NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
बैंक यूनियनों का ‘निजीकरण’ के ख़िलाफ़ दो दिन की हड़ताल का ऐलान
दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक कर्मचारियों के संयुक्त मंच ने सरकार को 16 व 17 दिसंबर की हड़ताल का नोटिस दे दिया है। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Dec 2021
Bank union strike

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ 16 दिसंबर से दो दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यूएफबीयू बैंक कर्मचारियों का एक संयुक्त मंच है इसके तहत बैंकों की नौ यूनियनें आती हैं।

यूएफबीयू के सदस्यों में अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए), अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी), राष्ट्रीय बैंक कर्मचारी परिसंघ (एनसीबीई), अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओए) और बैंक कर्मचारी परिसंघ (बीईएफआई) शामिल हैं। इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन (INBEF), इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (INBOC), नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (NOBW) और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (NOBO)। 

गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल की शुरुआत में वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करते हुए 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने के विनिवेश लक्ष्य के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी। इससे पहले सरकार ने 2019 में आईडीबीआई बैंक में अपनी बहुलांश हिस्सेदारी एलआईसी को बेचकर आईडीबीआई बैंक का निजीकरण कर दिया था। इसके अलावा पिछले चार साल में 14 सरकारी बैंकों का विलय किया गया है।

बैंक कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि "राष्ट्र और इसके लोग" देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मालिक हैं और चुनी हुई सरकार को महज़ इनकी "रखवाली" करने  का दायित्व है। लेकिन नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के आक्रामक तरीक़े से निजीकरण की तरफ़ बढ़ रही है। हम इस क़दम की कड़ी आलोचना करते है।


सीतारमण ने इस साल 2021-22 के वित्तीय वर्ष में अपने बजट भाषण के दौरान दो पीएसबी (आईडीबीआई बैंक के अलावे एक और बैंक) और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण का ऐलान किया था। उन्होंने चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए जीवन बीमा निगम (LIC) की आंशिक प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) शुरू करने की केंद्र की प्रतिबद्धता को भी दोहराया था।

आपको बता दे इसी साल 15 मार्च को सरकार के इसी क़दम के ख़िलाफ़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और पुराने निजी बैंकों के क़रीब 10 लाख कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर चले गये थे। बैंक कर्मचारियों के साथ जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) और एलआईसी के कर्मचारी भी शामिल हो गये थे, उन्होंने एक दिन के लिए अपनी ड्यूटी भी छोड़ दी थी।

हाल ही में सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन ऑल इण्डिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) के आह्वान पर ‘बैंक बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत देश के अलग-अलग राज्यों में पैदल मार्च किया गया और रैलियाँ निकाली गईं। बैंक बचाओ, देश बचाओ अभियान के तहत भारत यात्रा पर निकले बैंकरों ने मंगलवार 30 नवम्बर को दिल्ली के  जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद AIBOC की ओर से जो जन जागरूकता अभियान 24 नवंबर से भारत यात्रा के साथ शुरू हुआ था उसका 30 नवम्बर को समापन हुआ।

देश में सरकारी बैंकों को निजीकरण के "ख़तरे" से बचाने की लड़ाई में ट्रेड यूनियन, किसान, राजनीतिक दल बैंक अधिकारियों के साथ एकजुटता जाहिर किया

बैंक कर्मियों ने बैंक के निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई। इनका कहना है कि सरकार संसद में जो बिल लाने जा रही है उससे बैंकों के निजीकरण का रास्ता साफ होगा और रोजगार के अवसर कम होंगे। साथ ही किसानों, छोटे व्यवसायियों, स्वयं सहायता समूह समेत कमजोर वर्गों के लिए ऋण सुविधा भी लगभग खत्म हो जाएगी।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार दो सरकारी बैंकों का निजीकरण करने की बड़ी तैयारी कर रही है। इसी के चलते संसद के इस शीतकालीन सत्र में बैंकिंग कानून संशोधन विधेयक लाया जा सकता है। इससे सरकार को बैंकिंग नियमों में बदलाव करने का अधिकार मिल जाएगा। वहीं जिन दो बैंकों का निजीकरण करने के तैयारी चल रही है, उसका भी रास्ता साफ़ हो जाएगा।
 सरकार ने बैंकिंग अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2021 को संसद के मौजूदा सत्र के दौरान पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है।

बैंक कर्मचारी यूनियन के नेता कहते है कि, "निजी बैंकों का इतिहास बैंकिंग नाकामियों से अटा-पड़ा है, एक के बाद एक बैंक बंद होते गए, जिससे उनके कर्मचारियों और जमाकर्ताओं को बहुत परेशानी हुई।" फ़ेडरेशन यह बात देश में बैंकों के राष्ट्रीयकरण के पहले वाले दौर की बात कर रहा है। 1969 में कम से कम उन 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था, जो उस समय देश में काम कर रहे थे।

कमर्चारियों की  यूनियन बीईएफ़आई ने कहा कि तब से देश के "आर्थिक विकास" और इसकी "संप्रभुता" को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तरफ़ से निभायी गयी "शानदार भूमिका" के साथ देश ने एक लंबा सफ़र तय किया है।

