NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
10,000 लापता तमिल हिंसा में मारे गए
श्रीलंकाई अधिकारियों ने हजारों तमिलों के लापता होने में राज्य की मिलीभगत को स्वीकार किया है। 2009 में देश में गृह युद्ध समाप्त होने के बाद पहली बार इन्हें अब मृत घोषित किया गया है।
पीपल्स डिस्पैच
23 Jan 2020
Gotabaya Rajapaksa

2009 में समाप्त हुए श्रीलंकाई गृहयुद्ध के एक दशक से अधिक समय गुज़रने के बाद राष्ट्रपति गोताबाया राजपाक्षे ने आख़िरकार 10,000 तमिलों के मौत की बात को स्वीकार कर लिया है जो जातीय हिंसा के दौरान लापता हो गए थे। पहला ऐसा मौक़ा है जब किसी उच्च अधिकारी ने तमिल समाज के लोगों की गुमसुदगी और उनकी मौत के मामले में सरकार के मिलीभगत को लेकर ये बात स्वीकारी है।

राजपाक्षे उस वक़्त खुद रक्षा सचिव थे जब श्रीलंकाई सरकार ने देश के उत्तरी हिस्से को नियंत्रित करने वाले लिब्रेशन टाइगर ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के नेतृत्व में तमिल सैनिकों के ख़िलाफ़ अपना क्रूर अभियान शुरू किया था। उन पर कई मानव अधिकारों के समूहों द्वारा सामूहिक हत्याओं के करने, जबरन गुमसुदगी और मारने का आरोप लगाया गया है लेकिन राजपाक्षे ने अपने ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों से बार-बार इनकार किया है।

वास्तव में, राजपाक्षे के नेतृत्व वाली श्रीलंकाई सरकार द्वारा स्वीकार किया गया हालिया बयान भी ऐसे समय में आया है जब उनकी पार्टी एक ऐसा कानून लाने की कोशिश कर रही है जो उन लोगों को रक्षा प्रदान करेगा जो गृह युद्ध के दौरान होने वाली व्यापक हिंसा के लिए ज़िम्मेदार थे।

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, राजपाक्षे ने कोलंबो में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि के सामने कहा कि उनकी सरकार तमिलों को आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र प्रदान करने की पहल कर रही है।

1983 में हिंसक रूप लेने वाले सिंहली और तमिलों के बीच 26 साल के नस्लीय संघर्ष में हिंसा ने लगभग एक लाख लोगों की जान ले ली। हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अनुसार, श्रीलंका की सेना तमिलों के ख़िलाप़ "गैर-कानूनी हत्याओं, गुमसुदगी और लिंग आधारित हिंसा में में शामिल है।"

2007 और 2009 के बीच की अवधि ये संघर्ष जब अपने आखिरी चरण में था तब इसे उपमहाद्वीप में सबसे बुरे अनुभव के तौर पर बताया गया है जिसमें तमिल समुदाय के खिलाफ सरकारी सैनिकों द्वारा किए गए अत्याचारों के भयानक प्रमाण मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस संघर्ष पर अपनी कई रिपोर्टों में स्वीकार किया है कि कैसे सरकारी सैनिक व्यवस्थित रूप से नागरिकों को मार रहे हैं: "भारी मात्रा में हथियारों को भी 'नो फायर जोन' में बार-बार लॉन्च किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 70,000 तमिल नागरिक मारे गए थे।"

साभार : पीपल्स डिस्पैच

Gotabaya Rajapaksa
Srilanka
Srilanka Tamil Problem
Violence in Srilanka
Tamil killed in srinlanka
Srilanka Government
Tamil Citizens

Related Stories

श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी

श्रीलंका में हिंसा में अब तक आठ लोगों की मौत, महिंदा राजपक्षे की गिरफ़्तारी की मांग तेज़

आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे का इस्तीफ़ा, बुधवार तक कर्फ्यू लगाया गया

श्रीलंका में कर्फ्यू, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफ़ा दिया

आइएमएफ की मौजूदगी में श्रीलंका के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को ख़तरा 

रूस-यूक्रैन संघर्षः जंग ही चाहते हैं जंगखोर और श्रीलंका में विरोध हुआ धारदार

कौन हैं गोटाबाया राजपक्षे, जिसने पूरे श्रीलंका को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है

श्रीलंका का संकट सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी

श्रीलंका के नए वित्त मंत्री ने नियुक्ति के एक दिन बाद इस्तीफ़ा दिया

श्रीलंका में सत्ता पर राजपक्षे की पकड़ कमज़ोर हुई


बाकी खबरें

  • एम. के. भद्रकुमार
    पुतिन की अमेरिका को यूक्रेन से पीछे हटने की चेतावनी
    29 Apr 2022
    बाइडेन प्रशासन का भू-राजनीतिक एजेंडा सैन्य संघर्ष को लम्बा खींचना, रूस को सैन्य और कूटनीतिक लिहाज़ से कमज़ोर करना और यूरोप को अमेरिकी नेतृत्व पर बहुत ज़्यादा निर्भर बना देना है।
  • अजय गुदावर्ती
    भारत में धर्म और नवउदारवादी व्यक्तिवाद का संयुक्त प्रभाव
    28 Apr 2022
    नवउदारवादी हिंदुत्व धर्म और बाजार के प्रति उन्मुख है, जो व्यक्तिवादी आत्मानुभूति पर जोर दे रहा है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन
    28 Apr 2022
    वाम दलों ने धरने में सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ व जनता की एकता, जीवन और जीविका की रक्षा में संघर्ष को तेज़ करने के संकल्प को भी दोहराया।
  • protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन
    28 Apr 2022
    वाम दलों ने आरएसएस-भाजपा पर लगातार विभाजनकारी सांप्रदायिक राजनीति का आरोप लगाया है और इसके खिलाफ़ आज(गुरुवार) जंतर मंतर पर संयुक्त रूप से धरना- प्रदर्शन किया। जिसमे मे दिल्ली भर से सैकड़ों…
  • ज़ाकिर अली त्यागी
    मेरठ : जागरण की अनुमति ना मिलने पर BJP नेताओं ने इंस्पेक्टर को दी चुनौती, कहा बिना अनुमति करेंगे जागरण
    28 Apr 2022
    1987 में नरसंहार का दंश झेल चुके हाशिमपुरा का  माहौल ख़राब करने की कोशिश कर रहे बीजेपी नेताओं-कार्यकर्ताओं के सामने प्रशासन सख़्त नज़र आया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License