NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
'राम के नाम पर बहुसंख्यक की आक्रमकता और धर्म का राजनीतिकरण, संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर हमला'
वाम दलों का कहना है कि भूमि पूजन सरकार का नहीं, मंदिर ट्रस्ट का काम है। भाकपा माले ने राम मंदिर भूमि पूजन समारोह को सरकारी आयोजन में तब्दील कर देने और उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार की इसमें पूर्ण भागीदारी के खिलाफ देशव्यापी प्रतिवाद किया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Aug 2020
left party protest

अयोध्या में आज 5 अगस्त को राम जन्मभूमि पूजन हुआ। इस पूजा में देश के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री समेत पूरी सरकार की सक्रियता थी। इसको लेकर देश की तमाम वामपंथी पार्टियों ने अपना विरोध जताया और कहा भूमि पूजन सरकार का नहीं, मंदिर ट्रस्ट का काम है। वामपंथी दल भाकपा माले ने राम मंदिर भूमि पूजन समारोह को सरकारी आयोजन में तब्दील कर देने और उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार की इसमें पूर्ण भागीदारी के खिलाफ देशव्यापी प्रतिवाद किया और इसे काला दिवस की संज्ञा दी।  
 

माले ने कहा 'राम के नाम पर बहुसंख्यक की आक्रमकता और धर्म का राजनीतिकरण, संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर हमला है।'

बिहार की राजधानी पटना में माले राज्य कार्यालय में माले राज्य सचिव कुणाल, विधायक दल के नेता महबूब आलम सहित पूरे बिहार में माले नेताओं ने प्रदर्शन किया और इसे संविधान की मूल मान्यताओं पर हो रहा हमला बताया।

90bd9713-d02a-4345-babb-ea914ea2160d.jpg

बिहार राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि राम के नाम पर बहुसंख्यक की आक्रमकता और धर्म व राजनीति का घालमेल देश के संविधान के धर्मनिरपेक्ष चरित्र पर हमला है। भारतीय संविधान की मूल भावना को सोच समझ कर नष्ट करने का यह कृत्य है।

उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले ने मंदिर निर्माण की राह खोली थी, उसी फैसले में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढाहने की आपराधिक कृत्य के रूप में स्पष्ट तौर पर आलोचना की गयी है। केंद्र सरकार का प्रधानमंत्री के स्तर पर भूमि पूजन में शरीक होना, उस अपराध को वैधता प्रदान करने की कार्यवाही है। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धान्त का मखौल उड़ाना तो है ही, भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर भी हमला है।

4edf432d-5eac-4084-bc5c-94ec0bc855d7.jpg

माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने इस मौके पर कोरोना माहमारी को लेकर सवाल उठाए और कहा कि अयोध्या में आज का आयोजन केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी कोविड-19 से बचाव के प्रोटोकॉल का भी उल्लंघन है, जिसमें धार्मिक आयोजनों, बड़े जुटान एवं 65 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की भागीदारी पर रोक है। अयोध्या में पुजारी और तैनात पुलिस वालों का कोरोना पॉज़िटिव पाया जाना, बढ़ती महामारी के बीच लोगों को आमंत्रित करने से मानव जीवन के लिए पैदा किए जा रहे खतरे को रेखांकित करता है। राम मंदिर को कोरोना वारस का इलाज बताने वाले भाजपा नेताओं के बयान संघ-भाजपा की धर्मांधता और कोरोना महामारी के बीच सरकार की अनुपयुक्त प्राथमिकताओं को ही दर्शाते हैं। जब कोरोना के केस दिन दूनी-रात चौगुनी गति से बढ़ रहे हैं, तब सरकार अपनी पूर्ण विफलता को लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ के जरिये ढंकना चाहती है।

8b204ed1-cb56-4173-9d96-dcf5066ac083.jpg

धीरेन्द्र झा ने कहा कि धर्म का राजनीतिकरण करने और जन स्वास्थ्य के बजाय धार्मिक आयोजन को प्राथमिकता देने के मोदी सरकार की कार्यवाही को खारिज करना होगा और धर्मनिरपेक्षता व न्याय के संवैधानिक उसूलों को बुलंद करना हम जारी रखेंगे।
 

इससे पहले अन्य वाम दलों ने भी इस आयोजन में सरकारी भागीदारी को लेकर अपनी आपत्ति जाता चुके है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने 3 अगस्त को जारी अपने बयान में इसकी आलोचना की थी। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने एक के बाद एक ट्वीट कर भूमि पूजन के इस अयोजन को लेकर सरकार पर हमला बोला।
 

 

Covid-19 is raging across the country. The preventive protocol stipulated by the Union Home Ministry rules out religious gatherings. Reports of priests and policemen deployed in Ayodhya testing Covid positive only highlights the risks to human lives (4/n) https://t.co/mGRSW8jbAj

— Sitaram Yechury (@SitaramYechury) August 3, 2020

उन्होंने लिखा कि सीपीआई-एम हमेशा से मानती रही है कि अयोध्या विवाद का हल या तो बातचीत से हो या फिर कोर्ट द्वारा। और कोर्ट ने इसका फैसला कर मंदिर निर्माण की अनुमति दी है। "
इसके साथ ही येचुरी ने कोरोना काल में हो रहे इस भव्य आयोजन पर गंभीर सवाल उठाए और लोगों से संविधान की रक्षा करने की भी अपील की।
 

 

