NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असहमति कुचलने के लिए आतंक-निरोधक क़ानून का दुरुपयोग हरगिज़ न हो : जस्टिस डीवाइ चंद्रचूड़
हाल ही में, यूएपीए के तहत निरुद्ध किए गए और जेल में वर्षों से रह रहे अनेक लोगों को रिहा कर दिया गया है।
संगम
15 Jul 2021
न्यायमूर्ति डीवाइ चंद्रचूड़ 
न्यायमूर्ति डीवाइ चंद्रचूड़ 

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ ने हाल ही में जोर देकर कहा है कि आतंकवाद से निपटने के लिए बनाए गए कानूनों का दुरुपयोग देश में नागरिकों की असहमति व्यक्त करने के अधिकारों को कुचलने में नहीं किया जाना चाहिए।

भारत-अमेरिका संयुक्त सम्मेलन में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “आपराधिक कानून, जिनमें आतंक-निरोधक कानून भी शामिल है, उनका दुरुपयोग असहमति को दबाने या नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए हर्गिज नहीं किया जाना चाहिए। जैसा कि मैंने अर्णब गोस्वामी बनाम राज्य (महाराष्ट्र) मामले में लिखा था कि हमारी अदालतों को यह अवश्य ही सुनिश्चित करना चाहिए कि वे देश के नागरिकों को उनकी स्वतंत्रता से वंचित किए जाने के विरोध में लगातार रक्षा की पहली कतार बनी रहें।” 

उन्होंने आगे कहा,  “आज, दुनिया के सबसे प्राचीन एवं बड़े लोकतंत्र विविधवर्णी/बहुरंगी एवं बहुलतावादी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां उनके संविधान मानवाधिकारों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध हैं एवं उनका आदर करते हैं।” 

विचाराधीन कैदियों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लिए गए निर्णयों के बारे में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “न्यायालय ने सजायाफ्ता या विचाराधीन के रूप में सात साल से जेलों में कैद लोगों को जमानत या पैरोल पर छोड़े जाने के लिए मार्च 2020 में महामारी की पहली लहर के दौरान ही सभी राज्यों से एक उच्चस्तरीय कमेटी बना कर इस पर विचार करने का निर्देश दिया था।  न्यायालय ने इसी तरह का विचार उन मामलों में कैद विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए दिया था, जिनके किए गए अपराधों में अधिकतम सात साल कैद की सजा का प्रावधान है। लेकिन जैसे ही पहली लहर नरम पड़ी तो, उन रिहा हुए कैदियों को फिर से जेल में डाल दिया गया।”

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है, जबकि एनआइए की अदालत एवं बम्बई उच्च न्यायालय द्वारा फादर स्टेन स्वामी की स्वास्थ्यगत आधार पर जमानत की मांग को बार-बार ठुकरा दिए जाने से देश में काफी रोष है। गौरतलब है कि हाल ही में बुजुर्ग फादर की कैद में ही मौत हो गई थी। स्टेन स्वामी को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गैरकानूनी गतिविधियां निवारक अधिनियम (यूएपीए) के अधीन गिरफ्तार किया गया था। देश के अनेक बुद्धिजीवियों एवं जनजातीय समुदायों के अधिकारों के लिए संघर्षरत कार्यकर्ताओं ने इसे “न्यायिक हत्या” करार दिया है। 

हाल ही में, यूएपीए के तहत गिरफ्तार कई लोगों को रिहा किया गया है, जो सालों से देश की विभिन्न जेलों में बंद थे। उदारहरण के लिए, श्रीनगर के बशीर अहमद बाबा को बडोदरा की केंद्रीय कारा से 11 साल बाद रिहा किया गया है। असम के किसान नेता अखिल गोगोई को, जिन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था और इसी तरह, आइआइएससी शूटिंग केस में गिरफ्तार त्रिपुरा के मोहम्मद हबीब को भी रिहा कर दिया गया है। 

