NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
असम : विरोध के बीच हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन चाय के पौधे उखाड़ने का काम शुरू
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस साल फ़रवरी में कछार में दालू चाय बाग़ान के कुछ हिस्से का इस्तेमाल करके एक ग्रीनफ़ील्ड हवाई अड्डे के निर्माण की घोषणा की थी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 May 2022
Assam
Image courtesy : ANI

विरोध और अटकलों के बाद असम सरकार ने गुरुवार को ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण को अमली जामा पहनाने के लिए कछार जिले के दालू चाय बागान में चाय की पौधों को उखाड़ना शुरू कर दिया है।

गुरुवार की सुबह भारी संख्या में पुलिस, सुरक्षा बल और अन्य सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में सैकड़ों की संख्या में बुलडोजरों ने चाय के पौधों को उखाड़ना शुरू कर दिया। अधिकारियों के अनुसार ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन से अधिक पौधों को उखाड़ा जाना है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस साल फरवरी महीने में घोषणा की थी कि दालू चाय बागान के एक हिस्से का इस्तेमाल करके एक हवाई अड्डा बनाया जाएगा। सरकार ने चाय बागान की 2500 बीघा भूमि का इस्तेमाल करके हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 50 करोड़ रुपये का भुगतान करने का अनुमान लगाया है। इस बागान के मालिक ने इस डील को करने के लिए सहमति दी दी है लेकिन कामगार इस फैसले से नाखुश हैं।

कछार के दालू चाय बागान के 2,000 से अधिक कामगार इसका विरोध कर रहे हैं और उन्होंने पहले कहा था कि सरकार को चाय के पौधों को नष्ट करने से पहले उन्हें मारना होगा। वे इस परियोजना की घोषणा के बाद से ही विरोध कर रहे हैं। इस क्रम में कछार जिला प्रशासन के अधिकारी उन्हें समझाने के लिए कई बार उनके पास जा चुके हैं।

प्रशासन ने चाय बागान मालिकों से सलाह मशविरा कर इस बागान के कर्मियों को भविष्य निधि (₹1.57 करोड़) और ग्रेच्युटी (₹80 लाख) की लंबित राशि बांटा है। लेकिन कामगारों का कहना है कि, "यह हमारा पैसा है जो मालिक वापस दे रहे हैं लेकिन हम उन्हें बदले में चाय के पौधों को नष्ट नहीं करने दे सकते।"

विरोध के बीच, पुलिस ने दक्षिणी असम के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कनकनज्योति सैकिया और कछार जिले के पुलिस अधीक्षक रमनदीप कौर के नेतृत्व में चाय बागान में एक विशाल फ्लैग-मार्च शुरू किया था।

रिपोर्ट के अनुसार कौर ने कहा कि ये फ्लैग मार्च बागान कामगारों को डराने के लिए नहीं बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए था। कौर ने मंगलवार शाम को एक बयान में कहा कि, “यह विश्वास पैदा करने के लिए किया गया था क्योंकि सरकार एक विशाल हवाई अड्डे के निर्माण की योजना बना रही है। हमारा इरादा कामगारों में डर पैदा करने का बिल्कुल भी नहीं है।”

इस को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि पौधों को उखाड़ने की प्रक्रिया कब शुरू होगी। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रमिकों ने पुलिस के फ्लैग मार्च के सामने धरना जारी रखा। बुधवार शाम को कछार जिले के उपायुक्त कीर्ति जल्ली ने दालू चाय बागान और आसपास के इलाकों में अचानक धारा-144 लगा दिया और संकेत दिया कि जल्द ही बेदखली शुरू हो जाएगी।

नोटिस के सामने आते ही सैकड़ों जेसीबी मशीन को दालू चाय बागान की ओर जाते हुए देखा गया। गुरुवार सुबह करीब पांच बजे पुलिस ने बागान के चयनित हिस्से को घेर लिया ताकि कोई श्रमिक अंदर न घुस सके और जेसीबी चाय के पोधों को उखाड़ने लगे।

इस कार्रवाई को रोकने का प्रयास करने वाले श्रमिकों को असहाय देखा गया। वे सुरक्षाकर्मियों और सरकारी अधिकारियों के सामने रोने-चिल्लाने लगे और कार्रवाई रोकने की गुहार करने लगे। पुलिस ने उन्हें उस स्थान से पीछे धकेल दिया जिसे सरकार ने हवाई अड्डे के निर्माण के लिए अधिग्रहित किया था।

असम पुलिस के स्पेशन डीजी (लॉ एंड ऑर्डर) जीपी सिंह और कछार के एसपी रमनदीप कौर की निगरानी में कार्रवाई की जा रही है। साथ ही कौर ने श्रमिकों को सरकार के आदेश की अवहेलना न करने की चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी श्रमिकों को अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से आंदोलन करने की बजाय स्पष्ट रूप से बात करना चाहिए। उन्होंने कहा, “कुछ मांगों को सरकार पहले ही पूरा कर चुकी है और अगर और मांगें हैं तो श्रमिकों को बात करनी चाहिए। मुझे यकीन है कि जायज मांगों पर ध्यान दिया जाएगा।"

