NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
अपराध
उत्पीड़न
भारत
राजनीति
दिल्ली: नाबालिग दलित लड़की की गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप, पुलिस ने नहीं दर्ज की रिपोर्ट
दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर क्षेत्र में आने वाले गुड़ मंडी क्षेत्र में यह घटना हुई है। परिजनों का कहना है कि 4 अक्टूबर को नाबालिग का बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। घटना के विरोध में एसएफआई समेत विभिन्न संगठनों ने 16 अक्टूबर को मॉडल टाऊन थाना पहुंचकर पीड़िता के परिवार के साथ विरोध-प्रदर्शन किया।
मुकुंद झा
17 Oct 2020
नाबालिग दलित लड़की की गैंगरेप के बाद हत्या का आरोप
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और उसकी विधानसभा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर से करीब गुड़मंडी नामक एक बस्ती है। यहां पर कथित तौर पर बीते 4 अक्टूबर को एक नाबालिग दलित लड़की से बलात्कार करके उसकी हत्या कर दी गई है। मामले में पुलिस पर पीड़ित परिवार को प्रताड़ित करने के आरोप लग रहे हैं। परिवार और उनके शुभचिंतकों का कहना है कि पुलिस ने परिवार की शिकायत पर कार्रवाई करने के उल्टा परिवार के लोगों के साथ मारपीट की है।

इसको लेकर छात्रों ने कल यानी 16 अक्टूबर को मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शन किया। लेकिन पुलिस ने उनकी मांग पर ध्यान देने के बजाय प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की और महिलाओं के साथ हाथपाई की। यहां तक कि कुछ मीडिया वालों के साथ भी मारपीट की हुई।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता का परिवार बहुत ही गरीब है और लड़की भी परिवार की आर्थिक मदद हो सके इसलिए लोगों के घरो में काम करती थी। इस लड़की की माता का निधन जब यह 3 साल की थी तभी हो गया था उसके बाद इसके पिता ने भी इन्हें छोड़ दिया। पीड़िता अपने मौसी के रहती थी। इसकी मौसी-मौसा भी आर्थिक रूप से कमजोर हैं। मौसा प्लम्बर का काम करते हैं जबकि मौसी घरों में काम किया करती हैं।

परिवार के मुताबिक लड़की की उम्र 17 साल है जो मॉडल टाउन में एक घर में काम करती थी। परिवार ने आरोप लगाया है कि मकान मालकिन के बेटे और उसके ड्राइवर द्वारा बलात्कार किया गया और 4 अक्टूबर को उसकी हत्या कर दी गई, जहाँ वह पिछले 10 दिनों (24 घंटे) से काम कर रही थी। घटना के दिन वह अपनी ‘मौसी’ को फोन पर कुछ बताना चाहती थी, लेकिन मकान मालकिन की मौजूदगी के कारण असमर्थ थी।

उसी दिन बाद में मकान मालकिन की बेटी लड़की की ‘मौसी’ को अपनी माँ यानी मालकिन के घर ले गई, जहां पहले से ही पुलिस बल की मौजूदगी थी, कुछ संघर्ष के बाद उसे पीड़िता को देखने की अनुमति दी गई, जो तब तक मर चुकी थी और उसका शव ड्राइवर के कमरे में लटकता हुआ मिला।

उसके बाद पुलिस ने घटना स्थल से शव को कब्जे में ले लिया और परिवार के लोग पीड़िता के शरीर का कोई पता नहीं लगा पाए। इसलिए वे मकान मालकिन के घर गए, जहां से ना केवल पुलिस ने परिवार के 12 सदस्यों जिसमे 8 महिला और 4 पुरुष थे, उन्हें गिरफ्तार किया, बल्कि उन्हें बेरहमी से पीटा और यहां तक कि गिरफ्तार की गई महिलाओं से पुरुष पुलिसकर्मी ने भी मारपीट की। इसके अलावा उन्होंने परिवार को लॉकअप में देर रात तक जबरदस्ती रखा।

अगले दिन पुलिस शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले गई, जिसकी रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। उसी दिन शाम तक पुलिस ने कुछ परिवार के सदस्यों की उपस्थिति (जबरन) में पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि परिवार को शव घर वापस लाने तक नहीं दिया गया। यहां तक कि पुलिस ने परिवार को पीड़िता के पूरे शव को देखने की अनुमति तक नहीं दी। ये सभी जानकारी पीड़ित पक्ष ने बताई है।

पीड़िता की मौसी ने रोते हुए कहा कि "हमे तो यह भी नहीं बताया गया कि मेरी बेटी मर गई है बाद में हमे पता चला कि वह मर गई है। अब पुलिस वाले हम से कह रहे हैं जाओ जो करना है कर लो हम रिपोर्ट नहीं देंगे (एफआईआर नहीं लिखेंगे),जाओ कोर्ट में जाओ हम कुछ नहीं करेंगे।"

जबकि उसके मौसा ने कहा "हम बस अपनी बच्ची के लिए न्याय चाहते है और कुछ नहीं '

अब तक मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन द्वारा कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस इस पूरे मामले को आत्महत्या बता रही है जबकि परिवार इससे पूरी तरह से नकार रहा है।

इस घटना की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो के बीच पहुंची जिसके बाद डीयू के छात्र और छात्र संगठनों के अलावा सभ्य समाज के लोगों ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया।

पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मॉडल टाउन थाने के सामने इकट्ठा हुए एसएफआई सहित विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटा गया और उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन के अंदर हिरासत में एक बंद कमरे के अंदर पुलिस ने उनके साथ मारपीट की।

दिल्ली में हाथरस की पुनरावृत्ति!

