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राजनीति
दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों ने की बेहतर कार्य स्थिति और वेतन की मांग, काली पट्टी लगाकर कर रहे काम
डीबीसी कर्मचारियों ने अपनी माँगों के प्रति लगातार दिखाई जा रही उदासीनता के विरोध में, 4 जनवरी 2022 से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर न जाने का निर्णय लिया था। परन्तु कोरोना की तीसरी लहर के बढ़ते प्रकोप के मद्देनज़र अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार न करके, विरोध के दूसरे तरीक़े अपनाने का निर्णय लिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Jan 2022
Domestic Breeding Checkers

दिल्ली के तीनों नगर निगम में कार्यरत डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स(डीबीसी) कर्मचारी 4 जनवरी 2022 से काली पट्टी बाँधकर काम कर रहे है। पहले इन कर्मचारियों ने अपनी माँगों के प्रति लगातार दिखाई जा रही उदासीनता के विरोध में 4 जनवरी 2022 से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर न जाने का निर्णय लिया था। परन्तु कोरोना की तीसरी लहर के बढ़ते प्रकोप के मद्देनज़र अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार न करके विरोध के दूसरे तरीक़े अपनाने का निर्णय लिया।

इन कर्मचारियों का बुरा हाल है। वो लगातार 26 वर्षों से कार्यरत डीबीसी कर्मचारी, दिल्ली में हर तरह की महामारी से लड़ने के लिए फ्रंट लाइन में रहते हैं। लेकिन आज वो अपने कर्मचारी होने के बुनियादी हक़ के लिए लड़ रहे है। 

एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष देवानंद शर्मा ने कहा कि सन 1996 से आज तक लगातार डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, पीलिया, हैजा और पिछले 2 वर्षों से कोरोना(कोविड-19) से अपनी जान को जोखिम में डालकर लगातार बिना कोताही किए कार्य को बेहतरीन तरीके से करते आ रहे हैं। साथ ही कई साथी अपनी अपनी जान भी गंवा बैठे हैं। कई रिटायर हो चुके हैं। कोरोना में कई साथियों की मृत्यु भी हुई लेकिन निगम का दिल फिर भी नहीं पसीजा और ना ही उनके परिवार के लिए कुछ किया गया जो कि बेहद शर्मनाक है।

आगे उन्होंने कहा कि लगातार डीबीसी भाइयों की मांग को लेकर एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन ने अपने परमानेंट करने और पद नाम को लेकर कई बार निगम से बातचीत भी की, प्रदर्शन भी किए, लेकिन 26 वर्षो के बीत जाने के बाद तीनों निगम कमिश्नर के मीटिंग मिनट्स बन जाने के बाद भी, हाईकोर्ट से आर्डर हो जाने के बाद भी निगम को रहम नहीं आया।

इसी के चलते आज तीनों निगम के डीबीसी कर्मचारियों ने एमसीडी के 12 जोन के कर्मचारी 4 जनवरी 2022 से विरोध दर्ज करा रहे है। कर्मचारियों ने कहा “हम सबने निगम द्वारा दिए गए मौखिक व लिखित आश्वासनों को मानते हुए किसी भी कठिन वक्त, चाहे हमारा वेतन ना मिला हो या किसी गंभीर महामारी में हड़ताल पर जाने का निर्णय नहीं किया था, क्योंकि हम सब डीबीसी कर्मचारी भी दिल्ली की जनता हैं। परन्तु आज डीबीसी कर्मचारी अपने आप को निगम प्रशासन द्वारा ठगा हुआ महसूस करता है।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली: डीबीसी कर्मचारियों का स्थायी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन, हड़ताल की चेतावनी दी

सरकार इन्हे आजतक कोई पद नहीं दे पाई है जबकि तीनों निगम में डीबीसी कर्मचारी लगभग 25 तरह के कार्य करता है। निगम के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट से लेकर हाउस टैक्स कलेक्शन ,पॉल्यूशन ड्यूटी और डोर टू डोर सर्वे जो डीडीए द्वारा प्रधानमंत्री योजना के तहत करवाए गए और ना जाने कई तरह के कार्य, डीबीसी कर्मचारी अपने आप को हर आग में झोंकने के लिए तैयार रहे हैं।

डीबीसी कर्मचारियों की मुख्य माँगें इस प्रकार हैं-

-बढ़ते कोरोना/ ओमिक्रोन वायरस के प्रभाव के मद्देनज़र प्रशासन हमारी सेवा शर्तों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाए 

-डीबीसी कर्मचारियों को नियमित/पक्का किया जाए

-वेतन मंहगाई अनुसार- 30,000 रुपए महीने किया जाए

एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने बताया कि उन्हें पग-पग पर मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है जबकि वे विभाग से कई बार इस विषय पर बातचीत कर चुके हैं लेकिन वो उनकी मदद के बजाय और मुश्किल खड़ी कर रहा है।

इससे कर्मचारियों में भारी रोष है। एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष देवानंद शर्मा का कहना है कि यह हमारा दुर्भाग्य ही तो है कि हमारा निगम प्रशासन और हमारे नेतागण किसी भी तरीके से हमारा साथ नहीं दे रहे हैं। न तो हमारी जीवन सुरक्षा और हमारे परिवार की सुरक्षा है।

इसे भी पढ़ें: क्या दिल्ली सच में डेंगू से लड़ने के लिए तैयार है ?

Domestic Breeding Checkers
DBC workers
workers protest

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