NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है
पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं।
अजय कुमार
30 Apr 2022
Palm oil crisis

क्या आप पाम ऑयल के बारे में जानते हैं? हो सकता है कि हम में कुछ लोग न जानते हों लेकिन हम सब ने इसका अपने जीवन में इस्तेमाल किया है। पूरी दुनिया में खाना बनाने वाले तेल के तौर पर पाम ऑयल का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। खाना बनाने के तेल से लेकर कॉस्मेटिक, प्रोसेस्ड फूड, चॉकलेट, आइसक्रीम, केक, साबुन, शैंपू, जैव ईंधन सब में इसका इस्तेमाल किया जाता है। पूरी दुनिया में खाना बनाने वाले तेल के तौर पर सोयाबीन, कनोला, पाम और सूरजमुखी का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। इसमें से तकरीबन 40 फीसदी हिस्सेदारी पाम ऑयल की है। इन सब में पाम ऑयल इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रति हेक्टयेर इसकी पैदावार सबसे ज़्यादा है। एक हेक्टयेर में 0.4 टन सोया ऑयल, 0.7 सरसों के तेल की पैदावार होती है तो तकरीबन 3.3 टन पाम ऑयल की पैदावार होती है। दूसरे तेलों के मुकाबले सस्ता होने के चलते और दुनिया में बहुत अधिक मांग होने के चलते इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों ने पाम ऑयल का जमकर पैदावार किया। इसलिए पाम ऑयल पर उष्णकटिबंधीय इलाके के वनों को बर्बाद करने का भी आरोप लगता है। कहा जाता है कि पाम ऑयल उत्पादन के लालच में आकर उष्णकटिबंधीय जैवविविधता को बर्बाद किया जा रहा है।

अब आप पूछेंगे कि पाम ऑयल को लेकर इतनी जानकारी क्यों दी गयी है? तो जवाब यह है कि दुनिया में पाम ऑयल के सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यानी दूसरे देशों को इंडोनेशिया की तरफ से पाम ऑयल नहीं बेचा जायेगा। दुनिया के तकरीबन 60 प्रतिशत पाम ऑयल की सप्लाई इंडोनेशिया से होती है। पाम ऑयल के क्षेत्र में इंडोनेशिया न केवल सबसे बड़ा उत्पादक देश है बल्कि सबसे बड़ा निर्यातक देश भी है। पाम ऑयल की सबसे अधिक खपत भी इंडोनेशिया में ही होती है।

अब सवाल बनता है कि इंडोनेशिया ने पाम ऑयल पर प्रतिबंध क्यों लगाया? पाम ऑयल का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता होने के बावजूद भी इस समय इंडोनेशिया में पाम ऑयल को लेकर किल्लत चल रही है। पाम ऑयल की क़ीमतें बहुत अधिक बढ़ चुकी है। आम आदमी को सस्ती क़ीमतों पर पाम ऑयल नहीं मिल पा रहा है। जबकि इंडोनिशया में पिछले साल से ज्यादा पाम ऑयल का उत्पादन हुआ है।

इंडोनेशिया में पाम ऑइल की कमी इसलिए हुई है क्योंकि पूरी दुनिया में खाने के तेल को जो महत्वपूर्ण वैकल्पिक स्तोत्र है, उन सबके उत्पादन में किसी न किसी वजह से कमी आयी है। अर्जेंटीना में मौसम खराब होने की वजह से सोयबीन की पैदावार कमी हुई है। कनाडा में सूखे की वजह से कनोला की पैदावार कम हुई है। रूस और यूक्रेन की लड़ाई की वजह सूरजमुखी की पैदावार कम हुई है। इन सबका मिलाजुला असर यह पड़ा कि पूरी दुनिया के पाम ऑयल का सबसे अधिक इस्तेमाल हुआ। अब स्थिति ऐसी आ पहुंची है कि इंडेनोशिया में जितने पाम ऑयल की मांग है उतना इंडोनेशिया में ही पूरा नहीं हो पा रहा है।

पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गयी। इंडोनेशिया की सरकार ने महंगाई को काबू में रखने के पूरी तौर पर निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से पहले कई तरह के कदम उठाये। जनवरी में कुल  कच्चे पाम ऑयल का 20 प्रतिशत निर्यात करने की छूट दी। लेकिन इसके बाद भी क़ीमतें बढ़ती रहीं। बाद में जाकर 28 अप्रैल को पाम ऑयल पर पूरा प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी गई।

इसके आलावा पाम ऑयल की क़ीमतें इसलिए भी बढ़ीं क्योंकि इंडेनोशिया में पाम ऑयल का इस्तेमाल ग्रीन फ्यूल की तरह भी किया जाता है। पाम ऑयल का इस्तेमाल बायो डीजल की तरह भी किया जाता है। इंडोनेशिया की वित्त मंत्री श्री मुलयानी इंद्रावती ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि प्रतिबंध का बुरा असर दूसरे देशों पर भी पड़ेगा। लेकिन फिलहाल सरकार, देश के भीतर खाने के तेल की किफायती सप्लाई को प्राथमिकता दे रही है। इंद्रावती के मुताबिक तेल की क़ीमतें स्थिर करने की तमाम कोशिशें नाकाम होने के बाद ही सरकार को यह कठोर कदम उठाना पड़ा है।

