NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
भारत
राजनीति
अमित शाह का शाही दौरा और आदिवासी मुद्दे
भोपाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बुलाकर मेगा इवेंट किया गया। भोपाल एयरपोर्ट से लेकर भाजपा कार्यालय और जम्बूरी मैदान तक सुरक्षा, सजावट और स्वागत पर करीब 15 करोड़ खर्च किए गए। 
रूबी सरकार
23 Apr 2022
amit shah

भोपाल के जम्बूरी मैदान में तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस बांटने के नाम पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बुलाकर मेगा इवेंट किया गया। भोपाल एयरपोर्ट से लेकर भाजपा कार्यालय और जम्बूरी मैदान तक सुरक्षा, सजावट और स्वागत पर करीब 15 करोड़ खर्च किए गए। दरअसल इसे सरकारी दौरा बनाया गया। यह इवेंट पूरी तरह 2023 के चुनाव की तैयारी के लिए था। जिसमें पार्टी के नेताओं के साथ बैठक करना मुख्य काम था। बैठक में सत्ता और संगठन दोनों की क्लास लगी। शाह की क्लास में मध्य प्रदेश भाजपा के सभी पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहे। आगामी चुनाव को देखते हुए आदिवासी वर्ग को साधने के लिए काम करने के लिए पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया। 

आदिवासी भटकते रहे गेट पर, सुरक्षाकर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया

दूसरी तरफ जिनके लिए यह मेगा शो का आयोजन किया गया, उन्हें तो कार्यक्रम स्थल तक घुसने नहीं दिया गया। आदिवासियों को इस भीषण गर्मी में अलग-अलग जिलों से बसों में ठूंस कर लाने की जिम्मेदारी वन विभाग को दी गई। 

गाडरवारा रातीकरार वन ग्राम से आए सतीश मेहरा, राकेश मेहरा, रामस्वरूप मेहरा, तिरोत सिंह ठाकुर, बख्तू मेहरा, मोहनलाल गोंड, मंडोली नाई जैसे अनेक आदिवासी कार्यक्रम स्थल के बाहर खड़े रहे। इन लोगों ने बताया कि वे एक दिन पहले भोपाल के लिए चले। पूरी रात सफर तय करने के बाद सुबह कार्यक्रम स्थल पहुंचे। परंतु भीतर जाने नहीं दिया गया। इन लोगों का कहना है कि यहां पर कौन आ रहा है यह उन्हें नहीं मालूम, बस इतना कहा गया कि तेंदूपत्ते का बोनस मिलेगा। पैसे के खातिर यहां आए हैं।

बख्तू मेहरा

टंटू लाल गोंड, धनराज मेहरा, मोहनलाल, मंडोली नाई जैसे आदिवासियों का भी यही हाल देखा गया। इन लोगों ने कहा कि हमसे बोला गया कि वन ग्रामों को मान्यता देंगे। आदिवासियों को पट्टा मिलेगा। जंगल पर हमारा अधिकार होगाा। यही सब सुनकर यहां आए हैं। परंतु यहां अंदर जाने को ही नहीं मिल रहा।

सिवनी जिले के गोंड आदिवासी सुखराम धुर्वे वन सुरक्षा समिति के सदस्य है। धुर्वे ने कहा कि उसे तो भोपाल बुलाया ही नहीं गया। उन्होंने कहा, राज्य सरकार द्वारा एक ही बार में करीब एक हजार वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की बात सुनी है। परंतु यह तो जंगल को बढ़ाने की बजाय घटाना हुआ। राज्य सरकार आदिवासियों को जंगलों का मालिक बनाने की बात करती है परंतु तीन लाख, 60 से अधिक पट्टे अदालत में विचाराधीन है। इसमें व्यक्तिगत व सामुदायिक दोनों तरह के पट्टे शामिल है, सरकार उसकी पहल नहीं करती। वन सुरक्षा समिति को जंगल से कमाई का 20 फीसदी हिस्सा देने की बात करती है। लेकिन समिति का सारा हिसाब-किताब वन विभाग के रेंजर के पास होता है। वह जब चाहे समिति के अध्यक्ष को बुलाकर अंगूठा लगवा लेता है। सिवनी जिले के लखनादौन विकासखंड के अंतर्गत धूमा वनग्राम के वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष पुषालाल बताते हैं कि मुंशी अंगूठा लगवा लेते हैं। पैसे कहां खर्च होता है, हमें नहीं मालूम। हमारे अधिकार के बारे में भी हमें कोई नहीं बताता। पुषालाल को भी भोपाल नहीं बुलाया गया।

