NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी : वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के बाद कौन लेगा लगाए गए पौधों की सुध?
करीब 4,20,000 रुपये से पंचवटी योजना के तहत 10 हजार पौधे लगाए गए थे। लेकिन आठ दिन बाद हीइनमें बहुत से पौधे देखरेख के अभाव में सूख गए और बहुत से मवेशी चर गए।
सोनिया यादव
19 Aug 2019
plantation
Image courtesy:Uttarpradesh.org

देश में आजकल किसी भी योजना का शुभारंभ बड़े ज़ोर-शोर से किया जाता है, लेकिन वास्तव में वो योजना अपने लक्ष्य में कितनी सफल हुई, इसकी कोई खोज़-ख़बर नहीं लेता। कुछ ऐसे ही हालात हैं उत्तर प्रदेश सरकार के 'वृक्षारोपण महाकुंभ' कार्यक्रम में हुए पौधारोपण का। दरअसल 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर 'वृक्षारोपण महाकुंभ' के अंतर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने एक दिन में 22 करोड़ पौधे लगा कर अपने नाम रेकॉर्ड तो दर्ज करा लिया लेकिन अब इन करोड़ो पौधों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 'वृक्षारोपण महाकुंभ' के तहत लगाए गए पौधे देख-रेख के अभाव में अब मुरझाते नज़र आ रहे हैं। खबर के अनुसार लखनऊ के पास बक्शी के तालाब (बीकेटी) में हुए पौधरोपण की हकीकत हैरान करने वाली है। यहां करीब 4,20,000 रुपये से पंचवटी योजना के तहत 10 हजार पौधे लगाए गए थे। लेकिन आठ दिन बाद ही इन पौधों की शक्ल बदल गई।

प्रदेश में नौ अगस्त को बंजर भूमि सुधारने व पर्यावरण दुरुस्त करने के नाम पर वृक्षारोपण महाकुंभ के ही तहत पंचवटी योजना में बीकेटी बीडीओ अरुण कुमार सिंह ने गुलालपुर व मुसपिपरी गांव में खाली पड़ी ज़मीन पर 10 हजार पौधे लगवाए थे। इन दस हजार पौधों की कीमत लगभग चार लाख बीस हजार रुपये है। आठ दिन बाद ही यहां पर एक भी पौधा ऐसा नहीं बचा जो जीवित दिख रहा हो। ज्यादातर पौधों को अधिकारियों की उदासीनता के कारण छुट्टा मवेशी अपना निवाला बना गए तो कुछ पौधे देखरेख के अभाव व पानी न मिलने के कारण सूख गए।

ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इन पौधों के सूखने का जिम्मेवार कौन है? आखिर हम इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के नाम कब तक बड़े-बड़े पोस्टरों और बैनरों को देखकर हकीकत से अंजान खुश होते रहेंगे?

स्थानीय लोगों के अनुसार हर साल की तरह इस बार भी अधिकारियों द्वारा करोड़ों का बजट खर्च कर एक विशाल कार्यक्रम के तहत प्रचार प्रसार करके पंचवटी योजना के तहत हजारों पेड़ लगाए गए और हमेशा की तरह आठ दिन में ही वह नष्ट हो गए। मुसपिपरी के ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने सिर्फ पौधे लगाए उनकी देखरेख का कोई इंतजाम नहीं किया। इस कारण ही यह सभी पौधे एक सप्ताह में ही सूख गए।

गौरतलब है कि प्रदेश सरकार का पंचवटी योजना के तहत हर ग्राम पंचायत को पंचवटी के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत पांच वृक्ष आवंला, बेल, पीपल, बरगद, शीशम और अशोक के पौधे लगाए जाते हैं। ग्राम समाज की जमीन पर दिशाओं के अनुसार विशेष कोण में इन पौधों को लगाया जाता है। इस योजना को पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तौर पर शुरू किया गया था।

इसी पंचवटी योजना के आधार पर बीकेटी तहसील ब्लॉक व नगर पंचायत प्रशासन ने आठ अगस्त से 10अगस्त के बीच 2 लाख 62 हजार पौधे लगवाए थे। बीडीओ अरुण सिंह के अनुसार 1 लाख 80 हजार पौधे मनरेगा के तहत लगवाए गए थे, जबकि 19 हजार पौधे पंचायती राज विभाग, 19 हजार पौधे तहसील प्रशासन तथा 25 हजार पौधे नगर पंचायत ने लगवाए गए थे। कुल 2 लाख 62 हजार पौधे लगवाने में 42 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से एक करोड़ दस लाख चार हजार रुपये खर्च किए गए थे। 

वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि वृक्षारोपण तो किया गया लेकिन देखरेख का कोई इंतजाम नही हुआ जिसके चलते ये पौधे सूख गए।

गुलालपुर गांव के ग्रामीणों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि योजना के तहत अधिकारी पौधे लगाकर चले गए थे। उसके बाद कोई देखने नहीं आया और न ही इस काम मे किसी ग्रामीण को लगाया गया। इससे अधिकतर पौधे एक सप्ताह में ही मुरझा गए या मवेशी चर गए।

जब इस संबंध में बीडीओ अरुण सिंह मीडिया को गोलमोल जवाब देते ही नज़र आए।उन्होंने पहले कहा कि गांव के सचिव इस पर नजर बनाए हैं। लेकिन जब पौधों की इतनी संख्या बताई गई तो उन्होंने कहा कि 200 पौधों पर मनरेगा से एक मजदूर रखा जाएगा जो देखरेख करेगा। वहीं तहसीलदार राकेश पाठक ने बताया कि देखरेख के लिए अभी कोई टीम नहीं बनाई गई है, लेकिन प्रधानों से बात कर टीम बनाई जाएगी।

भारतीय वन सेवा विभाग में अधिकारी रह चुके जतिन व्यास ने न्यूज़क्लिक को बताया कि कई बार ऐसा होता है कि भारी संख्या में लगाए गए पौधों में से कई पौधे सूख जाते हैं या जीवित नहीं रह पाते। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में इन पौधों का सूखना निश्चित तौर पर चिंताजनक है। जब पौधों का रोपण होता है तो इसके रख-रखाव और देखभाल की जिम्मेदारी भी तय होती है लेकिन इस तरह की लापरवाही बहुत दुखद है।

इस योजना के खस्ता हाल को देखकर तो यही लगता है कि हमें पौधरोपण अभियान की जगह पौधों की सुरक्षा का अभियान चलाना चाहिए। हमारा ज़ोर पौधों की सुरक्षा तय करने की व्यवस्था पर होना चाहिए और इसकी ज़िम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। साथ ही आज-कल बढ़ते सोशल मीडिया के दौर में किसी भी अभियान का मतलब सिर्फ मुस्कुराती हुई तस्वीर खिंचाना न रहे अपितु उस अभियान के प्रति गंभीरता भी हो तो शायद सही मायनों में हम अपने लक्ष्य में सफल हो सकते हैं।

UttarPradesh
Yogi Adityanath
BJP
plantaion
panchvati yojna
world record plantation

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में न Modi magic न Yogi magic
    06 Mar 2022
    Point of View के इस एपिसोड में पत्रकार Neelu Vyas ने experts से यूपी में छठे चरण के मतदान के बाद की चुनावी स्थिति का जायज़ा लिया। जनता किसके साथ है? प्रदेश में जनता ने किन मुद्दों को ध्यान में रखते…
  • poetry
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'टीवी में भी हम जीते हैं, दुश्मन हारा...'
    06 Mar 2022
    पाकिस्तान के पेशावर में मस्जिद पर हमला, यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को ध्यान में रखते हुए पढ़िये अजमल सिद्दीक़ी की यह नज़्म...
  • yogi-akhilesh
    प्रेम कुमार
    कम मतदान बीजेपी को नुक़सान : छत्तीसगढ़, झारखण्ड या राजस्थान- कैसे होंगे यूपी के नतीजे?
    06 Mar 2022
    बीते कई चुनावों में बीजेपी को इस प्रवृत्ति का सामना करना पड़ा है कि मतदान प्रतिशत घटते ही वह सत्ता से बाहर हो जाती है या फिर उसके लिए सत्ता से बाहर होने का खतरा पैदा हो जाता है।
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
    06 Mar 2022
    हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
  • 7th phase
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट
    06 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ़ आख़िरी दौर के चुनाव होने हैं, जिसमें 9 ज़िलों की 54 सीटों पर मतदान होगा। इसमें नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत अखिलेश का गढ़ आज़मगढ़ भी शामिल है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License