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बिहारः 204 विद्यालयों के पास नहीं है अपना भवन, ज़मीन पर बैठकर बच्चे करते हैं पढ़ाई
बिहार के वैशाली ज़िले में ऐसे 204 विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है। कुछ जगहों पर बच्चों को पेड़ के पास पढ़ाया जा रहा है तो कहीं सामुदायिक भवन में कक्षाएँ चल रही हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Dec 2021
Bihar
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: Firstpost

बिहार में शिक्षा का स्तर कैसा है यह किसी से छिपा नहीं है। यहां शिक्षकों और विद्याल भवनों की भारी कमी है जो चिंता की बात है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है। प्रदेश के वैशाली जिले में करीब 204 ऐसे विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है जिससे छात्र-छात्राओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिला शिक्षा विभाग के उदासीन रवैये के चलते बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल 204 ऐसे विद्यालय हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है और उन्हें दूसरे स्कूल में टैग कर दिया गया है। कुछ विद्यालय रेंट और रेंट फ्री पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे विद्यालय जहां एक भवन में दो विद्यालय चल रहे है वहां समस्याएं अधिक हैं और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। निदेशक प्राथमिक शिक्षा के निर्देश के बावजूद जिला शिक्षा विभाग ऐसे स्कूल जो एक ही भवन में दो-दो संचालित हैं उनकी स्थित विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है।

रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्षों से निदेशक की ओर से प्राथमिक शिक्षा जिला शिक्षा विभाग को पत्र जारी किया जा रहा है कि वैसे दो या दो से अधिक विद्यालय जो एक ही भवन में संचालित किए जा रहे हैं उनका प्रपत्र में प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें एक विद्यालय में समायोजित कर अतिरिक्त शिक्षकों को अन्यत्र स्थान्तरित किया जा सके लेकिन इसी सूची नहीं भेजी जा रही है।

संसाधन का अभाव

जिला के आदर्श मध्य विद्यालय में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय चकजगदीशपुर स्कूल को टैग किया गया है। इसके प्रधानाध्यापक संजय कुमार अखबार से कहते हैं कि शिक्षा विभाग को टैग करने की बजाए विद्यालय को इसी विद्यालय में मर्ज कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जहां एक ही भवन में दो विद्यालय संचालित होते हैं वहां पहले तो उनके पास संसाधन का अभाव होता है। दूसरे एक ही कमरे में पांच वर्ग संचालित करने पड़ते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भी अधूरी रह जाती है।

छोटे बच्चों के लिए परेशानी

सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार न्यूज़क्लिक से कहते हैं भगवानपुर प्रखंड के पडेढ़ा में नवसृजित विद्यालय और मटियारा विद्यालय के पास अपना भवन नहीं है। दोनों विद्यालय महादलित बस्ती में है। मटियारा स्थित विद्यालय को सामूदायिक भवन में चलाया जा रहा है। पटेढा में स्थित विद्यालय को ब्रह्म स्थान के पास खुले में चलाया जा रहा है। इस विद्यालय का भी अपना भवन नहीं है। इस संबंध में हमने शिक्षा मंत्री को भी लिखा था लेकिन इस पर अब तक काम नहीं हुआ है। जिला स्तर पर भी अधिकारियों को संबंध में लिखा गया था लेकिन विभाग की ओर से कोई इसका जवाब भी नहीं आया। उन्होंने कहा कि हाल में वैसे विद्यालय जिनका अपना भवन नहीं है उनके बच्चों को पास के विद्यालय में समायोजित करने की बात सामने आई है लेकिन विद्यालय के दूर होने से छोटे बच्चों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी और वे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।

ज़िला शिक्षा विभाग से नहीं मिली रिपोर्ट

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2017 में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया था कि जहां एक भवन में दो या दो से अधिक विद्यालय संचालित हैं उन्हें एक विद्यालय में समायोजित कर अतिरिक्त शिक्षकों को दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए। इस निर्देश के बाद तत्कालीन शिक्षा निदेशक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से ऐसे सभी विद्यालय को लेकर रिपोर्ट मांगा था जहां एक भवन में दो विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया गया। निदेशक प्राथमिक शिक्षा ने मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पांच बार पत्र जारी कर रिपोर्ट मांगा लेकिन जिला शिक्षा विभाग की ओर से रिपोर्ट नहीं भेजा गया। इस वर्ष भी निदेशक प्राथमिक शिक्षा अमरेंद्र प्रसाद ने पत्र जारी कर एक सप्ताह का समय दिया था जो पूरा हो गया लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

भवन विहीन विद्यालय की अधिक संख्या ग्रामीण क्षेत्र में

रिपोर्ट के अनुसार वैशाली जिले के 16 प्रखंड हैं जिनके कुल 204 विद्यालय भवन विहीन हैं। इनमें 183 विद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में है जबकि 19 विद्यालय शहरी क्षेत्र में स्थित हैं। 183 विद्यालय पूर्ण रूप से भवन विहीन हैं। जबकि अन्य विद्यालय अंडर कंस्ट्रक्शन, रेंट और फ्री रेंट पर संचालित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा भवन विहीन विद्यालय राघोपुर प्रखंड में है जहां इसकी संख्या 35 है। दूसरे स्थान पर जंदाहा प्रखंड है जहां 25 विद्यालय भवन विहीन हैं। हाजीपुर में 19 विद्यालय भवन विहीन हैं जबकि भगवानपुर प्रखंड में 11 विद्यालय के पास अपना भवन नहीं है। वहीं देसरी में 4 जबकि चेहराक्ला में 9 और गोरौल में 15 विद्यालय भवन विहीन हैं। उधर महुआ प्रखंड में 16, महनार में 5, पातेपुर में 14, लालगंज में 13, राजापाकर में 2, जंदाहा में 24, सहदेई बुजुर्ग में 16, बिददुपुर में 11 और वैशाली में 7 विद्यालय भवन विहीन हैं।

ज्ञात हो कि 2020 की एनएसओ की रिपोर्ट के अनुसार सभी राज्यों में बिहार नीचे से तीसरे स्थान पर है। इसका शिक्षा दर 70.9 प्रतिशत हो जो कि राष्ट्रीय दर 77.7 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत कम है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में महिला शिक्षा दर 58.7 प्रतिशत है शहरी क्षेत्र में इसका प्रतिशत 75.9 है। पुरूष शिक्षा दर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र दोनों में अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र में यह दर 78.6 प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्र में 89.3 प्रतिशत है।

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