NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बरौनी रिफायनरी ब्लास्ट: माले और ऐक्टू की जांच टीम का दौरा, प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
भाकपा (माले) और मज़दूर संगठन ऐक्टू की जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और अपनी एक जाँच रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को बरौनी रिफाइनरी में हुआ ब्लास्ट प्रबन्धन की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Sep 2021
Barauni Refinery Blast

बिहार के बरौनी रिफाइनरी के तीन ब्यॉलर में से एक एवीयू-1 में 16 सितम्बर को ब्लास्ट हुआ। जिसमें कुल 19 लोग जख़्मी हो गए। इस पूरी घटना की जाँच के लिए भाकपा(माले) विधायक दल नेता महबूब आलम और ऐक्टू राज्य सचिव रणविजय कुमार की दो सदस्यीय सँयुक्त जांच टीम ने 17 सितम्बर को बरौनी रिफाइनरी  पहुंचकर घटना की जांच की और मीडिया में एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें उन्होंने कई खुलासे किए और प्रशासन पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं।   

एवीयू-1 में 16 सितम्बर की सुबह, लगभग साढ़े दस बजे हुए ब्लास्ट में कुल 19 लोग ज़ख़्मी हुए थे, इनमें 14 ठेका मजदूर व 5 कर्मचारी थे। 

ऐक्टू ने अपने बयान में बताया कि जांच टीम सर्वप्रथम बरौनी घायल मजदूर व कर्मचारियों से बेगूसराय के निजी अस्पताल(ग्लोकल व रिफाइनरी हॉस्पिटल) में मिली। इनमें से 8 का इलाज ग्लोकल निजी अस्पताल, बेगूसराय में तथा 11 का रिफायनरी अस्पताल में  चल रहा था। जाँच टीम ने बताया कि ग्लोकल अस्पताल में इलाजरत ठेका मजदूर मो० शाहिद की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

जांच टीम के सदस्यों (माले विधायक दल नेता महबूब आलम, ऐक्टू नेता रणविजय कुमार) ने घायलों से बातचीत की, उनका कुशलक्षेम पूछा तथा उन्हें किसी भी तरह की परेशानी में मदद का भरोसा दिया।

इस रिपोर्ट में घटना की मूल वजह जो बताई गई वो इस प्रकार है-

60 वर्ष पुराने 1962 में तैयार तीन एयूवी(AUV) ब्यालर में से एयूवी 1 ब्यालर में हुआ विस्फोट, प्रबन्धन द्वारा अनेक स्तर पर बरती गई आपराधिक लापरवाही के कारण हुआ है।

-पहला कि एयूवी की गुणवत्ता की जांच गलत तरीके से की जाती है, मोबाइल से फोटो खींचकर गुणवत्ता जांच किया जाता है जबकि हकीकत है कि उसे वेल्डिंग करने पर लोहे का खराब टुकड़ा एयूवी से झरने लगता है, 

दूसरा- घटना के दिन के एक माह पहले तक रिफाइनरी बन्द थी। एयूवी को चालू कर जांचा जा रहा था। जांचने की प्रक्रिया में, मजदूरों को 50 मीटर ऊंचे व 15 फ़ीट चौड़े एयूवी (जिसमें ऊपर से चिमनी लगा रहता है) के ऊपर बगैर किसी सुरक्षा मानक का ख्याल रखे हुए, रंगाई-पुताई के लिए ऊपर चढ़ा दिया गया। और एयूवी का हीटर चालू कर दिया गया। जबकि मजदूरों को एयूवी जांच के दौरान काम पर नहीं लगाना चाहिए था। इसी दौरान एयूवी के एक हिस्से में विस्फोट हो गया। जिससे दर्जनों मज़दूर और कर्मचारी बुरी तरह घायल हो गए। इस घटना के लिए बरौनी रिफाइनरी प्रबन्धन पूरी तरह जिम्मेदार है। प्रबंधन व सम्बंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी करवाई करते हुए इस घटना की उच्चस्तरीय जांच करायी जाए। 

भविष्य में भी दुर्घटना की आशंका: रिपोर्ट

भविष्य में और बड़े विस्फोटक का खतरा बरकरार है, क्योंकि तीनों एयूवी 60 वर्ष पुराने हैं जो 1962 में तैयार हुए थे, जिसकी गुणवत्ता जांच बहुत जरूरी है, एक तरह से ये कंडम स्थिति में हैं, इसकी गुणवत्ता जांच के बगैर इसे चालू करने से भविष्य में और बड़े विस्फोट का खतरा बरकरार है। जिस तरह अधिक से अधिक मुनाफा हेतु मोदी सरकार 44 श्रम कानूनों को रद्द कर, कम्पनियों का निजीकरण कर रही है, पूंजीपतियों को बेच रही है, यह सब मजदूरों के श्रम व मजदूरी की लूट पर आधारित है। उसी तर्ज पर मुनाफे के लिए मजदूरों की जान की कीमत पर इसे चालू रखना, मजदूरों व अन्य कर्मियों की जिंदगी को पूरी तरह तबाह कर सकता है।

इसलिए जाँच दल ने तीनों एयूवी की गुणवत्ता जांच कर, इसे नया लगाया जाने या इसके नवीनीकरण की सिफारिश की है। 

