NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
कोरोना इफेक्ट : पड़ोसियों के व्यवहार से दुखी, लगाया बोर्ड - ‘‘घर बिकाऊ है’’
मध्यप्रदेश के शिवपुरी में कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर लौटे व्यक्ति के साथ पड़ोसियों का व्यवहार इतना खराब है कि वह अपना घर बेचकर शहर छोड़ना चाहता है।
राजु कुमार
14 Apr 2020
कोरोना इफेक्ट

कोरोना से जंग जीत लेने के बाद भी व्यक्ति का जीवन सामान्य हो जाए, ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। कोरोना को मात देने के लिए रात-दिन काम कर रहे डॉक्टर्स और अन्य लोगों के साथ भेदभाव की घटनाएं लगातार आ रही हैं, लेकिन अब कोरोना को मात देकर घर लौटे व्यक्ति के साथ भी बहिष्कार का मामला सामने आया है। मध्यप्रदेश के शिवपुरी निवासी दीपक शर्मा कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर घर लौट आए, लेकिन पड़ोसियों ने उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार किया, जिससे आहत होकर उन्होंने घर बेचकर दूसरे शहर में बसने का इरादा कर लिया। उन्होंने बकायदा घर के आगे बोर्ड लगा दिया है - ‘‘यह घर बिकाऊ है’’

शिवपुरी के दीपक शर्मा पेट्रोलियम इंजीनियर हैं। वे 18 मार्च को दुबई से शिवपुरी लौटे थे। कोरोना के लक्षण दिखने के बाद उन्हें शिवपुरी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद वे कोरोना पॉजिटिव निकले। इसके बाद 24 से 31 मार्च तक शिवपुरी में कर्फ्यू लगा दिया गया था। कोरोना पॉजिटिव का पता चलते ही इनके परिवार के साथ पड़ोसियों का बर्ताव बदल गया और वे ख़ौफ़ के कारण इनके परिवार से दूरी बनाने लगे। इलाज के बाद युवक की दूसरी और तीसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद इन्हें स्वस्थ बताकर 4 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और घर पर ही 14 अप्रैल तक क्वारंटाइन में रहने के कहा गया। जब वे ठीक होकर घर लौट आए, तो पड़ोसियों ने उनके साथ सौहार्दपूर्ण बर्ताव करने के बजाय दूरी बना ली।

दीपक शर्मा का कहना है कि उन्होंने कोरोना पर विजय पा ली, लेकिन पड़ोसियों के व्यवहार ने उनके मनोबल को तोड़ दिया। उसके परिवार को देखते ही पड़ोसी दरवाजा बंद कर लेते हैं। मोहल्ले के लोग परेशान कर रहे हैं। पड़ोसी को शुभचिंतक होना चाहिए, लेकिन कई लोगों का व्यवहार खराब है। एक पड़ोसी ने तो दूध वाले और सब्जी वाले को घर में समान देने से मना किया और उन लोगों से कहा कि दीपक के घर समान देने से वायरस पकड़ लेगा। जिस रास्ते से मां जाती है, उस रास्ते पर दूसरे को जाने से मना करते हैं, और कहते हैं कि उनके जहां कदम पड़े, वहां से वायरस पकड़ लेगा। दीपक के बुजुर्ग पिता कहते हैं कि पड़ोसी रात को दरवाजा पीटते हैं, जिससे कि वे परेशान होकर परिवार सहित कहीं और चले जाएं।

आत्मग्लानि से घिरे परिवार का कहना है कि कोरोना किसी को भी हो सकता है, इसलिए किसी के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए। उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। लेकिन कई लोग अछूतों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। दीपक शर्मा का कहना है कि स्थिति सामान्य होने पर वह फिर काम पर दुबई लौट जाएंगे, लेकिन पड़ोसियों के इस व्यवहार के बीच उसके बुजुर्ग माता-पिता कैसे रह पाएंगे? इसलिए उनकी इच्छा है कि वे घर बेचकर दूसरी जगह शिफ्ट हो जाएं।

शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक जाहिद खान का कहना है, ‘‘यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि ऐसी घटनाएं सामने आ रही है। आम व्यक्ति इससे सुरक्षित रहने के बजाय डर में जीने लगा है। यदि क्वारंटाइन का बोर्ड किसी के घर में लग जाए, तो उसके प्रति पड़ोसियों का व्यवहार बदल जा रहा है। बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों के साथ दोषियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। जब एक मरीज ठीक हो गया, तो उसके साथ और उसके परिवार के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए, लेकिन लोग उसे समस्या की जड़ मानने लगे हैं। यह अकल्पनीय है कि यदि अल्पसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति ठीक होकर वापस घर लौटेगा, तो उसके साथ समाज कैसा व्यवहार करेगा।’’

