NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
विज्ञान
कोविड-19: अध्ययन से पता चला है कि ऑटो-एंटीबाडी से खतरनाक रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है
ऑटो-एंटीबॉडीज रोगजनक की पहचान करने के बजाय उन अणुओं पर हमला करने लगते हैं जो कोशिका झिल्ली निर्मित करते हैं।
संदीपन तालुकदार
05 Nov 2020
कोविड-19

कोविड-19 रोग के बारे में पता चला है कि अति-संवेदनशील प्रतिरोधक प्रतिक्रिया अपने आप में जटिलता लिए हुए है। यह “वायरस के बजाय अपने खुद की प्रतिरोधक प्रणाली के हाथों मारे जाने” जैसा है।

इस परिघटना को साइटोकाइन तूफान के नाम से जाना जाता है, जिसके बारे में अब यह तथ्य प्रमाणिक तौर पर उपलब्ध हैं कि नवीनतम कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में आतंकित प्रतिरोधक प्रणाली की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप कहीं और ज्यादा जटिलता उत्पन्न होने लगती है।

इस प्रकार के आतंकित प्रतिरोधक प्रणाली का एक एक दूसरा पहलू, रक्त के थक्कों के बनने को लेकर भी है, जो कई मामलों में खतरनाक साबित हुआ है।

यह भी मालूमात हासिल हुई है कि एक अति सक्रिय प्रतिरोधक प्रतिक्रिया के चलते कुछ बेहद बीमार रोगियों में खतरनाक थक्कों के निर्माण की शुरुआत की संभावना बनने लगती है। शोधकर्ताओं ने अब इस बारे में कुछ पहलुओं के बारे में पता लगा पाने में सफलता हासिल कर ली है कि ये थक्के कैसे बनने लगते हैं।

थक्कों के निर्माण के पीछे की एक वजह ऑटो-एंटीबाडीज भी है। जैसा कि विदित है कि वायरस और संक्रमण को दूर करने के लिए शरीर में एंटीबॉडीज का होना अति आवश्यक है। लेकिन ऑटो-एंटीबॉडीज, रोगाणुओं की पहचान करने के बजाय अणुओं पर ही हमला करने लगते हैं, जो कि कोशिका झिल्ली निर्मित करने का काम करते हैं।

यह हमला न्युट्रोफिल को, जो कि एक प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका होती है को वायरस के खिलाफ लक्षित संसाधनों के जाल को जारी करने के लिए प्रेरित कर सकता है। जब ये जाले अपने अंदर लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को फँसा लेते हैं तो उनका एक झुण्ड सा बन जाता है। जोकि अंततः रक्त वाहिकाओं के मार्ग को अवरुद्ध करने का काम करने लगती हैं। साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक शोध में ऑटो-एंटीबाडी के जरिये रक्त के थक्के बनने के तंत्र के बारे में बताया गया है।

इसके तंत्र पर टिप्पणी करते हुए इस शोध के लेखक और मिशिगन विश्विद्यालय में रुमेटोलॉजिस्ट के तौर पर कार्यरत, जैसन नाइट का कहना था कि “संभवतः उतकों में संक्रमण को नियंत्रित करने का यह एक तरीका हो सकता है। लेकिन यदि यही काम रक्तप्रवाह में होना शुरू हो जाता है, तो यह घनास्त्रता या कहें थक्के के निर्माण को अग्रगति दे सकता है।”

अपनेआप में यह बेहद पेचीदा निष्कर्ष है, क्योंकि अभी तक ऑटो-एंटीबाडीज को लेकर कई तरह के कयास लगाये जाते रहे हैं, लेकिन उनके रोगजनक प्रभावों के बारे में मालूमात हासिल नहीं हो सके हैं।

ऑटो-एंटीबाडीज पर किये गए एक प्रारंभिक स्तर के पूर्व-प्रिंट अध्ययन ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि ये एंटी-बॉडीज विभिन्न प्रकार के मेजबान लक्ष्यों को बाँध कर रख सकते हैं, जिसकी वजह से ही कुछ मामलों में रोग अपने गंभीर स्तर पर पहुँच जाते हैं। इसके साथ ही विभिन्न क्षमताओं में चलाए गए अध्ययनों से पता चलता है कि वायरसों के खिलाफ प्रतिरोधक प्रतिक्रिया में ऑटो-एंटीबाडीज अपना हस्तक्षेप कर सकते हैं।

