NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
फिल्में
भारत
राजनीति
फिल्म प्रमाणन न्यायाधिकरण को समाप्त करने पर फिल्मकारों ने की सरकार की आलोचना
“एफसीएटी को समाप्त करना विवेकहीन निर्णय है और निश्चित तौर पर लोगों को मन मुताबिक काम करने से रोकने वाला है। यह इस समय क्यों किया गया? यह फैसला क्यों लिया गया?”
भाषा
08 Apr 2021
विशाल भारद्वाज, हंसल मेहता और गुनीत मोंगा
Image courtesy : The Indian Express

मुंबई: चलचित्र प्रमाणन अपीलीय न्यायाधिकरण (एफसीएटी) समाप्त करने के सरकार के निर्णय की आलोचना करते हुए फिल्मकार विशाल भारद्वाज, हंसल मेहता और गुनीत मोंगा ने बुधवार को कहा कि यह फैसला “विवेकहीन” और “लोगों को मनचाहा काम करने से रोकने वाला” है।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्मों में की जाने वाली काट-छांट के विरुद्ध फिल्मकार, कानून द्वारा स्थापित एफसीएटी का दरवाजा खटखटा सकते थे।

विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा न्यायाधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अध्यादेश 2021, की अधिसूचना रविवार को जारी की गई जिसके अनुसार कुछ अपीलीय न्यायाधिकरण समाप्त कर दिए गए हैं और उनका कामकाज पहले से मौजूद न्यायिक संस्थाओं को सौंप दिया गया है।

सिनेमाटोग्राफी कानून में संशोधन के बाद अब अपीलीय संस्था उच्च न्यायालय है।

मेहता ने ट्विटर पर लिखा कि यह निर्णय “विवेकहीन” है। उन्होंने कहा, “क्या उच्च न्यायालय के पास फिल्म प्रमाणन की शिकायतों को सुनने का समय है? कितने फिल्म निर्माताओं के पास अदालत जाने के संसाधन हैं?”

उन्होंने कहा, “एफसीएटी को समाप्त करना विवेकहीन निर्णय है और निश्चित तौर पर लोगों को मन मुताबिक काम करने से रोकने वाला है। यह इस समय क्यों किया गया? यह फैसला क्यों लिया गया?”

भारद्वाज ने कहा कि यह सिनेमा के लिए “दुखद दिन” है।

कुछ साल पहले 2016 में आई मोंगा की फिल्म “हरामखोर”, फिल्मकार अलंकृता श्रीवास्तव की 2017 में आई “लिपस्टिक अंडर माय बुर्का” और नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत 2017 में आई “बाबूमोशाय बन्दूकबाज” में सीबीएफसी द्वारा काट-छांट किए जाने के बाद इन फिल्मों को एफसीएटी द्वारा मंजूरी दी गई थी।

भारद्वाज के ट्वीट को साझा करते हुए मोंगा ने लिखा, “ऐसा कैसे हो सकता है? कौन निर्णय ले सकता है?” मेहता ने भी एफसीएटी को समाप्त करने पर रोष व्यक्त किया।

Vishal Bhardwaj
Hansal
Guneet Monga
bollywood
Central Government
FCAT
CBFC

Related Stories

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली

फ़िल्म निर्माताओं की ज़िम्मेदारी इतिहास के प्रति है—द कश्मीर फ़ाइल्स पर जाने-माने निर्देशक श्याम बेनेगल

कलाकार: ‘आप, उत्पल दत्त के बारे में कम जानते हैं’

भाजपा सरकार के प्रचार का जरिया बना बॉलीवुड

तमिल फिल्म उद्योग की राजनीतिक चेतना, बॉलीवुड से अलग क्यों है?

भारतीय सिनेमा के महानायक की स्मृति में विशेष: समाज और संसद में दिलीप कुमार

भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत : नहीं रहे हमारे शहज़ादे सलीम, नहीं रहे दिलीप कुमार

नए फिल्म सर्टिफिकेशन बिल पर बवाल क्यों हो रहा है?

हीरक राजार देशे :  एक अभिशप्त देश की कहानी


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    उप्र चुनाव: आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है यह गाँव
    03 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार तेज़ी से चल रहा है पर एक ऐसा गाँव भी है जहाँ के लोगो को उम्मीदवारों के बारे में भी पता नहीं है। आखिर ऐसा क्यों है, आइये देखते हैं इस ग्राउंड रिपोर्ट में
  • hapur
    न्यूज़क्लिक टीम
    हापुड़ः चौधरी चरण सिंह के गांव नूरपुर ने भाजपा के ख़िलाफ़ कसी कमर, कहा, सुधारेंगे ग़लती
    03 Feb 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह पहुंची हापुड़ में नूरपुर गांव, जो पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का गांव है। यहां के लोगों ने भाजपा प्रचारकों को भगा दिया, उन पर FIR हुई, लेकिन वह…
  •  farm
    सुजॉय तरफ़दार
    उत्तर प्रदेश: मजबूर हैं दूसरे धंधों को अपनाने के लिए ढीमरपुरा के किसान
    03 Feb 2022
    झांसी में पाहुज इलाके के ज़्यादातर गांव वाले प्रवासी मज़दूरों में बदल गए हैं। क्योंकि उनकी ज़मीन साल के ज़्यादातर वक़्त पानी के भीतर रहती है। ऊपर से उनके पास यहां संचालित मत्स्य आखेटन का ठेका हासिल…
  • Aadiwasi
    राज वाल्मीकि
    केंद्रीय बजट में दलित-आदिवासी के लिए प्रत्यक्ष लाभ कम, दिखावा अधिक
    03 Feb 2022
    दलितों और आदिवासियों के विकास के सम्बन्ध में  सरकार की बातों में जो उत्सुकता दिखाई देती है, वह 2022-23 वित्तीय वर्ष के दलितों और आदिवासियों से सम्बंधित बजट में नदारद है।  
  • Goa election
    राज कुमार
    गोवा चुनाव: विधायकों पर दल-बदल न करने का दबाव बना रही जनता, पार्टियां भी दिला रहीं शपथ
    03 Feb 2022
    पिछले विधानसभा चुनाव में 17 सीटें जीतने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना पाई थी। जबकि भाजपा ने 13 सीटें जीतकर भी सरकार बना ली थी। अंत तक आते-आते कांग्रेस के 12 विधायक भाजपा में ही शामिल हो गये। इस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License