NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ज़ाकिर अली त्यागी भी डॉ. कफ़ील की तरह यूपी छोड़ने पर मजबूर!
“उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। यहाँ के हालात आपातकाल से ज़्यादा ख़राब हो चुके हैं। क़ानून का ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल कर के असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है।”

असद रिज़वी
16 Sep 2020
Zakir Ali Tyagi

जेल से रिहा होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता ज़ाकिर अली त्यागी भी डॉ. कफ़ील ख़ान की तरह उत्तर प्रदेश को छोड़ देना चाहते हैं। ज़ाकिर त्यागी का कहना है की उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें गौकाशी का आरोपी बना दिया, अब उनको लिंचिंग का ख़तरा महसूस हो रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध कथित टिप्पणी के मामले में पहले भी जेल जा चुके ज़ाकिर त्यागी के प्रदेश छोड़ने के बयान पर लोगों का कहना है कि, प्रदेश में आपातकाल जैसे हालत हो रहे हैं, युवा पीढ़ी यहाँ घुटन महसूस कर रही है।

अगर उत्तर प्रदेश में ऐसे गंभीर हालत हो रहे हैं कि अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते तो यह चिंता का विषय है। उस से भी अधिक गंभीर विषय यह है कि अपनी बात रखने वालों को इतना प्रताड़ित किया जाए कि वह प्रदेश छोड़ कर जाने को मजबूर हो जाये।

लेकिन ऐसे हालात में भी मुख्य धारा के मीडिया के पास केवल बॉलीवुड के एक अभिनेता की आत्महत्या की ख़बर दिखाने को ही समय है। देश के सबसे बड़े प्रदेश का एक डॉक्टर दूसरे प्रदेश चला जाये, या एक युवा छात्र प्रदेश छोड़ने की बात करे, ऐसी खबरों के लिए कोई महत्व नहीं दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश से अगर किसी ख़बर को प्राथमिकता दी भी जा रही तो मुख्यमंत्री द्वारा एक संग्रालय के नाम बदलने को, बढ़ती बेरोज़गारी और महिला हिंसा जैसे मुद्दों पर तो चर्चा ही ख़त्म हो गई है।

क्या है पूरा मामला, कौन हैं ज़ाकिर अली त्यागी?

उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में रहने वाले 21 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकारिता के छात्र हैं ज़ाकिर अली त्यागी। ज़ाकिर को पुलिस ने 25 अगस्त को गौकाशी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था। उसी दिन उनको जेल भेज दिया गया। वह क़रीब 16 दिन के बाद 10 सितंबर को जेल से रिहा हुए।

इससे पहले ये नगरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में सक्रिय रहे। ज़ाकिर त्यागी ने कहा कि वह अब उत्तर छोड़ने पर मजबूर हैं। क्यूँकि उनको दो ख़तरे महसूस हो रहे हैं। ज़ाकिर त्यागी का कहना है वह लगातार सत्ता से सवाल करते हैं, इस लिए उनको भविष्य में भी झूठे मुक़दमों में फँसा कर, दोबारा जेल भेजा सकता है।

इसके अलावा उन्होंने कहा की गौकाशी के मामले में उनको जेल भेजा गया। जबकि शिकायतकर्ता ने उनके ख़िलाफ़ नामज़द मुक़दमा भी नहीं किया था। ज़ाकिर त्यागी के अनुसार पुलिस ने उन पर गौकशी का झूठा आरोप लगाकर, उनकी जान को ख़तरे में डाल दिया है।

ज़ाकिर त्यागी के अनुसार जेल से रिहा होने के बाद, कट्टर हिन्दुत्व समर्थक मुझे गौकाशी का ज़िम्मेदार समझने लगे हैं। जिसकी वजह से मुझे महसूस होता है कि मेरी जान को यहाँ ख़तरा है। ज़ाकिर त्यागी कहते है कि उनको आशंका है किसी भी समय एक भीड़ आकर उनकी लिंचिंग कर सकती है। उनका कहना है उनको ऐसी आशंका इसलिए है कि गौ वंश की रक्षा में नाम पर पहले भी कई बार लोगों की लिंचिंग हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कथित आलोचना के आरोप में त्यागी को 2017 में भी जेल काटना पड़ी थी। उनका अब कहना है कि सत्ता में बैठे लोग लोकतांत्रिक ढंग से की गई आलोचना भी पसंद नहीं करते हैं। इसी लिए उन जैसे लोग, जो सत्ता से सवाल करते हैं, उनको झूठे मुक़दमों में फँसा कर जेल भेज दिया जा रहा है।

हाल में ही गोरखपुर के रहने वाले डॉ. कफ़ील ख़ान मथुरा जेल से रिहा होने के बाद, सीधे राजस्थान चले गए। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में सीएए के विरुद्ध एक प्रदर्शन में कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जेल में बंद डॉ कफ़ील ख़ान ने भी रिहाई के बाद कहा था कि, उत्तर प्रदेश में उनको ख़तरा है। डॉ कफ़ील के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस उनको दोबारा नये मुक़दमों में फँसा के जेल भेज सकती है।

बता दें अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर) के बाल रोग विभाग के डॉ. कफ़ील ख़ान उस वक़्त सुर्खियों में आए, जब वहां एक साथ बड़ी तादाद में बच्चों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई थी। डॉ. कफ़ील पहले मीडिया में एक हीरो की तरह सामने आए थे, जिनके प्रयासों से कई बच्चों की जान बचाई जा सकी। लेकिन इस मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा उन्हें दोषी मानकर निलंबित कर जेल भेज दिया गया था।

