NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार: जिस ई-श्रम कार्ड को बनाने में ही भ्रष्टाचार हो रहा है वो करोड़ों असंगठित मजदूरों की ज़िंदगी में बदलाव कैसे लाएगा?
सरकारी दस्तावेज़ बनवाने में भारत के ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त भ्रष्टाचार का चलन है। श्रम कार्ड बनवाने को लेकर बिहार में जिस तरह की लूट मची हुई है, उसका एक नमूना आप यहां पढ़ सकते हैं।
राहुल कुमार गौरव
06 Nov 2021
Leela Devi
बिहार के सुपौल जिला के पिपरा प्रखंड के कटैया गांव की 53 वर्षीय लीला देवी एक आंख से देख नहीं पातीं और मज़दूरी करके घर का चूल्हा जलाती है। उन्हें श्रम कार्ड बनाने में 200 रुपये लगे।

दीवार पर चुनाव के पोस्टर लगे हुए हैं। इस पोस्टर के आगे खड़ी महिला एक आंख से अंधी है और मजदूरी करके घर का चूल्हा जलाती है। सरकार के द्वारा बिहार के सुपौल जिला के पिपरा प्रखंड के कटैया गांव की 53 वर्षीय लीला देवी पंजीकृत मजदूर नहीं है। इसलिए इनके खाते और घर तक कोई सरकारी योजना भी नहीं पहुंच पाता है।

जाति से महादलित लीला देवी बताती है कि " लगभग 6 महीने पहले राशन कार्ड की सुविधा प्राप्त हुई है। इससे पहले हम दोनों पति-पत्नी काम हो या रूपया, जो कुछ भी मिल जाए मांग कर गुजारा करते थें। सरकार के द्वारा वृद्धा पेंशन भी नहीं मिलता है"

"पता नहीं लेकिन सितंबर महीने में मजदूरी वाला एक कार्ड बना था। इसके लिए टोला(मोहल्ला) के सभी महिलाओं और पुरुषों से ₹200 लिया गया था। अभी तक तो कोई फायदा नहीं हुआ है। आगे देखते हैं।" आगे लीला देवी बताती है।

मुखिया जी प्रचार करने आएंगे तो हम सवाल पूछेंगे

वही सुपौल के त्रिवेणीगंज प्रखंड के मटकुरिया गांव के दर्जनों ग्रामीणों से ई-श्रम कार्ड बनाने के नाम पर प्रति कार्ड एक सौ रुपये लिए जा रहा है।

मटकुरिया गांव के रत्नेश मुसहर बताते हैं कि, "वीणा टेलीकॉम के सीएसपी संचालक नवीन कुमार ने लगभग गांव के 50 से 60 मजदूरों से लगभग 100 रुपया और किसी-किसी से ₹200 प्रति कार्ड बनाने के लिए लिया है।"

"जब हमने गांव के मुखिया और सरपंच प्रतिनिधि से अपनी बात कही तो उन्होंने कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं दी। अब चुनाव में वोट मांगने आएंगे तो हम भी सवाल पूछेंगे कि उस वक्त आप लोग कहां थे जब हमारे श्रम कार्ड बनने पर ₹100 रंगदारी लिया जा रहा था।" आगे रत्नेश मुसहर बताते हैं।

राशन कार्ड की तरह ही श्रम कार्ड की स्थिति ना हो जाए:

सहरसा जिले के दक्षिणी महिषी पंचायत के मुसहर टोला में लगभग 100 परिवार है। जिसमें अभी तक 36 परिवार का नाम राशन कार्ड में भी नहीं है। इस 100 परिवार में लगभग 500 मजदूर हैं। जिसमें सिर्फ 39 मजदूर बिहार के अंदर काम करने वाले मजदूरों की संख्या में रजिस्टर्ड है। बांकी 461 मजदूरों को कोरोना महामारी के वक्त दिया जा रहा कोई भी सरकारी सुविधा नहीं मिला था।

