NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
दिल्ली विश्वविद्यालय: डूटा ने कहा 45,000 से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन परीक्षा को नकारा
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा किए गए सर्वेक्षण में बताया गया है कि लगभग 50% छात्रों ने कहा है कि वे अपने शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन भेजे गए पढ़ाई के मैटेरियल तक नहीं पहुँच पा रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 May 2020
duta

दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) द्वारा 23-25 मई 2020 के बीच ऑनलाइन ओपन बुक एग्ज़ाम पर एक ऑनलाइन जनमत संग्रह किया गया। इस जनमत में भाग लेने वाले 90% छात्रों का कहना है कि वो किसी भी तरह की परीक्षा के लिए अभी तैयार नहीं है। इस सर्वेक्षण में 51452 छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया था।  


दरअसल विश्वविद्यालय ने अपने एक नोटिफिकेशन में सुझाव दिया था कि छात्र विश्वविद्यालय द्वारा ऑनलाइन भेजे गए प्रश्न पत्र को डाउनलोड करें, एक सादे कागज पर अपने उत्तर लिखें और तीन घंटे के भीतर इसे अपलोड करें। विश्वविद्यालय के इस प्रस्ताव का शिक्षकों और छात्रों दोनों ने विरोध किया। छात्रों के बड़े समूह ने कहा कि ऐसी परीक्षा आयोजित करना गरीब और हाशिये के तबके से आये छात्रों के साथ अन्याय होगा क्योंकि वो उपकरणों की कमी, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य मुद्दों से जूझ रहे हैं।

शारीरिक रूप से विकलांग श्रेणी के छात्रों ने कहा कि इस फर्मूले में सहायक लेखकों और अतिरिक्त समय के उनके मुद्दों पर विचार नहीं किया गया। जो कि आमतौर पर कलम और पेपर परीक्षाओं में दिया जाता हैं।

सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि लगभग 50% छात्रों ने कहा कि वे अपने शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन भेजे गए पढ़ाई के मैटेरियल तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि 55% छात्रों ने जवाब दिया कि महामारी की घोषणा से पहले आयोजित होने वाली क्लास के लिए भी उनके पास पढ़ाई का मैटेरियल नहीं था।

सर्वे के सबसे ज़रूरी और तार्किक पक्ष

सर्वेक्षण में कहा गया है कि 74% छात्र स्मार्टफोन पर निर्भर हैं और स्मार्टफोन पर परीक्षा आयोजित करना कोई अच्छा विकल्प नहीं है। इसी तरह, 46.6% छात्र 4 जी इंटरनेट सेवाओं का लाभ उठाते हैं, जबकि 10.9 % छात्र पुराने 2 जी सेवाओं पर निर्भर हैं। जम्मू और कश्मीर के छात्रों ने कहा कि परीक्षा देने के लिए अशांत क्षेत्र में अस्थिर परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। जबकि लगभग 7% छात्र इंटरनेट का इस्तेमाल ही नहीं करते है। 80.5% छात्रों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान वो घर पर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।

इस जनमत संग्रह में भाग लेने वाले छात्रों ने 92.2% स्नातक के छात्र थे और शेष मास्टर के छात्र थे। 86.8% छात्र रेगुलर मोड में, 8% प्रतिशत स्कूल पर ओपन लर्निंग से तथा 5.2% छात्रा नॉन कॉलेजिएट वूमेंस एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) में पढ़ रहे हैं।

एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए DUTA अध्यक्ष राजीव रे ने कहा कि परीक्षाओं आयोजित करने का निर्णय निर्वाचित प्रतिनिधियों या कार्यकारी परिषद या शैक्षणिक परिषद के सदस्यों के साथ बिना किसी परामर्श के लिया गया था। उन्होंने कहा, “ DUTA मानता है कि OBE (ओपन बुक परीक्षा) परीक्षा का एक गलत तरीका है क्योंकि यह उन लोगों के खिलाफ भेदभाव करता है जिनकी किताबों, नोट्स और ऑनलाइन संसाधनों तक पहुँच नहीं है। ये ईमानदार छात्रों के साथ धोखा होगा। इसके अलावा, यह कई छात्रों की विशेष ज़रूरतों का ध्यान नहीं रखता है, विशेष रूप से विकलांग छात्रों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।”
 
उन्होंने कहा, " DUTA मांग करता है कि विश्वविद्यालय को अन्य तरीको को ढूँढना चाहिए, जो छात्रों के  बड़े वर्ग का अनादर न करे या बेईमानी को बढ़ावा न देता हो। विभिन्न तबकों से  प्राप्त प्रस्तावों को देखा जा सकता है और इस अनिश्चित समय में छात्रों को तनाव और चिंता को कम करने में मदद करने के लिए एक उपयुक्त निर्णय लिया जा जाना चाहिए।”

पूर्व डीयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल सदस्य आभा देव हबीब ने कहा कि विश्वविद्यालय सरकारों के सुधारों को लागू करने वाली एक प्रयोगशाला बनता जा रहा है। हम ये चार वर्षीय अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम (एफवाईयूपी) या विकल्प के आधार ऋण प्रणाली (CBCS) पाठ्यक्रम के समय से ही देख रहे है। यह काफी उल्लेखनीय है कि तुलनात्मक रूप से छोटे विश्वविद्यालयों जैसे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने परीक्षाओं को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। यह केवल दिल्ली विश्वविद्यालय है जो इस तरह का प्रस्ताव लेकर आया है। यहां तक कि, यूजीसी समिति के प्रमुख केसी कुहाड़ ने विश्वविद्यालयों में अकादमिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने की सलाह दी, उन्होंने भी अपने मूल संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के लिए इसकी सिफारिश नहीं की हैं।