गुना जिले के सहरिया आदिवासी सूरज ने कहा कि उसके बमोरी वनग्राम में 25 आदिवासी घर हैं, किसी को भी भोपाल नहीं बुलाया गया। सूरज ने कहा, समाचार से यह पता चला कि तेंदूपत्ते की एक गड्डी में ढाई सौ रुपए मिलते है, जबकि हमारे गांव के सहरिया आदिवासियों को तो दो सौ रुपए ही दिए जाते हैं। इसके अलावा बोनस तो दो साल से नहीं मिला है। जबकि राज्य सरकार कहती है कि एक गड्डी की मजदूरी बढ़ाकर ढाई सौ से तीन सौ कर दिया गया है। यहां आदिवासियों के पास वन भूमि के पट्टे तक नहीं है। उन्होंने कहा तेंदूपत्ते का काम तो सिर्फ एक महीने का होता है, बाकी समय हमारे पास कोई काम नहीं होता है, इसलिए सौ फीसदी पलायन पर चले जाते है। ग्वालियर-चंबल में खुलकर पेसा कानून का उल्लंघन होता है, यह भी सबको मालूम है।

सूरज गुना

अपराध भी हमारे साथ सबसे अधिक होता है। नीमच में आदिवासी लड़के को  रस्सी से बांधकर घसीटा गया। सबने देख, अपराधी को क्या सजा मिली, नहीं मालूम। नेमावर में आदिवासी परिवार की हत्या कर जमीन में गाड़ दिया गया। पुलिस आज तक अपराधी को खोज नहीं पायी। अब जाकर साक्ष्य मिटाने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। यहां तक कि पेटलावद में ब्लास्ट में मारे गए आदिवासियों को न्याय ही नहीं मिला। सारे आरोपी अदालत से बरी हो गए।सरकार इस तरह इवेंट के बजाय अगर आदिवासियों के हित में यह खर्च करती,  तो आदिवासियों के जीवन में कुछ सुधार आता।

जमबुरी मैदान के बहार इंतज़ार करते आदिवासी 

बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के मुखिया राजकुमार सिंहा बताते हैं बरगी बांध के लिए विस्थापित आदिवासियों के मामले सरकार के पास एक अरसे से लंबित है। सरकार इसका समाधान क्यों नहीं करती! बांध के नाम पर लाखों आदिवासी परिवारों को बेदखल कर दिया गया। आदिवासी और अन्य जंगलवासियो के राष्ट्रव्यापी विरोध किया। परंतु अभी तक कोई हल नहीं निकाला गया। 

बार-बार कानून का स्पष्ट आदेश होने के बावजूद विकास परियोजनाओं और निजी कंपनियों के लिए जंगलों को डाइवर्ट करने से पहले वन समुदायों की सहमति का अनिवार्यता को पर्यावरण मंत्रालय ने उलंघन किया और हजारों हेक्टेयर भूमि को परियोजनाओं के लिए सौंप दिया। हाल ही में राष्ट्रीय लॉकडाउन के दौरान ग्राम सभाओं की सहमति के बगैर वन डायवर्सन के लिए सौ से अधिक परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई । 

आदिवासियों के कुछ प्रमुख मुद्दे हैं, जिस पर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए, जैसे- मध्यप्रदेश में करीब 22 फीसदी आदिवासी आबादी है। आदिवासियों के खिलाफ देश भर में दर्ज अपराध और अत्याचार में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे अधिक 23 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो रिपोर्ट 2020 के अनुसार मध्यप्रदेश में आदिवासियों पर उत्पीड़न के 2401 प्रकरण दर्ज हुए। जिसमें 59 लोगों की हत्या और 297 महिलाओं पर हमले के प्रकरण दर्ज हुए हैं।

जनजातियों को स्वास्थ्य सुविधा देने में मध्यप्रदेश सबसे पीछे है, अभी भी 2067 उप स्वास्थ्य केंद्र, 463 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 101 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कमी दर्ज की गई है।

जबलपुर संभाग का आदिवासी जिला डिंडोरी 56.23 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे है। दूसरे नम्बर पर मंडला है जहां 48.10 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे है।

’मध्यप्रदेश में विभिन्न विकास परियोजनाओं जैसे बांध, खनन, राष्ट्रीय पार्क एवं उद्यान, थर्मल पावर प्लांट, सङक,आयुध कारखाने आदि से लगभग 20 से 25 लाख आदिवासी व्यक्ति विस्थापित एवं प्रभावित हुए हैं।