उसी मुसहर टोला की वीणा देवी बताती है कि, "श्रम कार्ड बनाने का कोई खासा उत्साह उनके टोला में नहीं दिख रहा है। कई बार राशन कार्ड बनाने के लिए अप्लाई कर चुकी हूं। हर बार अलग-अलग मुखिया को वोट दे रही हूं। हम सब के स्थिति पर कुछ फर्क नहीं पड़ रहा है।"

जब मजदूर महिला ने केंद्रीय मंत्री के सामने खोला ई-श्रम कार्ड के वसूली का पोल:

बिहार की राजधानी पटना में ई-श्रम कार्ड वितरण सह निबंधन कार्यक्रम चल रहा था। मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्रम एवं रोजगार रामेश्वर तेली और बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश मिश्रा मौजूद थे।

राज्य सरकार द्वारा राज्य के श्रमिकों को निबंधित करने के लिए ई-श्रम कार्ड वितरण करने का समारोह चल रहा था। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री रामेश्वर तेली बिहार के श्रमिकों को ई-कार्ड बांट रहे थे। बांटते वक्त मंत्री साहब ने श्रमिक महिला किरण देवी को कार्ड देने के दौरान उनसे सवाल पूछा कि उन्हें इस कार्ड को बनाने में किसी तरह के कोई पैसे तो नहीं देने पड़े?

इस सवाल का जवाब देते हुए महिला ने कहा उसे ई-श्रम कार्ड को बनवाने के लिए 100 रुपये देने पड़े। महिला की इस जवाब ने बिहार में बन रहे श्रम कार्ड की पूरी कहानी कह दी। क्योंकि सरकार के तरफ से सख्त निर्देश हैं कि श्रम कार्ड बनाने में मजदूरों से एक भी रुपया नहीं लिया जाए। सवाल के जवाब को सुनकर बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश मिश्रा से कहा कि इस मामले की जांच कराएं और देखें आखिर क्या मामला है।

ई-श्रम कार्ड के जरिए देश के करीब 38 करोड़ असंगठित मजदूरों का डाटा तैयार करने का प्रयास:

बिहार के अंदर काम करने वाले रजिस्टर्ड मजदूरों की संख्या करीब 19 लाख है। वहीं बिहार राज्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में राज्य के 14 लाख 87 हजार 23 श्रमिक पंजीकृत हैं। यह भवन निर्माण सहित अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले वे श्रमिक हैं, जिनकी आयु 60 वर्ष तक है। लेकिन बिहार (Bihar) के बाहर अन्य राज्यों में काम करने वाले मजदूरों का सही आंकड़ा मौजूद नहीं है।

इस वजह से सरकार के द्वारा मजदूरों को दिया जा रहा कोई भी सरकारी सुविधा उन तक नहीं पहुंच रहा है। बिहार में लगभग दो करोड़ मज़दूर हैं। जिसमें कोरोना महामारी के वक्त राज्य के सिर्फ 15 लाख श्रमिकों के खातों में राज्य सरकार के द्वारा करीब 446 करोड़ रुपए भेजा गया था।

इस कार्ड को सरकार के बनाने का उद्देश्य खास है कि आने वाले समय में सरकार की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जो भी योजनाएं होंगी, श्रमिकों को उनका फायदा दिया जाएगा। उन्हें एक कार्ड भी दिया जाएगा, जिसके जरिए मजदूर अगर दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, तो उन्हें अपनी स्किल के आधार पर काम करने का मौका मिलेगा।

श्रम कार्ड भ्रष्टाचार पर सरकारी महकमों का क्या कहना है:

