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भारत
राजनीति
डॉ. कफ़ील ख़ान पर फिर कार्रवाई, रिहाई से पहले रासुका लगाई
मथुरा की जेल में बंद बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर) के डॉ कफील खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं।  उत्तर प्रदेश सरकार ने मथुरा जेल से रिहाई से पहले इनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका) लगा दिया है। 
असद रिज़वी
14 Feb 2020
kafeel khan

मथुरा की जेल में बंद बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर) के डॉ. कफ़ील ख़ान की मुश्किलें बढ़ गई हैं, उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका) लगा दिया है। स्पेशल टास्क फोर्स (उप्र ) 29 जनवरी की रात को उनको मुम्बई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू ) में भड़काऊ भाषण देने के मामले में आरोपी डॉ कफील को 10 फरवरी को जमानत मिल गई थी।

 डॉ. कफ़ील पर 12 दिसंबर, 2019 को एएमयू  में संशोधित नागरिकता के  ख़िलाफ़ हुए  प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। हालंकि उनको  भड़काऊ भाषण देने के मामले में सीजेएम कोर्ट से ज़मानत 10 फरवरी को ही मिल गई थी। लेकिन जमानत के आदेश देर से पहुंचने के कारण गुरुवार को उनकी रिहाई नहीं हो सकी। उल्लेखनीय है कि सीजेएम कोर्ट ने उन्हें 60 हज़ार रुपये के 02 जमानत बांड के साथ सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट द्वारा डॉ कफील को हिदायत दी थी की वो भविष्य में इस तरह की घटना को नहीं दोहराएंगे।

शुक्रवार सुबह उनका परिवार जब रिहाई के लिए दोबारा जेल गया तो वहां बताया गया कि डॉ.कफील खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका) लगा दिया है। इस लिए उनकी रिहाई नहीं हो सकती है। अब डॉ. कफील के परिवार का कहना है कि उनको जान बुझ कर प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके भाई अदील खान का आरोप है कि डॉ. कफील पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार के  इशारे पर ( रासुका) लगा दिया है। बता दे की डॉ. कफील की पत्नी डॉ शाबिस्ता खान लगातार सोशल मीडिया पर अपने पति की गिरफ़्तारी का विरोध कर रही थी और लोगो से मदद मांग रही थी। आज सुबह भी डॉ शाबिस्ता खान ने ही डॉ. कफील के ट्विटर पर पोस्ट कर बताया के उनके पति पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई है।

न्यूज़क्लिक ने डॉ. कफील के भाई अदील खान से बात की तो उन्होंने आरोप लगाया कि  मथुरा जेल के अधिकारियो ने जानबूझ कर उनके भाई की रिहाई में देरी की थी। अदील खान के अनुसार सीजेएम कोर्ट के आदेश था कि  डॉ. कफील को 24 घंटे के अंदर रिहा किया जाये। लेकिन जेल प्रशासन ने उनको चार दिन तक रिहा नहीं किया। 

उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि उनको रिहाई के लिए जेल प्रशासन के खिलाफ  कोर्ट में  अवमानना की अर्ज़ी  भी देना पड़ी थी। जिस पर डॉ. कफील की तुरंत रिहाई के लिए कोर्ट से एक प्रतिनिधि भी जेल भेजा था। लेकिन जमानत के आदेश देर से पहुंचने के कारण गुरुवार को रिहाई नहीं हो सकी और फिर आज शुक्रवार की सुबह 6 बजे जेल प्रशसन को डॉ. कफील की रिहाई के आदेश दे दिए गए।  जिसके बाद जेल प्रशसन ने सुबह 9 बजे बताया की  डॉ. कफील पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका) लगा है और इस लिए अब उनको रिहा नहीं किया जा सकता है। अदील खान ने बताया की जेल में डॉ. कफील की रासुका का नोटिस प्राप्त करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती देंगे, क्योकि अदालत के अलावा उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं।

बता दें कि गोरखपुर के रहने वाले डॉ कफील को 29 जनवरी को संशोधित नागरिकता के ख़िलाफ़ "मुंबई बाग" में होने वाले प्रदर्श में हिस्सा लेने गए थे। लेकिन प्रदर्शन ने पहले ही एयरपोर्ट पर उनको स्पेशल टास्क फोर्स (उप्र) ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए जाने के बाद डॉ कफील ने कहा था, 'मुझे गोरखपुर के बच्चों की मौत के मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है और अब मुझको दोबारा से आरोपी बनाने की कोशिश की जा कर रही हैं। डॉ कफील ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि उनको  महाराष्ट्र में रहने दे क्योकि उनको (उप्र ) पुलिस पर भरोसा नहीं है।

पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे में कहा गया कि एएमयू में अपने भाषण में डॉ. कफील खान ने कथित तौर पर कहा था कि 'मोटा भाई' सबको हिंदू और मुसलमान बनने की सीख दे रहे हैं, इंसान बनने की नहीं , इसके अलावा उन्होंने  यह भी कहा था कि संशोधित नागरिकता क़ानून  के खिलाफ संघर्ष हमारे वजूद की लड़ाई है। डॉ  कफील खान को गिरफ्तारी को लेकर यूपी एसटीएफ पर सवाल भी उठे थे, जबकि  पुलिस का कहना था कि सिर्फ़ न्यायिक प्रक्रिया के तहत डॉ कफील खान की गिरफ्तारी किया गया है।

वर्ष अगस्त 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज (गोरखपुर) के प्रवक्ता एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा.कफील उस समय मीडिया की सुर्खी बन गए थे जब वहां एक साथ बड़ी तादाद में बच्चों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई थी। इस मामले में राज्य सरकार द्वारा उन्हें दोषी मानकर निलंबित कर जेल भेज दिया था।

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