NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा : सिर्फ़ जानें नहीं गईं, बच्चों का भविष्य भी दांव पर लग गया है!
"दिन-रात शोर का माहौल और ये डर भी है कि कहीं कोई आकर मार ना दे। ऐसे हालात में कोई कैसे परीक्षा दे सकता है, इसलिए मुझे मजबूरी में बुधवार की परीक्षा छोड़नी पड़ी।"
सोनिया यादव
29 Feb 2020
Attack on School
Image courtesy: Facebook

'मैंने पूरे साल मेहनत की, लेकिन पेपर नहीं दे पाया, मुझे नहीं पता अब मेरा क्या होगा!’

यह चिंता 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले भजनपुरा के हैदर मुनिस की है, हैदर फ़तेहपुरी मुस्लिम सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र हैं। गुरुवार 27 फ़रवरी को हैदर की अंग्रेज़ी की परीक्षा होनी थी लेकिन हिंसा के कारण वे परीक्षा नहीं दे पाए। अब उन्हें नहीं पता कि उनके रिज़ल्ट का क्या होगा, क्या परीक्षा दोबारा होगी या उन्हें एबसेंट क़रार दे दिया जाएगा।

दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में हिंसा के बाद अब धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी दोबारा पटरी पर लौट रही है। लेकिन इन सब के बीच बच्चों का भविष्य अभी भी दांव पर लगा हुआ है। दिल्ली समेत देशभर में इस समय सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं जारी हैं। हिंसा के कारण बोर्ड ने बुधवार 26 फ़रवरी और गुरुवार 27 फ़रवरी को भी हिंसाग्रस्त इलाक़ों में होने वाली दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था। इस दौरान दिल्ली सरकार ने भी इन इलाक़ों में सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दे दिया था। लेकिन ऐसे में उन छात्रों का भविष्य अधर में है जो हिंसाग्रस्त इलाक़ों में रहते हैं लेकिन उनका सेंटर इन इलाक़ों से बाहर पड़ता है।

हैदर जैसे और भी कई छात्रों ने अपने भविष्य को लेकर चिंता ज़ाहिर की। कई छात्रोें का कहना है कि अभी भी उनके कानों में बार-बार धमाके की आवाज़ें गूंज रही हैं, आंखों के सामने हिंसा का भयानक मंज़र तैर रहा है, आस-पास के दोस्तों से उनका पूरी तरह से कट ऑफ़ हो गया है और अब उन्हें घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है।

आइशा दसवीं की छात्रा हैं और मौजपुर में रहती हैं। बुधवार 26 फ़रवरी को आइशा का अंग्रेजी का पेपर था। लेकिन आइशा तैयारी के बावजूद पेपर देने नहीं जा पाईं। आइशा को डर था कि कहीं भीड़ उन्हें या उनके पिता को मुस्लिम समझकर निशाना ना बना ले। अपनी आप बीती सुनाते हुए वो डर के मारे रोने लगती हैं। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आगे क्या होगा?

आइशा ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, "मैं तीस हजारी के क्वीन मेरीज़ सीनियर सेकंडरी स्कूल में पढ़ती हूँ। सोमवार को धमाके की कई ख़बरें आ रही थीं, उस दिन जैसे-तैसे मैंने पेपर दिया लेकिन उसके बाद से मैं एक दिन भी नहीं पढ़ पाई हूं। दिन-रात शोर का माहौल और ये डर भी है कि कहीं कोई आकर मार ना दे। ऐसे हालात में कोई कैसे परीक्षा दे सकता है, इसलिए मुझे मजबूरी में बुधवार की परीक्षा छोड़नी पड़ी।"