जांच दल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि घायल ठेका मजदूर अत्यंत गरीब हैं और जिला प्रसाशन उनकी सुध नहीं ले रहा है। इसलिए श्रम क़ानूनों का सख्ती से पालन किया जाए। 

जांच दल ने आगे बताया कि गनीमत है कि इस हादसे में किसी मजदूर की अब तक मौत नहीं हुई है, लेकिन इलाजरत ठेका मजदूर मो० शाहिद की स्थिति चिंताजनक है, हादसे में ऊंचाई से गिरने और अत्यधिक मात्रा में गैस पी लेने के कारण उन्हें साँस लेने में तकलीफ है तथा इनके कई अंग भी काम नहीं कर रहे हैं। साथ ही दोनों पैर व सिर में गहरी चोट है। वहीं गोपाल सिंह जो अत्यंत गरीब हैं का बायां पैर टूट गया है, लक्ष्मण पासवान को कंधा, पैर, सिर में गहरी चोट है।

जांच टीम ने पाया कि उक्त सभी अपने परिवार के कमाऊ सदस्य हैं। काम नहीं करने से इन्हें मजदूरी भी नहीं मिलेगी। जिससे इनके परिजन के समक्ष खाने-पीने का संकट पैदा हो जाएगा। जिला प्रशासन अब तक घायलों की सुध लेने नहीं पहुंचा है, साथ ही रिफायनरी में बहुतायत ठेका मजदूरों के श्रम अधिकारों का हनन हो रहा है। जिसमें उन्हें मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा खासकर ईएसआई व ईपीएफ का लाभ मिले व श्रम कानूनों का सख्ती से पालन हो।

जांच टीम की मांग व घोषणा इस प्रकार है-

1. सभी घायल ठेका मजदूर जो अत्यंत गरीब हैं को भरण पोषण हेतु तत्काल 2 लाख रुपए तथा मुआवजा प्रति मजदूर 5 लाख रुपया दिया जाए।

2. गंभीर रूप से घायल व चिंताजनक स्थिति में पड़े ठेका मजदूर मो० शाहिद सहित अन्य इलाजरत मजदूरों की जिंदगी बचाने के लिए अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराया जाए।

3. घटना की आपराधिक लापरवाही के जिम्मेदार बरौनी रिफाइनरी प्रबंधक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई व उच्चस्तरीय जांच की जाए। तथा 60 वर्ष पुराने एयूवी से काम लेने पर और भी बड़े हादसा का खतरा बरकरार है इसलिए तीनों एयूवी की गुणवत्ता जांच कर नवीनीकरण किया जाए।

4. जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सभी घायल ठेका मज़दूरों के परिवार को मुआवजा तथा 6 माह का मुफ्त राशन उपलब्ध कराए व रिफाइनरी में सख्ती से श्रम कानूनों के पालन, ईएसआइ- ईपीएफ लाभ की गारंटी करे।

5. माले इस मामले को बिहार विधानसभा मे उठाएगा तथा 27 सितम्बर को मजदूर-किसानों के आहूत भारत बन्द को मुद्दा बनाएगा।

Bihar
Barauni Refinery Blast
CPI-ML
AICCTU
Mahbub Alam
Ranvijay Kumar

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका


बाकी खबरें

  • channi sidhu
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: ‘अनिवार्य’ वैक्सीन से सिद्धू-चन्नी के ‘विकल्प’ तक…
    23 Jan 2022
    देश के 5 राज्यों में चुनावों का मौसम है, इसलिए खबरें भी इन्हीं राज्यों से अधिक आ रही हैं। ऐसी तमाम खबरें जो प्रमुखता से सामने नहीं आ पातीं  “खबरों के आगे-पीछे” नाम के इस लेख में उन्हीं पर चर्चा होगी।
  • Marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं
    23 Jan 2022
    भारतीय कानून की नज़र में मैरिटल रेप कोई अपराध नहीं है। यानी विवाह के बाद औरत सिर्फ पुरुष की संपत्ति के रूप में ही देखी जाती है, उसकी सहमति- असहमति कोई मायने नहीं रखती।
  • Hum Bharat Ke Log
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    महज़ मतदाता रह गए हैं हम भारत के लोग
    23 Jan 2022
    लोगों के दिमाग में लोकतंत्र और गणतंत्र का यही अर्थ समा पाया है कि एक समय के अंतराल पर राजा का चयन वोटों से होना चाहिए और उन्हें अपना वोट देने की कुछ क़ीमत मिलनी चाहिए।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    नये चुनाव-नियमों से भाजपा फायदे में और प्रियंका के बयान से विवाद
    22 Jan 2022
    कोरोना दौर में चुनाव के नये नियमों से क्या सत्ताधारी पार्टी-भाजपा को फ़ायदा हो रहा है? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रशांत किशोर पर जो बयान दिया; उससे कांग्रेस का वैचारिक-राजनीतिक दिवालियापन…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी की योगी सरकार का फ़ैक्ट चेक, क्या हैं दावे, क्या है सच्चाई
    22 Jan 2022
    एनसीआरबी की रिपोर्ट है कि 2019 की अपेक्षा 2020 में ‘फ़ेक न्यूज़’ के मामलों में 214 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फ़ेक न्यूज़ के जरिए एक युद्ध सा छेड़ दिया गया है, जिसके चलते हम सच्चाई से कोसो दूर होते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License