NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
बिहारः शिक्षकों की हड़ताल से चरमराई शिक्षा व्यवस्था
शिक्षकों के आंदोलन और हड़ताल का संचालन कर रहे बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं का कहना है कि सरकार अभी तक हमसे कोई वार्ता नहीं करके अपनी हठधर्मिता ही दिखा रही है।
अनिल अंशुमन
14 Mar 2020
Teachers protest

बिहार की 'सुशासन' सरकार की हठधर्मिता के कारण पिछले 17 फरवरी से प्रदेश के प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के साथ साथ सभी टेट पास शिक्षक ‘समान वेतन, समान काम’ समेत अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिससे पूरे प्रदेश के लगभग 76 हज़ार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में पठन–पाठन और संबंधित सारे कार्य ठप्प पड़ गए हैं।

हाल ही में किसी तरह सम्पन्न हुई मैट्रिक और इंटर की परीक्षाओं के बाद उसकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य बाधित होने के कारण परीक्षाफल निर्धारित समय पर निकलने के भी आसार कम ही दिख रहे हैं। इस हड़ताल के कारण सभी प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्कूलों की पढ़ाई बाधित है वहीं परीक्षाफल में देरी होने से आगे की पढ़ाई करने वाले सभी छात्र – छात्राओं के भविष्य पर भी खतरा मंडराने लगा है।

शिक्षक –कर्मचारी आंदोलनों से जुड़े वरिष्ठ कर्मचारी नेता और अराजपत्रित कर्मचारी संघ (गोप गुट) के अध्यक्ष रामबली का कहना है सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये से बिहार की लचर शिक्षा व्यवस्था इस हड़ताल के कारण चौपट होने की कगार पर जा पहुंची है। इसका कारण सरकार की हठधर्मिता है। सरकार के सामने आंदोलनकारी शिक्षकों ने अनेकों बार ज्ञापन दिये लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। सरकार के अलावा राज्य के शिक्षा विभाग ने भी इन मांगों के समाधान की दिशा में कोई कारगर कदम उठाना तो दूर कोई संज्ञान तक नहीं लिया। अब मजबूरी में हड़ताल पर गए शिक्षकों को ही सरकार राज्य में गिरती शिक्षा व्यवस्था का ज़िम्मेदार ठहरा रही है।

teachers mov. 2.jpg

शिक्षकों के आंदोलन और हड़ताल का संचालन कर रहे बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के नेताओं का कहना है कि सरकार अभी तक हमसे कोई वार्ता नहीं करके अपनी हठधर्मिता ही दिखा रही है। इससे हड़ताली शिक्षकों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। 13 मार्च के इस हड़ताल में पिछले 27 फरवरी से शामिल टेट उत्तीर्ण शिक्षक संघर्ष समिति के सदस्यों ने राजधानी स्थित गर्दनी बाग धरनास्थल पर सामूहिक मुंडन करवाकर अपने गुस्से का इजहार किया।

इसी दिन प्रदेश के कई इलाकों में हड़ताली शिक्षकों ने नुक्कड़ सभाएं कर जनसंपर्क अभियान चलाया। इसके पहले भी 2 मार्च को सामूहिक भिक्षाटन कर अपना विरोध जताया। 5 मार्च को सभी जिलों में आक्रोश मार्च निकालकर ज़िला शिक्षा अधिकारी के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया गया। सरकार के रुख के खिलाफ आंदोलनकारी शिक्षकों ने होली नहीं मनाई और होलिका दहन के दिन मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री और शिक्षा सचिव का पुतला दहन किया। आंदोलन कर रहे शिक्षकों ने यह भी ऐलान किया है कि प्रदेश सत्ताधारी दल के मंत्री - विधायक प्रदेश में जहां भी जाएंगे उनका घेराव किया जाएगा। खबर है कि इसी कारण राज्य के शिक्षा मंत्री ने 13 से 15 मार्च के अपने बेतिया– बगहा दौरे को स्थगित कर दिया।

teachers mov. 1.jpg

शिक्षकों के जारी आंदोलन को लेकर प्रदेश विधान सभा और विधान परिषद में भी विपक्षी दलों के नेताओं ने भी शिक्षकों के आंदोलन और हड़ताल को मुद्दा बनाते हुए सरकार से उनकी मांगों के त्वरित समाधान कर हड़ताल समाप्त कराने की मांग की। जबकि भाकपा माले व अन्य विधायकों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हड़ताली शिक्षकों की मांगों के समर्थन में पोस्टर लगाकर प्रदर्शन किया।

माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने बिहार की लचर शिक्षा व्यवस्था के लिए नीतीश कुमार शासन को दोषी ठहराते हुए कहा कि खुद बिहार हाई कोर्ट ने भी प्रदेश में शिक्षा की बदहाल स्थिति के लिए सरकार को फटकार लगाते हुए तल्ख टिप्पणी की है कि – सरकारी विद्यालय फटेहाल किसानों, दलित – गरीबों की चीज़ बन गए हैं। इसीलिए सरकार को हड़ताल और उससे छात्रों को हो रहे नुकसान की कोई चिंता नहीं है।

आंदोलनकारी शिक्षकों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है 2019 के शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य विधानसभा और विधान परिषद में खुद मुख्यमंत्री ने सभी नियोजित शिक्षकों को सातवां वेतनमान देने की घोषणा की थी, आज इससे मुकर कर सभी शिक्षित बेरोजगारों की हकमारी कर रहें हैं। हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए दमन और आंदोलनकारी शिक्षकों पर झूठे मुकदमे थोपकर बर्खास्त किया जा रहा है। दर्जनों बार दिए गए हमारे लिखित आवेदनों– ज्ञापनों पर न तो कोई रुचि दिखाई गयी है और न ही अभी तक कोई आश्वासन ही मिला है। जबतक सरकार हमसे सम्मानजनक समझौता नहीं करेगी , हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

शिक्षक – कर्मचारी नेता रामबली जी का यह भी कहना है कि कुछ ही महीनों बाद राज्य में विधान सभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार की हठधर्मिता कहीं उसके लिए नुकसानदेह साबित न हो जाए। क्योंकि मामला अब सिर्फ हड़ताली शिक्षकों की मांगों तक ही नहीं सीमित रह गया है अब यह राज्य में शिक्षा बचाओ अभियान का रूप ले चुका है। सरकार समान काम का समान वेतन तो नहीं ही दे रही, शिक्षा सुधार के नाम पर प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था का निजीकरण करने पर तुल गयी है। इसीलिए मिड डे मिल समेत कई ग्रामीण योजनाओं को निजी एजेंसियों के हवाले करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। पिछले चुनावों में नीतीश कुमार की सरकार बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका रही है।

जिसे वे सिरे से खारिज कर आज उनकी जायज़ मांगों को भी अनसुना कर रहें हैं। आज प्रदेश में नियोजित और टेट उत्तीर्ण शिक्षकों की बड़ी संख्या जब अपनी जायज़ मांगों को लेकर सड़कों पर आ गयी है तो सरकार को भी समय रहते तानाशाही का रवैया छोड़ कर प्रदेश के अनगिनत स्कूली बच्चों के बेहतर भविष्य के हित में अपने राज्य के शिक्षकों के साथ समन्वय से काम लेना चाहिए।

Bihar
teachers protest
Teachers Stike
education system
Nitish Kumar
krishnandan prasad verma

Related Stories

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता


बाकी खबरें

  • corona
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के मामलों में क़रीब 25 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई
    04 May 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,205 नए मामले सामने आए हैं। जबकि कल 3 मई को कुल 2,568 मामले सामने आए थे।
  • mp
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सिवनी : 2 आदिवासियों के हत्या में 9 गिरफ़्तार, विपक्ष ने कहा—राजनीतिक दबाव में मुख्य आरोपी अभी तक हैं बाहर
    04 May 2022
    माकपा और कांग्रेस ने इस घटना पर शोक और रोष जाहिर किया है। माकपा ने कहा है कि बजरंग दल के इस आतंक और हत्यारी मुहिम के खिलाफ आदिवासी समुदाय एकजुट होकर विरोध कर रहा है, मगर इसके बाद भी पुलिस मुख्य…
  • hasdev arnay
    सत्यम श्रीवास्तव
    कोर्पोरेट्स द्वारा अपहृत लोकतन्त्र में उम्मीद की किरण बनीं हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं
    04 May 2022
    हसदेव अरण्य की ग्राम सभाएं, लोहिया के शब्दों में ‘निराशा के अंतिम कर्तव्य’ निभा रही हैं। इन्हें ज़रूरत है देशव्यापी समर्थन की और उन तमाम नागरिकों के साथ की जिनका भरोसा अभी भी संविधान और उसमें लिखी…
  • CPI(M) expresses concern over Jodhpur incident, demands strict action from Gehlot government
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जोधपुर की घटना पर माकपा ने जताई चिंता, गहलोत सरकार से सख़्त कार्रवाई की मांग
    04 May 2022
    माकपा के राज्य सचिव अमराराम ने इसे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अनायास नहीं होती बल्कि इनके पीछे धार्मिक कट्टरपंथी क्षुद्र शरारती तत्वों की…
  • एम. के. भद्रकुमार
    यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल
    04 May 2022
    भारत का विवेक उतना ही स्पष्ट है जितना कि रूस की निंदा करने के प्रति जर्मनी का उत्साह।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License