NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
गुड़गांव पंचायत : औद्योगिक मज़दूर, किसान आए एक साथ, कहा दुश्मन सांझा तो संघर्ष भी होगा सांझा!
रविवार को गुड़गांव में बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लॉयीज यूनियन, मानेसर द्वारा मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इसमें  कृषि बिलों को वापस लेने और श्रम संहिताओं को समाप्त करने की संयुक्त मांग उठाई गई।  
मुकुंद झा
15 Nov 2021
Gurgaon Panchayat

देश में उतप्दान करने वाले दो वर्ग–किसान और श्रमिक–अपनी ऐतिहासिक एकता को कायम करने और एक दूसरे  के संघर्षो में उत्साह भरने को लेकर दिल्ली एनसीआर शहरी क्षेत्र में किसान-मज़दूर पंचायत का आयोजन किया गया।  इसमें मज़दूर-किसान की एकता और अपने सांझे दुश्मन के खिलाफ आंदोलन को तेज़ करने पर चर्चा हुई।  

कल 14 नवंबर को लघु सचिवालय गुड़गांव में बेलसोनिका ऑटो कंपोनेंट इंडिया इंप्लॉयीज यूनियन, मानेसर द्वारा मजदूर-किसान पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में बेलसोनिका के स्थाई और संविदा कर्मचारी सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र के मजदूर संगठनों एवं यूनियन प्रतिनिधियों के अलावा संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं जोगेंद्र उग्राहन, डॉ दर्शन पाल, युद्धवीर सिंह एवं जागीर सिंह ने भी अपनी टीम के साथ भागीदारी की।

यह दोनों वर्ग किसानों के दिल्ली मार्च की पहली वर्षगांठ से पहले  एक साथ आए।  इस महीने 26 नवंबर को श्रमिकों की देशव्यापी विरोध का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), जो राजधानी की सीमा पर आंदोलन का नेतृत्व कर कर रहा है और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (सीटीयू) ने इस दिन को  विरोध दिवस के रूप चिन्हित किया है।  

पिछले साल संसद में सुधार के नाम पर  कृषि विधेयकों और श्रम संहिताओं के पारित होने  के बाद से ही  दोनों समूह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ खड़े हैं।

पंचायत में केंद्र की सरकार और  कॉर्पोरेट समूहों के खिलाफ नारेबाजी हुई।  इस जनसभा को एक प्रतिरोधों का रूप दिया गया और नेताओं ने कहा हमारा दुश्मन एक है और हमारा संघर्ष भी अब एक ही होगा।  इसे उन्होंने किसान-मज़दूर की एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उनके अनुसार, एक शहरी इलाक़े में यह इस तरह की पहली  संयुक्त बैठक है, जिसमें कृषि बिलों को वापस लेने और श्रम संहिताओं को खत्म करने  की संयुक्त मांग उठाई  गई। ये  पिछले साल शुरू हुए आंदोलन को व्यापक बनाने का संकेत देती है, जो कि विवादास्पद नीतिगत फैसलों के खिलाफ है।

पंजाब स्थित क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रमुख दर्शन पाल ने सभा  को संबोधित करते हुए कहा, "मजदूरों और किसानों के इस तरह के सम्मेलन केंद्र सरकार और उसके फैसले के खिलाफ एक संयुक्त संघर्ष बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।"
         
दर्शन पाल ने आगे कहा कि किसान आंदोलन अब सिर्फ किसानों का ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता का आंदोलन बन चुका है।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि रविवार की बैठक को औद्योगिक श्रमिकों और किसानों के एक साथ आने के रूप में घोषित किया गया था। बीकेयू (एकता उग्राहन) के जोगिंदर उग्राहन ने पंचायत में कहा कि मजदूर और किसान बुनियादी उत्पादक वर्ग हैं। पूंजीपति वर्ग दोनों का ही साझा दुश्मन है। अत: मजदूरों-किसानों को कंधे से कंधा मिलाकर अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाना होगा और व्यवस्था परिवर्तन की ओर बढ़ना होगा।