एसएफआई दिल्ली के अध्यक्ष सुमित कटारिया ने कहा, "हाथरस मामले की तरह ही, पुलिस भी गुड़मंडी से मारे गए पीड़ित के लिए न्याय से इनकार कर रही है। और न्याय मांगने वाले प्रदर्शनकारियों की आवाज को दबा रही है।" एसएफआई सहित सभी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की ओर से इस गंभीर लापरवाही और अन्याय का विरोध किया और मामले की तत्काल जांच की मांग की। सुमित ने कई गंभीर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों की मांग इस प्रकार है

  • इन सबके पीछे जो पुलिस अधिकारी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
  • पीड़ित को न्याय दिया जाना चाहिए और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • दोषियों के खिलाफ तुरंत बलात्कार और हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ़्तार किया जाए।
  • इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
  • लड़की की लाश को जबरन जलाने के दोषी अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।
  • लड़की के परिवार के 12 सदस्यों (8 महिला,4 पुरुष) को धाने के अंदर 8 घंटे तक पीटने और लगातार प्रताड़ित करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

हमने इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष जानने की कोशिश की और नार्थ वेस्ट डीसीपी से संपर्क किया तो उनके सहयोगी ने बताया कि अभी वो मीटिंग में है जबकि मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन फोन किया लेकिन किसी ने उठाने की जहमत नहीं उठाई। खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष नहीं मिल सका है। जैसे ही कोई जानकारी मिलेगी ख़बर को अपडेट कर दी जाएगी।

New Delhi
rape case
Dalit Girl
crimes against women
women safety
delhi police
BJP
AAP

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

सवर्णों के साथ मिलकर मलाई खाने की चाहत बहुजनों की राजनीति को खत्म कर देगी

जहांगीरपुरी— बुलडोज़र ने तो ज़िंदगी की पटरी ही ध्वस्त कर दी

अमित शाह का शाही दौरा और आदिवासी मुद्दे

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

यूपी चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय OBC नेताओं पर भारी पड़ता केंद्रीय ओबीसी नेता? 

अनुसूचित जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति और मकान किराए के 525 करोड़ रुपए दबाए बैठी है शिवराज सरकार: माकपा

यूपी चुनाव में दलित-पिछड़ों की ‘घर वापसी’, क्या भाजपा को देगी झटका?

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित


बाकी खबरें

  • LAW AND LIFE
    सत्यम श्रीवास्तव
    मानवाधिकारों और न्याय-व्यवस्था का मखौल उड़ाता उत्तर प्रदेश : मानवाधिकार समूहों की संयुक्त रिपोर्ट
    30 Oct 2021
    29 अक्तूबर को जारी हुई एक रिपोर्ट ‘कानून और ज़िंदगियों की संस्थागत मौत: उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा हत्याएं और उन्हें छिपाने की साजिशें’ हमें उत्तर प्रदेश में मौजूदा कानून व्यवस्था के हालात को बेहद…
  • migrant
    सोनिया यादव
    महामारी का दर्द: साल 2020 में दिहाड़ी मज़दूरों ने  की सबसे ज़्यादा आत्महत्या
    30 Oct 2021
    एनसीआरबी के आँकड़ों के मुताबिक़ पिछले साल भारत में तकरीबन 1 लाख 53 हज़ार लोगों ने आत्महत्या की, जिसमें से सबसे ज़्यादा तकरीबन 37 हज़ार दिहाड़ी मजदूर थे।
  • UP
    लाल बहादुर सिंह
    आंदोलन की ताकतें व वाम-लोकतांत्रिक शक्तियां ही भाजपा-विरोधी मोर्चेबन्दी को विश्वसनीय विकल्प बना सकती है, जाति-गठजोड़ नहीं
    30 Oct 2021
    पिछले 3 चुनावों का अनुभव गवाह है कि महज जातियों के जोड़ गणित से भाजपा का बाल भी बांका नहीं हुआ, इतिहास साक्षी है कि जोड़-तोड़ से सरकार बदल भी जाय तो जनता के जीवन में तो कोई बड़ी तब्दीली नहीं ही आती, संकट…
  • Children playing in front of the Dhepagudi UP school in their village in Muniguda
    राखी घोष
    ओडिशा: रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्न-आय वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट इस तथ्य का खुलासा करती है कि जब अगस्त 2021 में सर्वेक्षण किया गया था तो ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 28% बच्चे ही नियमित तौर पर पठन-पाठन कर रहे थे, जबकि 37% बच्चों ने अध्ययन बंद कर दिया था।…
  • climate change
    संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट : अमीर देशों ने नहीं की ग़रीब देशों की मदद, विस्थापन रोकने पर किये करोड़ों ख़र्च
    30 Oct 2021
    रिपोर्ट के अनुसार, विकसित देश भारी हथियारों से लैस एजेंटों को तैनात करके, परिष्कृत और महंगी निगरानी प्रणाली, मानव रहित हवाई प्रणाली आदि विकसित करके पलायन को रोकने के लिए एक ''जलवायु दीवार'' का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License