जाफ़राबाद इलाक़े में रहने वाली मदिहा भी बुधवार को परीक्षा नहीं दे पाईं। वो कहती हैं कि जब सीबीएसई हिंसाग्रस्त इलाक़ों के सेंटर पर परीक्षा रद्द कर सकता है तो बोर्ड को उन छात्रों के बारे में भी सोचना चाहिए जिनके सेंटर दूसरे इलाक़ों में हैं लेकिन वो रहते उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हैं।

delhi-violence-1582741625.jpg

दिल्ली हिंसा के कारण परीक्षा ना दे पाने का जितना दुख छात्रोें को है, उनके अभिवावक भी उतने ही परेशान हैं। कई अभिवावकों का कहना है कि उनके बच्चों का भविष्य ख़तरे में पड़ गया है। वो कहते हैं कि बीते दिनों जो भी कुछ हुआ, बच्चों के दिमाग पर उसका गहरा असर हुआ है। सब कुछ शांत होने के बाद भी तनाव में बच्चे कैसे पेपर देंगे और उनके क्या नंबर आएंगे?

शिव विहार की आस्था अपने बच्चे के भविष्य को लेकर परेशान हैं। वो कहती हैं, "मेरा बेटा 12वीं में पढ़ता है, उसका सेंटर पुरानी दिल्ली में है, लेकिन हम नहीं जा पाए। मैंने सीबीएसई में इसके लिए संपर्क किया लेकिन वहां किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, फिर हमने स्कूल में एप्लिकेशन लिखकर दी है कि हिंसाग्रस्त इलाक़े में रहने वाले बच्चों की परीक्षा दोबारा कराई जाए।"

कई अभिवावकों का कहना है कि सुरक्षा पहले है, भविष्य में परीक्षाएं तो होती रहेंगी। परीक्षाएं पूरी दिल्ली में रद्द की जानी चाहिए थीं। दोबारा पेपर कैसा आएगा, प्रश्न पत्र ज़्यादा कठिन होगा या आसान इससे छात्रों की मार्किंग में भी अंतर हो सकता है। आख़िर में सबको आगे कॉलेज में एडमिशन लेना है, इस वजह से किसी के मार्क्स ज़्यादा होंगे और किसी के कम।

हालांकि सीबीएसई उत्तर पूर्वी दिल्ली के छात्रों को लेकर आगे क्या करेगा ये अभी तक पूरी तरह साफ़ नहीं है। न्यूज़क्लिक ने इस संबंध में सीबीएसई से ईमेल के ज़रिये सवाल पूछने की कोशिश की है। ख़बर लिखे जाने तक हमें कोई जवाब नहीं मिला है।

thjc-CBSE_0.jpg

बोर्ड के विद्यार्थियों के अलावा कई अन्य स्कूली छात्र भी इस हिंसा से प्रभावित हुए हैं और रात-रात भर जागकर घर की रखवाली के कारण न वो सो पा रहे हैं और न ही पढ़ पा रहे हैं। साथ ही वो मानसिक तौर से परेशान हैं अपनी पढ़ाई को लेकर, अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर।

करावल नगर में रहने वाले शिवम सिंह आठवीं के छात्र हैं, उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली के सरकारी स्कूल में पढ़ता हूं, दो मार्च से हमारी परीक्षाएं होने वाली हैं। मैं ट्यूशन भी जाता हूं लेकिन जब से यहां माहौल ख़राब हुआ है मैं घर में कैद हूं। ट्यूशन तक नहीं जा पा रहा हूं। मुझे नहीं पता कौन सही है कौन गलत बस इतना जानता हूं कि जो भी हो रहा है सही नहीं हो रहा।"

ग़ौरतलब है कि राजधानी दिल्ली के एक बड़े इलाक़े में रविवार 23 फ़रवरी से हिंसा शुरू हुई थी। पहले हिंसा की कुछ छिटपुट ख़बरें आईं लेकिन सोमवार यानी 24 फ़रवरी की दोपहर तक लगने लगा कि दिल्ली में दंगे जैसा माहौल है। एक के बाद एक आगज़नी और सोशल मीडिया पर हिंसा के वीडियो, फ़ोटो वायरल होने लगे।

