NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सीएए-एनआरसी विरोध के बीच पीएम मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के दावे का मतलब
यह गुरुर को दिखाता है। इससे पता चलता है कि बीजेपी और उसका नेतृत्व लोगों से कितना दूर हो गया है।
सुबोध वर्मा
23 Dec 2019
As CAA/NRC Protests

विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के ख़िलाफ़ देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शन में एक अनुमान के अनुसार पिछले दो हफ्ते में कम से कम 20 लोगों ने अपनी जान गंवा दी वहीं हजारों लोग ज़ख़्मी हुए जबकि कई लोग हिरासत में लिए गए हैं।

क़रीब 50 से ज़्यादा बड़े विश्वविद्यालयों और संस्थानों के छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया और पुलिस की बर्बरता का सामना किया जो पहले कभी नहीं हुआ था। इन विश्वविद्यालयों में नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शामिल हैं। छात्रों पर पुलिस की बर्बरता को लेकर वाम दलों ने 19 दिसंबर को देश भर में विरोध-प्रदर्शन का सफल आयोजन किया। दो मुख्यमंत्री इस सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए सड़कों पर आए जबकि छह अन्य मुख्यमंत्रियों ने इस विरोध का समर्थन किया।

इस बीच प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के तीन उद्योग संघों में से एक एसोचैम के शताब्दी समारोह को संबोधित किया और उन्हें आश्वासन दिया कि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर काफी बेहतर तरीक़े से आगे बढ़ रहा है। सच्चाई के बावजूद उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को गिरने से बचाया और विकास के रास्ते पर वापस ला दिया। पीएम की यह बात कई मायने में विचित्र और परेशान करने वाली है।

गिरती अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन कर रही है और अपनी गति से आगे बढ़ रही है ऐसा कहने के लिए कि कल्पना करने की आवश्यकता है जबकि सीएमआईई (सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी) के अनुमान के मुताबिक सात महीनों में बेरोज़गारी 8 प्रतिशत से ज़्यादा और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा किए गए आधिकारिक अनुमान के अनुसार पिछले 45 वर्ष के उच्चतम स्तर को छू दिया है।

सिर्फ यही नहीं बल्कि आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, मुद्रास्फीति और विशेष रूप से खाद्य मुद्रास्फीति पिछले कई महीनों से लगातार बढ़ रही है। आधिकारिक अनुमान आमतौर पर वास्तविक क़ीमतों को कम आंकता है। उपभोक्ता व्यय पर एनएसओ रिपोर्ट में सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2011-12 और 2017-18 के बीच उपभोक्ता ख़र्च में 4% की गिरावट आई है। शायद इसने लाखों लोगों को ग़रीबी और कुपोषण में धकेल दिया है जो कि उच्च बेरोज़गारी के चलते और बढ़ गया है। निवेश लड़खड़ा रही है या कम हो रही है, बैंक ऋण स्थिर है, आयात-निर्यात कम हुए हैं और पूंजीगत व्यय घट गया है। इनमें से कोई भी एक केवल सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शीर्ष नेता को एक परिपूर्ण और स्वस्थ अर्थव्यवस्था को आख़िर कैसे दर्शाता है। जहां तक लोगों का सवाल है, अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है और वह एक भयावह भविष्य का सामना कर रहा है।

फिर भी प्रधानमंत्री ऐसा कह रहे हैं जबकि उनके कैबिनेट सहयोगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अर्थव्यवस्था के धीमा होने के नाम पर करों में कटौती और बचाव निधि के माध्यम से कॉर्पोरेट्स को रियायत दे रहीं हैं जो कि अजीब बात है। क्या वे अलग अलग दुनियाओं में रह रहे हैं जो एक दूसरे से अनजान हैं?

परेशान करने वाली बात यह है कि मोदी सरकार अनभिज्ञ है कि जारी आर्थिक संकट से कैसे निपटना है। वे रियायतें देने, ऋण में ढील देने, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों को लगातार बिक्री करने और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी पूंजी के प्रवेश को आसान बनाने के द्वारा कॉर्पोरेट आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन यह सब डूबती अर्थव्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं डाल रहा है क्योंकि लोगों के हाथों में पैसे देकर मांग को बढ़ावा देने के लिए कुछ भी सार्थक नहीं किया गया है। वास्तव में, इसके विपरीत कल्याणकारी योजनाओं पर सरकारी व्यय को कम कर दिया गया है।

