NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
आंध्र का नया गेमिंग क़ानून : आजादी और मानवीय अस्तित्व के लिए झटका?
एक लोकतंत्र में सरकार अपनी नैतिकता नागरिकों पर नहीं थोप सकती और यह निर्देश नहीं दे सकती कि सभी खेल, जिनमें कोई भी चीज दांव पर लगी हो, उन्हें नहीं खेला जा सकता। इसमें यह मायने नहीं रखता कि संबंधित खेल में कौशल की भूमिका है या वह पूरी तरह संयोग से संचालित खेल है।
श्री हर्षा कांडुकुरी
18 Dec 2020
आंध्र का नया गेमिंग क़ानून

आंध्रप्रदेश विधानसभा ने हाल में "AP गेमिंग (अमेंडमेंट) बिल, 2020" (आंध्रप्रदेश खेल (संशोधन) विधेयक) पारित किया है। इसने सितंबर 2020 में लागू किए अध्यादेश का स्थान लिया है। AP गेमिंग एक्ट 1974 में किया गया यह संशोधन ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन गैंबलिंग और ऑनलाइन बैटिंग को राज्य में अपराध घोषित करता है।

इससे पहले आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संचार एवम् सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री को ख़त लिखकर आंध्रप्रदेश में 132 वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी, जो ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग से जुड़ी हैं।

ऐसे ऑनलाइन गेम्स जो पैसे के लिए खेले जाते हैं, उन पर प्रतिबंध लगाने का सिलसिला तेजी से जोर पकड़ रहा है।

यहां सरकार की कोशिश युवाओं को जुए और सट्टे जैसी गलत आदतों से बचाने की है, लेकिन विधेयक के जरिए पैसे के लिए खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का यह बेहद अतिवादी कदम उठाया गया है।

2017 में तेलंगाना राज्य ने "तेलंगाना गेम्स एक्ट, 1974" में एक संशोधन पारित किया (कुछ तकनीकी चीजों को छोड़कर इसकी पूरी नकल आंध्रप्रदेश सरकार ने उतारी है)। तमिलनाडु राज्य ने भी हाल में एक अध्यादेश पारित किया है, जो ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी पर लगाम लगाता है।

खेलों पर प्रतिबंध, राज्य की नैतिकता को लोगों पर थोपा जाना है

यहां सरकार की कोशिश युवाओं को जुए और सट्टे जैसी गलत आदतों से बचाने की है, लेकिन विधेयक के जरिए पैसे के लिए खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगाने का बेहद अतिवादी कदम उठाया गया है। इस परिभाषा में ऐसे ऑनलाइन गेम्स शामिल है, जो पैसे या दूसरी चीजों को जीतने के लिए खेले जाते हैं।

सट्टे और जुएं पर पहले ही प्रतिबंध था और इन्हें पिछले कानूनों के हिसाब से भी अपराध घोषित किया गया था। लेकिन यह विधेयक उन ऑनलाइन गेम्स, जिन्हें पैसे के लिए खेला जाता है, लेकिन जिनमें कौशल और क्षमता (खेल की क्षमता) की जरूरत होती है, उनसे, जुएं और सट्टे का अंतर नहीं करता, जो पूरी तरह 'इत्तेफाक' पर निर्भर करते हैं।

सट्टेबाजी की परिभाषा में किए गए बदलाव और क्षमता की जरूरत वाले खेलों को प्रदान सुरक्षा को खत्म करने से वह खेल हतोत्साहित होंगे, जो ऐसे वैधानिक खेल हैं, जिनमें कौशल की जरूरत पड़ती है, लेकिन उन्हें खेलने के लिए एक शुल्क चुकानी पड़ती है या उन्हें जीतने पर नगद पुरस्कार दिया जाता है। इस संशोधन से ऑनलाइन क्विज, चेस के खेल या याददाश्त आधारित खेल, जहां प्रतिभागियों को एक शुल्क जमा करना पड़ता है और उन्हें पुरस्कार ने नगद पैसा दिया जाता है, यह खेल बिलकुल वैसे ही हो गए, जैसे सट्टा या जुआं लगाना।

राज्य का यह कदम, जिससे वैधानिक खेल गतिविधियों पर भी असर पड़ता है, वह राज्य द्वारा उछाया गया एक तरह का पैतृक कदम है, जहां राज्य यह फ़ैसला कर रहा है कि कौन सा खेल खेला जाए और कौन सा नहीं।

