NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
लोकनायक अस्पताल सीएमओ ने ‘नकारात्मक मीडिया कैंपेन’ पर ऐतराज़ जताया
रितु सक्सेना ने कहा कि अस्पताल को कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि संक्रमण के डर से डॉक्टर जॉइन नहीं कर रहे हैं।
रवि कौशल, शिल्पा शाजी
19 Jun 2020
Translated by महेश कुमार
लोकनायक

संजय राम, एक दर्जी, लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) में अपने छोटे भाई हेम चंद्र के बारे में जानकारी लेने लगभग रोज़ आते हैं। उनके भाई का यहां कोविड-19 और कैंसर का इलाज इस कोविड-19-समर्पित संस्थान में चल रहा है।

चंद्र के कैंसर का इलाज श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में किया जा रहा था और 16 अप्रैल को उनकी सर्जरी होनी थी। अस्पताल ने उन्हें सर्जरी से पहले कोविड-19 की जांच करने को कहा और 15 अप्रैल को उनकी जांच पॉज़िटिव पाई गई थी। बाद में आगे के इलाज के लिए उन्हें लोकनायक अस्पताल भेज दिया गया।

राम ने बड़े अफसोस के साथ कहा, “वह अब दो महीने से अस्पताल में भर्ती है और हमें कभी-कभार ही उसकी दशा के बारे में पता चलता है। एक रोगी होने के नाते जिसे खास चिकित्सा देखभाल की जरूरत है, उसे निजी देखभाल के लिए रिशतेदारों की भी जरूरत होती है। लेकिन उसकी सहायता के लिए वहाँ कोई भी तैनात नहीं है। हमें सूचना मिली है कि उनका दो बार ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन हमें इसकी सही जानकारी नहीं है। मेरा भाई दर्द में है और मैं इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता।”

राम ने कहा, ''हमारे पास जो भी पैसा था उसे हमने खर्च कर दिया है। लॉकडाउन से पहले मैं एक एक्सपोर्ट हाउस में काम करता था, लेकिन अब में बेरोजगार हूँ। अपने भाई के परिवार या खुद के परिवार का समर्थन करने के लिए अब मेरे पास एक भी पैसा नहीं है। जहां तक उनके इलाज का सवाल है, मेरे भाई ने मुझे बताया कि कोई भी उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं देता है, यहाँ तक कि समय पर उनका डायपर भी नहीं बदला जाता है। हमें अस्पताल में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। मैं पूरी तरह से असहाय हूं।”

राम की कहानी उन सैकड़ों लोगों का पर्याय है, जो अस्पतालों से अपने प्रियजनों की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लोकनायक अस्पताल ने तब सुर्खियां बटोरी थी जब अस्पताल के गलियारों में लाशों के ढेर के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। कुप्रबंधन, हालांकि, दिल्ली सरकार के द्वारा लिए गए निर्णयों के मूल में है। 2000 बेड वाली सबसे बड़ी कोविड-19 सुविधा का अस्पताल 27,741 सक्रिय मामलों की कुल संख्या के बावजूद अपनी क्षमता से नीचे पर काम कर रहा है।

महामारी से पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के निरीक्षण का आदेश तब दिया था, जब एक गर्भवती माँ की याचिका पर सुनवाई चल रही थी जिस याचिका के मुताबिक लापरवाही के कारण उसने अपने नौ महीने के भ्रूण को खो दिया था। समिति के निष्कर्षों और दिल्ली सरकार की खुद की पेश की गई रपट के बाद पता चला कि अस्पताल आवश्यक कर्मचारियों के केवल 2 तिहाई संख्याबल के साथ काम कर रहा था  और लगभग 33 प्रतिशत पद खाली पड़े थे। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के बावजूद, अस्पतालों को स्वच्छता कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए, एलएनजेपी में नर्स यूनियन के सदस्यों ने कहा कि अस्पताल में 1,200 नर्स हैं  लेकिन उनमें से केवल 800 ही काम पर उपलब्ध हैं। दिल्ली स्टेट हॉस्पिटल्स नर्सेज यूनियन के सचिव शौकत अली ने कहा: "हमारी श्रमशक्ति में कमी हैं। हालाँकि लगभग 1,200 नर्सें हैं, कुछ प्रभारी और सहायक नर्सिंग अधीक्षक हैं और कुछ को अन्य काम आवंटित किए जाते है - परिणामस्वरूप, लगभग 900 स्टाफ नर्स काम के लिए रह जाती हैं। इनमें से, कुछ मातृत्व अवकाश पर हैं। जिन कर्मचारियों की प्रतिरक्षा प्रणाली कामज़ोर है उन्हे कोविड-19 का काम नहीं सौंपा गया है। सब मिलाकर, नर्सों की कुल कार्यशक्ति लगभग 800 होगी। इसके अलावा, 1,200 नर्सों में से 923 स्थायी कर्मचारी हैं जबकि बाकी लोग ठेके पर हैं। ”उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कमी से मरीजों पर भारी असर पड़ने लगा है।