दिल दहला देने वाली एक खबर

इस बीच मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र कर दूं। केंद्रीय मंत्री अमित शाह के स्वागत और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद पुलिस व्यस्त थी। इधर कुछ बदमाश कोचिंग से घर लौट रही बी.ए. की छात्रा को ऑटो में ही बंधक बनाकर घुमाते रहे। लड़की के अनुसार  ‘‘सुनसान जगह ऑटो रोका, मुझे खींचा, विरोध किया तो चांटे मारे, बोले काटकर फेंक देंगे, आरोपी खुलेआम चार थाना क्षेत्रों में छात्रा से ऑटो में छेड़छाड़ करते हुए घूमते रहे, लेकिन जब लड़की थाने में एफआईआर दर्ज कराने पहुंची, तो पुलिस सीमा विवाद में उलझी रही। रातभर फरियाद लेकर भटकने के बाद आखिर अल सुबह 4 बजे उसकी शिकायत पंजीकृत की गई।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित समाचार में बताया गया कि परेशान बच्ची एक थाने से दूसरे थाने भटकती रही पर उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। अंततः सुबह 4 बजे पर उसकी शिकायत पंजीकृत की गई। उसको सताने का घटनाक्रम शाम 7 बजे से प्रारंभ हुआ था पर उसकी रिपोर्ट अगले दिन सुबह 4 बजे लिखी गई। यह सब उस समय हुआ जब दूसरे दिन सरदार पटेल के बाद देश के दूसरे सबसे ताकतवर गृह मंत्री भोपाल आने वाले थे।

भोपाल में कुछ दिन पहले पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की गई है। हमें आश्वस्त किया गया था कि नई प्रणाली में ज्यादा बेहतर पुलिस व्यवस्था उपलब्ध होगी।

ये भी पढ़ें: एमपी में सरकार की असफलताओं को छिपाने और सत्ता को बचाने के लिए धार्मिक उन्माद भड़काया जा रहा है : संयुक्त विपक्ष 

Madhya Pradesh
Amit Shah
Shivraj Singh Chouhan
BJP
aadiwasi
Adiwasi in MP
SC/ST

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

सवर्णों के साथ मिलकर मलाई खाने की चाहत बहुजनों की राजनीति को खत्म कर देगी

मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में सैलून वाले आज भी नहीं काटते दलितों के बाल!

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

जहांगीरपुरी— बुलडोज़र ने तो ज़िंदगी की पटरी ही ध्वस्त कर दी

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे


बाकी खबरें

  • china
    अनीश अंकुर
    चीन को एंग्लो-सैक्सन नज़रिए से नहीं समझा जा सकता
    24 Oct 2021
    आख़िर अमेरिका या पश्चिमी देशों के लिए चीन पहेली क्यों बना हुआ है? चीन उन्हें समझ क्यों नहीं आता? ‘हैज चाइना वॉन' किताब लिखने वाले सिंगापुर के लेखक किशोर महबूबानी के अनुसार "चीन को जब तक एंग्लो-सैक्सन…
  • Rashmi Rocket
    रचना अग्रवाल
    रश्मि रॉकेट : महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले अपमानजनक जेंडर टेस्ट का खुलासा
    24 Oct 2021
    फ़िल्म समीक्षा: किसी धाविका से यह कहना कि वह स्त्री तो है, लेकिन उसके शरीर में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा अधिक होने के कारण वह स्त्री वर्ग में नहीं आ सकती अपने आप में उसके लिए असहनीय मानसिक यातना देने…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    शाह का कश्मीर दौरा, सत्ता-निहंग संवाद और कांग्रेस-राजद रिश्ते में तनाव
    23 Oct 2021
    अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी किये जाने के बाद गृहमंत्री अमित शाह पहली बार कश्मीर गये हैं. सुरक्षा परिदृश्य और विकास कार्यो का जायजा लेने के अलावा कश्मीर को लेकर उनका एजेंडा क्या है?…
  • UP Lakhimpur
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    ‘अस्थि कलश यात्रा’: लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए चार किसानों की अस्थियां गंगा समेत दूसरी नदियों में की गईं प्रवाहित 
    23 Oct 2021
    12 अक्तूबर को लखीमपुर खीरी से यह कलश यात्रा शुरू हुई थी, यह देश के कई राज्यों में फिलहाल जारी है। उत्तर प्रदेश में ये यात्रा पश्चिमी यूपी के कई जिलों से निकली, जिनमें मुझफ्फरनगर और मेरठ जिले शामिल थे…
  • Fab and Ceat
    सोनिया यादव
    विज्ञापनों की बदलती दुनिया और सांप्रदायिकता का चश्मा, आख़िर हम कहां जा रहे हैं?
    23 Oct 2021
    विकासवादी, प्रगतिशील सोच वाले इन विज्ञापनों से कंपनियों को कितना फायदा या नुकसान होगा पता नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि ये समाज में सालों से चली आ रही दकियानुसी परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ-साथ…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License