NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
आज़ादी के 75वर्ष: 9 अप्रैल से इप्टा की ‘‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’
भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) आज़ादी के 75 साल के मौके पर ‘‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ निकालने जा रहा है। यह यात्रा 9 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के रायपुर से शुरू होकर तमाम राज्यों में होती हुई 22 मई को मध्यप्रदेश के इंदौर में संपन्न होगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Apr 2022
 cultural tour

भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) आज़ादी के 75 साल के मौके पर ‘‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ निकालने जा रहा है। यह यात्रा 9 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के रायपुर से शुरू होकर तमाम राज्यों में होती हुई 22 मई को मध्यप्रदेश के इंदौर में संपन्न होगी। इस सांस्कृतिक जनसंवाद यात्रा के दौरान जगह-जगह गीत, संगीत, फ़िल्म, किस्सागोई के कार्यक्रम होंगे। आम लोगों को भी अपने गीत, कविता, नाटक, पोस्टर, पेंटिंग इत्यादि के साथ इस यात्रा में शिरकत करने की अपील की गई है।

इप्टा की इस मुहिम, इस अभियान को अन्य लेखक व सांस्कृतिक संगठनों प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), जनवादी लेखक संघ (जलेस), जन संस्कृति मंच (जसम), दलित लेखक संघ (दलेस) और जन नाट्य मंच (जनम) ने भी अपना सहयोग और समर्थन दिया है।   

इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा ने इस सांस्कृतिक यात्रा को लेकर जनता के नाम एक बयान या कहें कि निमंत्रण पत्र जारी किया है, जिसमें इस यात्रा के कार्यक्रम की रूपरेखा के अलावा इस यात्रा की ज़रूरत को रेखांकित किया है। यह इस प्रकार है—

एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाज़े दो

अब तुम पर कौन सी तुम आवाज़ सुनों तुम क्या मानों

दोस्तो,

आज़ादी के 75 साल के मौके पर निकलने वाली ‘‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ असल में स्वतंत्रता संग्राम के गर्भ से निकले स्वतंत्रता - समता - न्याय और बंधुत्व के उन मूल्यों के तलाश की कोशिश है, जो आजकल नफ़रत, वर्चस्व और दंभ के तुमुल कोलाहल में डूब से गये हैं। हालांकि वो हमारे घोषित संवैधानिक आदर्शों में झिलमिलाते हुये हर्फ़ों के रूप में, गांधी के प्रार्थनाओं और आंबेडकर की प्रतिज्ञाओं के रूप में हमारी आशाओं में अभी भी चमक रहे हैं। इन्हीं का दामन पकड़कर हमारे किसान, मजदूर, लेखक, कलाकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता गांधी के अंहिसा और भगत सिंह के अदम्य शौर्य के सहारे अपनी कुर्बानी देते हुए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में डटे हैं।

यह यात्रा उन तमाम शहीदों, समाज सुधारकों एवं भक्ति आंदोलन और सूफ़ीवाद के पुरोधाओं का सादर स्मरण है, जिन्होंने भाषा, जाति, लिंग और धार्मिक पहचान से इतर मानव मुक्ति एवं लोगों से प्रेम को अपना एकमात्र आदर्श घोषित किया।

प्रेम जो उम्मीद जगाता है, प्रेम जो बंधुत्व, समता और न्याय की पैरोकारी करता है, प्रेम जो कबीर बनकर पाखंड पर प्रहार करता है, प्रेम जो भाषा, धर्म, जाति नहीं देखता और इन पहचानों से मुक्त होकर धर्मनिरपेक्षता का आदर्श बन जाता है।

आइए... ‘ढाई आखर प्रेम की’ इस यात्रा के बहाने बापू के पास चलें, भगत, अशफ़ाक़, बिस्मिल और अनेकानेक शहीदों के पास चलें। उस हिंदुस्तान में चलें जो आंबेडकर और नेहरू के ख्वाब में पल रहा था, जो विवेकानंद के नव वेदांत और रविन्द्रनाथ टैगोर के उद्दात मानवतावादी आदर्शों में व्यक्त हो रहा था। मानवतावाद जो अंधराष्ट्रवादी - मानवद्रोही विचार को चुनौती देते हुए टैगोर के शब्दों में ‘‘उन्नत भाल और भय से मुक्त विचार’’ में मुखरित हो रहा था। जहां ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले फातिमा शेख़ और पंडिता रमाबाई जैसे लोग ज्ञान के सार्वभौम अधिकार के लिए लड़ रहे थे। जो आज तक भी हासिल नहीं किया जा सका है। वहीं अंधविश्वास और रूढ़िवाद के खिलाफ ईश्वरचंद्र विद्यासागर, राम मोहन राय, पेरियार ईवी रामासामी सरीखे लोग तर्क बुद्धि और विवेक का दामन पकड़कर एक तर्कशील हिंदुस्तान के रास्ते चल रहे थे। यह रास्ता प्रेम का ज्ञान का रास्ता है।

