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राजनीति
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युद्धविराम की घोषणा के बावजूद आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई जारी
मॉस्को द्वारा ट्रूस समझौते की मध्यस्थता करने के एक दिन बाद आर्मेनिया और अजरबैजान दोनों ने रविवार को इसके उल्लंघन के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाया।
पीपल्स डिस्पैच
12 Oct 2020
आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच लड़ाई जारी

अर्मेनिया और अजरबैजान द्वारा मॉस्को में युद्धविराम की घोषणा के एक दिन बाद दोनों ने एक दूसरे पर रविवार 11 अक्टूबर को असैन्य क्षेत्रों में हमला करने का आरोप लगाया है। शनिवार को दोनों पक्षों ने दो सप्ताह से अधिक समय तक हुई झड़पों में मारे गए लोगों को एक दूसरे को सौंपने और क़ैदियों के आदान-प्रदान करने को लेकर संघर्ष विराम के लिए सहमति व्यक्त की थी।

अजरबैजान ने दावा किया कि युद्ध विराम की इस घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर अर्मेनियाई सैनिकों ने इसके दूसरे सबसे बड़े शहर गांजा के नागरिक इलाकों पर हमला किया जिसमें नौ लोग मारे गए और 33 घायल हो गए। अजरबैजान ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में उसकी सेनाओं ने नागोर्नो कराबाख में अर्मेनियाई सैनिकों के ख़िलाफ़ हवाई हमले किए।

आर्मेनिया ने अपनी सेनाओं द्वारा गांजा में नागरिक क्षेत्रों पर हमला करने के आरोपों से इनकार किया और इसके बजाय अज़रबैजान पर अपनी राजधानी स्टेपनाकर्ट सहित काराबाख क्षेत्र में नागरिक क्षेत्रों पर हमला करने का आरोप लगाया। आर्मेनिया का कहना है कि युद्धविराम की घोषणा के बाद ऐज़री हमलों में कम से कम पांच नागरिक मारे गए हैं।

मॉस्को में रूसी मध्यस्थता के बाद ये संघर्ष विराम हासिल हुआ था। दोनों पक्षों के बीच पहला सीधा संपर्क लड़ाई को समाप्त करने और राजनीतिक समाधान की तलाश करने के लिए दोनों पक्षों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव का परिणाम था।

अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच संघर्ष का मौजूदा दौर 27 सितंबर को उस समय शुरु हो गया था जब अर्मेनिया के नियंत्रण से अजरबैजान की सेनाओं ने अपने क्षेत्रों को फिर से हासिल करने की कोशिश की थी। दोनों देश नागोर्नो-काराबाख और इसके आस-पास के क्षेत्रों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इसे अजरबैजान के भाग के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन 1991 के बाद से नागोर्नो-करबाख में बहुसंख्यक अर्मेनियाई लोगों ने अपनी अलहदगी की घोषणा की।

दोनों देशों के बीच 1991-94 के युद्ध के चलते 30,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई अजरबैजान के हज़ारों निवासी आर्मेनियाई नियंत्रण क्षेत्रों में अपने घरों से विस्थापित हो गए। ऑर्गनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप (ओएससीई) के अधीन इस अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ने रूस, फ्रांस और अमेरिका के मिन्स्क ग्रुप को नियुक्त किया, जो अभी तक संघर्ष का एक स्वीकार्य समाधान खोजने में विफल रहे हैं।

Armenia
Azerbaijan
armenia-azerbaijan war
International news

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