NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
दुनिया भर की : चिली में वामपंथी छात्र नेता होंगे सबसे युवा राष्ट्रपति
चिली के ‘नवउदारवादी’ आर्थिक मॉडल को दफ़न कर देने का वादा करने वाले कानून के इस पूर्व छात्र ने रविवार को राष्ट्रपति के पद के लिए हुए चुनावों (रन-ऑफ़) में धुर दक्षिणपंथी जोस एंटोनियो कास्त को क़रारी मात दे दी।
उपेंद्र स्वामी
20 Dec 2021
चिली में वामपंथी छात्र नेता होंगे सबसे युवा राष्ट्रपति

बेहतर शिक्षा की मांग को लेकर छात्रों के जोरदार विरोध प्रदर्शन की अगुआई करने के ठीक दस साल बाद महज 35 साल की उम्र के गाब्रियल बोरिक अब चिली के सबसे युवा राष्ट्रपति बनेंगे। रविवार को आए चुनावी नतीजे केवल इस दक्षिण अमेरिकी देश में ही नहीं बल्कि समूचे लैटिन अमेरिका में प्रगतिशील वामपंथ के फिर से उदय की नई इबारत लिख रहे हैं।

चिली के ‘नवउदारवादी’ आर्थिक मॉडल को दफ़न कर देने का वादा करने वाले कानून के इस पूर्व छात्र ने रविवार को राष्ट्रपति के पद के लिए हुए चुनावों (रन-ऑफ) में धुर दक्षिणपंथी जोस एंटोनियो कास्त को करारी मात दे दी।

चिली में आम चुनाव 21 नवंबर को हुए थे। वहां के संविधान के मुताबिक अगर उस दिन तमाम प्रत्याशियों में से कोई भी 50 फीसदी मत हासिल कर लेता तो रन-ऑफ की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उस दिन कास्त को सबसे ज्यादा 28 फीसदी और बोरिक को 25 फीसदी वोट हासिल हुए थे। नियमों के मुताबिक सबसे ऊपर रहने वाले दो प्रत्याशियों के बीच दूसरे दौर का चुनाव यानी रन-ऑफ हुआ।

धुर विरोधी विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले बोरिक व कास्त के बीच रविवार को चुनाव हुआ और इसमें 99 फीसदी मतों की गिनती होने तक बोरिक को 55.86 फीसदी मत हासिल हो चुके थे। कास्त को 44.14 फीसदी वोट ही मिले थे। लिहाजा कास्त ने ग्राबियल बोरिक को राष्ट्रपति चुने जाने के लिए बधाई देकर अपनी पराजय स्वीकार कर ली। बोरिक अब मार्च में नए राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार सभालेंगे।

दरअसल दोनों प्रत्याशियों की विचारधाराओं में खाई इससे ज्यादा स्पष्ट नहीं हो सकती थी। 55 साल के कास्त को अक्सर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति बोलसोनारो सरीखा माना जाता है। वह चिली के पूर्व तानाशाह जनरल आगस्तो पिनोशे के शासनकाल और मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था के कट्टर समर्थक हैं। उन्होंने अपने एजेंडे में कंपनियों के लिए करों में और कटौती करने, गर्भपात पर रोक लगाने और अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए चिली के उत्तर में दीवार खड़ी करने को शामिल कर रखा था।

ठीक उलट बोरिक शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ दस साल पहले छेड़े गए आंदोलन से उभरे छात्र नेता हैं। हालांकि एंडीज पर्वतमाला के इस देश में प्रगतिशील वाम को मजबूती मिलनी शुरू हुई। 2019 में छेड़े गए एक और जबरदस्त आंदोलन के बाद। अक्टूबर 2019 में हुए और महीने भर चले उस जबरदस्त आंदोलन की मांगों में पेंशन में सुधार करना, बेहतर शिक्षा प्रणाली लागू करना और संपन्न व ताकतवर तबके का समर्थन करने वाली आर्थिक व्यवस्था को भंग करना शामिल था।

इन प्रदर्शनों के दबाव में ही निवर्तमान राष्ट्रपति पिनेरा ने संविधान को बदलने के लिए जनमत संग्रह कराने को रजामंदी दे दी। मौजूदा संविधान पिनोशे के तानाशाही के दौर से उपजा था। फिर पिछले साल यानी 2020 में चिली के लोगों ने भारी बहुमत से नया संविधान तैयार किए जाने के पक्ष में मत दे दिया। अब उसकी प्रक्रिया चल रही है और अगले साल के मध्य में किसी समय एक और जनमत संग्रह के जरिये नए संविधान को स्वीकार किए जाने की कवायद होगी।

