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हरियाणा: आए दिन सामने आ रहे पेपर लीक घोटाले सरकार पर सवाल क्यों खड़े करते हैं?
अगर परीक्षाओं की गोपनीयता पर करोड़ोें होने के बावजूद पेपर लीक हो जाता है तो ऐसे में सरकार पर सवाल उठता लाजमी है। विपक्ष का आरोप है कि अब तक हरियाणा में अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े 28 पेपर लीक हो चुके हैं।
सोनिया यादव
11 Aug 2021
protest
image credit- Social media

उत्तर प्रदेश की योगी आदितयनाथ सरकार की तरह ही हरियाणा की मनोहरलाल खट्टर सरकार भी भ्रष्टाचार मामले में ज़ीरो टॉलरेंस का दावा तो करती है लेकिन यहां भी आए दिन भर्तियों के घोटाले की खबरें कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के बाद अब हरियाणा राज्य कर्मचारी चयन आयोग यानी एचएसएससी भी सुर्खियों में है। इसकी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा, जो 7 और 8 अगस्त को होनी थी, उसे पेपर लीक होने के बाद रद्द कर दिया गया। ऐसे आरोप हैं कि लीक हुआ पेपर 10 से 20 लाख रुपये तक में बिका है।

उधर, भर्तियों के मामले में घोटालों को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है तो वहीं भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का दावा करने वाली हरियाणा की खट्टर सरकार ने चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस की आरोप है कि अब तक अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े 28 पेपर लीक हो चुके हैं। इसे लेकर हरियाणा युवा कांग्रेस ने एचएसएससी ऑफिस के बाहर प्रदर्शन भी किया। कई जगह प्रदेश के युवा खुद भी सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की।

हर पेपर के पाठ्यक्रम निर्धारण से लेकर भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर बनाने और पेपर लीक करने वालों को सख्त से सख्त सजा की मांग युवाओं ने की। इसके अलावा सभी भर्तियों को समय पर पूरी करने सहित कई अन्य बातें ज्ञापने के जरिए सरकार तक पहुंचाने की कोशिश भी की।

28 बार अलग-अलग तरह के पेपर हो चुके हैं लीक

आपको बता दें कि एचएसएससी ने पुरुष कॉन्स्टेबल के 7,298 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। इसके लिए 7 और 8 अगस्त को दो पारियों में परीक्षा होनी थी।। 7 तारीख को दोनों पारियों की परीक्षा हुई भी लेकिन इसे निरस्त कर दिया गया और 8 तारीख को होने वाली परीक्षा को स्थगित कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि हरियाणा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पता किया जिसने एचएसएससी की इस भर्ती के पेपर को लीक कर दिया था। लाखों में इस पेपर को बेचा जा रहा था। हरियाणा पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। इसके अलावा पुलिस ने सात ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार किया है जिन्होंने ‘आंसर की’ खरीदी थी। ये वो लोग थे जिन्होंने कॉन्स्टेबल भर्ती में पास होने के लिए पेपर और आंसर्स के बदले पैसे दिए थे।

राज्य में प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार के आने के बाद से अभी तक 28 बार अलग-अलग तरह के पेपर लीक हो चुके हैं। बार-बार परीक्षाओं के रद्द होने, पेपर लीक होने से ना केवल सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि बेरोजगारों का मनोबल भी टूट रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3 साल के बाद कॉन्स्टेबल परीक्षा आयोजित कराई गई थी और वो भी पेपर लीक के कारण रद्द हो गई। ऐसे में वे युवक काफी परेशान हो गए हैं, जो पिछले तीन सालों इसकी तैयारी कर रहे थे।

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मामले पर कहा कि बीजेपी सरकार में परचून की दुकान के सामान की तरह नौकरियां बिक रही हैं। एक के बाद एक सामने आ रहे पेपर लीक घोटाले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर ओलिंपिक में पेपर लीक करने का कोई इवेंट होता तो हरियाणा की बीजेपी-जेजेपी सरकार को पक्का गोल्ड मेडल मिलता। कांग्रेस पेपर लीक घोटाले के मामले को आने वाले विधानसभा सत्र में उठाएगी।

हरियाणा युवा कांग्रेस ने कर्मचारी चयन आयोग के बाहर किया प्रदर्शन

मामला के तूल पकड़ते ही सियासत तेज हो गई। सोमवार, 9 अगस्त को हरियाणा युवा कांग्रेस ने कर्मचारी चयन आयोग के बाहर प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस कार्यकर्ता, आयोग के अध्यक्ष को 28 परीक्षाओं के पेपर लीक हो जाने का ‘रिकॉर्ड’ बनाने के लिए एक ट्रॉफी देने पहुंचे। युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा ने इस मामले में हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि उनका चुप रहना दोषियों को समर्थन का इशारा कर रहा है।

दिव्यांशु ने कहा, "प्रदेश में नकल माफिया हावी है। सीएम अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते, उन्हें सफाई देनी होगी।"

इस पूरे मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों की जांच हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए। साथ ही साख खो चुके हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।

सुरजेवाला ने पार्टी के बयान के साथ ट्वीट किया, “ युवाओं के भविष्य का भद्दा मजाक उड़ा रही है खट्टर सरकार। परीक्षा में पूछे गए बेतुके विषय व ऊल-जलूल सवालों का कॉन्स्टेबल की नौकरी से नहीं कोई सरोकार। सिफारिशियों को नौकरी देने की मंशा से पूछ रहे हैं बेसिर पैर प्रश्न। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को फौरन बर्खास्त किया जाए।"

प्रशासन का क्या कहना है?

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन भोपाल सिंह ने कहा है कि आयोग पूरे मामले की तह तक जाना चाहता है और अगर जरूरत पड़ी तो पेपर लीक कांड की जांच कराने के लिए एसआईटी भी गठित की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि एफआईआर कराने के लिए आयोग की ओर से डीजीपी ऑफिस को पत्र भेजा गया है। साथ ही भर्ती के नए शेड्यूल पर सीएम खट्टर के साथ चर्चा भी की जाएगी।

गौरतलब है कि इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक प्रदेश में हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा, क्लर्क, एक्साइज इंस्पेक्टर, एचसीएस ज्यूडिशियल, कंडक्टर, पटवारी, नायब तहसीलदार, आईटीआई इंस्पेक्टर, बिजली बोर्ड और ग्राम सचिव की भर्ती परीक्षा जैसी दर्जनों परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। हर साल इन परीक्षाओं की गोपनीयता पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं बावजूद इसके पेपर लीक हो जाते हैं और सालों से तैयारी कर रहे हजारों-लाखों अभ्यार्थियों के सपनों पर पानी फिर जाता है।

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