सीपीआई ने भी बयान जारी किया और लगभग वही सवाल उठाए जो सीपीएम और भाकपा माले ने उठाए।
 cpi.PNG

वाम दलों के विरोध के प्रमुख बिन्दु और सवाल इस प्रकार है:-

- उच्चतम न्यायालय जिसने अयोध्या की जमीन मंदिर ट्रस्ट को दी, उसने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद का ढहाया जाना एक अपराध था। भारत के प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनकी सरकारें, शिलान्यास में शामिल होकर उस आपराधिक कृत्य का राजनीतिक लाभ क्यूँ उठाना चाहते हैं? भारत के नागरिक के तौर पर हम बाबरी मस्जिद गिराने के अपराधियों को राजनीतिक लाभ नहीं सज़ा दिये जाने की मांग करते हैं।  

- अनलॉक-3 के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी धार्मिक आयोजनों पर रोक है और 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को घर पर और भीड़भाड़ से अलग रहने की सलाह दी गयी है। जब 69 वर्षीय प्रधानमंत्री इन दिशा निर्देशन का उल्लंघन करते हैं और धार्मिक समारोह में शामिल होते हैं, क्या वे सभी भारतीयों को कोरोना से बचाव के दिशा-निर्देशों को अनदेखा करने और उनका उल्लंघन करने के लिए उकसा नहीं रहे हैं ?

- भारत का संविधान इस बात में दृढ़ है कि धर्म और राजनीति का मिश्रण नहीं होना चाहिए। तब भारत के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री क्यूँ एक मंदिर के भूमिपूजन समारोह से राजनीतिक लाभ बटोरने की कोशिश कर रहे हैं?

- पूरा देश कोविड-19 और लॉकडाउन संकट से जूझ रहा है, साथ ही बाढ़ भी झेल रहा है, जो हर साल अपने साथ अन्य महामारियां भी लाती है. ऐसे समय में जनता को इन जानलेवा संकटों से बचाने के बजाय भारत के प्रधानमंत्री, मंदिर के शिलान्यास समारोह को राजनीतिक मंच में तब्दील करने में क्यूँ व्यस्त हैं?

- सरकार को धार्मिक आयोजनों से दूर रहना होगा. राम मंदिर को कोरोना वायरस का इलाज बताकर अंधविश्वास फैलाना बन्द किया जाए। कोरोना नियंत्रण में विफलता को लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ के जरिये ढंकना बंद किया जाए और धर्म का राजनीतिकरण करना बंद हो। साथ ही, जन स्वास्थ्य को प्रमुखता दी जाए। 

 

CPI
CPIM
Ram Mandir
ayodhaya case
babri masjid
ayodhya bhumipujan
Indian democracy
mejoritarianism in-ndia
CPI(ML)

Related Stories

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

राम मंदिर के बाद, मथुरा-काशी पहुँचा राष्ट्रवादी सिलेबस 

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

झारखंड : हेमंत सरकार को गिराने की कोशिशों के ख़िलाफ़ वाम दलों ने BJP को दी चेतावनी


बाकी खबरें

  • sudan
    पीपल्स डिस्पैच
    सूडान: सैन्य तख़्तापलट के ख़िलाफ़ 18वें देश्वयापी आंदोलन में 2 की मौत, 172 घायल
    17 Feb 2022
    इजिप्ट इस तख़्तापलट में सैन्य शासन का समर्थन कर रहा है। ऐसे में नागरिक प्रतिरोधक समितियों ने दोनों देशों की सीमाओं पर कम से कम 15 जगह बैरिकेडिंग की है, ताकि व्यापार रोका जा सके।
  • muslim
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    मोदी जी, क्या आपने मुस्लिम महिलाओं से इसी सुरक्षा का वादा किया था?
    17 Feb 2022
    तीन तलाक के बारे में ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना, तब, जब मुस्लिम महिलाओं को उनकी पारंपरिक पोशाक के एक हिस्से को सार्वजनिक चकाचौंध में उतारने पर मजबूर किया जा रहा है, यह न केवल लिंग, बल्कि धार्मिक पहचान पर भी…
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब चुनाव में दलित-फैक्टर, सबको याद आये रैदास
    16 Feb 2022
    पंजाब के चुनाव से पहले प्रधानमंत्री मोदी सहित सभी पार्टियों के शीर्ष नेता बुधवार को संत रैदास के स्मृति स्थलों पर देखे गये. रैदास को चुनावी माहौल में याद करना जरूरी लगा क्योंकि पंजाब में 32 फीसदी…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: मोदी की ‘आएंगे तो योगी ही’ से अलग नितिन गडकरी की लाइन
    16 Feb 2022
    अभी तय नहीं कौन आएंगे और कौन जाएंगे लेकिन ‘आएंगे तो योगी ही’ के नारों से लबरेज़ योगी और यूपी बीजेपी के समर्थकों को कहीं निराश न होना पड़ा जाए, क्योंकि नितिन गडकरी के बयान ने कई कयासों को जन्म दे दिया…
  • press freedom
    कृष्ण सिंह
    ‘दिशा-निर्देश 2022’: पत्रकारों की स्वतंत्र आवाज़ को दबाने का नया हथियार!
    16 Feb 2022
    दरअसल जो शर्तें पीआईबी मान्यता के लिए जोड़ी गई हैं वे भारतीय मीडिया पर दूरगामी असर डालने वाली हैं। यह सिर्फ किसी पत्रकार की मान्यता स्थगित और रद्द होने तक ही सीमित नहीं रहने वाला, यह मीडिया में हर उस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License