इन्हीं सूत्रों को पकड़ कर एक तरफ प्रेमचंद और सज्जाद ज़हीर के नेतृत्व में 9 अप्रैल 1936 में प्रलेस की स्थापना हुई जिसे राहुल सांकृत्यायन, यशपाल आदि ने आगे बढ़ाया। 1942 के ‘‘भारत छोड़ो आंदोलन’’ और दूसरी ओर बंगाल के अकाल पीड़ितों की सहायता के लिए देश भर के कलाकार एकजुट हुए और ‘‘नबान्न’’ नाटक के साथ इप्टा की यात्रा शुरू हुई।

हमारी यह यात्रा उसी सिलसिले को आगे बढ़ाने वाली और नफ़रत के बरक्स प्रेम, दया करुणा, बंधुत्व, समता और न्याय से परिपूर्ण हिंदुस्तान के स्वप्न को समर्पित है। जिसे हम और आप मिलकर बनाएंगे। जो बनेगा जरूर।

वो सुबह कभी तो आयेगी...!

वो सुबह हमीं से आयेगी....!!

कला जनता के नाम एक प्रेमपत्र है वहीं सत्ता के नाम अभियोगपत्र भी। आइए आज़ादी के 75वें साल में हम सब मिल कर आज़ादी की लड़ाई के जाने-अनजाने योद्धाओं, लेखकों और कलाकारों को बार बार याद करें और उनकी बनाई राह पर चलें। यह यात्रा पूरी तरह जन सहयोग पर आधारित है। आप यात्रा के किन्ही पड़ावों पर गीत, कविता, नुक्कड़, लघु नाटक, पोस्टर, पेंटिंग के साथ शामिल हो सकते हैं, यात्रा के समर्थन में अपने स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं और कुछ नही तो यथासंभव आर्थिक सहयोग कर सकते हैं।

राकेश, महासचिव, इप्टा। 

IPTA
Indian Public Theater Association
Dhaai Akshar Prem Ki
cultural tour
ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा
75 years of Independence

Related Stories

प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के साथ लोगों में ग़लत के ख़िलाफ़ ग़ुस्से की चेतना भरना भी ज़रूरी 

इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी

समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा

नफ़रत के बीच इप्टा के ‘’ढाई आखर प्रेम के’’

साहित्य और संघर्ष: क्रन्तिकारी पहल की शुरुआत


बाकी खबरें

  • vyapam
    भाषा
    व्यापमं घोटाला : सीबीआई ने 160 और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया
    18 Feb 2022
    केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2013 के प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में धांधली करने के आरोप में 160 और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया है। आरोपियों में प्रदेश के तीन निजी मेडिकल…
  • Modi
    बी सिवरमन
    मोदी के नेतृत्व में संघीय अधिकारों पर बढ़ते हमले
    18 Feb 2022
    मोदी सरकार द्वारा महामारी प्रबंधन के दौरान अनुच्छेद 370 का निर्मम हनन हो, चाहे राज्यों के अधिकारों का घोर उल्लंघन हो या एकतरफा पूर्ण तालाबंदी की घोषणा हो या फिर महामारी के शुरुआती चरणों में अत्यधिक…
  • kannauj
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: कन्नौज के पारंपरिक 'इत्र' निर्माता जीवनयापन के लिए कर रहे हैं संघर्ष
    18 Feb 2022
    कच्चे माल की ऊंची क़ीमतें और सस्ते, सिंथेटिक परफ्यूम के साथ प्रतिस्पर्धा पारंपरिक 'इत्र' निर्माताओं को पहले से कहीं अधिक प्रभावित कर रही है।
  • conteniment water
    सौरभ शर्मा
    यूपी चुनाव: कथित तौर पर चीनी मिल के दूषित पानी की वजह से लखीमपुर खीरी के एक गांव में पैदा हो रही स्वास्थ्य से जुड़ी समस्यायें
    18 Feb 2022
    लखीमपुर खीरी ज़िले के धरोरा गांव में कथित तौर पर एक चीनी मिल के कारण दूषित होते पानी के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गांव के लोग न सिर्फ़ स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, बल्कि…
  • voting
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: न ध्रुवीकरण हो रहा, न लाभार्थी कार्ड चल रहा, न मोदी जी जनता से कनेक्ट कर पा रहे
    18 Feb 2022
    तीसरे चरण की तैयारियों के बीच मोदी जी की लखीमपुर रैली रद्द होना भाजपा के लिए बड़ा झटका।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License