर हफ़्ते की कुछ ज़रूरी ख़बरों को लेकर फिर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन..
  • hate
    न्यूज़क्लिक टीम
    नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज
    16 Apr 2022
    देश भर में राम नवमी के मौक़े पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद जगह जगह प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में दिल्ली में जंतर मंतर पर नागरिक समाज के कई लोग इकट्ठा हुए. प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि सरकार हिंसा और…
  • hafte ki baaat
    न्यूज़क्लिक टीम
    अखिलेश भाजपा से क्यों नहीं लड़ सकते और उप-चुनाव के नतीजे
    16 Apr 2022
    भाजपा उत्तर प्रदेश को लेकर क्यों इस कदर आश्वस्त है? क्या अखिलेश यादव भी मायावती जी की तरह अब भाजपा से निकट भविष्य में कभी लड़ नहींं सकते? किस बात से वह भाजपा से खुलकर भिडना नहीं चाहते?
  • EVM
    रवि शंकर दुबे
    लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा
    16 Apr 2022
    देश में एक लोकसभा और चार विधानसभा चुनावों के नतीजे नए संकेत दे रहे हैं। चार अलग-अलग राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License