सट्टे और जुएं पर पहले ही प्रतिबंध था और इन्हें पिछले कानूनों के हिसाब से भी अपराध घोषित किया गया था। लेकिन यह विधेयक उन ऑनलाइन गेम्स जिन्हें पैसे के लिए खेला जाता है, लेकिन जिनमें कौशल और क्षमता (खेल की क्षमता) की जरूरत होती है, उनसे, उन जुएं और सट्टे का अंतर नहीं करता, जो पूरी तरह 'भाग्य' पर निर्भर करते हैं।

यहां न्यूनतम शासन के विचार का उल्लंघन किया जा रहा है, क्योंकि यहां सरकार इस चीज का फ़ैसला कर रही है कि नागरिकों के लिए कौन सा खेल अच्छा है और कौन सा खराब।

इस बात से कोई इंकार नहीं किया जा सकता कि कई लोग ऑनलाइन गेम्स और सट्टेबाजी से आर्थिक और भावनात्मक तौर पर प्रभावित होते हैं।

अगर इसके पीछे आर्थिक नुकसान को रोका जाना मुख्य उद्देश्य है, तो स्टॉक मार्केट में व्यापार भी एक तरह का जुआं ही है।

यह तर्क भी दिया जा सकता है कि इन खेलों पर नैतिक वज़हों से प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन अगर इन्हें अनैतिकता के चलते प्रतिबंधित किया गया है, तो यह बात कोई मायने नहीं रखी जानी चाहिए कि इन खेलों में पैसा लगता है या नहीं।

लेकिन नए कानूनी प्रावधानों में सिर्फ उन्हीं खेलों पर प्रतिबंध लगाया गया है, जिनमें दांव पर कुछ लगाया जाता है। 

यहां न्यूनतम शासन के विचार का उल्लंघन किया जा रहा है, क्योंकि यहां सरकार इस चीज का फ़ैसला कर रही है कि नागरिकों के लिए कौन सा खेल अच्छा है और कौन सा खराब।

यह राज्य की जगह नहीं है कि वह नागरिकों का पैतृक बने और पैसे के लिए खेलेना जाने वाले कौशल की जरूरत वाले खेलों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दे। क्योंकि इस प्रक्रिया में बहुत सारे लोगों के पैसा का नुकसान होगा।

गेमिंग को सिर्फ़ मनोरंजन की गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कई लोग इसमें करियर बनाते हैं और इसे राजस्व का स्त्रोत बनाते हैं। गेमिंग (अमेंडमेंट) बिल नागरिकों की अपनी मनमर्जी से खेलने (बशर्ते खेल में कौशल की जरूरत हो) की आजादी छीनता है।

एक लोकतंत्र में सरकार अपनी नैतिकता नागरिकों पर नहीं थोप सकती और यह नहीं कह सकती कि जिन खेलों में कुछ भी दांव पर लगता है उन्हें नहीं खेला जा सकता। अगर सरकार यह नहीं समझ सकती कि इंसान अपने कल्याण और फ़ैसले लेने के लिए खुद जिम्मेदार होता है, तो वह मानव के अस्तित्व पर ही संदेह कर रही है, जो एक मुक्त और आजाद समाज का आधार होता है।

यह राज्य की जगह नहीं है कि वह नागरिकों का पैतृक बने और पैसे के लिए खेलेना जाने वाले कौशल की जरूरत वाले खेलों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दे। क्योंकि इस प्रक्रिया में बहुत सारे लोगों के पैसा का नुकसान होगा।

कौशल के ज़रिए खेले जाने वाले खेलों को संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त

यह बहुत अजीब है कि सरकार ने कौशल के ज़रिए खेले जाने वाले खेलों को जुएं और सट्टे के दायरे में लाने से पहले सुप्रीम कोर्ट और आंध्र हाईकोर्ट के पुराने फ़ैसलों को नज़रंदाज कर दिया।

कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कौशल के ज़रिए खेले जाने वाले खेलों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत सुरक्षा प्राप्त है। यह अनुच्छेद कहता है कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी पेशे को अपनाने या किसी भी व्यापार को करने की स्वतंत्रता है।

1996 में सुप्रीम कोर्ट के पास एक मौका था कि वह इस बात पर फ़ैसला दे सकता था कि घोड़ों पर शर्त लगाना पुलिस कानून या खेल कानून के तहत प्रतिबंधित खेलों की श्रेणी में आएगा या नहीं। या फिर यह एक कौशल का खेल है, जिसे कानून के तहत सुरक्षा प्रदान की गई है।

अगर सरकार यह नहीं समझ सकती कि इंसान अपने कल्याण और फ़ैसले लेने के लिए खुद जिम्मेदार होता है, तो वह मानव के अस्तित्व पर ही संदेह कर रही है, जो एक मुक्त और आजाद समाज का आधार होता है।

कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि घोड़ों पर शर्त लगाने के लिए, किसी के पास घोड़ों के विश्लेषण की क्षमता होनी चाहिए कि वो उनकी ताकत, क्षमता का अनुमान लगा सके। इसलिए घोड़ों पर शर्त लगाना एक कौशल का खेल है, इसलिए यह कानून के तहत सुरक्षित है।

ऐसे ही एक सवाल का जवाब सुप्रीम कोर्ट ने दिया था कि रमी खेलना कौशल का खेल है या नहीं। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा, "रमी का खेल, तीन-पत्ती की तरह पूरा भाग्य का खेल नहीं है.... तीन पत्ती का खेल, जो 'फ्लश', 'ब्रैग' के नाम से भी जाना जाता है, वह पूरी तरह संयोग का खेल है। जबकि दूसरी तरफ रमी में एक तरह के कौशल की जरूरत पड़ती है, क्योंकि इसमें पत्तों को याद रखना होता है और रमी बनाने के लिए, अपने पास पत्ते रखने और फेंकने में चयन करने के लिए जरूरी कौशल क्षमता की जरूरत होती है। इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि रमी पूरी तरह इत्तेफाक का खेल है।"

इस फ़ैसले का पालन कई हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसलों में किया, जिनमें आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट भी शामिल है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री ने आईटी मंत्रालय को जो ख़त भेजा था, उसमें कई रमी वेबसाइट भी शामिल थीं।

आंध्रप्रदेश सरकार की कौशल के खेल और जुएं-सट्टे में अंतर ना कर पाने से तेजी से बढ़ते खेल उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा। 

इस पर भी ध्यान देना जरूरी है कि ड्रीम11 जैसे फैंटेसी गेम राजस्थान और बॉम्बे हाईकोर्ट में खुद को बचाए रखने में कामयाब रहे हैं, क्योंकि उन्हें कौशल के खेल की तरह देखा गया। 

आंध्रप्रदेश सरकार की कौशल के खेल और जुएं-सट्टे में अंतर ना कर पाने से तेजी से बढ़ते खेल उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा। 

आंध्रप्रदेश सरकार की कौशल के खेल और जुएं-सट्टे में अंतर ना कर पाने से तेजी से बढ़ते खेल उद्योग पर बुरा असर पड़ेगा। 

परिभाषा के हिसाब से देखें, तो ड्रीम11 (IPL का मुख्य आयोजक) और रमीसर्कल डॉटकॉम भी कानून में "गेमिंग" के दायरे में आते हैं और इन पर हाल के संशोधनों के हिसाब से प्रतिबंध लगाया जा सकता है। पता नहीं किन वज़हों से सरकार ने इनके खिलाफ़ कार्रवाई नहीं की, जबकि दूसरी कम ख्यात वेबसाइट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई। 

सरकार को अपने फ़ैसले पर दोबारा सोचना चाहिए

2018 में भारत के कानून आयोग ने "लीगल फ्रेमवर्क: गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इंक्लूडिंग इन क्रिकेट इन इंडिया" नाम की रिपोर्ट प्रकाशित की। आयोग ने अपने सुझाव में कहा कि जुएं और सट्टे से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाए भारत में कानून द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए।

आयोग का मानना था कि इन गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना संभव नहीं है, इसलिए बेहतर है कि इन्हें नियंत्रित किया जाए और इनकी कालाबाज़ारी रोककर राज्य का राजस्व बढ़ाया जाए। आयोग का यह भी मानना था कि अगर इन गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है तो इससे अल्पवयस्क और संकट में घिरे लोगों को इसमें जाने से रोका जा सकता है, क्योंकि यहां सरकार देख सकती है कि लोगों के साथ फर्जीवाड़ा ना हो।

सरकार ने ना केवल कौशल के खेल पर प्रतिबंध लगाकर कंपनियों की गेमिंग बिज़नेस में जाने की स्वतंत्रता को रोका है, बल्कि इससे उस तर्कशील इंसान की आजादी भी खत्म हुई है, जिसके पास मनोरंजन और पैसे के सभी संसाधन मौजूद है।

2018 में भारत के कानून आयोग ने "लीगल फ्रेमवर्क: गैंबलिंग एंड स्पोर्ट्स बेटिंग इंक्लूडिंग इन क्रिकेट इन इंडिया" नाम की रिपोर्ट प्रकाशित की। आयोग ने अपने सुझाव में कहा कि जुएं और सट्टे से जुड़ी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाए भारत में कानून द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए।