दो साल पहले के विरोध प्रदर्शनों से उपजी लहर पर ही प्रगतिशील वाम ने चिली को नई राजनीतिक दिशा देनी शुरू की। बोरिक के प्रस्तावों में एक समावेशी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था खड़ी करना, छात्रों के कर्जों को माफ करना, अति-संपन्न तबके के लिए करों में वृद्धि करना और देश की निजी पेंशन प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव करना शामिल है। यह पेंशन प्रणाली भी पिनोशे की सैन्य व्यवस्था की ही परिणति थी।

जाहिर था कि राष्ट्रपति पद के दोनों दावेदारों की भविष्य की परिकल्पना एक-दूसरे से एकदम उलट थी। अब लोगों को अपना भविष्य चुनना था, जो रविवार के नतीजों से साफ हो गया है। मजेदार बात यह भी है कि दोनों ही उम्मीदवार उस मध्यमार्गी राजनीतिक धारा से बाहर के थे जो 1990 में पिनोशे की सैन्य तानाशाही का अंत होने और लोकतंत्र के बहाल होने के बाद से देश पर शासन कर रही थी। यही कारण था कि दोनों ने ही अपनी-अपनी धुर स्थिति को थोड़ा लचीला दिखाने की कोशिश की थी ताकि वे मध्यमार्गी मतदाताओं के वोट हासिल कर सकें।

बोरिक ने शनिवार को एक खुला पत्र देश के नाम जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार वे सारे बदलाव लेकर आएगी जिनके लिए चिली के लोगों ने 2019 में आंदोलन किया था।

बोरिक ने आगे कहा, इसका मतलब होगा एक ऐसी वास्तविक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू करना जो किसी भी व्यक्ति को अपने दायरे से बाहर न छोड़े। इससे अमीरों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं और गरीबों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच जो अंतर है, वह खत्म किया जाएगा। साथ ही महिलाओं के लिए आजादी व अधिकार भी बिना किसी हिचक के आगे बढ़ाए जाएंगे।

बोरिक ने रविवार को निवर्तमान राष्ट्रपति सेबेस्टियन पिनेरा को एक कॉल में कहा कि मैं चिली के सभी नागरिकों का राष्ट्रपति बनूंगा।

वाम समर्थकों का कहना है कि अब पिनोशे के दौर में लागू किया गया देश का वह आर्थिक मॉडल बदलेगा जो आर्थिक विकास दर तो अच्छी हासिल कर लेता है लेकिन अमीरों व गरीबों के बीच की खाई को उतनी ही चौड़ी भी कर देता है। अब छोटे से लेकिन संपन्न तबके को फायदा पहुंचाने वाले अंधेरे व शोषक दौर का अध्याय बंद किया जा सकेगा।

यह हैरानी की बात नहीं कि रविवार को नतीजों के बाद सैंटियागो में जश्न मनाने वालों में अपने इंद्रधनुषी रंगों के साथ एलजीबीटी समूहों के लोग बड़ी संख्या में थे। यह दुनियाभर में देखा गया है कि वाम धारा को अपने इसी समावेशी स्वरूप के लिए विविध समूहों के लोगों द्वारा पसंद किया जाता है। बोरिक को भी समावेशी सामाजिक नीतियों और बाजारोन्मुखी आर्थिक मॉडल को बदलने के वादे के लिए इन समूहों का तगड़ा समर्थन मिला।

हालांकि राष्ट्रपति बनने के बाद भी बोरिक के लिए आगे का रास्ता इतना आसान नहीं रहने वाला है। कांग्रेस में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं है। इसलिए बोरिक के सामने विपक्ष को साथ लेकर चलने की चुनौती भी रहने वाली है। उन्हें दृढ़ छवि के साथ अनिश्चिचतता के दौर को खत्म करना होगा। जाहिर है कि उनके शुरुआती फैसलों और उनके सलाहकारों- सब पर दुनियाभर की निगाह रहेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Chile
chile president
communist president
gabriel boric president

Related Stories

क्या चिली की प्रगतिशील सरकार बोलीविया की समुद्री पहुंच के रास्ते खोलेगी?

यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, क्या निकलेगी शांति की राह, चिली-कोलंबिया ने ली लाल करवट

दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक

2.2 करोड़ अफ़ग़ानियों को भीषण भुखमरी में धकेला अमेरिका ने, चिले में वाम की ऐतिहासिक जीत

नज़रिया : ग्रेबिएल बोरिक की जीत चिली के वामपंथ के लिए बड़ा मौक़ा

लैटिन अमेरिका दर्शा रहा है कि दक्षिणपंथी उभार स्थायी नहीं है

प्रगतिशील शक्तियों ने चिली के कंस्टिट्यूशनल कन्वेंशन में अधिकांश सीटें जीतीं

नवउदारवाद चिली में पैदा हुआ था, चिली में ही नवउदारवाद का अंत होगा!

चिली के लोगों ने सेबेस्टियन पिनेरा और पुलिस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन तेज़ किया

चिली : अक्टूबर 2019 के विद्रोह के दौरान गिरफ्तार किए गए राजनीतिक क़ैदियों की रिहाई की मांग तेज़


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License