सुपौल के त्रिवेणीगंज प्रखंड के मटकुरिया गांव के दर्जनों ग्रामीणों से ई-श्रम कार्ड बनाने के नाम पर प्रति कार्ड एक सौ रुपये लिए जा रहा था। इस मसले पर न्यूज़क्लिक को श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी विधानचंद सिंह बताते हैं कि, "सीएसपी संचालक के विरुद्ध अवैध वसूली के लिए प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। मामला दर्ज कर लिया गया है। सभी आरोपों पर बारीकी से जांच की जा रही है। जांच के बाद अग्रेत्तर कार्रवाई की जाएगी।"

वहीं मधेपुरा जिला के जिला अधिकारी श्याम बिहारी मीना ने न्यूज़क्लिक को बताया कि " जिला में कहीं भी किसी भी मजदूर के द्वारा अगर श्रम कार्ड बनाने में ₹1 भी लेने की खबर आ रही है तो हम स्थल पर जाकर कार्रवाई करते हैं। लेकिन अगर शिकायत ही नहीं आएगी तो हम क्या कर सकेंगे।"

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

श्रम कार्ड
E shram card
लेबर कार्ड
लेबर कार्ड इन बिहार
Labour card in bihar
Corruption on making of E-shram card
Panchayat election
Mukhia Responsibility

Related Stories

झारखंड: पंचायत चुनावों को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध, जानिए क्या है पूरा मामला

बिहारः प्रतिबंध के बावजूद पंचायत चुनावों के बीच शराब की तस्करी बढ़ी

बिहार: बाढ़़ प्रभावित इलाकों में कैसे होगा पंचायत का चुनाव; कैसी हैं चुनाव आयोग की तैयारियां

लखीमपुर खीरी के पंचायत चुनाव दोबारा कराए जाएं : प्रियंका गांधी

यूपी: पंचायत चुनाव में गांव-गांव बह रहे हैं शराब के परनाले!, मिलावटी शराब से मौतों का भी सिलसिला

उत्तर प्रदेश में चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव, अधिसूचना जारी

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी और भाजपा के बीच आपदा को अवसर में बदलने की होड़, पंचायतों की वित्तीय-निधि पर संघर्ष  


बाकी खबरें

  • सबरंग इंडिया
    फादर स्टेन स्वामी की हिरासत में मौत 'हमेशा के लिए दाग': संयुक्त राष्ट्र समूह
    21 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र वर्किंग ग्रुप ने मनमानी हिरासत पर भारत सरकार से उन परिस्थितियों की प्रभावी जांच करने को कहा जिनके कारण फादर स्टेन स्वामी की मृत्यु हुई थी
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    कांग्रेस का असल संकट और 'आप' के भगत अम्बेडकर
    20 Mar 2022
    कांग्रेस का असल संकट क्या है? 18 और 23 असंतुष्ट नेताओं के ग्रुप वैचारिक दबाव-समूह हैं या चुनावी राजनीति में अपने-अपने स्वार्थ के अखाड़ेबाज? पंजाब में अपनी शानदार चुनावी सफलता के बाद आम आदमी पार्टी(आप…
  • itihas ke panne
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या लाभार्थी थे भाजपा की जीत की वज़ह?
    20 Mar 2022
    'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंग में नीलांजन बात करते हैं समाजशास्त्री हिलाल अहमद से. वे बात करते हैं देश के बदलते चरित्र की.
  • Kanwal Bharti
    राज वाल्मीकि
    भेदभाव का सवाल व्यक्ति की पढ़ाई-लिखाई, धन और पद से नहीं बल्कि जाति से जुड़ा है : कंवल भारती 
    20 Mar 2022
    आपने 2022 में दलित साहित्य के समक्ष चुनौतियों की बात पूछी है, तो मैं कहूँगा कि यह चुनौती अब ज्यादा बड़ी है। हालांकि स्थापना का संघर्ष अब नहीं है, परन्तु विकास और दिशा की चुनौती अभी भी है।
  • Aap
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक
    20 Mar 2022
    हर हफ़्ते की ज़रूरी ख़बरों को एक पिटारे में एक बार फिर लेकर हाज़िर हैं अनिल जैन
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License