जहाँ तक भारत की बात है तो भारत पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक देश है। सरसों, मूंगफली और सोया तेल के मुकाबले पाम ऑयल प्रति लीटर कम क़ीमत पर बिकता है। भारतीय रसोई में सबसे अधिक पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है। हालांकि पिछले साल के मुकबाले इस साल हर तरह के तेल की क़ीमतों में इज़ाफ़ा हुआ है। भारत अपने खाने के तेल में 40 फीसदी हिस्सा पाम ऑयल से इस्तेमाल करता है। इसका आधा हिस्सा यानी तकरीबन 8.3 मीट्रिक टन पाम ऑयल का आयात इंडोनेशिया से करता है। जानकारों का कहना है कि इंडोनेशिया के फैसले की वजह से इंडोनेशिया में तेल की क़ीमतें भले कम हो जाए लेकिन भारत में भयंकर महंगाई आएगी। भारत में वैसे ही लोग पहले से ही महंगाई से परेशान है। उसके बाद सोयाबीन, कनोला और सूरजमुखी के तेल को लेकर पहले से ही वैश्विक बजार में कमी है। पाम ऑयल का विकल्प भी ऐसा नहीं है कि खाने के तेल की क़ीमतों में कमी आ सके। एक अनुमान के मुताबिक खाने के तेल से जुड़े भारत के आयात बिल में 2 बिलियन डॉलर का इज़ाफ़ा होगा। इसलिए वह सारे उत्पाद जो पाम ऑयल पर निर्भर हैं, उन सब में महंगाई आएगी। खाने के तेल से लेकर साबुन शैम्पू हर जगह महंगाई का तूफ़ान आने वाला है।

यहाँ एक सवाल यह भी उठता है कि जब भारत खाने की तेल के जरूरतों को लेकर दूसरों देशों पर निर्भर है तो आत्मनिर्भर होने की कोशिश क्यों नहीं करता? यह परेशानी बहुत लम्बे समय से चली आ रही है लेकिन अब जाकर सरकार ने कुछ नीतियां बनाई है। जो अब भी केवल पन्नो शक्ल में हैं। इस पर कोई ठोस शुरूआत नहीं हुई है। खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिये  राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (National Edible Oil Mission-Oil Palm) नामक योजना में 11,000 करोड़ के निवेश से साल 2021 में ही शुरू की गयी है। इसका लक्ष्य है कि वर्ष 2025-26 तक पाम तेल का घरेलू उत्पादन तीन गुना बढ़ाकर 11 लाख मीट्रिक टन कर दिया जाए। इसके लिए भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जमीनों के इस्तेमाल की बात की गयी है। लेकिन यहां भी वही विरोध किया जा रहा है कि अगर पाम ऑयल की अधिक पैदावार की जाएगी तो यह पर्यावरण के अनुकूल नहीं होगा। जो हाल इंडेनोशिया और मलेशिया की जैव विविधता का हो रहा है। वही हाल अंडमान निकोबार का हो जाएगा। इसलिए ढंग से कहा जाए तो बात यह है कि खाने के तेल की आत्मनिर्भरता लेकर भारत की तरफ से अब भी कोई ठोस योजना नहीं बनी है।

Palm Oil
Palm oil crisis
Inflation
Rising inflation
Cooking Oil
Edible oil
Edible oil imports
indonesia
Labour shortage
Malaysia

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत

ईरानी नागरिक एक बार फिर सड़कों पर, आम ज़रूरत की वस्तुओं के दामों में अचानक 300% की वृद्धि

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 


बाकी खबरें

  • sultanpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनावः सुल्तानपुर चीनी मिल राज्य सरकार की अनदेखी से हुई जर्जर
    21 Feb 2022
    "सुल्तानपुर चीनी मिल के सही ढ़ंग से न चलने की वजह से इस इलाके के गन्ने की उपज प्राइवेट क्रशर मशीन में किसान मजबूरन दे देते हैं जहां से उनको गन्ने की कीमत आधी या दो-तिहाई ही मिल पाती है।"
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में पीएम मोदी ने पार की चुनावी मर्यादा, जागो चुनाव आयोग
    21 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अखिलेश यादव पर साधे गए निशाने पर बात की और उसको हास्यास्पद बताया। उसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कैसे एक…
  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख
    21 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में तीन चरणों के चुनावों के बाद अब चौथे चरण के लिए जंग शुरू हो गई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब अवध की चुनावी परिक्रमा लगातार जारी है। लेकिन चौथे चरण में अवध की वो सीटे भी हैं जहां…
  • Ballia
    विजय विनीत
    बलिया: ''सबके वोटे के चिंता बा, चुनाव बाद रसड़ा चीनी मिल के बात केहू ना करे ला''
    21 Feb 2022
    देसी चीनी और गुड़ के लिए मशहूर रसड़ा, कभी ''रसदा'' के नाम से जाना जाता था। रसड़ा इलाके में कई घंटे गुजारने के बाद हमें इस बात का एहसास हो चला था कि रसड़ा में हर आदमी की जुबां पर सिर्फ़ एक ही सवाल है…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक : …अब साइकिल भी आतंकवादी हो गई...और कूकर...और मोटरसाइकिल!
    21 Feb 2022
    एक चुनाव की ख़ातिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साइकिल को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश आमतौर पर पसंद नहीं की जा रही है। मज़दूर-कामगार के लिए तो आज भी साइकिल ही उनकी मोटरसाइकिल और कार है। सोशल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License