Screen Shot 2020-06-19 at 2.11.54 PM.png

अली ने कहा कि वायरल वीडियो मेडिकल वार्ड का था, जिसमें बड़ी संख्या में केस आए हैं। “परिचारकों को अंदर जाने की अनुमति नहीं है और अधिकांश रोगी बेहोश हैं। इन रोगियों में से अधिकांश वरिष्ठ नागरिक हैं जिन्हें वॉशरूम का उपयोग करने, खाना खाने और अपने कपड़े बदलने में मदद की आवश्यकता होती है। नर्सिंग स्टाफ की ताकत को देखते हुए, और परिचारकों की अनुपस्थिति में, दो नर्सें आठ घंटे की शिफ्ट में वार्ड की जिम्मेदारी संभालती हैं। इस एपिसोड के बाद, सभी मेडिकल वार्डों को चार वेंटिलेटर जारी किए गए हैं, ”उन्होंने कहा। अली ने उल्लेख किया कि विचाराधीन वार्ड जल्द ही गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू) में बदल जाएंगे। फिर उनके पास 12 सदस्यों का स्टाफ होगा, यह मेडिकल वार्डों में छह के विपरीत होगा, यानि एक शिफ्ट के दौरान चार स्टाफ के सदस्य मौजूद होंगे।

उन्होंने कहा कि फिलहाल आईसीयू में 20 मरीज हैं, जिनमें नर्सिंग स्टाफ के चार सदस्यों को हर वक़्त वहाँ तैनात रहना पड़ता है। “हमारे चिकित्सा वार्डों को भी आईसीयू सेट-अप में बदल दिया गया है और प्रत्येक (अस्थायी आईसीयू में) लगभग 35 मरीज हैं। अब तक, इन रोगियों की देखभाल के लिए एक शिफ्ट में चार कर्मचारी होते हैं, ”उन्होंने कहा।

भारतीय नर्सिंग परिषद की सिफारिशों के अनुसार, प्रत्येक आईसीयू बिस्तर के लिए एक स्टाफ नर्स होनी चाहिए। विशेष वार्डों में, कर्मचारियों के लिए रोगी का अनुपात 4:1 का है। “सरकार ने पहले ही सरकारी अस्पतालों के कुछ स्टाफ को निजी अस्पतालों में नोडल अधिकारी के रूप में तैनात कर दिया है। एलएनजेपी से भी आठ ऐसे आधुकारी नियुक्त किए गए हैं। अस्पताल की लगभग 70 नर्स जांच में पॉज़िटिव पाई गई है और इसलिए भी स्टाफ की कमी यहां एक प्रमुख मुद्दा है।

नर्सों का कहना है कि अस्पताल द्वारा अपने कर्मचारियों के एक हिस्से को आरक्षित रखने और अपने बाकी कर्मचारियों को तैनात करने के पहले के फैसले को पलटने से संकट बढ़ गया था।

अली ने बताया कि प्रारंभिक चरण (फरवरी-मार्च) के दौरान, अस्पताल में तीन श्रेणियां थीं – सक्रिय, क्वारंटाइन और रिजर्व। यदि अस्पताल को एक वार्ड में दो कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, तो इसने छह सदस्यों का एक बैच बनाया। उनमें से दो काम कर रहते, दो अन्य संगरोध में और शेष दो को रिजर्व में रखा गया था। हालाँकि, तब, कोविड-19 को केवल दो ब्लॉक आवंटित किए गए थे। उन्होंने कहा, “अब पूरा अस्पताल कोविड-19 रोगियों के लिए है। इसलिए हमारे पास उस प्रणाली के लिए कर्मचारी नहीं हैं।”