सोमवार की रात तक नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के बाबरपुर, मौजपुर, मुस्तफ़ाबाद, शिवपुरी, खजूरी ख़ास, चाँदबाग और अशोक विहार जैसे इलाकों में हिंसा होती रही। इस दौरान स्कूलों में भी बहुत नुकसान देखने को मिला है। तमाम अपील, वादों और दावों के बीच हक़ीक़त यह है कि दिल्ली में पढ़ने वाले छात्र ख़ुद को पिसा हुआ महसूस कर रहे हैं। वो हिंसा के चलते अपनी साल भर की महनत पर पानी फिरने से बेहद निराश और हताश हैं।

Delhi Violence
communal violence
Kasganj Communal Riots
CBSE
Attack on School
Exam Postponed
Maujpur
Karawal Nagar
Shiv bihar
Jafrabad

Related Stories

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

दुर्भाग्य! रामनवमी और रमज़ान भी सियासत की ज़द में आ गए

न्यायपालिका को बेख़ौफ़ सत्ता पर नज़र रखनी होगी

पश्चिम बंगाल में जाति और धार्मिक पहचान की राजनीति को हवा देती भाजपा, टीएमसी

दिल्ली दंगा: पुलिस पर कोर्ट के आदेश के बाद भी आरोपपत्र पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं देने का आरोप

उत्तर प्रदेश: निरंतर गहरे अंधेरे में घिरते जा रहे हैं सत्य, न्याय और भाईचारा

दिल्ली दंगों से फैले ज़हर के शिकार हुए कारवां के तीन पत्रकार

दिल्ली हिंसा: मकान में आग लगाकर बुजुर्ग महिला की हत्या में दो भाई गिरफ़्तार

दिल्ली : क्या सांप्रदायिक क़त्लेआम के शिकार पीड़ितों के साथ न्याय किया जा रहा है?

दिल्ली हिंसा: संसद में चर्चा को लेकर गतिरोध तीसरे दिन भी जारी


बाकी खबरें

  • UP
    सतीश भारतीय, परंजॉय गुहा ठाकुरता, शेखर
    विश्लेषण: विपक्षी दलों के वोटों में बिखराव से उत्तर प्रदेश में जीती भाजपा
    29 Mar 2022
    आज ज़रूरत इस बात की है कि जिन राज्यों में भी भाजपा को जीत हासिल हो रही है, उन राज्यों के चुनाव परिणामों का विश्लेषण बारीकी से किया जाए और यह समझा जाए कि अगर विपक्ष एकजुट रहा होता तो क्या परिणाम…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भारत बंद का दिखा दम !
    29 Mar 2022
    न्यूज़चक्र के इस एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की। उन्होंने नज़र डाला है दिल्ली-एनसीआर और देश में हड़ताल के व्यापक असर पर।
  • sanjay singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    विपक्ष के मोर्चे से भाजपा को फायदा: संजय सिंह
    29 Mar 2022
    इस ख़ास अंक में नीलू व्यास ने बात की आप के सांसद संजय सिंह से और जानना चाहा Aam Aadmi Party के आगे की योजनाओं के बारे में। साथ ही उन्होंने बात की BJP और देश की राजनीति पर.
  • Labour Code
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल : दिल्ली एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में दिखा हड़ताल का असर
    28 Mar 2022
    केंद्रीय मज़दूर संगठनों ने सरकार की कामगार, किसान और जन विरोधी नीतियों के विरोध में 28 और 29 मार्च दो दिन की देशव्यापी हड़ताल की शुरआत आज तड़के सुबह से ही कर दी है । हमने दिल्ली एनसीआर के साहिबाद…
  • skm
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन
    28 Mar 2022
    मज़दूरों की आम हड़ताल को किसानों का समर्थन मिला है. न्यूज़क्लिक से बातचीत में ऑल इंडिया किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले ने कहा कि सरकार मजदूरों के साथ साथ किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रही है. खाद, बीज…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License