सीएए/एनआरसी की वास्तविक मंशा

सत्तारूढ़ बीजेपी के इस पूर्वाग्रह का सबसे ज्यादा परेशान करने वाला हिस्सा इस चौतरफा संकट के समय पर सीएए/एनआरसी है। शायद वे वास्तव में मानते हैं कि अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सब कुछ ठीक है और इसलिए वे हिंदू राष्ट्र की स्थापना के अपने बड़े लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं। या शायद नागरिकता के जीवन और मृत्यु के मुद्दे पर हर किसी का ध्यान हटा करके विभाजनकारी सीएए/एनआरसी गिरती अर्थव्यवस्था से निपटने के लिए उनकी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन विचार प्रक्रियाओं का मनोविश्लेषण न तो यहां है और न ही वहां है।

सच्चाई यह है कि मोदी एक बड़े उद्योग लॉबी समूह को आश्वस्त करने के लिए अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं कि सबकुछ ठीक है, हम व्यापार से संबंधित अपराधों को कम कर रहे हैं, अर्थव्यवस्था फिर से बेहतर हो रही है, फिर भी हज़ारों लोग सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करके सरकार पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार धार्मिक पहचान के आधार पर नागरिकता तय करने की अपनी ज़हरीली योजना को छोड़ दे।

सरकारी प्रचारक और बीजेपी के नेता / कार्यकर्ता लगातार झूठ बोल रहे हैं कि सीएए का एनआरसी से कोई लेना-देना नहीं है और एनआरसी भारत के किसी भी मूल नागरिक के ख़िलाफ़ लागू नहीं किया जाएगा। हालांकि इस प्रोपगैंडा को कई वर्गों द्वारा ख़ारिज कर दिया गया है जो लगातार बढ़ते विरोधों से स्पष्ट है।

सीएए एनआरसी की ओर ले जाने वाला एक कदम ज़रूर है जिसका वास्तविक उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय को और अधिक हाशिए पर लाना है और अंततः उन्हें दूसरे दर्जा का नागरिक बनाने, मतदान का अधिकार छीनने और बहुसंख्यकों की प्रजा बना देगा। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक एमएस गोलवलकर द्वारा काफी पहले कहा गया था और संघ परिवार की सोच और गतिविधियों की आधारशिला रही है। यह एक सपना है जिसे वर्तमान बीजेपी सरकार द्वारा अमल में लाया जा रहा है।

न केवल इसका मतलब यह होगा कि प्रत्येक व्यक्ति इन दस्तावेजों को पाने के लिए हाथ-पांव मार रहा होगा। क़ानून कहता है कि सबूत का दायित्व सरकार पर नहीं व्यक्ति पर है। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारियों के हाथों में होगा। सीएए सभी की मदद करेगा लेकिन मुसलमानों को नागरिकता प्राप्त करने के मामले में कोई कमी है। लेकिन, प्रभावी रूप से इस कार्य का मतलब होगा कि पूरा देश सड़कों पर खड़ा होगा, कतारों में खड़े होकर यह साबित करने की कोशिश करेगा कि वे सच्चे नागरिक हैं। अन्यथा, जैसा कि क़ानून कहता है कि आपको 'नजरबंद' और / या निर्वासित किया जाएगा।

इसके अलावा ये प्रक्रिया खुद ही हाशिए पर मौजूद वर्गों के लिए उत्पीड़न और दमन का हथियार बन जाएगी जिसमें न केवल मुस्लिम बल्कि अन्य सभी वंचित वर्ग जैसे कि दलित और आदिवासी भी शामिल होंगे।

बहरहाल ये सब भविष्य की बात है लेकिन वर्तमान में ये डर मोदी को देश की आर्थिक संपत्ति और श्रम को बिना किसी अड़चन के लोभी कॉर्पोरेट को बेचने की अनुमति देने के उद्देश्य को पूरा करता है।

सौभाग्य से मौजूदा विरोध और सरकार की आर्थिक नीतियों के ख़िलाफ़ 8 जनवरी को औद्योगिक श्रमिकों की आगामी हड़ताल मोदी और संघ परिवार की नीतियों के लिए बड़े पैमाने पर एकजुट विद्रोह में दोनों पहलुओं को बांध रही है। इस हड़ताल का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया है जिन्होंने सीएए / एनआरसी का विरोध भी किया है। जनता और इस सरकार के बीच का टूटता संबंध और बढ़ रहा है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

As CAA/NRC Protests Rage, PM Modi Talks About $5 Trillion Economy

indian economy
Economic distress
Modi government
$5 Trillion Economy
CAA/NRC Protests
January 8 Strike Call
BJP Disconnect
BJP
RSS

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 


बाकी खबरें

  • Antony Blinken
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस को अमेरिकी जवाब देने में ब्लिंकन देरी कर रहे हैं
    21 Jan 2022
    रूस की सुरक्षा गारंटी देने की मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने की समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी कूटनीति तेज हो गई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License