अभी पिछले महीने, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगे में गिरफ्तार छात्र कार्यकर्ताओं नताश नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत पर रिहा करते हुए आतंक-निरोधी कानून के गैरजवाबदेही से इस्तेमाल के लिए सरकारी एजेंसियों की आलोचना की थी। तब न्यायालय ने कहा था, ‘आतंकी कार्य’ पदावली को अवश्य ही आतंकवाद के आवश्यक चरित्र के रूप में ही लिया जाना चाहिए और उसे आपराधिक कृत्यों या गलतियों के लिए जो परम्परागत अपराधों की परिभाषा के दायरे में आती हैं, जैसा भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अन्य तथ्यों के साथ परिभाषित किया गया है। इस कानून का लापरवाही से इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”

यह आलेख मूल रूप से लीफ्लेट में प्रकाशित किया गया था।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Anti-terror Law Must not be Misused to Quell Dissent: Justice DY Chandrachud

freedom of speech
Fundamental Rights
Right to Life
rule of law
UAPA
Sedition

Related Stories

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

विशेष: कौन लौटाएगा अब्दुल सुब्हान के आठ साल, कौन लौटाएगा वो पहली सी ज़िंदगी

किसकी मीडिया आज़ादी?  किसका मीडिया फ़रमान?

बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून

राजद्रोह पर सुप्रीम कोर्ट: घोर अंधकार में रौशनी की किरण

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामलों की कार्यवाही पर लगाई रोक, नई FIR दर्ज नहीं करने का आदेश

भारत में ‘वेंटिलेटर पर रखी प्रेस स्वतंत्रता’, क्या कहते हैं वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार?

दिल्ली दंगा : अदालत ने ख़ालिद की ज़मानत पर सुनवाई टाली, इमाम की याचिका पर पुलिस का रुख़ पूछा

यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के पतन का अमृतकाल है

RTI क़ानून, हिंदू-राष्ट्र और मनरेगा पर क्या कहती हैं अरुणा रॉय? 


बाकी खबरें

  • सत्येन्द्र सार्थक
    आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?
    25 Apr 2022
    सरकार द्वारा बर्खास्त कर दी गईं 991 आंगनवाड़ी कर्मियों में शामिल मीनू ने अपने आंदोलन के बारे में बताते हुए कहा- “हम ‘नाक में दम करो’ आंदोलन के तहत आप और भाजपा का घेराव कर रहे हैं और तब तक करेंगे जब…
  • वर्षा सिंह
    इको-एन्ज़ाइटी: व्यासी बांध की झील में डूबे लोहारी गांव के लोगों की निराशा और तनाव कौन दूर करेगा
    25 Apr 2022
    “बांध-बिजली के लिए बनाई गई झील में अपने घरों-खेतों को डूबते देख कर लोग बिल्कुल ही टूट गए। उन्हें गहरा मानसिक आघात लगा। सब परेशान हैं कि अब तक खेत से निकला अनाज खा रहे हैं लेकिन कल कहां से खाएंगे। कुछ…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,541 नए मामले, 30 मरीज़ों की मौत
    25 Apr 2022
    दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच, ओमिक्रॉन के BA.2 वेरिएंट का मामला सामने आने से चिंता और ज़्यादा बढ़ गयी है |
  • सुबोध वर्मा
    गहराते आर्थिक संकट के बीच बढ़ती नफ़रत और हिंसा  
    25 Apr 2022
    बढ़ती धार्मिक कट्टरता और हिंसा लोगों को बढ़ती भयंकर बेरोज़गारी, आसमान छूती क़ीमतों और लड़खड़ाती आय पर सवाल उठाने से गुमराह कर रही है।
  • सुभाष गाताडे
    बुलडोजर पर जनाब बोरिस जॉनसन
    25 Apr 2022
    बुलडोजर दुनिया के इस सबसे बड़े जनतंत्र में सरकार की मनमानी, दादागिरी एवं संविधान द्वारा प्रदत्त तमाम अधिकारों को निष्प्रभावी करके जनता के व्यापक हिस्से पर कहर बरपाने का प्रतीक बन गया है, उस वक्त़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License