उन्होंने मजदूरों को आह्वान किया कि 26 नवंबर को किसानों के दिल्ली की सीमाओं पर आये एक साल पूरा होने के अवसर पर मजदूर दिल्ली की सरहदों पर किसानों के साथ मंच साझा करें।

यह कहते हुए कि यह "एकता जारी रहनी चाहिए, उग्राहन ने आग्रह किया कि कृषि सुधारों से न केवल किसानों के लिए बल्कि श्रमिकों के लिए भी अधिक संकट पैदा होगा।

गुरुग्राम स्थित मजदूर संघ इंकलाबी मजदूर केंद्र के श्यामबीर ने न्यूज़क्लिक को बताया कि यह वही सरकार है जिसने श्रम संहिता और कृषि विधेयक पारित किए हैं और इस तरह,  पूरे देश में औद्योगिक श्रमिकों और किसानों के बीच संयुक्त सम्मेलनों को आयोजित किया जाना चाहिए।

श्यामबीर ने कहा कि ये पूंजीवादी व्यवस्था मजदूरों और किसानों दोनों का निर्मम शोषण कर रही है। मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी लेबर कोड्स हों या काले कृषि कानून दोनों ही कॉर्पोरेट पूंजीपतियों के हितों में लाये गये हैं। इन लेबर कोड्स में मजदूरों के लिए कानूनी हड़ताल के रास्ते बंद कर और गैरकानूनी घोषित हड़ताल में शामिल मजदूरों और उनके समर्थकों पर भारी जुर्माने और जेल की सज़ा तक का प्रावधान कर मजदूर आंदोलन के अपराधीकरण की साजिश रची गई है।

उन्होंने  कहा, "यह वही कॉर्पोरेट समूह हैं, जो किसानों से सस्ते में अनाज खरीदेंगे, वही हैं जो श्रमिकों को मासिक भुगतान के नाम पर भुखमरी वेतन दे रहे हैं।" भुखमरी वेतन से उनका संदर्भ था कि आज कॉर्पोरेट मज़दूरों को जो वेतन दे रहा है, उसमें वे मुश्किल से अपने परिवार के लिए भोजन का इंतजाम कर पाता है।  

श्यामबीर ने  श्रम संहिताओं की आलोचना करते हुए आग्रह किया कि किसान समूह को अपने चार्टर में भी श्रमिकों की मांग को उठाना चाहिए। बाद की प्रमुख मांगों में शुक्ला के अनुसार, नियमित काम के लिए नियमित नौकरियों का कार्यान्वयन और सामूहिक छंटनी को रोकना भी शामिल है।

इस बीच, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ट्रेड यूनियन (एआईसीसीटीयू) के अभिषेक, जो जनसभा में भी मौजूद थे, ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एसकेएम और सीटीयू के बीच एक-दूसरे की मांगों के प्रति एकजुटता पहले ही बानी हुई है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के एक साल पूरे होने पर किसान मज़दूर एक साथ देशव्यापी प्रदर्शन करेगा।  

इसके अलावा, रविवार की जनसभा का एक और पहलू भी था जो परिणामी साबित हुआ, भले ही यह सीधे तौर पर विरोध करने वाले समूह की मांगों से संबंधित नहीं था।

हरियाणा के इस शहर में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर विवाद चल रहा है क्योंकि हाल के महीनों में शहर भर में विभिन्न स्थानों पर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया है। यूनियन नेताओं ने न्यूज़क्लिक को बताया कि एक ही शहर में किसानों और श्रमिकों की एक संयुक्त बैठक हुई, इससे समाज में  तनाव भी कम होगा।

बेलसोनिका कर्मचारी संघ के केंद्रीय सचिव मोहिंदर कपूर ने कहा: “सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ को लेकर चल रहे विवाद से [बेल्सोनिका कंपनी] कारखाने में मुस्लिम श्रमिकों के बीच तनाव पैदा हो रहा था। वे अपने काम को जारी रखने के लिए असुरक्षित महसूस कर रहे थे और हाल के दिनों में इस तरह की चिंताओं के साथ यूनियन  से संपर्क कर रहे हैं।”

