NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकाः कच्चे तेल की क़ीमत में ऐतिहासिक गिरावट, पहली बार निगेटिव में पहुंचे दाम
क़ीमतों में ऐतिहासिक गिरावट यह स्पष्ट करती है कि वैश्विक तेल उत्पादन में प्रतिदिन 15 मिलियन बैरल की दर से कम करने की ओपेक प्लस देशों की डील पर्याप्त नहीं है। उत्पादन में कमी लाने को लेकर यह समझौता कोरोना वायरस महामारी के चलते मांग में कमी को देखते हुए किया गया था।
पीपल्स डिस्पैच
21 Apr 2020
USA

अमेरिका (डब्ल्यूडीआई) में मई महीने के लिए कच्चे तेल की क़ीमत सोमवार 20 अप्रैल को -37 डॉलर प्रति बैरल के अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई जो इतिहास में सबसे कम है। इस गिरावट ने उत्पादकों में चिंता बढ़ा दी हैं। उनका मानना है कि वैश्विक रणनीतिक भंडार पूरी तरह भर जाने के बाद मौजूदा मांग ख़त्म हो जाएंगी।

जून महीने के लिए क़ीमतों में लगभग 21 डॉलर तक गिरावट आ गई। इससे अमेरिका में तेल उत्पादन पूरी तरह से बंद हो जाएगा। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है।

ग्लोबल प्राइसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्रेंट क्रूड ऑयल की क़ीमतें कल भी 26 डॉलर के आसपास ही थी।

अमेरिका में पिछले कुछ हफ्तों में रिग उत्पादन में 35% की कमी आई है। अमेरिका में प्रति बैरल क्रूड शेल के उत्पादन की औसत लागत लगभग 23 डॉलर है और कंपनियों को इसे भेदने के लिए आमतौर पर लागत दोगुनी करने की आवश्यकता होती है।

अमेरिकी सरकार को तेल उत्पादकों को अपने कर्मचारियों को काम पर रखे रहने के लिए एक बड़ी राहत देनी पड़ सकती है, अगर सरकार देश के बेरोज़गारों की संख्या को नियंत्रण में रखना चाहती है। कोरोना वायरस महामारी के कारण आपातकाल की घोषणा के चार सप्ताह के भीतर 22 मिलियन से अधिक लोग पहले से ही बेरोज़गार हो चुके हैं।

इस साल के आख़िर में ट्रम्प के चुनाव पर उच्च बेरोज़गारी दर का प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक क़ीमतों में गिरावट रहने का मतलब यह हो सकता है कि अपने घरेलू तेल उद्योग को बचाए रखने के लिए अमेरिका को या तो आयात पर निर्भर रहना होगा या विदेशी तेल पर भारी टैरिफ तब तक लगाना होगा जब तक कि वह तेल निकालने के सस्ते तरीके विकसित न कर ले।

अमेरिकी सरकार ने कोरोना वायरस महामारी के बाद लगाए गए लॉकडाउन के कारण मांगों के अभाव में अपने रणनीतिक भंडार को भरने के लिए उत्पादन ख़रीदकर क़ीमतों को बरक़रार रखने की कोशिश की है। यह दुनिया के सबसे प्रभावित देश है जहां इससे संक्रमण के 7,98,000 से अधिक मामले सामने आए हैं जबकि 42,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

पिछले सप्ताह अमेरिकी दबाव में ओपेक प्लस देशों ने अपने दैनिक उत्पादन को 10 मिलियन बैरल तक कम करने की सहमति दी थी। इसके अलावा अन्य उत्पादकों से अतिरिक्त 5 मिलियन बैरल की कटौती करने की उम्मीद थी। हालांकि, ये कटौती पर्याप्त नहीं है क्योंकि मांगों में प्रति दिन 25-30 मिलियन बैरल तक नीचे जाने का अनुमान लगाया गया है। मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अभी भी बहुत अधिक है और इसलिए क़ीमतों में गिरावट जारी है। दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक सऊदी अरब पहले ही मई महीने के लिए अपने निर्यात कोटा को एक तिहाई तक कम करने का फैसला कर चुका है।

अन्य देशों ने अपने संबंधित रणनीतिक भंडार को भरने के लिए आयात कर लिया है। यह उम्मीद की जाती है कि दुनिया के सभी रणनीतिक भंडार जल्द ही भरे जाएंगे और यदि लॉकडाउन कुछ और हफ्तों तक जारी रहा तो दुनिया भर में लगभग 160 मिलियन बैरल तेल टैंकरों में होगा।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

USA
crude oil prices
Crude Oil
Donand Trump
Coronavirus

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

‘जनता की भलाई’ के लिए पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंतर्गत क्यों नहीं लाते मोदीजी!

प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा

कच्चे तेल की तलाश की संभावनाओं पर सरकार ने उचित ख़र्च किया है?

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?


बाकी खबरें

  • वसीम अकरम त्यागी
    विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी
    26 May 2022
    अब्दुल सुब्हान वही शख्स हैं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी के बेशक़ीमती आठ साल आतंकवाद के आरोप में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बिताए हैं। 10 मई 2022 को वे आतंकवाद के आरोपों से बरी होकर अपने गांव पहुंचे हैं।
  • एम. के. भद्रकुमार
    हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा
    26 May 2022
    "इंडो-पैसिफ़िक इकनॉमिक फ़्रेमवर्क" बाइडेन प्रशासन द्वारा व्याकुल होकर उठाया गया कदम दिखाई देता है, जिसकी मंशा एशिया में चीन को संतुलित करने वाले विश्वसनीय साझेदार के तौर पर अमेरिका की आर्थिक स्थिति को…
  • अनिल जैन
    मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?
    26 May 2022
    इन आठ सालों के दौरान मोदी सरकार के एक हाथ में विकास का झंडा, दूसरे हाथ में नफ़रत का एजेंडा और होठों पर हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद का मंत्र रहा है।
  • सोनिया यादव
    क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?
    26 May 2022
    एक बार फिर यूपी पुलिस की दबिश सवालों के घेरे में है। बागपत में जिले के छपरौली क्षेत्र में पुलिस की दबिश के दौरान आरोपी की मां और दो बहनों द्वारा कथित तौर पर जहर खाने से मौत मामला सामने आया है।
  • सी. सरतचंद
    विश्व खाद्य संकट: कारण, इसके नतीजे और समाधान
    26 May 2022
    युद्ध ने खाद्य संकट को और तीक्ष्ण कर दिया है, लेकिन इसे खत्म करने के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका को सबसे पहले इस बात को समझना होगा कि यूक्रेन में जारी संघर्ष का कोई भी सैन्य समाधान रूस की हार की इसकी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License