सिलचर (कछार) में एक स्वतंत्र हवाई अड्डा को लेकर काफी लंबे समय से चर्चा हो रही है क्योंकि मौजूदा हवाई अड्डा पुराना है और इसे रक्षा मंत्रालय द्वारा अधिग्रहित किया जा चुका है।

दालू चाय बागान की प्रबंधक सुप्रिया सिकदर के अनुसार प्रत्येक हेक्टेयर में नौ हजार से अधिक चाय के पौधे हैं और हवाई अड्डे के निर्माण के लिए ऐसी 325 हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा।

ज्ञात हो कि असम में एपीजे टी ग्रुप के स्वामित्व वाले चाय बागानों के श्रमिकों ने बुधवार को वेतन के भुगतान न होने समेत अन्य मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। डिब्रूगढ़ में कांग्रेस के पूर्व विधायक और उक्त संगठन के केंद्रीय उपाध्यक्ष राजू साहू के नेतृत्व में असम चाह मजदूर संघ (एसीएमएस) के बैनर तले पानीटोला में खरजन चाय बागान के श्रमिकों ने प्रदर्शन किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार साहू ने गुरुवार को कहा कि, “एपीजे के स्वामित्व वाले सभी चाय बागानों के श्रमिक अपने-अपने बागानों में विरोध प्रदर्शन में भाग ले रहे हैं। एपीजे समूह के पास असम में 17 चाय बागान हैं। कंपनी पिछले कई महीनों से कर्मचारियों और श्रमिकों के वेतन का भुगतान करने में विफल रही है।”

Assam
Himanta Biswa Sarma
Greenfield Airport

Related Stories

असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार

असम की अदालत ने जिग्नेश मेवाणी को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

सद्भाव बनाए रखना मुसलमानों की जिम्मेदारी: असम CM

असम: बलात्कार आरोपी पद्म पुरस्कार विजेता की प्रतिष्ठा किसी के सम्मान से ऊपर नहीं

उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने शांति वार्ता को लेकर केन्द्र सरकार की ‘‘ईमानदारी’’ पर उठाया सवाल

गुवाहाटी HC ने असम में बेदखली का सामना कर रहे 244 परिवारों को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की

असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया

दक्षिण पश्चिम असम में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खस्ताहाल–II

तेल एवं प्राकृतिक गैस की निकासी ‘खनन’ नहीं : वन्यजीव संरक्षण पैनल


बाकी खबरें

  • विपक्षियों में सहमति, योगी की राजनीति और गडकरी का नेहरू-प्रेम
    न्यूज़क्लिक टीम
    विपक्षियों में सहमति, योगी की राजनीति और गडकरी का नेहरू-प्रेम
    21 Aug 2021
    सत्ताधारी भाजपा यूपी के चुनावों की तैयारी में अभी से जुट गयी है. वह इन दिनों तालिबान पर सियासी-खेल 'खेलने' में लगी है. जहां किसी खास व्यक्ति के किसी बयान में वह तनिक गुंजायश देखती है, फौरन ही समूचे…
  • ‘ईश्वर के नाम पर’ शपथ संविधान की भावना के विरुद्ध
    वसंत आदित्य जे
    ‘ईश्वर के नाम पर’ शपथ संविधान की भावना के विरुद्ध
    21 Aug 2021
    संविधान कहता है कि राज्य को विचार और कर्म में धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और यही बात राजनीतिक पार्टियों के लिए भी लागू होती है।
  • मोदी सरकार ने दिखाया है कि हमें विभाजन के दर्द को किस तरह याद नहीं करना चाहिए
    स्मृति कोप्पिकर
    मोदी सरकार ने दिखाया है कि हमें विभाजन के दर्द को किस तरह याद नहीं करना चाहिए
    21 Aug 2021
    भारत को विभाजन को याद करने की जरूरत है, लेकिन मोदी सरकार ने इसके लिए ऐसी तारीख़ चुनी, जिसका मक़सद ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना और उनकी पार्टी को चुनावी फायदा दिलाना है। ना कि इसके ज़रिए शांति और…
  • भारत अमेरिका की अफ़गान नीति का पिछलग्गू न बन कर, स्थानीय ताकतों के साथ मिलकर काम करे
    अमिताभ रॉय चौधरी
    भारत अमेरिका की अफ़गान नीति का पिछलग्गू न बन कर, स्थानीय ताकतों के साथ मिलकर काम करे
    21 Aug 2021
    ‘किसी भी सूरत में, तालिबान शासित अफगानिस्तान भारत के लिए एक बेहद चिंताजनक विषय बना रहने वाला है, जिसका वहां करोड़ों डॉलर मूल्य का निवेश लगा हुआ है...’
  • दो, तीन नहीं, कई साइगॉन बनाओ। यही आज का नारा है
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    दो, तीन नहीं, कई साइगॉन बनाओ। यही आज का नारा है
    21 Aug 2021
    आशाहीनता का आरोप केवल तालिबान पर नहीं लगाना चाहिए बल्कि अमेरिका, सऊदी अरब, जर्मनी और पाकिस्तान जैसे देशों पर भी लगाना चाहिए,जिन्होंने तालिबान जैसे फासीवादियों और कट्टर लोगों का समर्थन किया और इनकी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License