लोकनायक अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव प्रतीक गोयल ने न्यूजक्लिक को बताया कि मरीजों के अचानक बढ़ जाने से उनके पास विकल्प बहुत कम है। उन्होंने कहा, “अब तक, डॉक्टर पीपीई पहनने के बाद  दिन में 12 घंटे तक काम करते हैं। स्थिति इतनी विकट है कि कुछ कर्मचारी दम घुटने के कारण बेहोश होकर गिर गए। अस्पताल में स्टाफ कम है; हमारे पास 1,200 डॉक्टर हैं लेकिन हमें दबाव को संभालने के लिए कम से कम 30 प्रतिशत अधिक स्टाफ की आवश्यकता है। डिपार्टमेंट ऑफ़ मेडिसिन एंड एनेस्थीसिया में स्थिति अधिक गंभीर है, जो 50 प्रतिशत से भी कम स्टाफ़ पर काम कर रहा हैं। यह वे विभाग हैं जो मुख्य रूप से अधिक कार्यभार के साथ काम कर रहे हैं। कभी-कभी, हमें 50 मरीजों के लिए केवल एक वार्ड बॉय ही मिलता है।”

सफाई कर्मचारियों के लिए 436 स्वीकृत पदों में से, 167 पद खाली पड़े हैं।

एलएनजेपी अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी रितु सक्सेना ने न्यूज़क्लिक को बताया कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती स्वास्थ्यकर्मियों के बीच संक्रमण के बढ़ते मामलों का होना है। यह बड़ी चुनौती है। डॉक्टरों के भीतर काम की प्रेरणा को धक्का लगा है और उन्हें काम पर वापस बुलाने में बहुत ऊर्जा लगती है।

सक्सेना ने स्वीकार किया कि भर्ती नहीं हुई है, लेकिन रिक्तियों की सही संख्या की पुष्टि या खुलासा करने से इंकार कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “वर्तमान में, डॉक्टर जॉइन करने के लिए तैयार भी नहीं हैं क्योंकि वे संक्रमण के जोखिम से डरते हैं। जहां तक खाली पड़े बेड की बात है, मुझे लगता है कि नकारात्मक मीडिया अभियान ने हमारी छवि को धूमिल किया है। यह मामला एक निजी चैनल पर घंटों तक प्रसारित किया गया था। अगर कोई महामारी के बीच में जनता के सामने अस्पताल की तस्वीर इस तरह पेश करता है तो कोई फिर हमारे पास क्यों आएगा।”

LNJP Hospital
COVID-19
GTB Hospital
Delhi High court
delhi hospitals

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

कोरोना अपडेट: देश में आज फिर कोरोना के मामलों में क़रीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी


बाकी खबरें

  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश में क्यों पनपती है सांप्रदायिक राजनीति
    24 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले वहां सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत फिर से हो गयी है। सवाल यह है कि उप्र में नफ़रत फैलाना इतना आसान क्यों है? इसके पीछे छिपी है देश में पिछले दस सालों से बढ़ती बेरोज़गारी
  • night curfew
    रवि शंकर दुबे
    योगी जी ने नाइट कर्फ़्यू तो लगा दिया, लेकिन रैलियों में इकट्ठा हो रही भीड़ का क्या?
    24 Dec 2021
    देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों…
  • kafeel khan
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोरखपुर ऑक्सिजन कांड का खुलासा करती डॉ. कफ़ील ख़ान की किताब
    24 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के इस वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार परंजोय गुहा ठाकुरता डॉ कफ़ील ख़ान की नई किताब ‘The Gorakhpur Hospital Tragedy, A Doctor's Memoir of a Deadly Medical Crisis’ पर उनसे बात कर रहे हैं। कफ़ील…
  • KHURRAM
    अनीस ज़रगर
    मानवाधिकार संगठनों ने कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ की तत्काल रिहाई की मांग की
    24 Dec 2021
    कई अधिकार संगठनों और उनके सहयोगियों ने परवेज़ की गिरफ़्तारी और उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को कश्मीर में आलोचकों को चुप कराने का ज़रिया क़रार दिया है।
  •  boiler explosion
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गुजरात : दवाई बनाने वाली कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा, चपेट में आए आसपास घर बनाकर रह रहे श्रमिक
    24 Dec 2021
    गुजरात के वडोदरा में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया, जिसकी चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License