सरकार अंधे तरीके से यह नहीं मान सकती कि हर इंसान तार्किक तरीके से व्यवहार करने और खुद को नशे के जाल में बचाने में अक्षम है। अगर निचले आयवर्ग के लोगों या युवाओं को बचाने का उद्देश्य है, तो सरकार एक दिन, एक हफ़्ते या एक महीने के लिए संबंधित शख्स द्वारा लगाए जाने वाले पैसे की सीमा तय कर सकती है। यह शख्स की आय के हिसाब से तय हो सकता है। 

लेकिन इसके ठीक उलट, कमजोर और वंचित तबकों के लोगों को बचाने के लिए, कौशल के खेलों में भागीदारी को अपराध बनाकर उनपर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना एक अतिवादी और अतार्किक कदम है।

इस लेख को मुख्यत: द लीफ़लेट में प्रकाशिक किया गया था।

श्री हर्षा कांडुकुरी ने अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई की है। यह उनके निजी विचार हैं।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Andhra’s Gaming Law: A Setback to Liberty and Human Agency?

 

Online Gaming
Telangana
tamil nadu
Andhra
Indian judiciary

Related Stories

सूर्यवंशी और जय भीम : दो फ़िल्में और उनके दर्शकों की कहानी

तेलंगाना की जेलों में क़ैदी बने ‘आरजे’

डेली राउंडअप : पतंजलि ज़मीन घोटाला, तेलंगाना में छात्रों की आत्महत्या

डेली राउंडअप : रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती, तमिलनाडु में छात्रों ने की आत्महत्या

भयावह जल संकट की चपेट में चेन्नई, पानी के बिना लोग बेहाल

यज्ञ से बारिश!, कितनी दफा हम यही राग सुनेंगे?


बाकी खबरें

  • मेनका गांधी
    भाषा
    मेनका गांधी की कथित अपमानजनक टिप्पणी के ख़िलाफ़ पशु चिकित्सकों ने किया प्रदर्शन
    24 Jun 2021
    एसोसिएशन ने मांग की कि भाजपा सांसद अपनी टिप्पणी वापस लें और सार्वजनिक तौर पर काफी मांगे। शर्मा ने कहा कि कोविड-19 के संकट के दौरान देश भर में 150 से अधिक पशु चिकित्सक और एक हजार से अधिक पैरा मेडिक्स…
  • CNN न्यूज़ 18 ने बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा की ख़बर में कई साल पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल किया
    प्रियंका झा
    CNN न्यूज़ 18 ने बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा की ख़बर में कई साल पुरानी तस्वीरों का इस्तेमाल किया
    24 Jun 2021
    मालूम चला कि ये तस्वीर 2018 की है और आसनसोल में रामनवमी के समय भड़की हिंसा की है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने इस तस्वीर का क्रेडिट PTI को दिया है और लिखा है, “रानीगंज के बर्धमान में रामनवमी के जुलूस के…
  • दो-बच्चों की नीति राजनीतिक रूप से प्रेरित, असली मक़सद मतदाताओं का ध्रुवीकरण
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    दो-बच्चों की नीति राजनीतिक रूप से प्रेरित, असली मक़सद मतदाताओं का ध्रुवीकरण
    24 Jun 2021
    दरअसल दक्षिणपंथ की ओर से इस नीति की वकालत करने वालों का निहित संदेश यही है कि हिंदुओं के मुक़ाबले मुसलमानों के ज़्यादा बच्चे हैं और सरकार ने दो से ज़्यादा बच्चों वाले परिवारों को दंडित करके साहस…
  • ईएमएस स्मृति 2021 और केरल में वाम विकल्प का मूल्यांकन
    अज़हर मोईदीन
    ईएमएस स्मृति 2021 और केरल में वाम विकल्प का मूल्यांकन
    24 Jun 2021
    इस वर्ष के पैनल ने इस बात की तरफ़ इशारा किया कि केरल की वर्तमान एलडीएफ़ सरकार अगले पांच वर्षों में कैसे आगे बढ़ने की योजना बना रही है, जिसमें सार्वजनिक शिक्षा और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, जन-योजना और…
  • CPM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्य प्रदेश रेत खनन पर माकपा ने कहा शिवराज सरकार रेत माफियों की है
    24 Jun 2021
    मंगलवार को सरकार ने रेत व्यपारियों को राहत देने का ऐलान किया। जिसमें रेत व्यपारियों को चार माह की रोयल्टी का 50 फीसद माफ करने और बाकी का 50 फीसद अगले साल जमा करने का  निर्णय किया गया है। जिसका अब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License