ऑटोइम्यून रोग की एक किस्म जिसे एंटी-फॉस्फोलिपिड सिंड्रोम या एपीएस के नाम से जाना जाता है, इसमें ऑटो-एंटीबाडीज फॉस्फोलिपिडस को कोशिका झिल्ली के अणुओं के तौर पर पहचानते हैं। वे रोगी जो एपीएस से पीड़ित हैं, उनमें ऑटो-एंटीबाडीज थक्का निर्मित करने वाली कोशिकाओं को अति-सक्रिय कर सकते हैं, जिसकी वजह से रोगियों में रक्त के थक्के बनने का जोखिम काफी हद तक बढ़ सकता है।  

नाइट एवं उनके दल द्वारा किये गए अध्ययन में अस्पताल में भर्ती 172 मरीजों को शामिल किया गया था और उनमें से आधे से अधिक में ऑटो-एंटीबाडीज पाई गई थी, जो मेजबान फॉस्फोलिपिड्स को पहचान सकते थे। इन एंटीबाडीज की उपस्थिति का सम्बंध खून में मौजूद उच्च स्तर के न्यूट्रोफिल से जुडी पाई गई, जिससे पता चला कि इसमें न्यूट्रोफिल भी शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने कुछ मरीजों के नमूनों से इकट्ठा की गई ऑटो-एंटीबाडीज को लैब में विकसित की गई न्यूट्रोफिल्स के साथ मिला दिया था।

इसका जो परिणाम देखने को मिला, वह शोधकर्ताओं के संदेह को पुख्ता करने वाला साबित हुआ- ऑटो-एंटीबाडीज के साथ मिश्रित किये गए न्यूट्रोफिल्स, जाल जारी करने में सक्षम थे। इसके अलावा जब रोगियों में से ऑटो-एंटीबॉडी को निकालकर कृन्तकों में इंजेक्ट किया गया था, तो कृन्तकों में भी रक्त के थक्के बनते देखे गए। यह एक तरह का संकेत था कि मनुष्यों में भी रक्त के थक्के की प्रक्रिया को ऑटो-एंटीबॉडीज द्वारा ट्रिगर किया जा सकता है।

हालाँकि अभी तक जितनी जानकारी हासिल हुई है वह किसी हिमशैल के एक सिरे के समान बेहद कम है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि एंटी-बॉडीज के रक्त के थक्के से जुड़े होने की पुष्टि के लिए और अधिक शोधकार्य जारी रहें। 

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

COVID-19: Study Suggests Auto-antibodies May Induce Dangerous Blood Clotting

Blood Clots in COVID19 Patients
Auto-Antibodies
COVID 19
Coronavirus Blood Clotting
Auto-Antibodies and Blood Clot
Auto-Antibodies and Neutrophils

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

क्या कोविड के पुराने वेरिएंट से बने टीके अब भी कारगर हैं?

बिहार के बाद बंगाल के तीन अस्पतालों में 100 से अधिक डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव

कोविड-19 : दक्षिण अफ़्रीका ने बनाया अपना कोरोना वायरस टीका

स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए

वैक्सीन नीति पर बीजेपी के दावों का तथ्य, बिहार में बाढ़ से हज़ारों बेघर और अन्य ख़बरें

कोरोना की वैक्सीन BJP की निजी जागीर नहीं

वैक्सीन रणनीति को तबाह करता भारत का 'पश्चिमीवाद'

कोविड-19 से सबक़: आपदाओं से बचने के लिए भारत को कम से कम जोखिम वाली नीति अपनानी चाहिए

यूनियन ने कहा यूपी में चुनाव ड्यूटी पर 1621 की मौत, तेलंगाना में किसानों का प्रदर्शन और अन्य ख़बरें


बाकी खबरें

  • Hijab controversy
    भाषा
    हिजाब विवाद: बेंगलुरु के कॉलेज ने सिख लड़की को पगड़ी हटाने को कहा
    24 Feb 2022
    सूत्रों के अनुसार, लड़की के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी पगड़ी नहीं हटायेगी और वे कानूनी राय ले रहे हैं, क्योंकि उच्च न्यायालय और सरकार के आदेश में सिख पगड़ी का उल्लेख नहीं है।
  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License