सार्वजनिक बैंकों की संख्या कम करने की सिफ़ारिशें 1991 से उस नयी राष्ट्रीय आर्थिक नीति के आगमन के बाद से गठित कई समितियों की तरफ़ से की जाती रही हैं, जिसने वैश्विक खिलाड़ियों के लिए भारतीय बाज़ार खोल दिये थे।

उन्हीं सिफ़ारिशों को अब मोदी सरकार आक्रामक तरीक़े से आगे बढ़ा रही है। इसका नतीजा यह हुआ है कि 2014 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 थी, जो घटकर 12 रह गयी है। यह वही साल था, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने केंद्र में सत्ता संभाली थी।

बीईएफ़आई के महासचिव, देबाशीष बसु चौधरी ने न्यूज़क्लिक से कहा कि , “बैंक कर्मचारी 1991 से ही बैंकों के निजीकरण के विचार का विरोध कर रहे हैं। यह जनता, यानी बैंकों के ग्राहकों को उतना ही नुक़सान पहुंचायेगा, जितना कि बैंक के कर्मचारियों का मनोबल गिरायेगा।”
 
अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सीएच वेंकटाचलम ने एक बयान में कहा कि बैंक कर्मचारी यूनियनों के महासंघ यूएफबीयू ने इसके विरोध का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यूएफबीयू ने आईबीए को 16 व 17 दिसंबर की हड़ताल का नोटिस दे दिया है। वेंकटाचलम ने कहा है कि भारत जैसे विकासशील देशों में बैंकों में बड़े पैमाने पर जनता की बचत जमा होती है। इसका इस्तेमाल व्यापक आर्थिक विकास में होना चाहिए। सरकारी बैंकें सामाजिक सोच वाली होती है, इसलिए इसलिए विकास के लिए ये सर्वथा उपयुक्त हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Bank union strike
privatization
Protest against privatization
United forum of bank unions
UFBU
AIBEA
INBOC
INBEF
NOBW

Related Stories

बैंक हड़ताल: केंद्र द्वारा बैंकों के निजीकरण के ख़िलाफ़ यूनियनों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी

निजीकरण को लेकर 10 लाख बैंक कर्मियों की आज से दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल

यूपी : निजीकरण के ख़िलाफ़ 900 बैंकों के 10,000 से ज़्यादा कर्मचारी 16 दिसम्बर से दो दिन की हड़ताल पर

दिल्ली: बैंक कर्मचारियों के 'बैंक बचाओ, देश बचाओ' अभियान को ट्रेड यूनियनों, किसान संगठन का मिला समर्थन  

निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन

किसान आंदोलन को सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन की स्पिरिट से प्रेरणा, परन्तु उसके नकारात्मक अनुभवों से सीख लेनी होगी

बैंक हड़ताल: कर्मचारियों ने कहा "शौक़ नहीं मजबूरी है, ये हड़ताल ज़रूरी है"

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, मेवात में किसान महापंचायत और अन्य ख़बरें

निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक कर्मचारियों की हड़ताल, किसानों और ट्रेड यूनियनों ने भी किया विरोध प्रदर्शन

ग्राउंड रिपोर्ट : निजीकरण के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • French President Emmanuel Macron (L) and US President Joe Biden
    एम. के. भद्रकुमार
    AUKUS पर हंगामा कोई शिक्षाप्रद नज़ारा नहीं है
    21 Sep 2021
    ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका [AUKUS] के बीच हुए नए सुरक्षा समझौते को लेकर राजनयिक टकराव अभी शुरू होने वाला है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 26,115 नए मामले, 252 मरीज़ों की मौत
    21 Sep 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 35 लाख 4 हज़ार 534 हो गयी है।
  • UP
    सबरंग इंडिया
    डेंगू, बारिश से हुई मौतों से बेहाल यूपी, सरकार पर तंज कसने तक सीमित विपक्ष?
    21 Sep 2021
    स्थानीय समाचारों में बताया गया है कि 100 से अधिक लोगों को डेंगू, वायरल बुखार ने काल का ग्रास बना लिया। बारिश से संबंधित घटनाओं में 24 लोगों की मौत का अनुमान है
  •  Collapses in Uttarakhand
    रश्मि सहगल
    उत्तराखंड में पुलों के ढहने के पीछे रेत माफ़िया ज़िम्मेदार
    21 Sep 2021
    जो अधिकारी ग़ैरक़ानूनी खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हैं, उनके ख़िलाफ़ ताकतवर राजनेता मोर्चा खोल देते हैं। लेकिन स्थानीय लोग धड़ल्ले से चल रहे खनन में छुपे निजी हितों और नियमों के उल्लंघन को खुलकर सामने ला…
  • Internet Shutdowns
    इशिता चिगिल्ली पल्ली
    क्यों भारतीय राज्य इंटरनेट शटडाउन पर अपनी निर्भरता बढ़ाता जा रहा है?
    21 Sep 2021
    एक बार फिर भारतीय राज्य ने इंटरनेट शटडाउन का विकल्प अपनाया है, इस बार हरियाणा में यह प्रतिबंध लागू किए गए हैं, ताकि क़ानून-व्यवस्था पर नियंत्रण किया जा सके। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License