इस बीच, विश्वविद्यालय में विभिन्न विभागों ने भी परीक्षाओं के लिए वैकल्पिक फॉर्मूले का सुझाव दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने पिछले सेमेस्टर के अंकों में 75% वेटेज और अंतिम सेमेस्टर के आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) के अंकों के लिए 25% वेटेज देकर अंक देने की सिफारिश की है। इतिहास विभाग के पाठ्यक्रम की संयुक्त समिति ने “स्नातक छात्रों के लिए सुझाव दिया कि, 1 + 2 + 3 + 4 + 5 सेमेस्टर के अंकों का औसत को 6  सेमेस्टर का 75% अंक मान लिया जाए और बाकी 25% इंटरनल असेसमेंट के अंक जोड़ लिया जाए। औसत अंकों के इन तरीकों को अंतिम वर्ष SOL और NCWEB छात्रों के लिए भी  लागू किया जा सकता है। पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के लिए, 1 + 2 + 3  सेमेस्टर के कुल मार्क्स / CGPA के 75% अंकों के औसत को सेमस्टर 4 का अंक माना जाए और बाकी 25% चौथे सेमेस्टर का इंटरनल असेसमेंट के अंक हों। उन छात्रों के लिए जो लॉकडाउन की कठिनाइयों के कारण समय पर इंटरनल असेसमेंट के लिए अपने असाइनमेंट जमा नहीं कर सके, उन्हें जुलाई में अतिरिक्त समय दिया जा सकता है।”

Online Examinations
Delhi University
DUTA
Open Book Exams
COVID 19 Lockdown
Online Classes
Access to Internet
Higher education

Related Stories

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

दिल्ली: दलित प्रोफेसर मामले में SC आयोग का आदेश, DU रजिस्ट्रार व दौलत राम के प्राचार्य के ख़िलाफ़ केस दर्ज

डीयूः नियमित प्राचार्य न होने की स्थिति में भर्ती पर रोक; स्टाफ, शिक्षकों में नाराज़गी

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट को लेकर छात्रों में असमंजस, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं गुहार

नई शिक्षा नीति का ख़ामियाज़ा पीढ़ियाँ भुगतेंगी - अंबर हबीब

यूजीसी का फ़रमान, हमें मंज़ूर नहीं, बोले DU के छात्र, शिक्षक

नई शिक्षा नीति ‘वर्ण व्यवस्था की बहाली सुनिश्चित करती है' 

शिक्षाविदों का कहना है कि यूजीसी का मसौदा ढांचा अनुसंधान के लिए विनाशकारी साबित होगा

लॉकडाउन में लड़कियां हुई शिक्षा से दूर, 67% नहीं ले पाईं ऑनलाइन क्लास : रिपोर्ट


बाकी खबरें

  • water pump
    शिवम चतुर्वेदी
    हरियाणा: आज़ादी के 75 साल बाद भी दलितों को नलों से पानी भरने की अनुमति नहीं
    22 Nov 2021
    रोहतक के ककराणा गांव के दलित वर्ग के लोगों का कहना है कि ब्राह्मण समाज के खेतों एवं अन्य जगह पर लगे नल से दलित वर्ग के लोगों को पानी भरने की अनुमति नहीं है।
  • ATEWA
    सरोजिनी बिष्ट
    पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अटेवा का लखनऊ में प्रदर्शन, निजीकरण का भी विरोध 
    22 Nov 2021
    21 नवंबर को लखनऊ के इको गार्डेन में नेशनल पेंशन स्कीम यानी एनपीएस को रद्द करने, पुरानी पेंशन सिस्टम यानी ओपीएस को पुनः बहाल करने और रेलवे के निजीकरण पर रोक लगाने की मांगों के साथऑल इंडिया टीचर्स एंड…
  • COP26
    डी रघुनंदन
    कोप-26: मामूली हासिल व भारत का विफल प्रयास
    22 Nov 2021
    इस शिखर सम्मेलन में एक ओर प्रधानमंत्री के और दूसरी ओर उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों तथा आला अफसरों के अलग-अलग रुख अपनाने से ऐसी छवि बनी लगती है कि या तो इस शिखर सम्मेलन के लिए भारत ने ठीक से तैयारी…
  • birsa
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘जनजातीय गौरव दिवस’ से सहमत नहीं हुआ आदिवासी समुदाय, संवैधानिक अधिकारों के लिए उठाई आवाज़! 
    22 Nov 2021
    बिरसा मुंडा जयंती के कार्यक्रमों और सोशल मीडिया के मंचों से अधिकतर लोगों ने यही सवाल उठाया कि यदि बिरसा मुंडा और आदिवासियों की इतनी ही चिंता है तो आदिवासियों के प्रति अपने नकारात्मक नज़रिए और आचरण में…
  • kisan mahapanchayat
    लाल बहादुर सिंह
    मोदी को ‘माया मिली न राम’ : किसानों को भरोसा नहीं, कॉरपोरेट लॉबी में साख संकट में
    22 Nov 2021
    आज एक बार फिर कॉरपोरेट-राज के ख़िलाफ़ किसानों की लड़ाई लखनऊ होते हुए देश और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई और नीतिगत ढांचे में बदलाव की राजनीति का वाहक  बनने की ओर अग्रसर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License