आज लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा करते हुए जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना वक्तव्य दिया, उससे कोरोना पॉजिटिव या संदिग्ध व्यक्ति या उसके परिवार के साथ भेदभाव एवं बहिष्कार की घटनाएं बढ़ने की संभावनाएं ज्यादा हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यदि एक भी मरीज बढ़े, तो सख्ती और ज़्यादा की जाएगी। पहले से ही भेदभाव के शिकार ऐसे लोग ज्यादा डरेंगे, क्योंकि उस इलाके की सख्ती और लॉकडाउन के लिए लोग कोरोना वायरस के बजाय उससे संक्रमित व्यक्ति को जिम्मेदार मानेंगे। बहिष्कार के साथ-साथ ऐसे संदिग्धों, संक्रमितों एवं उनके परिवार के साथ हिंसा होने की संभावनाएं भी हैं।

अपडेट : दीपक शर्मा ने जब खुले तौर पर अपनी बात रखी, तो प्रशासन ने उन्हें कहा कि वे ऐसा न करें और उनके पड़ोसियों को समझाया कि वे इस तरह से भेदभाव नहीं करें। दीपक शर्मा ने बताया कि प्रशासन के कहने पर उन्होंने घर के बाहर लगाए बोर्ड को हटा दिया है। यद्यपि उनका परिवार पड़ोसियों के व्यवहार से आहत है और बहुत परेशान होने के बाद ही उन्होंने घर बेचने का निर्णय लिया। बोर्ड उन्होंने इसलिए लगाया था कि घर जल्दी बिक जाए, ताकि काम पर वापस लौटने से पहले वे अपने परिवार को अन्य जगह शिफ्ट कर दें। प्रशासन के समझाने के बाद वे उम्मीद करते हैं कि शायद आगे पड़ोसियों के व्यवहार में बदलाव आए।

(राजु कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

Coronavirus
COVID-19
Corona Crisis
Madhya Pradesh
Social Distancing
Social Discrimination
Corona Effect

Related Stories

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

मध्य प्रदेश : एलपीजी की क़ीमतें बढ़ने के बाद से सिर्फ़ 30% उज्ज्वल कार्ड एक्टिव

हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक

लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़

ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक

मध्य प्रदेश: मुश्किल दौर से गुज़र रहे मदरसे, आधे बंद हो गए, आधे बंद होने की कगार पर

बाल विवाह विधेयक: ग़ैर-बराबरी जब एक आदर्श बन जाती है, क़ानून तब निरर्थक हो जाते हैं!

सावधान: देश में 6 महीने बाद कोरोना के 50 हज़ार से ज्यादा नए मामले सामने आए

कोरोना अपडेट: देश के 14 राज्यों में ओमिक्रॉन फैला, अब तक 220 लोग संक्रमित


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उत्तर प्रदेश चुनाव: जनता गुस्से में है सरकार की विफलताओं पर
    01 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के चुनावों में इस बात जनता बेहद गुस्से में है सरकार की विफलताओं को लेकर। चाहे फिर वो कोरोना काल में हुई मौत हो या फिर महंगाई और बेरोज़गारी, सरकार हर मोर्चे पर नाकाम ही नज़र आयी है , ऐसा…
  • Gujara
    दमयन्ती धर
    गुजरात दंगों के 20 साल: विस्थापित मुस्लिम परिवार आज भी अस्थाई शिविरों में रहने के लिए मजबूर
    01 Mar 2022
    20 वर्षों के बाद भी बुनियादी सुविधाओं के बिना ये शिविर हिंसा प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी आवास बन चुके हैं, जो एक बार फिर से विस्थापित कर दिए जाने की आशंका के बीच रहने के लिए मजबूर हैं।
  • BHU hospital
    सोनिया यादव
    यूपी: बीएचयू अस्पताल में फिर महंगा हुआ इलाज, स्वास्थ्य सुविधाओं से और दूर हुए ग्रामीण मरीज़
    01 Mar 2022
    बीते साल नवंबर में ही ओपीडी की फीस बढ़ोत्तरी के बाद अब एक बार फिर सभी जांच सुविधाओं की दर में दो से तीन गुना की बढ़ोत्तरी की गई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मानकों में…
  • Naveen
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन के खारकीव में गोलाबारी में भारतीय छात्र की मौत
    01 Mar 2022
    छात्र का नाम नाम नवीन शेखरप्पा है। वह कर्नाटक के रहने वाले थे।
  • ukraine
    एपी
    ब्रिटेन ने यूक्रेन को उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने के आह्वान को ख़ारिज किया
    01 Mar 2022
    ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम यह (उड़ान प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित) नहीं करने वाले हैं, क्योंकि हम ऐसी स्थिति में आ जाएंगे, जब हमें रूसी विमानों को मार गिराना हेागा।’’
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License