हालांकि, इसमें से बहुत कुछ अब निपटाया जाएगा, कपूर का मानना है कि रविवार की जनसभा का उस पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर। उन्होंने कहा, "किसान और मजदूर न केवल अपनी मांगों के लिए, बल्कि दक्षिणपंथी ताकतों की विभाजनकारी राजनीति का जवाब देने के लिए भी हाथ मिलाएंगे।"

भारतीय किसान यूनियन ( अराजनीतिक) के नेता और संयुक्त किसान मोर्चे के प्रतिनिधि युद्धवीर सिंह ने पंचायत को संबोधित करते हुये कहा कि मोदी सरकार निर्लज्जता के साथ देश की संपत्ति को पूंजीपतियों पर लुटा रही है। उन्होंने आगे कहा, "हालत यह है कि रक्षा क्षेत्र तक के कारखानों के भी निजीकरण की इस सरकार ने तैयारी कर ली है। आज सवाल सिर्फ तीन काले कृषि कानूनों को रद्द कराने का नहीं, बल्कि पूरे देश को बचाने का बन चुका है।"

पंचायत के अंत में बेलसोनिका यूनियन के अध्यक्ष अतुल कुमार ने आह्वान किया कि औद्योगिक क्षेत्र के मजदूर और यूनियन आंदोलनरत किसानों के कंधे से कंधा मिलाये और मजदूर विरोधी चार लेबर कोड्स के विरुद्ध कमर कसकर संघर्ष के मैंदान में आ जायें।

Bellsonica Employees Union
Gurugram
Mazdoor-Kisan Panchayat
Samyukt Kisan Morcha
Central Trade Unions
Farm Laws
Labour Codes
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को मिला व्यापक जनसमर्थन, मज़दूरों के साथ किसान-छात्र-महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल : दिल्ली एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों में दिखा हड़ताल का असर


बाकी खबरें

  • लाल बहादुर सिंह
    सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 
    26 Mar 2022
    कारपोरेटपरस्त कृषि-सुधार की जारी सरकारी मुहिम का आईना है उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी की रिपोर्ट। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने तो सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इसके सदस्य घनवट ने स्वयं ही रिपोर्ट को…
  • भरत डोगरा
    जब तक भारत समावेशी रास्ता नहीं अपनाएगा तब तक आर्थिक रिकवरी एक मिथक बनी रहेगी
    26 Mar 2022
    यदि सरकार गरीब समर्थक आर्थिक एजेंड़े को लागू करने में विफल रहती है, तो विपक्ष को गरीब समर्थक एजेंडे के प्रस्ताव को तैयार करने में एकजुट हो जाना चाहिए। क्योंकि असमानता भारत की अर्थव्यवस्था की तरक्की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,660 नए मामले, संशोधित आंकड़ों के अनुसार 4,100 मरीज़ों की मौत
    26 Mar 2022
    बीते दिन कोरोना से 4,100 मरीज़ों की मौत के मामले सामने आए हैं | जिनमें से महाराष्ट्र में 4,005 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा गया है, और केरल में 79 मरीज़ों की मौत के संशोधित आंकड़ों को जोड़ा…
  • अफ़ज़ल इमाम
    सामाजिक न्याय का नारा तैयार करेगा नया विकल्प !
    26 Mar 2022
    सामाजिक न्याय के मुद्दे को नए सिरे से और पूरी शिद्दत के साथ राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने के लिए विपक्षी पार्टियों के भीतर चिंतन भी शुरू हो गया है।
  • सबरंग इंडिया
    कश्मीर फाइल्स हेट प्रोजेक्ट: लोगों को कट्टरपंथी बनाने वाला शो?
    26 Mar 2022
    फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग से पहले और बाद में मुस्लिम विरोधी नफरत पूरे देश में स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है और उनके बहिष्कार, हेट स्पीच, नारे के रूप में सबसे अधिक दिखाई देती है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License