मौजूदा समय में डॉ. कफ़ील खान और ज़ाकिर अली त्यागी दोनों को योगी राज में ख़तरा महसूस हो रहा है। डॉ. कफ़ील जेल से सीधे ही उत्तर प्रदेश के बाहर चले गए। त्यागी अभी अपनी मां और भाइयों के साथ मेरठ में है, लेकिन ख़तरे की आशंका जाता रहे हैं और प्रदेश के बाहर जाना चाहते हैं। दोनो ही का कहना है की उनको सत्ता की आलोचना करने के लिए सज़ा देकर परेशान किया जाता रहा है।

अब इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि, क्या सत्ता से प्रश्न करना या उसकी आलोचना करना अपराध है? वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं की उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। यहाँ के हालात आपातकाल से ज़्यादा ख़राब हो चुके हैं। क़ानून का ग़लत तरीक़े से इस्तेमाल कर के असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है।

कई दशकों से उत्तर प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वाले शरत प्रधान कहते हैं कि, हैरत की बात है कि खुलेआम संविधान के विरुद्ध काम हो रहा है और सारा विपक्ष ख़ामोश बैठा है। उन्होंने कहाँ की विपक्ष कि ख़ामोशी का पूरा फ़ायदा उठाकर सत्ता पक्ष  संवैधानिक मूल्यों को ख़त्म कर रहा है।

कानपुर निवासी पूर्व सांसद सुभाषिनी अली कहती हैं कि योगी आदित्यनाथ सरकार से लोगों को इंसाफ़ की उम्मीद ख़त्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गौकशी के मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून का दुरुपयोग कर के अल्पसंख्यको और दलितों को फँसाया जा रहा है,यह एक चिंता का विषय है।

सुभाषिनी अली ने कहा कि डॉ कफ़ील के मामले में अदालत से आये फ़ैसले ने आशा की किरण दिखाई है। नौजवानों को निराशा होने की ज़रूरत नहीं है। हालाँकि सरकार से कोई उमीद करना व्यर्थ है। क्यूँकि कुलदीप सिंह सैंगर के मामले में सीबीआई के कहने में बावजूद उन्नाव के दोषी पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई करवाई नहीं हुई है।

वहीं क़ानून के माहिर भी मानते हैं कि मौजूदा वक़्त में युवा उत्तर प्रदेश में घुटन महसूस कर रहे हैं। मानवाधिकार कि प्रसिद्ध अधिवक्ता शुभांगी सिंह कहती हैं कि, लोकतंत्र में जनता अपने हित में सरकार बनाती है और जनता सरकार से प्रश्न करने का अधिकार भी होता है। यह अधिकार जनता का संवैधानिक अधिकार है।

सूचना और प्रौद्योगिकी के युग में युवा सोशल मीडिया के माध्यम से भी सत्ता से प्रश्न करते है। शुभांगी सिंह कहती ऐसे में अगर सोशल मीडिया के माध्यम से सत्ता से असहमति दर्ज कराने वाले युवाओं को इतना प्रताड़ित किया जाए कि, वह प्रदेश छोड़ने पर मजबूर हों यह निंदनीय और असंवैधानिक है। उन्होंने कहाँ प्रदेश में अराजकता बढ़ती जा रही है, और सवाल करने वालों को जेल भेजा जा रहा है। ऐसे में प्रदेश में नौजवान-युवा घुटन महसूस कर रहे हैं। यही वजह की प्रताड़ित लोग प्रदेश छोड़ने की बात कर रहे हैं।

 

 

Zakir Ali taygi
UP
yogi sarkar
subhashini ali
Dr Kafeel Khan
CAA

Related Stories

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

लाल क़िले पर गुरु परब मनाने की मोदी नीति के पीछे की राजनीति क्या है? 

शाहीन बाग़ की पुकार : तेरी नफ़रत, मेरा प्यार

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें

मेरठ: वेटरनरी छात्रों को इंटर्नशिप के मिलते हैं मात्र 1000 रुपए, बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे


बाकी खबरें

  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    यदि संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर पर आज वोट हो, तो क्या वो पास होगा?
    07 Oct 2021
    क्या संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रासंगिकता अब भी वही है जिस मकसद के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गई थी? या संयुक्त राष्ट्र संघ केवल ताकतवर देशों की कठपुतली बनकर रह गया है?
  •  David MacMillan,  Benjamin,
    भाषा
    अणुओं को बनाने का ‘हरित’ तरीका विकसित करने वाले लिस्ट, मैकमिलन को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार
    07 Oct 2021
    आणविक निर्माण का एक ‘‘सरल’’ नया तरीका खोजने के लिए दो वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दिये जाने की बुधवार को घोषणा की गई
  • Lakhimpur Kheri
    सबरंग इंडिया
    लखीमपुर खीरी: पत्रकार की मौत सुर्खियों में क्यों नहीं आ पाई?
    07 Oct 2021
    रमन कश्यप का परिवार न्याय चाहता है, उन पर कथित तौर पर राजनीतिक दबाव था
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 22,431 नए मामले, 318 मरीज़ों की मौत
    07 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.72 फ़ीसदी यानी 2 लाख 44 हज़ार 198 हुई | 
  • Lakhimpur Kheri
    डॉ. राजू पाण्डेय
    लखीमपुर खीरी की घटना में निहित चेतावनी को अनदेखा न करें!
    07 Oct 2021
    जब देश का शासन चला रहे महानुभाव प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपने आलोचकों के विरुद्ध हिंसा के लिए अपने समर्थकों को उकसाने लगें तो देश की जनता का चिंतित एवं भयभीत होना स्वाभाविक है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License